00:00कभी भी हजयात्रा पर उंगली नहीं उठाई जाती है, जकात पर उंगली नहीं उठाई जाती है, रोजा पर उंगली नहीं उठाई जाती है, लेकिन दीपाबली आएगी तो प्रदूशन होगा, होली आएगी तो पानी बरबाद होगा, और अब कामर यात्रा होगी तो तरह
00:30इस चुत रूप से उनको मांसिख भीमारी है।
00:32महराच कावर यात्रा को लेकर बयान बाजी करना है
00:34मौलाना की कावरिया मांस लेते हैं, सलाप पीते हैं
00:37और दंग करते हैं इसको किस तरीके साथ देखते हैं इस बयान को लगाता है।
00:41In the end of the day, सनातन पर टीकाटपणी करना मड़ा शळल हो गया है।
00:46Soft target है सनातन है।
00:48कभी भी हरयात्रा पर उंगली मी उठाइजाती हैं।
00:52जकात पर उंगली मी उठाइजाती हैं।
00:54रोजा पर उंगली मी उठाइजाती हैं।
00:56दीपा वली ऐाएगी तो प्रदूशन होगा, होली आएगी तो पानी बरबात होगा, मुझी साली होगी तो तरहो हैं इसे भले बिल्था होता है
01:17बार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वार्वा
01:47यह बार बार टीका टिपनिया भगवानों के उपर, कभी मंदलों के उपर, कभी तेवारों के उपर, कभी सनात्म की परंपरा के उपर की जाते हैं.
01:56अब कामर यात्रा पर उपर उपर हैं, हमको तो लगता है कि उपर मानसिक बीमारी है, और भी छिप्त है, कामर यात्रा भगवान महानदेव के परतिश्रथा का उपरतीक है, अब कोई कैसे जा रहा हो उसकी निजी आस्ता है, वो अपनी आस्ता से जा रहा है, जल वर के जा रह
02:26मुलाना साहब को यह कहना चाहेंगे उनके धर्म गुर्वों को कि हमारी बात बहुत गंभीरता से है यदि वो अभी कामण पर बोलेंगे और कल के दिन हम आपके उपर बोलेंगे तो आपको प्रबड़ी मिल्चीने को इसलिए उनके जतने भी विशिष्ट धर्म गुरू है ऐ
02:56बढ़र अपे तरह बहुत आपष्च कामण में जाने माली लोगों को भी प्रात्माइपर हैंगे पर अपनी सनातर परमपरा का मजातना होगे इतनी सावधानी कूल्वक चलना कि प्छेसें पहुंचेंगे इतनी सावधानी कूलवक अपनी आस्था को लेकर चलना होड़ा �
03:26आगारण सबी कामड़ियों के ऊपर उंगली में के और बुरे नहीं होते हैं
03:30एकारकोई बीच में अगर बूला भी हो उससे भी आधना करेंगे
03:33कि और जगे हें, और यात्राहें उन्हीयात्राउ में तुम पद्रों कर लेना
03:38प्रकावरी आत्राव पद्रमत करना, ताकी सना तंदरियों पर पुशिचे निखरांग।
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