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00:00:00मेरा बेटा 21 साल का हैसा है, उसे सिगरेट और विखा का एडिक्शन है
00:00:04और मैंने काउंसलिंग से, प्यार से, परिवार से, रिहाबिलिटेशन से कोशिश की पर असफल रही हूँ
00:00:14और हम चाह रही है कि बेटा, ये जो नशे की हालत इसको छोड़ करके साधारन होश की हालत में आ जाए
00:00:19यही हम चाह रहे हैं, हमारा बेटा भी वैसा ही हो जाए, जैसे सब लोग है दुनिया के
00:00:24नॉर्मल, नॉर्मल काइंड ओफ कॉंशियसनेस, उसको हम कहते हैं होश
00:00:29पर ये जो साधारन होश है, ये इतनी ही प्यारी और आनंदप्रद इस्थिति होती
00:00:34तो इतने सारे लोग नशा करके हो रहे होते हैं, अगर हमारे होश की इस्थिति वाकई बहुत अच्छी है, लाबदायक है
00:00:41तो कोई नश्य में वापस जाएगा, क्यों जाएगा? ये जो पैसे के अंधादुन दोड़ है, प्लेस्मेंट, प्लेस्मेंट ये नशा कैसे नहीं है, बताओ न, मा बच्चों के पीछे लगी हुई है, सिटल कब होगा, सिटल कब होगा, तेरी तो जॉब भी लग गई है,
00:01:11किसी तरीके के मकसद की, किसी तरह के उचाई की बात करते हैं, और जवानी उचाई मांगती है, उस नशे से अगर बचना है, तो एक ही तरीका है.
00:01:20नमस्ते आचारा जी, मेरा नाम है, मेरे बेटे को लेकर, मेरा बेटा 21 साल का है सर, उसे सिग्रेट और मुआ का एडिक्शन है, और मैंने काउंस्लिंग से, प्यार से, परिवार से, रिहाबिलिटेशन से,
00:01:47सब कोशिश की पर असफल रही हूं, और इसके कारण, वो हर बार मैनुपलेट कर जाता है, मैं उसमें आ जाती हूं, बस यही गाइडिस चीए, मैं इसकी लट कैसे छुड़ा हूं, उसे सही रास्ते पर कैसे लेकर के आऊं।
00:02:06देखें, आप कहा रही है, बेटे को नशे की लट लगी हूई है, बेटे को नशे की लट लगी हूई है, लट छुड़वानी है, नशा छुड़वाना है, बैठें।
00:02:22आपके सवाल में एक मानने ताई के जम्शन है, कि दो स्थितियां होती है, और दो ही स्थितियां होती है, जिनमें से एक स्थिति दूसरे से बहतर है, और एक स्थिति तो वो है जिसमें बेटा अक्सर चला जाता है, नशे की स्थिति, और दूसरी स्थिति वो है जिसे हम आम
00:02:52इसको हम होश बोल देते हैं, यही न, जैसे हम लोग यहां सब बैठे हुए हैं, तो हम कहेंगे हम होश में बैठे हुए हैं, हम कहेंगे हम यहां पर सब बैठे हुए हैं, तो हम थोड़ी कोई नशागर रखा है, तो हम सब होश में हैं, सड़क पर बाहर आप जाएंगे, लो�
00:03:22की स्थिति में ठीक है साथ चल रहे हैं हम चाहते हैं कि नशे की स्थिति में न रहे हम होश की स्थिति में आ जा और होश की स्थिति की हमारी परिभाशा है जिस स्थिति में आम आदमी की चेतना आम तोर पर रहती है वो होश है उसे हम होश कहते हैं उसे हम होश कहते हैं और उस
00:03:52भर में इतनी
00:03:54बड़ी समस्या है ये नशा
00:03:56हर तरीके से समस्या है
00:04:01अर्थ शास्त्री
00:04:04बोलते हैं इससे GDP का नुकसान होता है
00:04:06समाज शास्त्री बोलते हैं इससे
00:04:08समाज में दरार पड़ती है
00:04:09परिवार खराब होते हैं
00:04:12सड़कों पर दूर घटनाएं होती हैं
00:04:15जितने तरीके के नुकसान गिनाई जा सकते हैं, गिनाई जा सकते हैं, गिनाई दीजिए, लेकिन फिर भी, बहुत बहुत सारे लोग हैं, जो साधारन होश की अपेक्छा नशे को बहतर मानते हैं, क्यूं?
00:04:36और हम चाह रहे हैं, कि बेटा, यह जो नशे की हालत है, इसको छोड़ करके साधारन होश की हालत में आ जाए, यही हम चाह रहे हैं, यही चाह रहे हैं, हमारा बेटा भी वैसा ही हो जाए, जैसे सब लोग हैं दुनिया के, नॉर्मल, नॉर्मल काइंड ओफ कॉंशियसनेस, उ
00:05:06सारे लोग नशा करके हो रहे होते हैं, क्योंकि कोई भी अपने आपको जानते बूचते दुख नहीं देना चाहता, मनुष्य आनंद धर्मा है, सब जीव भी सुख ही चाहते हैं, यहां तक कि पेड़ पौधे भी, अब हम जानते हैं बहुत अच्छे से, कि आप उनकी और �
00:05:36और अगर साधारन होश की स्थिति, बहुत अच्छे है इस्थिति है, तो इतने लोग फिर नशा करते हैं, क्योंकि जिसको हम साधारन होश बोलते हैं उसमें ही खोट है, जिसको हम साधारन होश बोलते हैं, और वो जो होश है, सबसोश, consciousness की साधारन इस्थिति, वो निर्मा
00:06:06धर्म आ जाता है, अर्थवस्ता आ जाती है, संस्कार आ जाती है, सब आ जाता है, वो सब जब मिलते जुलते हैं, तो उसे परिभाशित हो जाता है, कि साधारन होश माने क्या, और यो साधारन होश की हालत है, बहुत अच्छी होती नहीं है, और इसलिए जब आप नशे से किस
00:06:36लग गई है लेकिन मैं तो एक बहुत सधारन मासूम से सवाल पूछ रहा हूं अगर हमारे होश की स्थिति वाकई बहुत अच्छी है लाबदायक है तो कोई नश्य में वापस जाएगा क्यों क्यों जाएगा कोई भी अच्छी चीज को छोड़ करके गड़बर हालत में जाना
00:07:06जिसको हम कहते हैं normal consciousness वो एक बनाई हुई चीज है वो एक construct है जिसको अर्थ हस्था ने बनाया है जिसको तमाम तरिक विचारधाराओं ने बनाया है जिसको लोकधर्म ने बनाया है और आपसे कहा जाता है कि ये सब चीजे हैं और तुम इनको मानोगे तो तुम होश्मंद क
00:07:36अगर वो बिल्कुल बुझी राख जैसी हो जिसके नीचे थोड़ी बहुत जो आग है वो भी दब जाती है समाप्त हो जाती है तो
00:07:48क्योंकि आम तोर पर नशे की शुरुआत जवानी में होती है और जवानी दहकना चाहती है और आपने जिसको कहा है होश्मंद होना उसमें दहकने के लिए कोई जगा है नहीं
00:08:01आप चाहते हो वो आग होने से पहले राख हो जाए
00:08:09और वो राख ना होना चाहे तो अब उसे कोई
00:08:11बहुत उच्छा अच्छा तरीका तो मिल नहीं रहा है
00:08:15जीवन दर्शन उसने जाना नहीं है
00:08:19विश्व का उत्कृष्ट बोथ साहित उसने पढ़ा नहीं है
