00:00बुरुस्तोत्रम
00:30विश्वकरताच विश्वयो निरयो निजह भूर्भुव सुवरोंचैव भर्ताचैव महाबलह पंचविंशती नामानी कुण्यानी नियतात्मना वसतानन्द भवने विश्णूना किर्तितानिवै यह पठेत प्रातरुद्थाय प्रयतह सुसमाहिताचैव।
01:00विपरीतोपी भगवान प्रीतोभवती वै गुरुह। यच्रनोति गुरुस्तोत्रम चिरम जीविन्य संचयह। रस्पती कृतापीडा नकदाचित्भविश्यती।
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