- 6/25/2025
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00:00कि आजकल के जो गुरू है बाबा लोग है मैंने उन सबको देखा वो पैसा बना रहे हैं और वो क्योंकि पैसा बना रहे हैं इसलिए वो असली नहीं है और अंधुश्वास के नाम पर देश में ऐसे बाबाओं की कमी नहीं जो लोगों की समस्या दूर करने के नाम पर पैसे �
00:30मजाल कि सीगी कि आखे तूबहरत के धर्म गुरूओं का जो ठागा है इन्हों
00:39कोई सीमाने इनको तूम बोलो कि बड़ा संते बड़ा संतङ है
00:56सोचो वो अपना जटा जूट और दाढ़ी औरडी सब कटा ले
00:59अधारन शर्ट पेंट पहन ले
01:01इंसानों जैसी भाशा में बात करने लगे
01:03तो उसमें कुछ बचेगा क्या संत जैसा है
01:07अचारी जी अभी कुछ दिन पहले की बात है
01:13कि कुछ रिलेटिव्स मेरे घर पर आये वेड़े
01:16तो कुछ भज़नायद हो ही है
01:18तो मैं आदधन गा रहा था
01:20तो उनकी और से कमेंट आया
01:23कि हां कि समय समय पर ऐसी माहनात्म होती रही है
01:29तो मैंने का समय समय की बात नहीं है
01:31अभी भी लोग हैं जो के सही अत्यात्मकार्त लोगों तक पहुंचा रहे है
01:36तो उनकी उसे सिर्फॉंस था इसका
01:41कि उनकी अनुसर कि असली संत्य तो वही है
01:44जो कि जो अपड़े में रहे
01:45जैसे पहले कभी साहब और जो हम संत्यों की छबी है
01:49जो उपड़े में रहे भिक्षा इत्यादी मांगे
01:53तो मेरी मेरी और से ये उनको रिपलाई था कि श्रे कृष्ण भगवान
01:57तो भी अगर आप देखो तो वो तो खुद भी राजा थे
02:02महलों में रहे हैं तो ऐसी कोई ऐसा कोई रूल तो आप नहीं लगा सकते हो
02:06कि असली संत तो वही है जो के जोबड़े में रहे तो बिसिकली उनकी
02:12दो मानेता है मिल्को इसमें दिखी कि एक तो वह के असली संत वही है
02:17जो कि दीन ही हालत में अपना जीवन बिदाए और फिर एक मानेता ही है
02:21कि जो पैसा बना रहा है वो तो फरजी है
02:23उनका कही ना कही ना कही रिस्पोंस था
02:25कि आज कल के जो गुरू है बाबा लोग है
02:27मैंने उन सब को देखा
02:29वो पैसा बना रहे हैं
02:31और वो क्योंकि पैसा बना रहे हैं इसलिए वो असली नहीं हो सकते
02:33तो इसके बारे में मैं जानना चाहता था आपसे कि
02:37ये दोनों माननेता हैं
02:39सही हैं गलत हैं क्या है
02:41माननेता का तो पता नहीं पर संत माने क्या
02:46संत माने कौन
02:49संत माने कि जो कि लोगों के
02:52बलाई के लिए काम करे
02:53उनके उनसे दुख खटाए
02:55तो इसमें जोपड़ी कहा है? इस परिभाशा में जोपड़ी कहा है?