00:08:22पर उसको ये दिखाई दे रहा है कि दुनिया परिवार समाज मुझसे जो कराना चाहते है
00:08:26मैं वैसा नहीं रहना चाहता
00:08:28ये एक तरीके से चाहते हैं कि मैं सोचूँ
00:08:33मैं वैसे नहीं सोचना चाहता
00:08:34तो ले दे करके वो एक रास्ता चुन लेता है
00:08:41एसा रास्ता जो बहुत गलत बहुत खतरनाक भी हो सकता है पर मरता क्याना करता वो यही रास्ता चुन लेता है वो रास्ता नशे का
00:08:53जो हमारी साधारण स्थित्य है खोश की चेतना की consciousness की
00:08:58अगर वो वाकई बहुत आकरशक होती तो कोई नशे की और नहीं जाता पहले हम यह देखना होगा न कि हमने हमने अपनी दुनिया रची कैसी है एक नए बच्चे के लिए जो कुछ सालों में युवा हो जाता है कोई कोई बच्चा नशा करता हो तो नहीं पैदा होता कि पैद
00:09:28मैं बेहोश होना पसंद करूँगा आपने आपने की बात करी आपको मालूमें पहले उसका इस्तिमाल किसलिए होता था वो एक पैन किलर के तौर पर इस्तिमाल की जाती थी कुछ समझ में आ रही है बात जब सरजरी करनी होती थी और एनस्थीजिया वगरा बहुत विक्सित
00:09:58यह मनें समाज बना कैसा रखाए इसमें एक जवान आदमी करे क्या वो चमकना चाहता है वो उठना चाहता है वो बढ़ना चाहता है और हम उसको देते हैं दमन
00:10:12हम उसको देते हैं दमन
00:10:14तो फिर अलग अलग तरीके के नशे सुईकार किये जाते हैं
00:10:27और जो लोग मादक द्रव्यों का नशा कर लेते हैं उनको तो हम कह देते हैं नशेडी
00:10:33पर जो दूसरे तरीके के नशे कर लेते हैं वो अपने आपको इज़दारी बोलते रहते हैं
00:10:39नशेडी सब है, उनको ये लगता रहता है, हम थोड़ी नशा करते हैं, ये जो पैसे के अंधा दुन दोड़ है, प्लेस्मेंट, प्लेस्मेंट ये नशा कैसे नहीं है, बताओ न,
00:10:48माँ बच्चों के पीछे लगी हुई है, सेटल कब होगा, सेटल कब होगा, तेरी तो जौब भी लग गई है, नशा कैसे नहीं है, माँ गो नशेडी क्यों न बोलें,
00:11:05और एक बार उसने शादी कर ली तो उसके पीछे लगी हुई है, अब बच्चा, बच्चा, बच्चा, भाई कोई बहकी बहकी बात करें तो यहीं तो कहते हो, नशे में हैं, ये सब बहकी बहकी बातें नहीं हैं क्या,
00:11:26आपने जो समाज बनाया है, उसमें आपके सब आदर्श, नेता, ये आपको क्या होश मंद लग रहे हैं, पर इन्हें ही हम होश वाला मानते हैं और कहते हैं, ऐसा ही बनो क्योंकि ये होश वाले लोग हैं, और उनसे ज्यादा बहोश कोई होता नहीं,
00:11:41आप election manifesto पढ़िये, चुनाव आता है election manifesto रहते हैं, किसी election manifesto में climate change का नाम नहीं है, और हम कहते हैं ये बड़े बड़े नेता हैं, उन्हीं में से सब आपके विधायक बनेंगे, सांसत बनेंगे, फिर मंतरी बनेंगे, मुख्य मंतरी बनेंगे, प्रधान मंतरी बनेंगे, �
00:12:11इतनी गड़बर कि उससे बचने के लिए हर आदमी कोई न कोई नशा करता है, उस नशे से अगर बचना है तो एक ही तरीका है, यह जो साधारन होश है, इसको ही बदल डालो, इसको ही बदल डालो, नहीं तो जिन्दगी जीने के लिए आपको कोई न कोई खुराफात पालन
00:12:41कुछ सीख रहे हो, किसी का कल्यान कर रहे हो, जहां जा रहे हो, प्रेम बरसा रहे हो, न कुछ सीख रहे हो, न जहां जा रहे हो, वहां की लोगों कोई लाफ दे रहे हो, तो तुम यह कर क्या रहे हो, यह भी एक तरह का नशा है,
00:12:53कोई कहता है एक के बाद एक फैक्ट्रीज डालूँगा कोई सीरिव अंत्रिप्रिनर बन जाता है क्यों कर रहे हो ये सब कुछ
00:13:03वो ये सब कुछ इसलिए कर रहा है ताकि जिसको हम आम जिंदगी कहते हैं उससे बच सके
00:13:10तो ये आम जिंदगी हमने इतनी घटिया चीज बनाई ही क्यों है कि इससे बचना पड़े बार बार
00:13:15बोलो तो ये जो फिल्में देखने भागते हो ये जो endless scrolling करते हो
00:13:22ये नशा नहीं है क्या और ये नशा क्यों करते हो क्योंकि आप बोलते हो कि real life is better than real life
00:13:28तो real life हमारी इतनी बेकार है ही क्योंकि हमें real life में घुसना पड़ता है
00:13:34अगर हम दुनिया ऐसी कर पाएं जहां एक जवान आदमी को अपनी उर्जा को सही जगह लगाने का भरपूर मौका मिले
00:13:49उसे जीवन के साथ प्रयोग करने की छूट मिले
00:13:54तो उसके पास समय ही नहीं होगा उर्जा ही नहीं होगी कि वो फाल्तू जा करके शराब और बाकी तरह के नशे करें
00:14:02उसे जरूरत ही नहीं लगेगी
00:14:04पर जब आप उसको बांध दो गए है रोक दो गए है
00:14:08तो बिलकुल हो सकता है कि वो परिवार का दिल रखने के लिए शराब का नशा न करें पर फिर वो कोई और नशा कर लेगा
00:14:15और जो वो कोई दूसरा नशा करता है तो आप बोलते हो मेरा बेटा बड़ा इजददार है
00:14:19हम भी इजददार है हमारे घराने का है ना हमारे घराने का है किसी किसी को तो इजदद का ही नशा होता है
00:14:28उनको बड़ा अच्छा लगता है जहां जा रहे हुआ सब जब जब जब दी इजदद मिल रही है
00:14:33किसी किसी को अपने ख्यालों का अपने विचारों अपनी मानेताओं का नशा होता है
00:14:42उसको लगता है कि उसके बाद assumptions नहीं है, truth है
00:14:44और उनके truth पर जरा सी चोट पड़े तो तिल मिला उचते हैं
00:14:49यह नशड़ी की निशानी है
00:14:53कि जरा सी चोट पड़ी नहीं कि तिल मिला गए
00:14:56बात समझ रहे हो
00:15:01जिन्दगी साफ सुथरी अगर जी जाए
00:15:10तो फिर उसमें किसी प्रकार की अतिरिक्त उत्तेजना की जरूरत नहीं पड़ती है
00:15:17नशा क्या होता है
00:15:19कि जिन्दगी परियाप्त नहीं है
00:15:24मुझे कुछ और चाहिए
00:15:26जिन्दगी परियाप्त नहीं है तो ऐसी जिन्दगी तुमने जीने का फैसला क्यों किया
00:15:32अब जब हम कहते हैं हमें उत्तेजना चाहिए
00:15:36तो उत्यजना के लिए शब्द क्या होता है इंग्रेजी में थ्रिल and adventure रइट?
