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00:31भगवान गनेश का सास सिंगार ही नहीं, जहांकी पंडाल ही नहीं, भूपाल के गनपती अपने इतिहास की वजह से देश में विख्यात हैं, आज़ादी वाले गनेश, जो स्वतंत्र भारत में ऐसे विराजे कि 78 साल तक ये सिलसिला रुका ही नहीं, इसलिए ये कहलाए भू
01:01सितंबर की 18 तारीक थी वो, जो आजादी के ठीक एक महिना दो दिन बाद आई थी,
01:31और सजी थी ये छांकी.
02:01यहां विराजे गनपती की खासियत है कि छांकी में पूरे दस दिन भगवान गनेश का हर दिन नया सिंगार होता है,
02:20उनके साथ रिद्धी सिद्धी भी नए सिंगार में होती है, व्यापारी ही पूरी जांकी का खर्च उठाते है,
02:28हर साल प्रतिमा भले बदल जाए, लेकिन गनपती जी को 100 किलो की चांदी के आभूशन पहनाए जाते है,
02:36कैमरमेन फैजान खान के साथ शिफाली, ETV भारत के लिए
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