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  • 5 months ago
आगर मालवा में क्या सरोवर के नीचे छिपा है राजा का खजाना? देखें अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय

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00:00पारी की सतेह के नीचे कौन?
00:29जल के नीचे क्या सच मुच बसी है? एक अलग ही दुनिया?
00:49खजाना है, छतरी तीन मंजिला है
00:54रहस्यों का ये कैसा संसार? ये कैसा भेद? ये कैसी पहेद?
01:03ये एक रहस्यों के सरोवर की और विश्वस्निया कहानी है
01:12नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और आप देख रहे हैं अद्भुत और विश्वस्निया और कल्पनिया
01:17हम इस समय आगर मालवा में हैं
01:20आगर मालवा का ये मूती सागर तालाब जिसमें रहस्य ही, रहस्य हर तरफ बिखरे पड़े है
01:25यहाँ पर कहानी है पानी के लिए बलिदान की
01:29यहाँ पर कहानी है श्राप की
01:31यहाँ पर कहानी है खजाने के रहस्य की
01:34लेकिन आज के युग में वर्तमान में इस कहानी के कितने सिरे हैं आज अध्भूत और विश्वस्निय और कल्पनिय आपको दिखाएगा
01:44गणी अनोखी घणी रुपाली गणी अनोखी घणी रुपाली बात्या मारा गाउं की
02:07अगर मालवा का मोती सागर सरोवर दिखने में एकदम शान्त और सुन्दर यहां योगी साधना के लिए आते हैं
02:23रोगी निदान के लिए स्थानिय लोग तैराकी के लिए और बाहर के लोग धमन के लिए
02:29लेकिन इसी सरोवर से चुड़ा है एक ऐसा विश्वास जो अद्भुत है
02:59इस सरोवर से जुड़ी है एक ऐसी मान्यता जो अविश्वस्तनी यह है
03:21जब से यहां खजाना पड़ा हुआ है और कोई जानकार यहां जाता है कि इसको हमें निकाल लूँ तो सर्फ के रूप में अजगर के रूप में यहां पर आते हैं
03:37इस सरोवर से जुड़ा है एक ऐसा यही जो अकलपनी है
03:49हम एक एक कर इन सभी रहस्यों से परदे हटाएंगे
04:11लेकिन सबसे पहले सरोवर के बीचों बीच बनी छतरी का रहस्य
04:16कि यह जो तालाब के बीचों बीच हम देख पा रहे हैं यह क्या है
04:26यह इसको छत्री बोलते हैं लगबग 1100 साल पुराना इसका इत्यास नजर आता है यहां पर अवयराम नाम का एक जो बंजारा था
04:34अन्होंने परमार बन से के टाइम पर या मुगलों के टाइम पर हमले और होते थे तो उन्हें एक छत्री बन वही थी यह चत्री लगबग में
04:44तीन मंजिल आहे एक मंजिल अभी जैसे दिखी देखिए एक मंजिल इसके निचे और एक डबी वी अच्छा इसा लगता है जैसे बहुत बड़ा व्यापरी था और अपने जित्ते भी व्यापर विसासे में जो पैसे और एकट्टे होते थे वह यहीं पर लगाता था था
04:59क्या कहानी है इससे जुड़ी हुई
05:01कहानी है कि जैसे बंजरा समाज का था वो यह सब विचान करते से लोग इखटा होते नहीं से लोग इनका कोई पर्टिकुलर घर था नहीं तो यहीं पर इखटे होके फिर वो अपना जो पैसा जो कमाते थे वो यहीं रखते थे चार सो भी गाव में फेलावा तलाव उसने �
05:31पापा ने मुझे तेरदा इस तलाव पे से काया है और जब आगर के बारे में यह कहा गाया है कि यह तलाव अगर या भील नाम व्यक्ति ने अपने जानवरों को पाने के लिए पानी ना होने के वज़े से तलाव का निर्मान करवाया था और कुछ के उदनती यसी है कि अ�
06:01इसके बारे में यह कहा है यहाँ पर राजा का खजाना रखा हुई है कि राजा अपना खजाना लेकर जा रहा था तो कुछ लूटे रहों ने उसका पीछे कर रहा तो सदू संद और फ़कीर कि यहां पर तपत्या अबादत करते तो उनने पुशआ कि आप क्यों गबरा र
06:31पाहड के उपर पाड़ी के उपर रख दो कोई लूटे लूटेगा नहीं तो जब से यहां खजाना पड़ा हुआ है और कोई जानकार यहां जाता है कि इसको अमें निकाल लूँ तो सर्फ के रूप में अजगर के रूप में यहां पर
06:45जान का खत्रा होता सब भाग जाते हैं यह से हमारे पूरवज्यों ने मुझे बताया और आज भी उसचीज का ध्यान है
07:15क्या वाकई शांथ सरोवर के नीचे एक तीन मनजिला महल है और क्या वाकई ऐसा हो सकता है कि सरोवर के नीचे राजा का खजाना हो और उसे निकालने की कोशिश ना की गई हो
07:34कि सामने एक चारो तरफ से घिरी हुई पहाडी है जिस पर भी रहसी ही रहसी है वहाँ पर नाक देवता और एक दरगाह है पीर बाबा किसी की भी वहाँ पर भी बताते कि वह खजाना है चहतरी तीन मनजिला है यहां पर भी पूरवज हमारे बताते थे कि यहां पर भी खजान
08:04कि आया हो कोई ऐसी चीज हुई हो जिससे लोग अपना सारा पैसा लेकर यहां तो यहां पर इस तालाब में आगे जाने का कोई तरीका नहीं है यह सबसे करीबी घाठ है हम ड्रोन के जरिये आपको वहां की और तस्मीरें कैद करके दिखाने का प्रयास कर रहे हैं क्योंकि दे
08:34महल हुआ करता था एक जो बंजारे थे उन्होंने इसका निर्माण करवाया था लेकिन इसका मुख्य मक्सब यह था कि यहां पर पानी रहे आगर मालवा का अगर पूरा आप क्षेत्र देखें तो राजस्थान से लगा हुआ है और काफी आपको रेगिस्तानी इलाका दि�
09:04रहते हैं इस पर लेकिन ये भीतर इसके कैसा होगा कितना आलिशान इसका धाचा होगा उसकी कल्पना केवल आपको कि विदंतियों में ही सुनाई देती रहेगी
09:14खजाने की बात करते करते स्थानी ये लोग उन मान्यताओं पर आ गए जिनका एक सिरा सरोवर के रहस्यों से जुड़ता था और दूसरा लोगों के सरोवर में अपनों को खोने के दर्द से
09:31कि यहां पर भी पूर्वज हमारे बताते थे कि यहां पर भी खजाना है यहां पर पूर्व में सोने का हाथ निकलता था और किसी हां ऐसा बताते थे हमारे पूर्वज के से सोने का हाथ निकलता था यह दोखो हमने नहीं देखा है हम तो सुनते हैं कहानिया जब छोटे छो�
10:01होा है मगर हमारे पुरोजों से इससे सुना है कि कुछ गलत हरकत किसी व्यक्ति द्वारा करी इसके बाद hug�� région
10:09अपना पिए निकलता था सोने का और तीम हो जया कर करती है तो मुझे लगता है कि यह लोगो फिर ही आए
10:25पूजा करते थे और किसी असमाजिक तत्तों ने वहां पर उसमें कुछ गंदगी रख दी उस समय से वहां तो निकलना वंद हो गया पर वट्से में एक बार कम सगम यहां पर एक बली जाती मतला है एक व्यक्ति कम सगम डूब जाता है यहां पर इसका इतिया से