00:15:41रोमांच, उत्यजना हमें चाहिए
00:15:43और कितने लोग हैं जो थ्रिल और adventure के लिए जाते हैं
00:15:48पहाड़ों पर कोई चड़ रहा है कोई किया रहा है मैंने फलाना risk उठाया
00:15:51मैं ये कर रहा हूँ, मैंने खतरनाक ट्रेक करी, मैंने ऐसी हाइकिंग करी,
00:15:56तुम्हें अतिरिक्त खत्रे क्यों उठाने पड़ रहे हैं।
00:16:00तुमारी जिन्दगी ये ऐसी क्यों नहीं है, कि उसमें कदम कदम पर खत्रा हो,
00:16:03क्योंगी तुम जूट को चुनौती दे रहे हो
00:16:04और जो जूट को और बंधनों को चुनौती देता है
00:16:08उसे अतिरिक्त खत्रे नहीं उठाने पड़ते
00:16:10उसकी जिन्दगी अपने आप में खत्रा बन जाती है
00:16:12बहुत थ्रिलिंग, बहुत एडविंचरस हो जाती है
00:16:14पर जिन्दगी तो हम सिखाते हैं अपने बच्चों को
00:16:19कि रूई के फाहे में सुरक्षित होकर जीना
00:16:21और जब एक जवान आदमी को तुम कॉटन वूल में लपेट करके जीना सिखाते हो
00:16:27तो फिर कहां से उसके पास रोमांच होगा
00:16:33और जवानी तो रोमांच मांगती है, खत्रा मांगती है
00:16:35तो फिर कहेगा चलो यही रोमांच कर लेते हैं
00:16:38एक नई ड्रग बाजार में आईए उसको ट्राइ करते हैं
00:16:41जिसको जीने के लिए सही मकसद मिल गया
00:16:49वो क्यों कोई नशा करेगा
00:16:51जिसको जीने के लिए उच्चतम मिल गया
00:16:57वो क्यों किसी ओर दिशा में जाकर अपना एक पल भी खराब करेगा
00:17:02पर हमारे पास ना मकसद ना उच्चतम, ना हमारा परिवार, ना हमारी शिक्षा
00:17:07किसी तरीके के मकसद की, किसी तरह के उचाई की बात करते हैं
00:17:11और जवानी उचाई मांगती है, क्योंकि आप बच्चे नहीं हैं, आप अपने आप से सवाल करते हो, मैं पैदा किसलिए हो हूँ, मुझे करना क्या है, और उसका जब कोई जवाब नहीं मिलता,
00:17:20तो आप इन सवालों से, अनुत्तरित अपने प्रशनों से घवरा करके कहते हो, नहीं, मन से इन बातों को हटाओ, उसके लिए फिर किसी ने आगर गया, आपको एक पुड़िया थमा दी, आप उस रास्ते पर निकल पड़े बहग गए,
00:17:37नशे की समस्या का सस्ता समधान ये है कि मादक दरवेओं के आप उर्ते बंद कर दीजे, जो कि होनी चाहिए, बॉर्डर सील कर दीजे, जो कि होना चाहिए, विजलेंस, लॉयन ओर्डर, एंफोर्समेंट, ये सब तगड़े हों, जो कि बिलकुल होने चाहिए, जो पकड़
00:18:07समाधान है, ये सतही समाधान है, असली समाधान तो तभी मिलेगा, जब किसी जवान आदमी को समाज से भाग करके अपने लिए एक काल्पनिक कॉंशियसनस रचने की जरूरत ही नहीं रहेगी, जो आप नशे में होते हों न तो आप एक अपना अलग काल्पनिक जगत रचल
00:18:37इसमें आप कुछ ढंग का कर नहीं पा रहे होते हो
00:18:41तो आप कहते हो चलो घंटे दो घंटे के लिए ही सही
00:18:44पर हमें दूसरी दुनिया तो मिल गई
00:18:46दूसरी दुनिया की जरूरत पड़े ही क्यों
00:18:49ये जो हमारी दुनिया है
00:18:51हम इसी को ऐसा क्यों नहीं बना सकते
00:18:53किसी को दूसरी किसी दुनिया में
00:18:55नशे की दुनिया में भागना ही न पड़े
00:18:57हम उच्छतम की बात कर रहे थे
00:19:04संतों रिशियों ने
00:19:05मालूम है क्या क्या है नशे को लेकर
00:19:07उनको कोई
00:19:09उनको किसी नशे की जरूत नहीं हो गयते है
00:19:11में राम खुमारी चड़ी हुई है
00:19:13तो राम का नशा
00:19:15माने उच्चतम की बात
00:19:17किसी छोटी चीज से
00:19:22खुद को बांध होगे
00:19:23तो कितना भी खुद को समझा लो
00:19:25उपर उपर मान जाओगे
00:19:27भीतर कुछ बैठा है जो छुटपन से
00:19:29खुद्रता से कभी राजी होता
00:19:31नहीं है और जब वो राजी नहीं होगा
00:19:33तो किसी ने किसी तरह की खुराफात
00:19:35करेगा कोई ने कोई
00:19:37वो अपने लिए नशा ढूंड लेगा
00:19:38पर हम सब बहुत होशियार
00:19:43लोग हैं जैसा हमने कहा
00:19:45कि दौलत का नशा हो
00:19:47शोहरत का नशा हो
00:19:49पचास और तरीके
00:19:51के नशे हो उनको हम नशा मानते ही नहीं
00:19:53उनको
00:19:55हम नशा मान लें तो ये पोल खुल जाएगी
00:19:58कि हमारा जीवन
00:19:59हमारा समाज बड़ा गड़बड चल रहा है
00:20:02क्योंकि अगर ये खुल गया
00:20:03कि भाई किसी जगह में किसी शहर में किसी देश में किसी प्रांत में
00:20:0795% लोग नशेडी हैं
00:20:10तो फिर तो विद्वन्स हो जाएगा न
00:20:12तो हम ये नहीं मानना चाहते हैं
00:20:15कि वास्ताव में नशा तो 95% कर रहे हैं
00:20:17हम अपने आपको सांतों ना दे लेते हैं
00:20:19ये बोल करके कि सिर्फ 5% नशेड़ी हैं
00:20:22बाकी सब ठीक हैं
00:20:23बाकी कोई नशा नहीं करते
00:20:24सिर्फ 5% नशेड़ी है
00:20:28संत कबीर कहते हैं
00:20:35जो सरसे ना उतरे माया कहिए सोए
00:20:38जिसके दिमाग में
00:20:40अगर कोई चीज चड़के बैठ रही है
00:20:42उसको भी माया ही मानो
00:20:43और यहां कोई नहीं बैठा ऐसा
00:20:47जिसका दिमाग खाली हो
00:20:49सबके दिमाग में कुछ तरह कुछ कीड़ा लगाई हुआ है
00:20:52किसी को ये खुराफाद चल रही है
00:20:55भाई को नीचा कैसे दिखाऊं
00:20:57किसी को ये चल रहा है फलानी शादी आ रही है
00:20:59वहाँ देवरानी से ज़्यादा आकरशक कैसे दिखूं
00:21:01ये सब नशे नहीं है क्या
00:21:03भाई नशे की क्या निशानी होती है
00:21:12दिमाग बिलकुल क्या बोलतु है
00:21:15आउट हो गया
00:21:16और जिसके दिमाग में उटपटांग चल ही रही है
00:21:19चल ही रही है
00:21:20उसका दिमाग आउट नहीं हुआ है क्या
00:21:23भले ही उसने
00:21:24या कोई और मैशान न करा हो
00:21:27बोलिए
00:21:30ओफिस पॉलिटिक्स में किस तरीके से
00:21:34मैं गुपता हूँ खन्ना का पत्ता कैसे काटना है
00:21:36और वो दिन रात इसी खुरपेंच में लगा हुआ है
00:21:40कि खन्ना का पत्ता कैसे काट दूँ
00:21:44और ग्यानियों ने हमसे कहा है
00:21:48माया माया सब कहें
00:21:50माया लखे न कोई
00:21:51जो सर से न उतरे
00:21:52माया कहिए सोए
00:21:53दिमाग में बहुत कोई छोटी
00:21:55पेटी शुद्र चीज लगातार चल रही है
00:21:58वो नशा कैसे नहीं है
00:21:59हाँ
00:22:01वो नशा ऐसा नहीं है
00:22:02जो रोड एक्सिडेंट करा दे
00:22:04वो नशा ऐसा भी नहीं है
00:22:06जो आप ही किड्नी खराब कर देगा
00:22:08या कि आपका दिमाग खराब कर देगा
00:22:11वो नशा ऐसा नहीं
00:22:12पर नशा तो है
