00:00एक दफा का जिक्र है, एक हरी भरी घास वाली जगा पर एक नीली बेल रहती थी, जिसका नाम बैला था।
00:07सब गए वाइट थी, लेकिन बैला ब्लू थी, और बैला का सपना था उरना।
00:12सब ने हसना शुरू कर दिया, गए कभी उरती हैं क्या।
00:16लेकिन बैला ने बलून्स बांधे जोर से मू किया, और वो हवा में उर गई।
00:21रेन्बू की पार से वापस आई, तो सब ने तालियां बजाई और अब बैला सिर्फ नीली बेल नहीं थी, बलके सबसे हिम्मत वाली थी।