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00:00कुए का मेढख था परिशान हो गया उप गया कुए से तो जब इतना सा था जरासा तो उसके लिए कुए बहुत बड़ी चीज थी फिर बड़ा हो गया अब कह रहा है कि यहीं पड़े रहेंगे क्या और फिर यहां खाने पीने की भी विवस्था सीमित है चिडिया दिख गई
00:30कुए से बड़ा कुछ हो सकता है तो गरया बोली तुम मूर्खी रहोगे नदी तो में समझ भी नहीं आ रही है मुश्किल से पचास मील दूर हां से समुदर भी है मेंढख एक नशा चा गया जाके कोबरा गोड़का आया खबरदार कुछ किया तो तो पता है समुन दर रह �
01:00मीड़क ने बोला कुओं देखरो कुओं बोले ऐसे समझ लोग एसे पांच चुओं है उसे समुदर बोलता हां बात कर ली कुऊं को समुदर बनाने के कुऊं तो समुदर बन जाए और में अक मा रगया है यह समया है कल्पना के साथ कल्पना बड़ी हो जाती है कल्पना आ residence
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