00:22:13भले ही वो आपको शारीरिक रूप से बहुत शती नहीं देता पर नशा तो है और ये कहना भी पूरी तरह ठीक नहीं कि शारीरिक रूप से शती नहीं देता
00:22:20दिमाग में उल्टी पुल्टी धारणाय कलपनाय अंध विश्वास बनाके जो हम चलते रहते हैं उससे उल्टी पुल्टी चिंताएं भी तो होती है और जो चिंताएं होती है वही फिर क्या रक्तचाप और मुदमे का कारण नहीं बनती तो शरीर हर तरह के नशे से खराब हो
00:22:50कब निकलने वाला है UPSC का रिजल्ट वहां के लड़कों को जाकर के मैं कैसे फसाऊंगा यह क्या करना है और यह से आप कर रहे हैं आपका BP बढ़ता जा रहा है बढ़ता जा रहा है हम क्यों नमाने कि अभी आप बैठके नशा ही कर रहे हो बस बोतल दिखाई नहीं दे रह
00:23:20उसको Rehabilitation के द्वारा अपनी साधारण होश की दुनिया में वापस ला सकते हैं पर बहुत संभावना होगी कि वह दुबारा जागर के किसी मादक पदार्थ का सेवन शुरू कर देगा आप अगर देखेंगे आखड़े तो ज्यादा तर यह होता है तो फिर इसी लिए Rehabil
00:23:50आठ महीने साल भर Rehabilitation चल रहा है उनका और उसमें फिर पैसा भी खूब देते हैं जिन्दगी को ही एक जबरदस्त रोमांच बना लो यह सब छोटे-मोटे नशे भूल जाओगे याद ही नहीं रहेगा याद ही नहीं रहेगा
00:24:09एक सज्जन आये थे मेरे पास उनकी सिग्रेट नहीं चूट रही थी
00:24:19तो बुले आपको सुनने से चूट गई मैंने का पर मैंने तो इस किस्म का कभी कोई लेक्चर उपदेश दिया ही नहीं
00:24:32आम तोर पर ये सब बातें ना मुझसे किसी ने पुछी हैं ना मैंने करी हैं कि सिग्रेट कैसे छोड़नी है तो आपकी सिग्रेट छूट कैसे गई
00:24:40बोले नहीं आपके कहने से नहीं छूटी है आपने कहा उससे नहीं छूटी है आपको सुनने से छूटी है
00:24:48मैंने का मतलब
00:24:50मैं दिन का डब्बा खाली कर देता था
00:24:52मैं भूले उपाय क्या निकाला
00:24:54भूले अभी मैं दिन में कई कई
00:24:56घंटे बैठ करके आपको सुन रहा होता हूं
00:24:59और जब सुन रहा हूं
00:25:00तो सिगरेट फूखने का ख्याली नहीं आता
00:25:02बोले ये जितने घंटे आपको सुन रहा होता हूं
00:25:08उसमें कहीं भी आप सिगरेट और छोड़ने की बात नहीं कर रहे है
00:25:11आपने शब्दों में बिल्कुल नहीं का सिगरेट छोड़ दो
00:25:14पर जब आपको सुन रहा होता हूं तो सिगरेट छूट जाती है
00:25:17उसक्त खाली नहीं आता
00:25:19और जो आपने कहा अगरो मैंने उसको ध्यान से सुना है
00:25:22तो मन कुछ ऐसा हो जाता है कि उसके बाद ये सब लगता ही नहीं कि डबबा खोलो फूको
00:25:27ये सब लगता ही नहीं
00:25:28मैं का अच्छा ठीक है आप सुनते रहिएगा
00:25:32तो मुझमें आ रही है बात
00:25:37ये सब खुराफाते हैं
00:25:39और ये जीवन में तभी प्रवेश करती हैं जब जीवन में खाली स्थान होता है
00:25:45जिन्दगी में खाली जगा छोड़ी क्यों रहे हो छोटी फी तो जिन्दगी है
00:25:48उसको पूरे तरीके से सही काम में आहूत कर दो
00:25:56जैसे ये ग्यमें आहूती दी जाती है
00:25:58मैं कहता हूँ ऐसे जलो जैसे कोई मुंबत्ती हो
00:26:02और दोनों सिरों से जल रही हो
00:26:04अब उसके बास बैठके कोई फाल्तू काम करने की कहा जगा है
00:26:10वो दोनों सिरों से जल रही उसे प्रकाश से इतना प्यार है
00:26:13वो गहरी मेरी जिन्दगी जल्दी खत्म हो जाएगी कोई बात नहीं
00:26:15पर रोशनी होनी चाहिए
00:26:16अब तुम थोड़ी कहोगे कि काम धंदा बंद करो
00:26:25अब दो घंटे यारों के साथ बोतल खोलने का समय आ गया है
00:26:29तुम्हारा काम ही तुम्हारा यार है बोतल औगयरा सब छूट जाती है
00:26:35क्या करना है
00:26:37और आपने कोशिश करके नहीं छोड़ा वो छूट गई
00:26:43कुछ इतना अच्छा इतना सुन्दर इतना आवश्यक मिल गया
00:26:48कि भले ही सोचा भी
00:26:49अच्छा आज तो पीना है आज बोतल खोलनी
00:26:52भले ही सोच के भी रखा था भूल गए
00:26:54क्या पीना छूट गया नहीं भूल गए
00:26:58भूल गए
00:27:00कुछ दूसरी चीज है जो बहुत जरूरी मिल गई
00:27:02ये गांजा अफीम चरस और
00:27:08LSD और
00:27:10शराब और ये सब क्या हुआ
00:27:12क्या हुआ
00:27:14भूल गए
00:27:15पुराना स्टॉक बहुत पड़ा हुआ है
00:27:17हॉस्टल में घर में जहां कहीं भी रहते हैं
00:27:21पर उसको उठाना
00:27:24भूल गए
00:27:25ये हो जाता है
00:27:27और जब ऐसे छूटता है न
00:27:29कि कोशिश करकर के नहीं छोड़ा
00:27:31वो छूट गया
00:27:33इट ड्रॉबट
00:27:34मुझे पता भी नहीं चला और छूट गया
00:27:38तब समझो कि सचमुझ छूटा है
00:27:39पर सचमुझ तभी छूटेगा
00:27:42जब पहले जीवन को एक सार्थक अर्थ
00:27:43दोगे और जीवन को सार्थक
00:27:46अर्थ आप माननेताओं पर
00:27:47और रूडियों पर चलकर कभी भी नहीं दे पाऊगे
00:27:49एक आदमी
00:27:52जो गलत नौकरी करके
00:27:54बैठा हुआ है बहुत संभावना ये नशाक करेगा
00:27:56एक आदमी जो गलत शादी करके
00:27:58बैठा हुआ है बहुत संभावना ये नशाक करेगा
00:28:00समझ में आ रही है बाद
00:28:03एक जवान आदमी जो ऐसे घर में है जहां लगातार
00:28:10उस पर दबाव बनाया जा रहा है नहीं नहीं
00:28:11तो ये पढ़ाई मत कर तू वाला कोर्स कर
00:28:14उसमें प्लेस्मेंट पैकेज और बहतर लगता है
00:28:16बहुत संभावना ये नशा करेगा
00:28:18और जिसके पास साफ सुथरी
00:28:26सही जिन्दगी है वो सही जिन्दगी ही अपने आप में
00:28:29इतना बड़ा संगहर्श होती है
00:28:31कि आप और कुछ नहीं मांगते
00:28:33बहुत हो कि मन में ख्याल आ रहा होगा
00:28:39पर मेरी तो नौकरी भी गलत है शादी भी गलत है
00:28:41पर मैं तो नशा नहीं करता
00:28:43तो हमने कहा था ना कि नशा सिर्फ वही थोड़ी होता है
00:28:50जो मूँ से किया जाए
00:28:53सौ तरे के नशे होते हैं
00:28:56आप दूसरे तरह का नशा करते होंगे, आप इजबदार नशा करते होंगे
00:28:58पर जो सुबह से शाम तक
00:29:04ऐसी जिन्दगी जी रहा है जिसमें सच्चाई का गलाग होटा जा रहा है
00:29:11वो उस जिन्दगी को बरदाश्ट कैसे करेगा, उसे उस जिन्दगी से
00:29:14थोड़ी देर के लिए, टेंपुरेरली हटने के लिए कोई नशा चाहिए होता है
00:29:20तो फिर उख करता है
00:29:20और एक दूसरे आप्मी को भी सोच लो
00:29:27उसकी साधारन होश की जिन्दगी इतनी प्यारी है कि उससे बरदाश्ट नहीं होता
00:29:33कि होश एक पल को भी खोए
00:29:34एक दूसरा आदमी ऐसा भी हो सकता है
00:29:37एक लिखक है वो लिख रहा है
00:29:40और पूरे होश में लिख रहा है