10:45जाती है यह अरसाली है यह बातें सुनने में ही अविश्वस निये थी कोई भी विश्वास एक बार स्थापित हो जाता है तो वो अपने उपर इतनी परतें चढ़ा लेता है कि सच और वहम का अंतर ही मिट जाता है
11:15सबसे बड़ा सवाल है कि यह बातें सुनी सुनाई है जो सालों से चली आ रही है और विश्वास बन गई या फिर हकीकत है
11:30सच मुछ लोगों पर बीती है मोती सागर सरोवर में डूबने से जिन शुभम जैन की मौत हुई थी हम उनके घर पहुँचे
11:39क्या हुआ था कुछ निवा परिक्षा दे कि आया था आके उसके पापा ने दोनों ने साथ में खाना खाया और रात चल रहे थे
11:49तो खाना खा है के वह भी लेट गए पेपर कर आया था था तो पड़ लेटी हुई थी उसने का कि मम्मी में आरा दस नेट में वह कभी बात रूम करने भी जाता तो विना कि यह नहीं जाता
12:03तो फिर उसने लेटी हुई थी दो बच्चे आये थोड़ी आदी घंटा बाद कि आपका बेटर तलाव में डूब किया तो हम जैसे खड़ेते वेसे कौन आया क्या हुआ ऐसा किसे हम वहां चले गए दोड़के गए फिर किर्जा शंकर नमकी ने हमा फास में उनको फोन किया म
12:33किर्दों कि जैसे दो एक दोबी था मा बचा रहा था वो ने बचा पाया ना उससे बचा रहा था उतुनी बचा पाया वो भी खिचाने लग जढ़े उसने छोड़ दिया और फिर उसने डुपके लगा क्यों कि गड़ शंकर नमकी ने निकाला अचानक ऐसा और आप कि वह �
13:03आम लोगों के लिए ये रहस्य हो सकता है
13:09एक मा के लिए एक ऐसी आप भी थी
13:12जिसका जवाब वो चाह कर भी हासिल नहीं कर पा रही
13:16इस इलागे में ये इकलोती घटना नहीं है
13:27लहाजा हम और भी घरों की ओर बढ़े
13:33कि आपके हां कौन आया था जो तालाब में यहां पर डूब कर हमारे जमाई थे उदेपुर वाले हमारी तुसरे नंबर की बच्ची शिखा तो ग्यारों था पत्नी का
13:43तो वह नहने के लिए गए तो नीचे के नीचे रह गए उनको तिर्दा भी आता सब बाद थी तेदा था उनको अच्छे तार गंगा साकर हो कि आये थे उसके पनरा जिन पहले हो और वह भी नहा के आये थे और अच्छे
13:55सब्सक्राइब थे नहाने के मामले में फिर क्या हुआ कि बस वह नीचे नहाने गए तो वापस उपर ही नहीं आया उटके लोगों नहीं किया कि वह जम ही गए थे आपके वह कहा है बही जम बालूं पड़ा के वह तो तो तलाव मीं अंदर निकाला तो हास्पोडिल लेगा
14:25सब्सक्राइब नहीं जा रहा है और उसके बाद में यह बोलते हैं कि हमेशा वो तलाव एकाद ना एकाद जनेगा भोग लेता है हर साल 14 अमावस पर एकाद एकाद जनेगा तो अपने को यह समझ में नहीं आ रहा कि
14:46सब्सक्राइब जादा वेसी मानते हैं कि अच्छी नहीं होती है तो क्या माला उन्हें भोग जैसे हर साल बोलते हैं कि हर साल तो नहीं हां साल दो साल मैं शल्ता होता रहता है
15:08अब एक मतलब ब्रहमन का वह भी ढूप जयादा जया जया अच्छा और उसी घाट पर है किस घाट पर हनुबान गाट हम जहां यह अभारा कमरसाब दूबे थे उसी घाट पर और दो तीन दिन बाल लास मिली उसकी लासाई तुमने यह भी देखा कि उनके बोडी पर जैसे
