00:00बिहार एक कृशी प्रधान राज्य है और बिहार जैसे राज्य भी ट्रम्प के टैरिफ से अच्छूते नहीं हैं, कई खाद्य सामागरियों को अमरीका और यूरोप के बाजार में भेजा जाता है, बिहार जैसे राज्यों पर भी टैरिफ का असर पढ़ने वाला है और यहा
00:30लगभग 35,000 टन हुआ था, जो कि पूरे बिस्व के मखाना उत्पादन का 90% से अगर लास्ट यर के डाटा को देखे तो लगभग जो डाटा हमलोग के पास उपलग था, उसमें पंदरसो से दो हजार टन जो है एक्सपोर्ट हुआ था, इसमें अमेरिका एक बड़ा मार्क
01:00है, उस टैरिफ से वहां का जो कंजूमर है, उसको बड़न बढ़ेगा, क्योंकि सपोर्च किजिए कि अगर पहले 10% के इंपोर्ट ड्यूटी पर जा रहा था, तब वो 25% के इंपोर्ट ड्यूटी पर जा रहा था, इसलिए वहां के कंजूमर को ये टैरिफ का लोड उठान
01:30परसेंट लगेगा, तो 25% लगेगा, तो लगवक 5,000 टैरिफ सहीत हो जाएगा, प्लस वहां क्या है, कंटेनर कॉस्ट लगता है, क्योंकि जाने में भी उसको 45 डेज लगते हैं, तो कंटेनर का कॉस्ट चार लाग से साथ लाग के बीच में एज़ पर रेट जो है फ्लक्श
02:00वह पांच हजार से साथ हजार रूपया के बीच में कंजूमर अभी उसको खरीद रहा है, तो इसलिए जो भी लोट बढ़ेगा इस टैरिफ के बाद, वहां के कंजूमर पर ही बढ़ेगा, तो क्यों लगता है टैरिफ के बाद वहां जो अभी जो लैंडिंग रेट वहां 4
02:30सबसे ज्यादा जो भीहार से निर्यात के जाने वाले मखाना हैं, उसका सबसे ज्यादा असर परेगा, जो बैवसाई है, इससे काफी और संतुष्ट है, और उन लोगों का कहना है कि अब हम लोग जो मखाना है वो अमेरिका नहीं भीज कर अन्ने देशों में भीजेंगे, �
03:00यूएस का मार्केट में मखाना जाता है, ये रेट बढ़ने से वहाँ पर मखाना महंगा होगा, और जैसा मैंने बताया, एक अंडर सप्लाइड प्रोड़क्ट है, तो मेरे को नहीं लगता है कि लोकल मार्केट में सा कोई भी फरक पढ़ना है, और जो ये प्राइस का जो �
03:30अमेरिका के द्वारा जो टैरिफ लगाया गया है, उससे पूरे भारत पर अशर पढ़ेगा, और भारत के सासा विहार पर भी एक बड़ा अशर पढ़ने वाला है, जो असर पढ़ेगा वो सबसे जादा असर पढ़ेगा, एक्सपोर्ट जो हमारे कम हो जाएंगे, डॉलर क
04:00ुपय की कीमत कम करने से GDP का growth rate भी कम होने की संभावना जदा ही जा रही है investment कम होगा रोजगार पर बहुत बड़ा शर्थ पढ़ने वाला है इसके साथ साथ जो product होगा विहार से तो ऐसे कहें तो वह बाश्मती चाबल का जो export है हमारा वो कम हो जाएगा मखाना जो export कम होगा �
04:30बिहार से खास करके जो है बिहार जैसे गरीब राज्जियों पर इसका बहुत जादा भार पढ़ना हां जाहिर है कि उन्हें चुकानी पड़ेगी जब हम export ज्यादा हो गया तो महंगी चीज़ें कोई चीज हो जाएगी तो महंगी होगी तो उसका demand क्या होगा कम होगा जब
05:0030 billion dollar का export इंपोर्ट है एक्सपोर्ट जो है 86 billion dollar है और इंपोर्ट जो है 45 billion dollar का है तो यह कहीं न कहीं देख रहा है अमेरिका कि इससे भरपाई की जा सकती है
05:13इसके side effects से बचना परतमान में तो बहुत मुश्किल है क्योंकि उसके लिए कहीं न कहीं अमेरिका से trade deal जो है करना पड़ेगा और जो सामान हम एक्सपोर्ट कर रहे है जितनी 86 billion dollar का और उतने billion dollar का कोई दूसरा बाजार होना पड़ेगा
05:32रंप के tariff का असर बिहार जैसे क्रिशिप प्रधान राज्य पर भी पढ़ने की संभावना है खास तोर पर मखाना और बास्मती rice को बिदेशों में भेजा जाता है अब सवाल ये उठता है कि बिहार के उतपादकों के सामने विकल्प क्या है जरूरत इस बात की है कि बिद
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