00:29:42और आपने जाकर के उसको शराब पिला दी
00:29:46और वो कह रहा है कि अब मेरे अक्षर कांप रहे है
00:29:49अब सही शब्द पकड़ में नहीं आ रहा है
00:29:52अब मेरे मुहावरे ढीले पड़ रहे है
00:29:54वो आदमी कहेगा दुबारा मत पिला देना
00:29:56मुझे मेरे काम से प्यार है
00:29:58और ये जो तुमने अभी मुझे पिला दीना
00:30:00इसकी वज़े से मेरे प्यार में बाधा पड़ती है
00:30:02दुबारा पिला मत देना मुझे
00:30:04हमारे पास क्या कुछ ऐसा है जिससे हमें इतना प्यार हो
00:30:12कि उससे हम दो मिनट भी हटने को तयार नहों हमारे पास आमतौर पैसा कुछ होता नहीं हो सकता है
00:30:17पर व्यवस्था, रूडियां, परंपरा, दूसरों की अपेक्षाएं और अपनी अंधता इनके चलते हम उसको दबा देते हैं
00:30:29पैदा तो सब प्रेमी होते हैं पर प्रेम को दबा देते हैं
00:30:35उसको दबाओगे तो तवाम तरह के रोग पैदा होंगे जिसमें से नशा एक रोग है
00:30:40मुझ में आ रही है बात
00:30:46मैं बहुत जोर दे करके आप लोगों से बोलना चाहता हूँ
00:30:51क्योंकि बहुत जल्दी आपकी जिंदिगी में ये दोनों चीज़ें आने वाली है
00:30:58नौकरी और परिवार दोनोकरी और यो और यह दोनो नशे के सबसे बड़े कारण है
00:31:05� com that बहुत सारी तो नौकरियां ऐसी होती हो चल नहीं सकती हैं बिना नशे के
00:31:12क्यां जानते हैं अब वहां पी यो पिलाव नहीं तो डील्स नहीं होती है
00:31:16वहाँ अगर पियोप इलाव नहीं तो डील्स नहीं होती हैं लेविश कॉर्पोरेट पाइटी होती हैं इन्वेस्मेंट बैंकिंग और में और वहाँ आप बोल दो आम टीटो टेलर मैं चप करी नहीं सकता चीर्स तो आपसे बात ही नहीं करेगा कोई
00:31:31बहुत लोग सिर्फ पैसे के लिए ऐसे अपने बॉस और को बर्दाश्ट करते हैं कि भीतर से घायल हो जाते हैं और फिर हो कहते हैं गम गलत करने के लिए थोड़ी पी लेते हैं
00:31:49और परिवार का तो कहना ही किया, गलत लड़की मिल गई, गलत लड़का मिल गया, नौकरी से तो फिर भी जल्दी से आप स्तीफा दे सकते हो, शादी से थोड़ी स्तीफा दे दोगे जल्दी, भारत में तो पता भी चल जाए कि शादी बिल्कुल गलत हो गई है, तो संबंध �
00:32:19तो और मुश्किल है, सिर्फ यही नहीं होता कि शादी हो गई है, अगर गर्भ हो गया और फिर बच्चा हो गया तो मामला पूरा ही रिवर्सिबल हो गया, और यह सब आपकी जिंदगी में अब आएगा अगले कुछ सालों में, तो इसलिए मैं आपसे बहुत जोर देकर ब
00:32:49बड़ी महंगी हो, इधर उधर जाकर के विर्थ में कोई दहेज के लिए शादी कर रहा है, कोई माबाप के दबाव में शादी कर रहा है, कोई जाती देख के शादी कर रहा है, कोई कह रहे है बाकी सब ठीक है पर अभी धर्म फसरा है मेरा जाकर के, कोई सिर्फ सेक्सी फि
00:33:19पाए जाओ तो तुम ही जब्मेदार हो कि मैं आपसे बोल तो रहा हूं पर मुझे पता है मेरे बोलने के बाद भी
00:33:27पर अपनी ओर से जितनी कोशिश कर सकता हूं बचाने की कर रहा हूं
00:33:35कोशिश तो 20 साल से कर रहा हूँ, 25-24 साल से कर रहा हूँ
00:33:42और यह भी देखा है कि जिनको बचाने की कोशिश की थी
00:33:44वो मेरी आँखों के सामने ही कैसे बरबाद हुए
00:33:46तो इसलिए हर 20 साल के साथ और ज्यादा जोर लगाकर
00:33:52पिद्रढ़ता से, इंटेंसिटी से कोशिश करता हूँ
00:33:55अला कि नतीजा ज्यादा तर यही निकलता है पर शायद कुछ लोग बच जाते होंगे
00:33:59मैं अपने आपको क्यों इतना हतोत साहित करूँ
00:34:01क्या पता, दो-चार बच जाएं, क्या पता
00:34:07बेटे को कुछ ऐसा दीजिए, जिसके लिए वो जी भी सके और मर भी सके
00:34:19सारे नशे छूट जाएंगे
00:34:21और आप न दे पा रहे हूँ, तो कम से कम उसे मौका दीजिए क्यों खुद खोजे
00:34:39न दबाव डालिए, न हड़बड़ी करिए, ठीक हैं?
00:34:43सवाल है कि अपना मान कर रखते हैं, हम जब भी उनके साथ जोड़े रहते हैं, जबकि वो
00:35:06सवाल है कि बहुत लोग होते हैं, जो जीवन को अशान्त कर देते हैं, लेकिन फिर भी हम उनका
00:35:18साथ तो छोड़ नहीं पाते हैं, तो ऐसा क्यों होता है?
00:35:26तो जिंदगी में लोग होते हैं, जिनके साथ पता है कि ये आएंगे, तो शान्ती ही खराब करेंगे,
00:35:34विचलन, विक्षेप, डिस्टर्बेंस पैदा करेंगे, पता है, लेकिन उसके बाद भी उन्हें छोड़ नहीं पाते हैं, और उन्हें हम बार-बार मौका देते रहते हैं कि फिर से आओ, और
00:35:44प्रश्नकरता ने डिस्टर्बेंस की तो बात करी, पर डी से ही एक और शब्द है जिसको बिल्कुल छुपा गए, डिजायर, आपको शान्ती से होगा थोड़ा बहुत प्रेम, आपको कामना से बहुत ज्यादा लगा हुए, आपने मूले शान्ती की अपेक्षा कामना को द
00:36:14वरना कोई ऐसे आदमी को जिन्दगी में आने नहीं देगा, भई मुझे पता है कोई मेरा नुकसान करता है, फिर भी मैं उसे बार बार आने देता हूं, तो जरूर कहीं चोरी छुपे, लुक छुपके मैं उससे कुछ फाइदा भी पा रहा हूं, नुकसान क्या कर रहा है,
00:36:44पड़े तो आप स्विकार कर लेते हो, आप कहते हो कामना पूरी होनी चाहिए भाईया, सुख मिलना चाहिए, मौज आनी चाहिए, भले ही पल दो पल की, उसके बाद अगर घंटों तक, हफ्तों तक भी तिल मिलाते रहो, बेचैन रहो, तो कोई बात नहीं, दो पल तो मज्ज
00:37:14और ये आदमी है, इसका पता है, दुख देता है, फिर भी हमने इसको आने दिया, ये घटना अकस्मात नहीं थी, सैयोग नहीं है, इसके पीछे एक नियम है, सिध्धान्त है, और सिध्धान्त ये है कि तुम्हारी जिंदगी में वही होगा, जिसको तुम मूल ले देते हो
00:37:44तुम्हारे चाहने से ही हो रहा है, तो तुम अगर कहते हो, कि मैं डिस्टर्ब हो गया, ये बाहरी घटना नहीं है, बाहर कोई तूफान नहीं आया था, तूफान भीतर आया था, भीतर के तूफान तुम्हारी सहमती के बिना नहीं आ सकते, ये नियम है, बाहर कुछ भी हो
00:38:14अपने आपको समझा रखी है कि बहुत बड़ी है, तो फिर शान्ति को कौन सम्मान, कौन कीमत देगा, और ये मुझे कैसे पता कि थोड़ी देर का सुख बड़ी बात होती है, मुझे कैसे पता कि कामना पूर्ति का बड़ा महत्तो है, वो मुझे वेवस्था ने, फिल्मों न
00:38:44क्योंकि हाँ तो सब कुछ ही शान्ति के लिए नहीं है, किसके लिए, सुख के लिए है, और जो आदमी सुख को शान्ति से ज्यादा महत्तो देता है, उसे सुख तो कभी मिलता ही नहीं, वो शान्ति से भी हात दो बैठता है,
00:39:01आप जाते हो आपके बड़े भू�》 आपको आशिरवाद भी क्या देते हैं?