03:04बिसिकली शायद यह होगा कि वो अपने लिए नहीं कर रहा तो अपने लिए उसने कोई
03:07कुछ घर पर महल यह सब खड़ा नहीं किया, इसलिए जोपड़ी में रहे गए
03:11ने, तो महल और
03:14जोपड़ी के बीच में कुछ नहीं होता
03:23एक तो है कि अपने लिए महल खड़ा कर लिया और एक है कि वो जोपड़े में रहता है उसके बीच में कुछ नहीं होता
03:29उमसाधारण
03:31इंसानों जैसा
03:34हवा हवाई नहीं
03:37यह संत की परिभाशा ही यही है कि वो जो जो जोपड़ी में रहता है तो संत है तो फिर तो भारत जैसे जैसे गरीबी से मुक्त होता जा रहा है वैसे वैसे संतों से मुक्त होता जा रहा है
03:50और सब को गरीब कर दो सब को जोपड़े में डाल दो तो सब संत हो गए
03:56अगर संतई की परिभाशा में जोपड़ी इतनी केंद्रिये चीज है तो सबको जोपड़े में डाल तो सबसंत हो जाएंगे
04:05या कहीं ऐसा तो नहीं कि यह संसारी आदमी है
04:14यह ज्यानी से इतनी इरश्या करता है यह कहता है सब कुछ तुम्हें ही मिल जाएगा क्या
04:30ज्यान तुम्हें मिल गया शांति तुम्हें मिल गई मुक्ति तुम्हें मिल रही है आनंदित तुम रहते हो
04:38अब कम से कम घर तो हमारे पास रहने दो
04:43तो तुम्हारे लिए जोपड़ा
04:45अगर ये सिद्ध हो जाए
04:49ये ज्ञान, शान्ते, मुक्ते, श्रद्धा
04:55इनके साथ एक साधारन घर भी चल सकता है
05:00तो फिर संसारी वुचार है क्या करेगा
05:01क्योंकि संसारी ने तो अपने आपको तर खमेशा ये ही दिया था
05:04कि मैं इतना बेइमान और लंपट और कायर और कमजोर इसी लिए हूँ
05:10क्योंकि अगर मैं ऐसा न हूँ
05:11तो घर नहीं चलेगा
05:13यही तो तरक रहता है ना हर भ्रष्टाचारी का क्या तरक होता है
05:17कि मैं इतना जो भ्रष्टाचार करता हूँ
05:22इतना कपट और काईयाँ पन करता हूं घर चलाने के लिए करता हूं अब अगर तुम यह साबित कर दो कि ज्ञानी होते हुए भी शद्धावान होते हुए भी
05:34घर हो सकता है तो फिर अब संसारी मुझा चुपाएगा उसका तो पूरा तर्खी नीचे गिर गया
05:42है संसारी ने कहा कि सबकुस घ्यानी को दे दोगे क्या के ग्ञान शद्धा मुक्तित उसके भास धे
05:53ही घर भी हो गया उसके पास तो फिर अब हमारे पास क्या बचा तो उसको जूपड़ा दे दो ने पाफ़िता हुआ ह।
06:07अब बड़ी सहुलियत हो जाती है
06:10जो जोपड़ों में नहीं भी रह रहे होते
06:15वो खास किसी आर्किटेक्ट को बुला के अपना घर जोपड़ यासा बनवाते है
06:21जब पता है कि संत कहलाओ गई तभी जब जोपड़े में रहोगे
06:32तो जहां भी रह रह रहे हो उसको जोपड़े जैसा कर दो
06:35कहीं भी महल भी बनवाया तो उसको नाम दे दो कुटीर
06:44पचास करोड़ का महल हो सकता है नाम हो सकता है दरिदर कुटीर
06:51भाबा जी बिलकुल BMW पे चलते हैं रोज
06:56लेकिन भक्तों के सामने आने से पहले वो गाड़ी से ही नहीं उतरते हैं
07:04जूते भी उतार देते हैं ऐसा लगता है बिलकुल एकदम सडक पर
07:08पदे आत्रा करते हुए आ रहे हैं नंगे पाउं
07:11यह ना करो तो संसारी को बड़ी ठेस लगेगी तुम सूचो तो उस बेचारे में कितनी आग उठेगी इरश्या की
07:24वो कहेगा मेरे पास घर है घर तो उसके पास भी है लेकिन मैंने तर किये दिया था
07:31कि इस घर की खातिर बड़ी बेमानिया करनी पड़ती है उसके पास भी वही घर है बेमानी करे बिना
07:38तो मैं तो कहीं का नहीं रहा ना
07:41मेरे पास पैसा है
07:44पैसा उसके पास भी है पर मैंने इस पैसे के लिए
