00:00रासधानी जैपुर नकेवल अपनी राजसी इतिहास के लिए जाना जाता है, बलकि यहाँ विराजित असंख शिवालेओं की वजह से यह छोटी काशी के नाम से भी प्रसद्ध है।
00:30जहाँ भगवान शिव पर चढ़ाये गया जल अमरित स्वरूप माना जाता है और इसे वियर्थ बहने से रोकने के लिए यहाँ विशेश जल सनरक्षन प्रनाली विक्सित की गई है।
01:00अपनी सेवा लेके अपने सांगा नेर में सांगा बाबा है वहां जाते थे।
01:05तो रास्ते के अंदर यह जगे पढ़ती थी तो यहाँ पर एक तो नदी बैती थी ढून नदी के नाम से और यहाँ ताड के वरक्षत और यह गाया आती थी जो वो उस जगे खड़ी होके अपने आपी दूद निकालती थी।
01:19महंत सत्य नारायन महाराज के अनुसार यहाँ ताड के वरक्षों की भरमार थी। इसलिए इन्हें ताड केश्वर महादेव कहा गया।
01:46यह मंदिर जैपुर की बसावट से भी पहले अस्तित्व में आ चुका था। बाद में जब जैपुर शहर की नीव रखी गई तो इस मंदिर को भव विरूप दिया गया।
02:16यहाँ पीतल की विशाल नंदी प्राण प्रतिष्ठित है।
02:44लेकिन परंपरा से हट कर यह शिवलिंग के सामने नहीं बलकि दाई और स्थित है।
02:50जानकारी के अनुसार यह तांत्रिक विधी से इस्थापित है और मानेता है कि यह नंदी महराज प्रतेक भक्त से साक्षतकार करते है।
02:58इसके अलावा मंदिर में गणेश जी, बजरंग बली, सहित कई देवी देरताओं की मूर्तियां प्रतिष्ठित है।
03:05तारकेश्वर महादेव की महिमा ऐसी है कि आसपास ही नहीं, दूर दराज से भी हजारों लोग भगवान को जल अर्पित करने मंदिर पहुंचते है।
03:15पहुत ज़री मानते है इस चीछ को और बावा जी का जल अमरीत ही होता है।
03:45foreign
04:15जैपूर से ETV भारत के लिए अंकुर जाकर की रिपोर्ट
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