00:39:07सदा शांत रहो
00:39:08क्या बोलते हैं?
00:39:11सदा?
00:39:13प्रसन रहो
00:39:14सुखी रहो
00:39:16फूलो फलो
00:39:17फूलो फलो
00:39:20फूलो फलो जी नहीं होता था भाई
00:39:21दूदो नहाऊ पूतो फलो
00:39:22यह हमें
00:39:29में शांति का संसकार दिया जा रहा है क्या नहीं क्योंकि जो लोक धर्म है ना लोक धर्म लोक संस्कृति पॉक्इल क्लूचर पॉप रिलिजन, जिसका आम आजनी व्यवार करता है जिसको मानते है
00:39:41कि यही तो धर्म है, वो पूरे तरीके से कामना पर आश्रित है, जिसको हम अपना कल्चर और रिलिजन बोलते हैं, उसके केंद्र में डिजायर बैठी है, इसलिए आप उन जगहों पर बहुत जाते हो, आपने देखा होगा, किसी जगह के बारे हम बात हो जाए, वहां मनो काम
00:40:11अध्यात्मिक दृष्टी से, तो कहते हैं, अरे वहां जो जो गए, उन्होंने जो मांगा मिल गया, तारी इच्छाएं पूरी होती हैं फलानी जगह जा करके, तो हमें जो संसकार ही मिले हैं, वो इच्छा पूर्ती के मिले हैं, किसी तरह जो चीज हम चाहते हैं, वो मिल ज
00:40:41पहली बात तो हमने ये देखा कि अगर हमें चैन की जगह बेचैनी पसंद होती है, तो उसका कारण ये है कि हम खुद बेचैनी को मूले देते हैं, कोई बाहरी बात नहीं है, और दूसरी बात हम ये देख रहे हैं कि ये जो मूले हम कह रहे हैं कि हम देते हैं, ये मूले भी
00:41:11तो जब उसे बहुत शांत पाते हो,
00:41:14कभी हुआ है ऐसा, कोई सामिन दे चला आ रहा, आप उसको देखो और कहो,
00:41:17बधाई हो, आप कितने शांत हैं,
00:41:21हाँ, किसी क्या नई गाड़ी आ जाए, तो आप बधाई देने पहुँच जाओगे,
00:41:24क्या कंजम्शन की चीज़, भोग की चीज़,
00:41:28हम जिन्दगी को बिल्कुल धरातल पर आकर परखना चाहते हैं,
00:41:32किसी के अगर बच्चा हो जाए, बच्चा भी नहीं, पुत्र रत्न,
00:41:36तो उसको बधाई देने पहुँच जाओगे,
00:41:38बधाई देने जाते हो, बधाई हो, आप बख्ष दिये गए, चाते हो क्या बधाई देने,
00:41:58पूरी के पूरी संस्कृत ही कामना पूरते और सुख प्राप्ति पर चल रही है, चल रही है कि नहीं चल रही है,
00:42:06पूरी के पूरी संस्कृत ही है, अरे फलाने के घर तो अब सोना बरस रहा है,
00:42:13सोना बरस रहा है, बेटी पैदा हुई है, कौन बोलता है सरस्वती आई है, अगर खुद को सांतो ना देनी भी है, तो क्या बोल देते हो, लक्षमी आई है,
00:42:28अब क्या करें हुई ही गई पैदा, चाहते तो नहीं थे, मरता क्या न करता, लक्षमी आई है, अरे सरस्वती बोल देते हैं,
00:42:40पर सरस्वती सुख नहीं देती हैं, वो शांती देती हैं, वो शांती देती हैं, ज्यान तो शांत करता है,
00:42:53बात आ रही है समझ में, हमें कूट कूट करके हर दिशा से ये बात भर दी गई है कि मज्जा बड़ी बात है, और मज्जा भी कैसा, सस्ता,
00:43:06सस्ता, चीप, मुमेंटरी प्लेजर्स, चीप टिटिलेशन्स, ये सब हमें चाहिए, और ये जब मिलता है तो फिर हम उससे इंकार करनी की हालत में रही नहीं जाते,
00:43:24क्योंकि हमने इस मूले को स्विकार कर लिया, आत्मसाथ कर लिया है, क्या, कि मज्जा तो बड़ी बात होती है, लोग अपनी इंस्ट्रग्राम, बीपी वेरे लाते हैं, फेस्बूक प्रॉफाइल लगाते हैं, वो अपने शांतिक शणू की लगाते हैं, क्या, वो कब लग
00:43:54या कि पूरा वीडियो बनवा दिया, उसमें फ्रेम दर फ्रेम देख देख के, जिस शण में दिखाई दे रहा है कि मदहोशी छा गई है बिलकुल सुख की, वो आप लगाओगे और लगाते ही न जाने, कितनों के दिल बिलकुल जल उठेंगे, कि सारा सुख तो यही लू�
00:44:24अध्यात्मी बोल सकते हो, पर अध्यात्मी बोलो तो डर जाते हो, तो जीवन शिक्षा बोल लो, वो जीवन शिक्षा हमें कभी देही नहीं गई, उस जीवन शिक्षा की जगए हमको बहुत सतही किसम के संसकार दिये गए हैं, जिसमें यह है कि ऐसी चीज हो जाए तो सु�
00:44:54आपके घर कोई आता है और कोई आप कहते हैं उस खुशी का मौका है खुशी का तो आप उसको कोई पोशक स्वास्ते वर्धक चीज खिलाते हो क्या
00:45:10कि खिलाते तो सडेले हलवाई का वो कार्बो हाइड्रेट और शुगर से भरा पुलिंदा ही हो और मरेगा वो जल्दी
00:45:17सुख और जिन चीजों में सुख मनाना है वो भी आपने नहीं सोची
00:45:39सुख शानती से बड़ी बात है ये भी आपको परवरिश ने समाज ने संसकार ने संयोग ने बता दिया
00:45:47और किन बातों में सुख मनाना है ये भी उन्हों नहीं बताया है तो हमारा अपना क्या है हमारी अपनी
00:45:54सिर्फ निराशा है, बेचैनी है
00:45:57हमारा अपना बस पच्टावा है
00:46:00ये दुनिया के चलन में रह करके
00:46:03अपनी जिंदे की गवा बैठे, ये पच्टावा है हमारा
00:46:06और इसी पच्टावे के साथ एक दिन आग हो जाना है हमको
00:46:09आपको ये भी कैसे पता कौन सी बात को सुख मानना है अच्छा बताओ
00:46:15कौन सी बात को सुख की घटना मानना है आपको ये भी कैसे पता
00:46:22ये भी दूसरों ने बता दिया है
00:46:23ये भी दूसरों ने बता दिया है, हमें नहीं पता
00:46:28इसलिए तो एक समाज में एक बात को माना जाता है कि ये खुशी की बात है, दूसरे समाज में बिलकुल उससे विपरीत चीज को माना जा सकता है खुशी की बात है, और एक ही समाज में एक शताबदी में एक चीज को मानेंगे ये खुशी की है, और कुसी और शताबदी में कि
00:46:58के जाने के बाद जो भगनावशेश बचते हैं जो रूइन्स हैं जो आफ्टर पाइटी होता है है ना सुख वाली पाइटी और उसके बाद वहां पर क्या बचता है कभी शादी ब्यागा पंडाल देखा है रात में नहीं अगले दिन सुबह
00:47:14वहां सब क्या दिखाई दे रहा होता है रात की मधहोशियों के बाद असली जिंदगी वो हमारी जिंदगी है रात आई चली गई और इब यह बचा है दोपल के सुखने यह चोड़ा है किस-किस तरि देखा है क्या हालत रहती है जब सब चले आते उसका पंडाल की और जो ज�
00:47:44मैं कहा करता हूँ लोगों से कि शादियों में जाओ न जाओ
00:47:51शादियों के बाद जरूर जाओ
00:47:54आप जवान लोग हैं आपको पूरी जिन्दगी जीनी है
00:48:01अपने आप से पूछिए
00:48:03What to value? What is really important?