15:38कोई निशान नहीं कि कोई टीशेट फटी हो कुछ भी नहीं पूरे नॉर्मल
15:42एक घाटना नहीं दो नहीं बल्कि एक ही तरह की कई कई दुर घाटनाओं ने लोगों के मन में आशंकाओं का डेरा डाल दिया
15:53लोगों के मन में यह सवाल था कि ऐसा कैसे हो सकता है
15:56जानकारों का कहना है कि दुनिया भर के सरोवरों में इस तरह की दुरगटनाएं होती हैं और इसके कारण अलग-अलग तरह के हो सकते हैं
16:06जो उस समय के मौसम से जुड़ सकते हैं पानी की गहराई से जुड़ सकते हैं
16:11जानकार जीलों में तैराकी में सापधानी बरतने की सलाह देते हैं क्योंकि गहराई का अंदाजा लगाना समाने रूप से मुश्किल है।
16:20सरोवर का पानी इतना साफ था कि पानी के अंदर की चीजें भी साफ नजर आ रही थी।
16:25हो सकता है कि सरोवर की धरोहर को मानव जनित प्रदूश्रों से बचाने के लिए कहानियों ने जनम लिया हूँ और फिर वो धीरे-धीरे मानिताओं में बदल गई है।
16:55प्राप्टो करके जाते हैं।
16:57यह गाट पी पहले से निर्माण है।
16:59यह घाट हमारे प्राजन समय से पुराने बाप दादा जो आपन है थे उन्हों ने इसका निरमान किया है।
17:04वो जो कहते हैं पीछे जो हम देख पार हैं थोड़ी सी छतरी।
17:08पूरा तब हमने इसको पूरा धंसे अच्छा से देखा भी था तब कैसा दिखा था वह तो इसमें थोड़ा से नीचे था
17:37करी 15-20 फिट दिख रहा हुता नीचे से और यह जित्ता भी दिख रहा है कि हमसें 20 फिट नीचे भी था
17:42दिल्चस फै कि जब पानी घटने पर महल की संरचना स्थानी लोगों ने देखी है फिर भी खजानी का रहस्य क्यूं आज भी रहस्य माना जाता है
18:07यहां ऐसे ही लाउस से जाते हैं एक एक करके जाना पड़ता है अच्छा फिर बेलेंस बीकर जाता है और उधर उस टापू पर भी जाते हैं उस टापू पर नहीं जाते हैं नहीं
18:19अच्छा साप विच्छू सब है तो उस पर जाने से मना करते हैं जा सकते बस जगह नहीं जाने की अच्छा अस्तनी उसमें रस्ता नहीं उसमें कितने साल क्यों सत्रा सत्रा साल के यह सूखा हुआ
18:37यहां पर आगे बढ़ने का और कोई तरीका नहीं है इसमें यहां पर हवा भी बहुत तेज होती है और इसा अभी प्रशाशनी के संसाधन है भी नहीं
19:06मुम्किन है वहां तक जाने के मुश्किलों के कारण रहसयों ने आका अरिम लिए
19:36पर दूसरा रहस्य और अंगिनत अकल्पनिय कहानिया।
20:06मान लीजिये जो दो हाथ निकलने की बात आती है यहाँ पर की दो हाथ बाहर निकलते थे और उन पर कुछ समर्पित करना होता था जिसने गंदगी डाली उसके बाद बुरा हुआ।
20:15तो गंदगी डालने से परहेज करें लोग ऐसा काम न करें।
20:19या फिर एक ऐसे हिस्से की कहानी हो जाए जहां पर कोई नहीं जा सकता है।
20:24तो अब हो सकता है यह हमारे पूरवजों की एक कोशिश हो प्रकृती को बहाँ पर संरक्षित रखने के।
20:32तिस्से कहानियों और रहस्यों की बीच इस सरोवर का अध्भुत सच ये भी है कि ये कभी सूपत नहीं है।