07:48हजार तरीके की हिंसा करी
07:51और पैसा उसके पास भी है पर हिंसा करे बिना
07:58सोचो कैसी भायानक इरश्या उठेगी
08:00तो
08:05यह
08:08विचार तुम मत पकड़ ले न
08:11हमेशा अपने आप से पूछना है
08:15इस अप शब्द जब सामने आते हैं
08:17इतनी बार सामने आये इनकी आदत लग गई है
08:19हम इनकी परिभाशा पूछना भूल जाते है
08:21संत्माने क्या
08:23जिन शब्दों की सबसे आदा आदत लग गई हो ना
08:26सबसे आदा उन्हीं की परिभाशा पूछा करो
08:28यह सूत्र बता रहा हूं
08:32जिन शब्दों से तुम्हारा सबसे आदा परिचय है
08:35तुम उन्हीं को लेके सबसे आदा अज्यान में हो
08:37कुछ शब्द बताता हूं लिख लो
08:40चुनोती देता हूं कि
08:42जब इनके बारे में विचार करोगे तो पाओगे कि
08:44कुछ नहीं पता, जीवन
08:45बताओ जीवन क्या है
08:48और योगी तुम नहीं जानते कि
08:50जीवन क्या है, इसलिए बड़े बड़े महागरू
08:52आ करके तुम्हें लाइफ लाइफ बोल करके ठगे जा रहे हैं
08:54वाट इस दपरपोस अफ लाइफ
08:57दपरपोस अफ लाइफ इस लाइफ
08:59बच्चा लोग बजाओ ताली
09:01क्या जवरदस्त बात बोलिये
09:03बच्छ इसमें एक छोटी सी चूक रह गई
09:05लाइफ माने क्या यह ना उनको पता है ना बताना चाहते हैं
09:09बताना चाहते भी दूर क्यों आते हैं ना पता है ना पता करना चाहते हैं
09:13जीवन जीवन तो रोज बोलते हो हाई जिन्दगी खराब हो गई
09:17या जिन्दगी गुलजार है, रोज बोलते हो न जीवन जीवन, लाइफ लाइफ, बताओ जीवन माने क्या, प्रेम बोलते हो रोज, बताओ प्रेम माने क्या, अच्छे से बताना, बस ऐसे नहीं कि उपरी कोई बात बोल दी, बताओ नौकरी माने क्या, बताओ शरीर माने क्य
09:47है जो आदख में में हमेता अस उबैंसे बगरे की तरह शुरू जाते यह बताओ में माने क्या पर आदत इतनी लगी हुई है
09:56मैं में आने की कभी यह कभी शक भी नहीं ही होता कि मुझे इस शब्द का मतलब तो पता ही यह मैं क्या बोले जा रहा हूं
10:04दुनिया, बताओ दुनिया माने क्या, भगवान, बताओ, आत्मा, बताओ, लिखनी रहो तुम, बहुत भरोसा है कि रिकॉर्डिंग मिल जाएगी, मेरा काम है बीच भीच में भरोसा तोड़ना,
10:34पैसा, बताओ, पैसा माने क्या, जवान आदमी हो, केरियर शब्द का बहुत इस्तिमाल करोगे, बताओ, केरियर माने क्या, पर जवान आदमी हो, तो एक और शब्द इसका बड़ा इस्तिमाल करोगे, दिल, बताओ, दिल माने क्या,
10:55कुछ पता है
11:03बताओ मृत्ति माने क्या
11:07बताओ जन्म माने क्या
11:09इस्तिमाल इतना ज्यादा करते हो
11:13pooled by familiarity
11:17इतने familiar हो गए इन शब्दों से
11:27कि मूरख बन गए
11:30पता कुछ नहीं है पर रोज इस्तिमाल कर रहा है
11:35लगता है कि जानते ही होंगे नहीं तो इतना इस्तिमाल क्यों करते
11:38तरक का शीरसासन
11:40होना यह चाहिए कि जानते हैं
11:45इसलिए इतना इस्तिमाल करते हैं
11:47पर तरक कुतरक बन जाता तरक कहता इतना इस्तिमाल करते हैं तो पता ही होगा ना
11:53इतना इस्तिमाल करते हैं तो पता ही होगा ना मतलब पता ही होगा देश माने क्या धर्म माने क्या
12:02बताओ
12:08कुछ पता है
12:11और इन शब्दों के लिए जान लेने देने को तयार हो जाते हो, जान दे दूँगा जान ले लूँगा, पैसा, प्रेम, दिल, देश, धर्म, आत्मा, बहुत लोग तो जिगर भी चलाते हैं,