00:48:10इनके सस्ते जवाब स्विकार मत करो
00:48:12किसी और की बात को उधारी स्विकार मत करो
00:48:16उधार की ही वरना जिन्दगी रह जाएगी
00:48:22खुद पूछो अपने आप से
00:48:26मैं इस काम में क्यों उतरूं?
00:48:32मैं फलानी बात को मैं क्यों महत्तो दूं?
00:48:36कुछ चल रही है रस्म रवायत प्रथा परंपरा
00:48:40मैं जानना चाहता हूँ कि मैं उसका पालन क्यों करूँ?
00:48:45ये सवाल जरूरी है
00:48:46हम कितनी नकली जिन्दगी जी रहे हैं?
00:48:52ये सबसे ज्यादा पता है कब चलता है?
00:48:55हमारे सेलिब्रेशन्स में, हमारे उत्सवों में
00:48:58उपर उपर सब ऐसे दिखा रहे होते हैं
00:49:02जैसे खुश है, सुखी है
00:49:03और सेलिब्रेशन्स से ज्यादा कहीं नहीं पता चलता
00:49:08कि हम कितने ज्यादा बेचैन हैं, खोखले हैं, दुखी हैं
00:49:12कहीं पर पाईटी जैसा कुछ हो रहा है, वहां चले जाना
00:49:16और समझ जाओगे कि ये सुख चीज क्या होती है
00:49:20हुआ था मेरे साथ एक बार
00:49:30आपकी उम्रुफ का था उससे भी जरा सा पहले की बात है
00:49:35तो भई
00:49:39सचिदानंद घन हम कहते हैं
00:49:43भीतरी बात असली बात आनंद को हम कहते हैं
00:49:45सभा हुए आनंद सबको चाहिए
00:49:47मैं भी पार्टीज में जाता था
00:49:49और गया दो वार चार बार
00:49:52और फिर जाना बंद कर दिया
00:49:54साथ वालों ने कहा कि
00:49:58क्या बात है तुझे निया आना
00:50:00डूंट यू लव फन बिलकुल यही शब्द थे
00:50:03चार आज भी आद हैं
00:50:06यहीं चार आज़ों पार्टीज ने कहा वालों और आज़ों और रहें पार्टीज लाव वालों पार्टीज अंतल बात हैं
00:50:16and hence I will not come.
00:50:19हाँ, हाँ, मुझे भी तब ज्वाय वाला शब्द नहीं था, तब फन की बात हुई थी, बिल्कुल साफ है, आदे, फन.
00:50:25तब नोने का था, आओ, वीलाफ फन, गुट फन, मैंने का, I also want to have good fun,
00:50:30but where is the fun?
00:50:31मैं अपने आप से जूट नहीं बोल सकता, वहाँ लोग बहुत सारे थे, और बहुत कुछ हो रहा था,
00:50:38और बहुत शोर था, और म्यूजिक था, और डान्स था, ये वो खाना, पीना, हर तरह की चीज़ चल रही थी,
00:50:45but to tell you the truth, I didn't find anybody really having fun,
00:50:48मुझे वो सब के सब मिजरेबल लगे, उदास, और भीतर से हताश,
00:50:58और उन्होंने उपर उपर खुशी पोत रखी थी, ऐसे, है है है, हाँ जी हाँ जी आईए जी आईए जी,
00:51:05गुड मॉर्निंग जी, आज तो बहुत अच्छा दिन है जी,
00:51:08क्या ऐसा ही नहीं है, बोलो, क्या ऐसा ही नहीं है,
00:51:20तो जिन्दगी इसलिए थोड़ी है कि ये, जो खोखला सुख है, इसके पीछे जाते रहो,
00:51:26सुख बुरा नहीं है, पर फिर असली सुख चाहिए,
00:51:29और वो असली सुख असली चीजों में ही मिलता है, असली जिन्दगी जी के ही मिलता है, ये छोटी छोटी बातों से असली सुख नहीं मिल जाता
00:51:38उपनिशद कहते हैं ना अल्पे सुखम, अल्प माने छोटा
00:51:46छोटी जिन्दगी जी करके, छोटे विशयों को अपना उद्देश से बना करके, छोटे छोटे लक्षे रख करके, तुम्हें कभी सुख नहीं मिलेगा
00:51:57योए भूमा तक सुखम, भूमा वाने बड़ा विशाल, अनन्त, अपने आपको अनन्त को समर्पित करो, लक्षे अपना आस्मान जैसा बनाओ, तब आनन्द में जीते हो
00:52:16आस्मान जिन्दगी के आखरी पल तक नहीं मिलना, पर जिन्दगी मौज में बीतेगी, जिन्दगी मौज में बीतेगी क्योंकि लक्ष ऐसा बनाया कि उसके लिए आराम से जीए फिर मरे, और छोटी सी चीज, उसको लक्ष बनाया, उसको पा भी लिया, तो भी वैसे ही मि�
00:52:46पा लिया लोग आ रहें बधाईयां दे नहीं अरे वा बंटू का तो बड़ा पैकेट लग गया है और बंटू कह रहा है
00:52:55बंटू कह रहा है यह पैकेज यह से जाधा मज़ा तो मुझे इंस्टाग्राम में आता है
00:53:00वो पैकेज वाली जॉब में जाकर भी वहाँ बात रूम में छुप-छुप की रील सी देख रहा होगा
00:53:12आपको पता हैं यह बहुत बड़ी-बड़ी कंपनिया हैं जिन्होंने अब यह करा है कि लेवेटरीज में मने शौचालेओं में वो ब्लॉकर्स लगाते हैं
00:53:23कौन से ब्लॉकर्स कि वहाँ पर नेट नहीं चल सकता और यह मैं बिलकुल कई फॉर्चून 500 कंपनीज हैं उनकी बात कर रहा हूं
00:53:33बैंगलोर में भी ऐसा खूब हो रहा है अब वो इतना पैसा दे रहे हैं और वो कहते इतनी बड़ी बाते हैं यह वह ऐसा टॉप की जॉब बढ़ियां लड़की मिलेगी दहेज अच्छा मिलेगा इधर उधर प्रेस्टीज पचास बातें
00:53:49पर वो जो लड़का ही नहीं 35-35 साल के मैनेजर हैं वो भावाक के जा रहे हैं वहां पर बंद कर रहे हैं अंदर कमोट के उपर बैठ जाते हैं और वहां क्या कर रहे हैं स्क्रॉलिंग कर रहे हैं और करते ही जा रहे हैं करते ही जा रहे हार कर यह करना है कि यहां पर आपका
00:54:19फिर टुचे कामों पर अपनी भडास निकालते हो
00:54:22यह सारा जो होता है वर्क प्लेस में
00:54:31क्या बुलते हैं एपसेंटीजम
00:54:33इम्प्लॉई डिससेटिस्पेक्शन
00:54:35डी मोटिवेशन
00:54:37यह सब क्यों होता है इसीलिए होता है
00:54:39क्योंकि तुम जिस नौकरी में हो सबसे पहलो तुम्हें करनी ही नहीं चाहिए थी
00:54:42तुम गलत काम में हो
00:54:43तो सही काम क्या है वो तुमने कभी अपने आप से न पूछा न तलाशा
00:54:49तुम तो पत्ते की तरह थे समाज की और सहीयोग की हवा तुमको जहां ले आई
00:54:54तुम वहां आकर पढ़ गए सहीयोग से नौकरी में हो
00:54:57अब यह अर्थ नहीं रखता कुछ काम तुम्हारे लिए तो जीओगे कैसे इसके लिए
00:55:02तो घड़ी ताकते रहते हो कब समय हो जाए घर भागे
00:55:06और कब तीस तारी खाए तो सैलरी मिले
00:55:09किसी ने कहा है दुनिया में सबसे अगर बेकार कोई खोज है
00:55:18the most futile of all pursuits वो है the pursuit of happiness
00:55:26जब कोई सीधे सीधे कहता है कि मुझे खुशी चाहिए तो उसे सिर्फ दुख मिलेगा
00:55:34जो कहता है मुझे खुशी नहीं चाहिए मुझे सार्थक्ता चाहिए उसे चुप चाप आनंद मिल जाता है