20:43आगर मालवा के इलाके में पानी की कमी के बीच एक ऐसा सरोवर लोगों के लिए प्रकृती का आशिवार है।
20:49ये कोई एक लोता सरोवर नहीं है जहां कि रहस्यों की कहानी हम आपको सुना रहे हैं।
21:01हैं बल्कि अब हम आपको एक ऐसे सरोवर की कहानी सुनाते हैं जिसका सीधा संबंध केवल प्रित्वी से नहीं बल्कि दूसरे ग्रहों से बताया जाता है
21:13कि यह कहा जाता है कि इस सरोवर में ऑक्सिजिन नहीं है फिर भी जीवन है अखिर कैसे
21:20कभी देखी है धर्ती पर ऐसी जील जो रिष्टा रखती है अंतरिक्ष से
21:42कभी सुना है ऐसी किसी अद्धुत जील के बारे में जिसका पानी हरा गुलाबी रंग बदलता हो
21:54क्या ऐसी जील हो सकती है जिसका पानी खारा हो लेकिन किनारों पर वही पानी नीठा हो जाता हो
22:10उसका आदा पानी जो है वो मीटा है और आदा पानी जो है वो खारा है
22:15क्या है महराश के बुलधाना की लोनार जील में जिसकी वज़े से दुनिया भर के वैज्ञानिक इसकी ओर खीचे चले आते हैं
22:24कितने राज छुपे हैं इस अद्धुत जील में
22:27ये दावा किया जाता है कि इस जील में ऑक्सीजन नहीं है लेकिन जीवन मौजूद है
22:34क्या ऐसा हो सकता है? क्या बिना ऑक्सीजन जील में जीवन पनप सकता है?
22:39लोनार सरोवर ऐसा है जो लाइव है
22:42और क्या है इस जील में ऐसा जिसके कारण वैज्ञानिक इसमें दूसरे ग्रहों में जीवन के सबूत धून रही है
22:49एक दशमलव छे किलोमीटर चौड़ी और एक सो सत्तर मीटर से ज़्यादा गहरी
22:57बिलकुल गोल आकार की ये जील एक रहस्य बनी हुई
23:00वैज्ञानिकों का मानना है कि लगभग 52,000 साल पहले
23:07खरीब 20 लाख टन वजनी एक उलका पिंट यहाँ पर धर्ती से टकराया था
23:12उस उलका पिंट के टकराने से इतनी उर्जा निकली
23:15जितनी कई मिलियन टन टी एंटी विस्फोटक में होती है
23:18उस जमाने में जमीन में एक बड़ा सा गढधा बन गया
23:22धीरे धीरे उस गढधे में पानी भर गया
23:24और ये एक झील बन गई
23:26इसको दुनिया का एक मात्र बिसाल्ट चट्टान में बना
23:33हाइपर विलोसिटी क्रेटर कहा जाता है
23:35जानि एक ऐसा गढधा जिसके बनने का कारण
23:39व्यज्ञानिकों को मालूम है
23:40सबसे पहले इसका पता ब्रिटिस रिसर्च स्कॉलर
23:45जे ई एलेक्जेंडर ने 1823 में लगाया था
23:48तो जो लोनार जील है एक उल्का पिंड से बना हुवा जील है
23:54चूकि लोनार जील में क्रेटर है जिसे हम ज्वाला मुखी मुख करते हैं
24:01क्रेटर तभी बनता है जब ज्वाला मुखी का उद्गार होता है
24:05तो जहां पर पस्मी घाट है, पस्मी घाट में बहारास्टा में जहां लोनार जील है, वहां पर किसी प्रकार के भूक काम्प के साथ साथ ज्वाला मुखी प्रक्रिया का उधार नहीं है, जब ज्वाला मुखी का उधगार नहीं है, तो वहां पर क्रेटर लेक नहीं बन सकता
24:35से अनतरिक्य से आने वाले किसी बड़े पइमाने पर उलका-पिंड से हुआ है
24:58ज्वाला मुखी विस फोटों से बनी मानी चाती हैं इसका जवाब है यहाँ पर मिले खास तरे के पत्थर जिनको शैटर स्टोन भी कहते हैं