12:31मतलब नहीं पता, पर इनके बारे मितने गंभीर है, ऐसे आत्मी क्या बोलोगे, जो किसी ऐसी चीज़ को लेगे बहुत गंभीर है, जिसको जानता ही नहीं,
12:43मैं चचा बैठे, इनको बोलू, हकूटा आ रहा है, और पसीना ऐसे चूरा है, अब पूछ भी ने रहे हकूटा माने क्या, हकूटा हो सकता, चूहे का नाम हो, जिसे जब ब्रेड खिलाई थी मैंने,
13:04हमें ऐसे ही जिद्धी की जीते हैं, हमें कुछ नहीं पता क्या है, लेकिन भरोसा पूरा है कि ठीक है, मतलब चली रहा है, संत माने क्या, पिर बताओ न, चूकि तुम नहीं जानते हैं संत माने क्या, इसलिए संतों को बड़ी सुविधा हो जाती है, वो कहते हैं, जानते है
13:34संत एक हफ्ते में बना सकता हूं बताओ इतना आसान है संत बनना पहला बाल बढ़ाना शुरू करो और दाड़ी बढ़ाओ दूसरा तुम 20 साल पहले ही अपना घर छोड़के निकल चुके हो
13:52पुरानी फोटो एल्बम कुछ हो खट से जला दो 20 साल से तुम नंगे पाउं विश्व भर्मन कर रहे थे
14:02फिर पैदल चले हो पैदल चलते चलते ही तुम अमेरिका पहुँचे
14:07पैदल चलते चलते ही तुम आस्ट्रेलिया पहुँचे
14:12पैदल माने यह नहीं कि प्लेन के भीतर भी पैदल चल रहे थे प्लेन जैसी नारकी यह चीज़ को तुमने कभी इस परशी नहीं कराया
14:23जोगी संत माने तो वो जो जोपड़ी में रहता है जोपड़ी में रहता हो प्लेन में थोड़ी चलेगा या प्लेन में भी जोपड़ी लेकर चलेगा यह प्लेन में भी थे लेकिन वहां भी जोपड़ी में थे
14:32जब से पहले तो यह सपष्ट होना चाहिए कि तुम बीस साल से दर दर भटक रहे थे फिर पास साथ बार तुम भगवान ने दर्शन दिया तुम बेहोश हो गए
14:43अई क्या तुम ये साधारण इंसान की तरह तुमने कपड़े पहन रखे इंसानों वाले कपड़े सब त्याग दो
14:52कुछ भी ऐसा मत करो जो इंसानों जैसा हो अभी संथ बन जाओगे
14:59बोल दो मुबाइल आज तक तुमने देखा ही नहीं बोलो
15:04बोलो मुबाइल मैंने आज तक देखा ही नहीं ये क्या है ये आधुनिक युग का कोई नार्किय यंत्र है
15:14जिसको इस्तिमाल करने से भारत की महान संस्कृते का पतन हो रहा है और क्या तुम इतना मूटा चश्मा आख पे लगा के यहां बैठ गए हो रभी तुम्हें कोई संत नहीं मानता
15:27तो हो मेरे दो में से एक भी आख नहीं है लेकिन फिर भी मुझे पूरा दिखाई देता है मेरी दो आखें है और दोनों आखें बहुत पहले खराब हो चुकी है लेकिन फिर भी मुझे बिना चश्मे के सब दिखाई देता है मैं संत हूँ
15:40मजाल कि सीखिकी कि आगे तुम्हारी आखें वह जाचें �追आ इंसानों की आखें जाची जाती हैं कि इनसानों का जाके परिक्ष्ण करा
15:53कौन पर दो
16:11को पता है कि संथ बनने के लिए क्या क्या करना एक
16:17आ कि को वह सवाल में अबूंचे तो सवार दी अबाल दीया चुका है
16:22रटे रटाए सदियों पुराने जवाब जो हैं वो दोराते रहो दोराते रहो धोके से भी कुछ ओरिजिनल मौलिक नया मत बोल देना
16:34क्योंकि लोग भी वही सुनने आये हैं जो सड़ी हुई पुरानी सब चली आ रही है बाते हैं वही कह रहे हैं दुबारा अपने मुझे बोल दो हो गए तुम संत
16:44और कोई ऐसा सवाल पूछी दे
16:51दोखे से जिसका कुछ नहीं पता तो उसको हस के बोलो बच्चे अभी तुम्हें वक्त लगेगा हमारे मौन को समझने में
17:04हुए और फिर आखे तरेर करके सब अपने चेले चपाटू की और देखो कि तुमने ऐसा ये धृष्ट व्यक्ति घुसने क्यों दिया जिसने ताजा सवाल पूछ लिया ऐसे हो कोई भेजा करो जिस अब सड़े गले सवाल पूछे
