00:00आम तोर पर जब हम यक्षणी साधना शब्द सुनते हैं तो हमारे मन में एक रहस्य मई, अत्यंत सुन्दर, कामुक और सिध्याओं देने वाली शक्ति की छवी उभरती है।
00:11लोक कथाओं, तंत्र ग्रंथों और आधुनिक फैंटेसी में यक्षणियां इतनी आकरशक रूप में चित्रित की गई हैं कि बहुत से साधक बिना पूरी समझ के इस मार्ग पर बढ़ निकलते हैं।
00:41और अध्यात्मिक युद्ध छिपे हैं।
00:43भारतीय संस्कृती और तंत्र ग्रंथों में यक्षणियों को अनन्य सौंदर्य और रहस्यमई शक्तियों से परिपूर्ण बताया गया है।
00:52कुबेर की सेविकाएं, भोग देने वाली अपसराएं या रात्र में प्रकट होने वाली स्त्रियां।
00:59इन सभी छवियों ने यक्षणी को एक ऐसी अद्रिश्य देवी के रूप में चितरित किया है, जो इच्छाएं पूर्ण करती है।
01:29नई उर्जा में ढालना पड़ता है।
01:59साधकों का मन अस्थिर होता है, वे भ्रम, भूत दोश या मानसिक असंतुलन का शिकार हो सकते हैं।
02:05यदि यक्षणी साधना बिना योग्यक गुरु के मार्गदर्शन में की जाए, या तांत्रिक विधियों में तुरुटी हो जाए, तो साधक की आत्मा एक ऐसे चक्रव्यूह में फस जाती है, जहां से वापसी कठिन हो जाती है।
02:19कई बार साधना बीच में तूट जाने से यक्षणी अप्रसन हो जाती है, और साधक पर मानसिक और शारिडिक संकटों की वर्षा होती है।
02:49अशुध भी होती हैं। यह भ्रह्म है कि हर यक्षणी केवल शुभ और सहयोगी होती है।
02:55कई तांत्रिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है उन यक्षणीयों का जो भ्रमित करती हैं, डराती हैं या साधक को मोह पाश में बांध कर उसका तेज नश्ट कर देती है।
03:05इन्हें छलिनी यक्षणियां कहा गया है।
03:09साधना के दोरान कई बार ऐसा अनुभव होता है जैसे कोई उर्जाने चोड़ रहा हो।
03:14कई साधक रातों में डरावने स्वपन, नींद में घुटन या अंजानी परच्छाईयों का अनुभव करते हैं।
03:21यदि साधक मानसिक रूप से द्रढ़ न हो या उसमें आत्मिक सुरक्षा का कवच न हो तो ये शक्तियां उसे भीतर से खोखला कर सकती है।
03:31इस मार्ग पर बिना उर्जात्मक सुरक्षा के चलना ऐसा है जैसे कोई नंगा व्यक्ति कंठीली जाडियों से भरे जंगल में दौड रहा हो।
03:40आत्मरक्षा जब गुरु का आशीरवाद और तांत्रिक नियमों का पूर्ण पालन ही इस मार्ग पर टिकने का एक मात्र उपाए है।
03:49वर्तमान में कई लोग सोशल मीडिया या किताबों के जरिये स्वयम को तांत्रिक या गुरु बताकर लोगों को यक्षणी साधना के ब्रह्म में फंसा रहे हैं।
03:59ऐसे नकली मार्ग दर्शक केवल लालच दिखाते हैं परंतु जब साधक किसी विपत्ति में फंसता है तब वे सहायता से पीछे हट जाते हैं।
04:09इसलिए एक अनुभवी, सिद्ध और आध्यात्मिक रूप से शुद्ध गुरु के बिना यक्षणी साधना का आरंभ भी नहीं करना चाहिए।
04:18यक्षणी साधना कोई तातकालिक या इंस्टेंट लाभ देने वाली प्रक्रिया नहीं है।
04:22यह तप, सैयम और वासना से उपर उठने का रास्ता है।
04:27जो साधक इसे केवल काम की पूर्ती के लिए करता है वह अंततह विनाश की ओर बढ़ता है।
04:34यदि कोई साधक शुद्ध भावना, पूर्ण समर्पन और योग्य गुरु के निर्देशन में यह साधना करता है, तो वहन न केवल यक्षणी की कृपा पाता है, बलकि आत्मिक उन्नती, चेतना का जागरण और जीवन का गहन उद्देश्य भी प्राप्त करता है।
04:50यह मार्ग केवल भोग नहीं, योग की ओर भी ले जाता है। यक्षणी साधना एक अगनिपठ है। यह मार्ग जितना आकरशक दिखता है, भीतर से उतना ही कठोर, रहस्यमई और जोखिम भरा होता है, जो इसे केवल रूप सौंदर्य की चका चौंध या इच्छाउं की �
05:20उनके लिए यह मार्ग जीवन बदल देने वाला हो सकता है। क्या आप मानते हैं कि बिना गुरु के यक्षणी साधना करना आत्मगाती हो सकता है। कमेंट में जरूर बताएं और वीडियो को शेयर करें, जिससे औरों को भी इस चेतावनी भरी जानकारी का लाभ मिल सके।
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