25:09प्रिश्वी पर जो चट्टाने हैं उनसे उन चट्टानों में कहीं भिन्नता मिलती है इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि परग्रही चट्टाने हैं जो आने वाले समय में अन्डग्रहों के बारे में जारकारी देने में बड़े सहायक हों
25:26धीरे धीरे ये गड़े एक उसूरत नीली जील में बदल गए
25:30जिसे अब हम लोनार क्रेटर जील कहते हैं
25:35लेकिन लोनार जील सिर्फ वो नहीं है जो आप देखते हैं
25:39बल्कि वो भी है जो आपको दिखाई नहीं दे रही है
25:42इस जील का पानी परतों में बटा हुआ है
25:47उपरी सतह पर ऑक्सीजन की मातर अधिक है
25:49जो विभिन प्रकार के पौधूं और जीव जन्तों को सहारा देती है
25:53लेकिन निचली परत बिलकुल अलग है
25:55ये समुदर के पानी से साथ गुना अधिक खारी या एलकलाइन और ऑक्सीजन विहीन है
26:01इसके बावजूद व्यग्यानिकों को इस पानी में एक कोशिये सुख्ष्म जीव बिले हैं
26:09जिनको एक्स्ट्रीमोफाइल कहते हैं
26:11जो अत्यंत कठोर परिस्थितियों में जीने वाले जीव होते हैं
26:14इनकी मौजूदगी व्यग्यानिकों को चकित करती है
26:19और इस चर्चा को जनम देती है
26:20कि क्या ऑक्सीजन रहित परिस्थितियों में भी जीवन संभब है
26:24यहां तक की अन्य ग्रहों पर भी
26:26जब भी कभी जो वहां आक्सीजन की नगणता के कारण
26:33लंबे समय तक वहां पर जीवन की रूप रेखा नहीं मिला
26:39वहां बैक्टिरिया नहीं पाए गए
26:41परन्तु जो जील के आज पास के चटान है
26:45जिससे जल निरंतर टकराते हैं मिलते हैं
26:48तो चटानों में भी कहीं कहीं माइक्रो लेबिल का आक्सीजन छिपा रहता है
26:53जिसके कारण जल में तो आक्सीजन नहीं है
26:58लेकिन चटान में जो आक्सीजन था उसे बैक्टिरिया के सर्वाइब करने का रास्ता मिल जाता है
27:05और फिर है इस जील का सबसे अध्भुत अविश्वसनिय, अकल्पनिय, रंगों का खेल
27:13साल के अलग-अलग समय में इसका पानी अपना रंग बदलता है
27:17कभी हरा तो कभी गुला भी
27:19जानकारों की माने तो ये परिवर्तन उन सुक्ष्म जीवों की वज़े से होता है
27:24जो जील की सते के नीचे मौजूद रासाइनिक मिश्रण में फलते फूलते हैं
27:29जील का गहराई के कारण और वायो मंडली ये प्रकास के कारण
27:36जील का पानी का रंग हमेशा बदलता रहता है
27:39जैसे दिन के समय जील का रंग अलग होगा
27:43रात के समय जील का रंग अलग होगा, सुबह साम जील का रंग अलग होगा
27:48और दिन में जब बरसात हो रही है तो पानी अलग रंग का होगा
27:51जब धूब निकला है तो पानी अलग रंग का होगा
27:54पानी का कोई रंग नहीं होता
27:56पानी का रंग हमेशा जो उसके साथ जो मिल रहा है जो प्रकास आ रहा है उसके साथ वो रंग बदलता है
28:03लोनार क्रेटर जील सिर्फ एक वैज्ञानिक चमतकार ही नहीं बलकि सांस्कृतिक धरोहर भी है
28:14स्थानियों लोग इसे त्रेता युक से जोड़ कर देखते हैं और ये उनकी आस्था का केंदर है