17:19बन जाओगे संत मस्त कैरियर है बनना है कंसल्टिंग मैं कर दूँगा एक एक दाव पेज से वाकिफ हूँ
17:29बस यह समझ लो कि करना है कि नहीं करना है सवाल होना चाहिए आपको सब पता है कि कैसे होता है
17:41तो आप काई नहीं बन गए क्योंकि सब जानता हूँ
17:48इसलिए कभी वो सब करूँगा नहीं
17:51बस उन पर दया आती है जो इन टोटकों में फस जाते हैं
18:00फसने वारे करोडों में
18:13सत्य निर्विशेश होता है जिसको लक्षण देखके ही पहचान लिया जाए वो
18:18ना सत्य है ना आदमी सच्चा है जो लक्षण पदर्शित करता घूमता हो वो आदमी जूटा है लाउद्जू से आगे पूछो
18:26वो कहते हैं जूट की पहचान यह है कि उसके पास सच के सारे लक्षण होते हैं
18:36होते हैं और सच की पहचान यह है कि उसके पास कोई लक्षण होता ही नहीं कोई चिहन नहीं होता उसका कोई
18:46पहचान नहीं होती किसी तरीके से तुम इशारा करके नहीं बोल सकते कि यह बाहर से ऐसा दिख रहा है इसलिए सकते हैं निर्विशेश होता है सकते
18:56और जूट चुकि वो जूट है इसलिए वो सच के सारे लक्षण धारण करके रखता है और लोग भी ऐसे हैं जिनकी नजर गहरा देख नहीं सकती
19:11तो लक्षणों को देखते हैं और प्रभावित हो जाते हैं
19:19कितना तो ठगा गया है भारत
19:21जो हजार सालों की गुलामी रही यूँ ही थोड़ी रही
19:27बाहर वालों ने हमें बाद में गुलाम बनाया पहले तो हमारे भीतर वालों नहीं हमें गुलाम बनाया है
19:35भारत की अवनति में बड़े से बड़ा रोल रहा है भारत के धर्म गुरुवों का
19:46जो ठगा है इन्होंने कोई सीमा नहीं
19:51आशर तो मुझे ये होता है कि इतने सुर्ख स्याह काले आकाश पर कुछ टिम्टिमाटते तारे शेश कैसे रह गए
20:05और जो शेश रह गए उन बेचारों को भी बड़ा दुख रहा है
20:16जो सचमुच ग्यानी थे जो सचमुच राम के अनन्य प्रेमी थे उन्होंने गाया माला तिलक पहनी मन माना लोगन राम खिलोना जाना
20:28उनके समय में भी यह हो रहा था
20:31आज से 700 साल पहले तब भी यह चल रहा था कि कोई भी माला तिलक धारण करके अपने आपको घोशित कर रहा था कि मैं तो राम का भक्त हूँ और मैं संथ हूँ
20:40वो सब राम भक्त बने हुए थे वो सब संथ थे उनके लिए क्या कह रहे हैं संथिरो मनी माला तिलक पहनी मनमाना लोगन राम खिलोना जाना
20:59और जो सच्चा संथ है उसको क्या बोल रहे है पागल है विक्षिप्त है लोग कहें कबीर बौरा ना कबीर का मरम राम जाना जो असली संथ है उनको बोलते थे बौरा है जो मैं बौरा तो राम तोरा लोग मरम न जाने मौरा
21:18यह दुनिया को उनका उत्तर था कि हां तुम सब मुझे पागल बोलते हो न तो मैं बोरा हूँ भी तो राम में तेरा बोरा हूँ
21:27मैं बोरी मेरे राम भतार का कारण रची रखे हो शिंगार
21:33जो सच्चा होता है उसको तो पागली कहा जाता है पागल है विक्षिप्थ है नकली है अडंबरी है कुछ बोलो जितने नकली होते हैं वो संथ कहलाते है थोड़ी भक्ति बहुत हंकारा
21:52ऐसे भगत मिले अपारा थोड़ी सी भक्ति हंकार इतना बड़ा
22:03मत्वनोसंत, इंसान बन जाओ पहले इतना काफी है, हम इंसान भी नहीं हैं, हम जानवर हैं,
22:12मनुष्य के लिए बड़ी से बड़ी उपलब्धी यही हो सकती है कि वो मनुष्य बन जाए,
22:16और जो मनुष्य से उपर कुछ बनने का प्रयास करते हैं, वो बस पाखंडी और आडम्बरी हो जाते हैं,
22:31पूरब में जब कोई बहुत उड़ने लगता है न, तो उसको बोलते हैं मनई धारण रहा,
