00:00कि दुनिया भर का जहर शिव ने अपने कंठ में धारण कर ली और तो कोई जगह थी ही नहीं जहाँ पर वो जहर रखा जा सकता हूँ जहा रखा जाता है उसी जहर भू गला देता जला देता हूँ शिव प्रथम गुरू है शिव अकेले थे जो उतना जहर अपने भीतर रख स
00:30जागातर लोगों से नहीं समझते
00:31गुर होने प्यारत होता है अब सबके जंजट तुम्हारे उपर आ रहे
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