00:00जयपुर के अंदर आजादी के आंदोलन की बयाद 1920 से ही चलने लगी थी 1931 आते आते प्रजामंडल बनता है पहले अरजुनला सेठी जी 1920 के अंदर क्रामतिकरी आंदोलन को लीड कर रहे थे बाद में प्रजामंडल को कपुर्चन जी पाटनी ने लीड किया फिर चरंजीलाल
00:30का अधा करते हैं और फिर इस आजादी के आंदोलन के अंदर हिरालाजी शास्त्री आज बाबा हरिश्चंदर ठीकराम पालिवाल रामकरण जोशी सरीखे नेता गण इसमें शामिल होते हैं और करते करते 15 अगस 1947 आ जाती है जब 15 अगस 1947 आई तो सुबह पहले ही अरुणा ह
01:00चोक की चोपड के उपर जिसे पुराने लोग आमिर की चोपड भी कहते हैं वहां पूर दिशा के अंदर एक स्टेज लगाया गया एक मंच लगाया गया और वहां पर क्योंकि उस दिन हिरालाल शास्ती जपर से भाहर थे मान सिंग जी भी विदेश गए वे थे तो मगर वह
01:30वो उसके अंदर शरीक हुए उसके बाद वो सब लोग गोबिंदेव जी गए और गोबिंदेव जी के जाकर उन सब लोगों ने भगवान से इस देश की बहबुदी समर्दी की प्रातने की और शाम को एक मशा जलूस बाबा हरी संद के नित्त में लगा मैं सोबा की शाली �
02:00बहुत सारे दलितों को अपने घर पे बुलाके एक भोच कायोजन किया जैपूर के जो नगर परिशत के जो चेर्मेन थे गुलाब जी कासके बाल उन्होंने गी के दीपक्षपूरे शेहर में जलाए और बड़ाई हासों बड़ाई उल्लास से बहुत ही खुशियों से पहल
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