22:36जब कोई बहुत एक्स्ट्रावेगेंट बिहेवियर दिखाने लगता है, तो उसको बोला जाता है मनई धारण रहा,
22:55जब रिशिकेश में विदेशी लोगों से मिलने की शुरुवात हुई थी,
23:11तब मैंने कहा था, और वो इन लोगों ने ले करके उसको तमाम जगह पे उसको छपवा के लगवा दिया था,
23:19WHATEB been THE need, делать NLightEN so much lunch be human first,
23:29वो सब विदेशी वह राए थे, अनलाइटनमेंट की तलाश में, मैंने बहूआ कहा है अनलाइटनमेंट की ज़रूवत ही नहीं, को मिइशन
23:30सब विदेशी वहाँ पर आये थे enlightenment की तलाश में मैंने का enlightenment की कोई ज़रूरत ही नहीं तुम इंसान बन जाओ इतने महीं मुक्ति हो जाएगी तुमारी तुम इंसान भी नहीं हो
23:38जानवर ज्यानी होने का ढोंग कर रहा है जानवर भक्त होने का ढोंग कर रहा है और कई-कई जानवर तो समाधिस्त होने का भी ढोंग कर रहे हैं तुम इंसान बन जाओ पर्याप्त है
23:51कोई लक्षण ना दिखाए पारंपरिक रूप से संताई के तुम्हें बड़ी दिक्कत हो जाएगी तुम पहचानी नहीं पाओगे उसको सोचो
24:03और जो असली संत हुए उन्होंने कोई पारंपरिक लक्षण दिखाया नहीं
24:11संत्रविदास बैठे हुए आराम से वो जूतों पर काम कर रहे हैं बताओ कौन सा लक्षण दिखा रहे हैं वो कोई लक्षण नहीं संत्कभीर बैठे हुए है कपड़े पर काम कर रहे हैं कोई लक्षण कुछ नहीं
24:25जण भरत हैं वो इतने साधारण सरल उनको एक राजा ने पकड़ा देखा रास्ते में ऐसी बैठा वो कुछ नहीं कर रहा बोले आओ जरा हमारी सेवा गरो हमारी पालकी जा रही है तुम भी हाथ दो
24:46वो आ गए बोले हाँ ठीक है वो थोड़ी दिख रहे थे कि जबरदस्त तरीके से एक सा माला तिलक और विशेश परिधान धारण करके एक संत वहां बैठा हुआ है कुछ नहीं
24:59और उसी राजा को फिर उन्होंने चलते चलते सरल भाशा में कुछ ज्यान नसीहत भी दे दी
25:16वह अपने संतों वाले जो बिलकुल यह प्रकट लक्षण है उनको छोड़के तुम्हारे सामने आ जाएं तो तुम्हें वह संत लगेंगे भी
25:24जिनको तुम बोलो कि तो बड़ा संत है बड़ा संत है सोचो वह अपना जटा जूट और दाढ़ी और अड़ी सब कटा ले
25:33कि साधारन शर्ट पेंट पहन ले इंसानों जैसी भाशा में बात करने लगे
25:38तो उसमें कुछ बचेगा क्या संत जैसा तो इसलिए वो न तो कभी इंसानों जैसा बरताव करेंगे ना इंसानों जैसा परिधान पहनेंगे ना इंसानों सी भाशा बोलेंगे क्योंकि संत ही के नाम पे उनके पास बस यही है परिधान आवरण आचरण भाशा यही है संत ह
26:08पूछा था कि संत्माने क्या, जो कुछ भी बाहरी है, सत्य ही है, प्रकट है, द्रिश्टव्य है, उसको हटा दो, तो बताओ फिर संत्माने क्या,
26:22उसको हटा दो तो फिर संत्वत्त में असली जो बात बचती है, वो तो यही है, सत्य के प्रति अगाध प्रेम,
26:28अर उस प्रेम को तो वही पैचान पाएग़ जो स्वेम प्रेक्मी हो
26:34जो स्वेम प्रेक्मी नहीं है उसको तो बस ठगा जाता है भारत खूप ठगा जाता रहा है
26:46फिर है तयारी आरहे हैं मेरे? साथ दिन के क्रैश कोरस में
26:54मैं तो फीस लूँगा, मैं संद तो हूँ नहीं, बताओ
27:01कर लो भाई इंसे संपर्ड डोनेशन हो गया रहा है, मूटी निकलवा लेना
27:15पशु पैदा हुए हो, इंसान हो जाओ, परियाप्त
27:45कर दो हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हुए हु
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