28:19भारत की इतिहास में इस जील का भी उलेख मिलता है
28:38आईनाय अकबरी में लोनार जील को अकबर की पसंदीदा पानी की जील बताया गया है
28:43लोनार जील पर कई संस्थान अपने शोध कर रहे हैं
28:48स्मित्सोनियन इंस्टिउशन, युनाइट स्टेट्स जीलोजिकल सर्वे, भारत की फिजिकल रिसेर्च लिबुरेटरी
28:54और जीलोजिकल सोसाइटी ओफ इंडिया जैसी कई संस्थान इस जील के अलग-अलग पहलूँ पर रिसेर्च कर रही है
29:01जंगलों के बीच में बनी इस जील को महराश सरकार ने, वन अभ्यरन खोशित कर रखा है
29:09ये परिटकों और सधालवों दोनों के लिए आकर्शन का केंद्र है
29:13आमतोर पर कोई भी एक सरुवर हो, कोई एक जलाश हो, तो वहाँ पर पूरे पानी का तापमान आपको एक साही मिलेगा
29:24लेकिन क्या आप कलपना कर सकते हैं, कि एक ही जगे पर तीन अलग-अलग तापमान दर्ज होते हैं
29:32और अगर ऐसा होता है तो वो क्यों होता है आपको इस अधुत कहानी में दिखा रहे हैं
30:02त्योंत नघ insights से तरफ टोण में अलग अलग अलग पानी आशास होता है
30:12एक में थंडा है िभी मेडियों में घ्रम है यहां पे तीनों भूम sap में अलग अलग अलग अपरेशयर Tahir
30:18आस्था कहती है यह चमतकारी कोंड है
30:44श्रद्धा कहती है इसकोंड का पानी इश्वरी ये वर्णाप्राइब
31:03यह मान्यत यहां की रहकिती
31:08यहां जो श्नान करता है आत्मू जो दोता है यह पानी से तो रोगमुक्त रहता है
31:14विश्वास कहता है कि एक कुंड में तीन तापमान का पानी है
31:20क्या है जंगलों और पहाड़ियों के बीच बने तीन तापमान वाले इस अदभुत कुंड करह से
31:44श्रद्धा के वश्रिभूत सदियों से लोग इस मंदर में आते हैं पूजा अर्चना करते हैं और कुंड में इस नान करके एक अध्भुत अनुभव साथ ले जाते हैं
32:03उनका अनुभव कहता है कि इस एक कुंड में एक समय में पानी का तापमान तीन अलग अलग तरह का मिलता है
32:13कमल कमल पर मधुकर बोले श्री कृष्णा शरा
32:17कुंड है बताते हैं कि तीन अलग-अलग तापमान उसमें रहता है तीन अलग-अलग कुंड में ऐसा सही है
32:26एक कुण में एक समय में तीन तापमान का पानी विज्ञान के नियमों के लिए चुनौती था
32:43तो हमारे लिए भी कुछ कम हैरान करने वाला नहीं था
32:46हमने इस अद्भुत विश्वास की पड़ताल करने का फैसला किया
32:56लोगों की मानिता है कि इस छेतर के चप्पे-चप्पे पन भगवान कृष्ण की श्याम रूप का जादूई प्रभाव है
33:08जिसका साक्षात प्रमाण है मंदर में बना अद्भुत जलकुंड
33:13यह बहुत पूराना मंदिर है तुल्शी श्याम मतलब क्रिश्ण भगवन का इस मंदिर है और गरम पानी का कुण है
33:24हम लोग हर खुदम को सुभई यह आते हैं और यह गरम पानी के कुण में नहा के अपने मंदर कुणी करते हैं
33:32हम अपने साथ पानी का टेंपरेचर नापने वाला डिजिटल धर्मोमीटर लेगे
33:52जब हमने नापना शुरू किया तो वागई तीनों कुंड में हमें फर्क मिला
34:02वैग्यानिक दिश्टिकोण और तरकों की स्थापना के लिए बरसों के शोध और प्रयोगों की जरूरत कोटी है
