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भगवद गीता के इस गहरे रहस्य को जानें। भगवान कृष्ण ने क्यों चुना अर्जुन को? इसका वास्तविक अर्थ आपके जीवन बदल देगा।
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00:03महाभारत का युद्ध शुरू होने वाला था, दोनों सेनाएं आमनी सामने खड़ी थी, शंक बच चुके थे, इतिहास का सबसे
00:08बड़ा युद्ध बस शुरू ही होने वाला था, लेकिन तभी महान युद्ध अर्जुन अपने ही रत में बैट कर तूट
00:14जाते हैं, उनके हा�
00:28युदिष्टिर को क्यों नहीं, या फर किसी रिषी मुनी को क्यों नहीं, आज के इस वीडियो में हम समझेंगे कि
00:33अर्जुन में ऐसा क्या खास था जिसकी वज़े से क्रिश्ञ ने उन्हें गीता सुनाई, अक्सर लोग अर्जुन को सिर्फ एक
00:39महा धनुर्धर के रूप म
00:54और तभी उनके मन में सवाल उठे क्या अपने ही लोगों को मारना सही है क्या सत्ता के लिए युद्ध
00:59जरूरी है क्या हिंसा कभी धर्म हो सकती है यानि अर्जुन सिर्फ युद्ध नहीं लड़ रहे थी वो अपने भीतर
01:05के संघर्ष से भी जूच रहे थी और यही संघर्ष
01:07गीता की शुरुआग बनता है गीता सिर्फ उबदेश नहीं है ये सवाल और जवाब का संबाद है अर्जुन ने क्रिष्ण
01:13से लगातार प्रशन पूछे धर्म क्या है कर्म क्या है सही नेड़ा कैसे लिया जाए मृत्यू क्या है आत्मा क्या
01:19है अगर अर्जुन सवाल ना �
01:21पूछते तो शायद गीता कभी सामने ही नहीं आती यही कारण है कि कई विद्वान कहते हैं कि गीता उन
01:27लोगों के लिए हैं जो सवाल पूछते हैं और अर्जुन वही व्यक्ति थे महाभारत में कृष्ण और अर्जुन का रिष्टा
01:32बेहत खास बताए गया है वो सिर्फ मित
01:47इमान भी शायद गीता का सबसे बड़ा रहसे यही है अर्जुन सिर्फ एक यूद्धा नहीं बलकि हर इंसान का प्रतीक
01:52है जब जीवन में कटिन फैस्टे आते हैं जब रिष्टे और करतवे टकराते हैं जब डर और भ्रम इंसान को
01:58कमजोर कर देते हैं तो हर व्यक्ति कही
02:00ही ना कहीं अर्जुन जैसा महसूस करता है और कृष्ण का ग्यान सेफ अर्जुन के लिए नहीं बलकि हर उस
02:06इंसान के लिए माना जाता है जो जीवन के संघर्ष में उलज्जा
02:09बहुत लोग सोचते हैं कि गीता सिर्फ युद्धि के बारे में हैं, लेकिन असल में गीता जीवन को समझने का
02:13दर्शन है, कृष्ण अर्जुन को सिर्फ लड़ना नहीं सिखाते, वो उन्हें सिखाते हैं, कर्म करो लेकिन फल की चिंता मत
02:19करो, डर पर नियंतर रखो, सही रा
02:37शायद नहीं, क्योंकि भीम भावनाओं से जादा क्रोध और शक्ति से चलते थे, अगर दुर्योधन होता तो शायद वो सुनना
02:43ही नहीं चाहता, अगर भीश मोहते तो वो पहले से ही अपने वरत और कर्तव्य में बंधे थे, अर्जुन ही
02:48वो व्यक्ति थे जो शक्ति शाल
03:06सिर्फ एक युद्ध भूमी नहीं, बलकि हर इंसान के भीतर चलने वाला संगर्श बन जाता है, अब सवाल आपसे, अगर
03:12आप अर्जुन की जगह होते ही तो क्या युद्ध लटते या फिर सब छोड़ देते, अपनी राय कॉमेंट में जरूर
03:17दे, वीडियो पसंद आई ह
03:18तो वीडियो को लाइक, शेर और चैनल को सब्सक्राइब सर्व करें
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