34:10लेकिन आस्था किसी भी मानिता को मूल रूप में सुविकार कर लेती है
34:14यही वज़े है कि विज्ञान जनिस थानों पर चमतकार की वज़े तलाशता है आस्था वहां अपने आराध्य धूम लेती है
34:20दरसल है तो ये वागई दुनिया बनाने वाले का चमतकार है
34:25क्योंकि प्रित्वी की सते पर मौसम जो भी हो प्रित्वी के भीतर एक सी ही संदच नहीं
34:30प्रित्वी की सते चार पड़तों में बटी होती है जिसमें तीन ठोस अवस्था में होते हैं और एक तरण
34:37सबसे गहरी परत inner core एक ठोस लोहे की गेंद होती है
34:40जिसका तापमान होता है करीब 5000-7000 डिगरी Celsius
34:44Inner core के उपर होती है outer core जिसमें लोहा पिगली आवस्था में होता है
34:49इसका तापमान होता है करीब 4000-5000 डिगरी Celsius
34:53अगली परत को कहते है mantle जो 1800 किलोमीटर मोटी होती है
34:58मैंटिल पिघला हुआ पत्थर होता है और बहता रहता है
35:02इसके उपर होता है अर्थ क्रस्ट जिस पर हम रहते हैं और जहां पर पानी मौजूद होता है
35:07अर्थ क्रस्ट की मोटाई जमीन के नीचे करीब 40 किलो मीटर होती है और समुदर के नीचे करीब 8 किलो मीटर
35:14अपर मैंटल में पिघला पत्थर बहने की वज़े से प्रित्वी की उपरी सतह या अर्थ क्रस्ट प्लेटों में टूट जाती है
35:20सतह का पानी जब इन ही प्लेटों के जरीए जमीन के अंदर जाकर मैंटल के पिघले पत्थरों से तकराता है तो गर्म हो जाता है और भाब बन जाता है
35:29कहीं कहीं पर जमीन के अंदर प्रेशर ज्यादा होने की वज़े से पानी सतह पर गर्म होकर बाहर आ जाता है
35:35इसी को hot water spring कहते है
35:37अर्थ क्रस्ट पर सेक्रों की तादाद में hot spring पाए जाते है
35:41hot water spring होता है कि जब सतह का पानी सीप करके
35:46रिस्ट करके नीचे की और जाता है
35:48जहां नीचे की और जाता है उस जगा पर
35:51300, 400, 500 मीटर उस जगा पर अभी भी जमीन ठंडी नहीं हो पाई है
35:56मतलब कि 20 लाक साल पहले जो वहां पर लावा उदगार हुआ था
35:59और लावा से बना था तो वहां की जमीन अभी भी नीचे में ठंडी नहीं हो पाई है
36:03क्योंकि ऊपर की सतर ने उसे ठंडे होने से रोग दिया
36:06पानी वहां पर पहुंचता है, पानी गरम हो जाता है
36:09फिर गरम होने के बाद में पानी फैल जाता है
36:12तुलसी शाम मंदिर कुंड में भी रोग दूड होने के पीछे का विज्ञान यहीं है
36:19जहां हर छोटे बड़े मर्ज के लिए हमें दवाईया लेनी पड़ती हैं, वही प्रक्रती के ऐसे औशधिये सोते अद्भुतों हैं
36:27कभी सोचिये तो एक ही सवाल के कई-कई जवाब मिल सकते हैं, लेकिन ध्यान से देखिये तो एक भी जवाब मिलना मुश्किल हो जाता है
36:37तभी तो ये है अद्भुत और विश्वस्निय और कल्पनिय अभी के लिए इतना ही देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहिए आज तक
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