00:55:40जो खुशी के लिए इधर उदर हात पाओ फेकता है उसे खुशी तो क्या ही मिलती है दुख मिलता है
00:55:47और जो कहता है खुशी हटाओ खुशी हो गयरा है कि हम परवाह नहीं करते
00:55:52मुझे सार्थक्ता चाहिए परपस चाहिए सही जिन्दगी चाहिए
00:55:56उसने मांगी थी सार्थक्ता उसे सार्थक्ता के साथ में आनंद मुफ्त मिल जाता है
00:56:01सार्थक्ता मांगिए आनंद अपने आप मिल जाएगा
00:56:06नमस्कार अचारी जी मेरा question इसी से related था जैसे आपने अभी बोला कि
00:56:19goals अपने आस्मान को इतना आपन को करना चाहिए तो जब goals अपने बड़े होते तो उतनी अपनी
00:56:25एक्सपेक्टेशन होती हैं तो एक्सपेक्टेशन जैसे हैं अगर उसे साफ से अपन अब वो चीज़ अचीज नहीं कर पा रहे या फिर उसके लिए अपन डेली उतनी महनक नहीं कर पा रहे उस फुल
00:56:37एफिशेन्सी से तो उसे हपन प्रश्टेटेटिएड या फिर अंगर हमें इतनाइस करना न चाहिए तो उस लिमिट
00:56:58और बात योहीं कोई उचा गोल बना लेने की नहीं होती है, वो जो गोल है न, वो दो तरह की समझदारी से निकलना चाहिए,
00:57:09टू काइंड्स ओफ अवेरनेस, पहला मैं कौन हूँ, मैं फसा कहां पर हुआ हूँ, और दूसरा ये काम तुम्हें जो भी करूँगा दुनिया में ही करूँगा न, तो दुनिया की आज की हालत क्या है और दुनिया की जरूरत क्या है,
00:57:30और जब इन दोनों बातों को एक साथ देखते हुए, आप एक काम में उतरते हो, तो उसके बाद बाद एक्सपेक्टेशन की नहीं, इमर्शन की हो जाती है, क्योंकि मैं काम में यूही नहीं उतरा हूँ,
00:57:45मैं जानता हूँ कि कुछ जरूरी है इसलिए कर रहा हूँ, मैं जानता हूँ मैं जो काम कर रहा हूँ, वो आज दुनिया के लिए बहुत जरूरी है, और मैं जानता हूँ मैं जो काम कर रहा हूँ, वो मैं न करूँ तो मैं भी नहीं जी पाऊंगा, मैं इसलिए उसमें उतर
00:58:15जिल्दी जिल्दी operation करना है, तो उसमें आप expectation थोड़ी रखी है कि मैं जाऊंगा आऊंगा तो कम से कम जो average speed है वो 80 के निकलनी चाहिए, 80 के MPH, ये expectation थोड़ी रखोगे, आप तो वास्तव में dashboard को, speedometer को देखोगे भी नहीं,
00:58:34जितना आपके bus में होगा, आप उतनी तेजी से गाड़ी भगाओगे और उतनी तेजी से वापस लाओगे, बल्कि कोई पूछेगा, कि average speed कितनी रखी तो आपको पता भी नहीं होगा,
00:58:45जब सही फैसले लिये जाते हैं, तो उसमें काम expectation का मूँ देख के नहीं किया जाता, ना अपनी expectation न दूसरों की,
00:58:59फिर काम उतना हो जाता है, जितने कि तुम कभी expectation कर भी नहीं सकते थे,
00:59:04असली काम की पहचान ही यही है, कि वो तुम्हारे भीतर वो ताकत खड़ी कर देता है, जितनी तुम्हें पता ही नहीं थी,
00:59:15छोटा काम करोगे न, तो उसके लिए ताकत भी छोटी ही चाहिए,
00:59:19और छोटे काम करते करते, स्वयन से भी हमारी अपेक्षा, उम्मीद, expectation क्या हो जाती है,
00:59:27कि मैं तो इतना ही कर सकता हूँ, तो expectation रख करके बड़ा काम नहीं किया जाता है,
00:59:32बड़ा काम बस किया जाता है, और फिर तुमके देखते हो कि बाप, रे बाप, मैं इतना कर गया, इतना तो मैं कभी कर भी नहीं सकता था,
00:59:38ये मैंने इतना किया है, तुम खुझ हैरान रह जाओगे कि मुझसे इतना कैसे हो गया,
00:59:44अगर मैं अपने लिए कोई lecture target, goal, deadline बनाता, मैं तो भी इतना ना कर पाता,
00:59:50जितना मैं सोचता हूँ कि करने के काबिल हूँ, मैंने उसे कहीं जादा कर दिया,
00:59:54और वो हो गया, वो हो गया क्योंकि जरूरी था, काम वो करो जो तुम्हारी समझ से निकलाओ,
01:00:03काम वो करो जो दुनिया के लिए जरूरी हो, उसके बाद घंटे गिनके काम नहीं करोगे,
01:00:08उसके बाद अपनी ठकान देखकर काम नहीं करोगे
01:00:11उसके बाद काम जिंदगी बन जाता है
01:00:13और उची चीज तुम्हें मिले
01:00:18उसके लिए जरूरी है पहले
01:00:21कि तुम ये सुईकार तो करो कि उचे संघर्षों में उतरना है
01:00:26अर्जुन इतने दिनों से थे श्री कृष्ण के पास
01:00:31कृष्ण उनके दोस्त की तरह रहते थे
01:00:36संबंधी भी है और सखा भी है रहते थे
01:00:40कृष्ण मिले हुए थे अर्जुन को गीता नहीं मिली अर्जुन को
01:00:43गीता तभी मिली जब अर्जुन ने
01:00:46सबसे भयानक युद्ध में उतरना सुईकार किया
01:00:50तब मिलती है गीता
01:00:53जो बात अर्जुन को पता चली वो कभी नहीं पता चलती अगर अर्जुन युद्ध से भाग गए होते
01:01:00अर्जुन ने अपना ही जो प्रचंड रूप देखा
01:01:03अर्जुन की अपनी उमीदों एक्सपेक्टेशन से आगे का अर्जुन ने जो अपना योधा रूप देखा
01:01:10वो अर्जुन खुद भी कभी नहीं देख पाते
01:01:12गीता को अर्जुन कभी नहीं पाते अगर अर्जुन ने महाभारत का युद्ध स्विकार नहीं किया होता
01:01:18और अरजुन भागने को तयार हो रहे थे
01:01:20तो पहले जीवन में बड़े संघर्षों को आने तो दो
01:01:24छोटी मोटी सुरक्षित जियोगे
01:01:27तो तुम्हें लगेगा कि तुम्हारी काबिलियत भी छोटी मोटी ही है
01:01:31तुम्हारी बहुत बहुत बड़ी काबिलियत है
01:01:35पर वो काबिलियत सक्रिय नहीं होगी
01:01:38अगर तुम जिन्दगी में बड़ी चुनौती आने ही नहीं दोगे
01:01:43अप्त्या कर रखा है जिन्दगी में की मच्छरी मारने है
01:01:48और बहुत लोग जिन्दगी में सिर्फ मच्छरी मारते है
01:01:52और भीतर तुम्हारे एक टैंक बैठा हुआ है
01:01:55तो उस टैंक का तुम्हें कभी पता लगेगा भी
01:01:59क्योंकि मच्छर मारने के लिए टैंक की तो जरूरत होती नई
01:02:02तो टैंक तुम्हारे भीतर पड़ा रहा जाएगा
01:02:05जंग खाता हुआ और तुम कभी जान नहीं पाऊगे कितनी ताकत तुम्हारे भीतर थी क्योंकि तुमने चुना यह कि जिंदगी मच्छर मारने बड़ा संघर्ष चुनो तो तुम्हें भी अचंभा हो जाएगा मेरे पास टैंक भी है हाँ टैंक है तुम्हारे पास पर वो त
01:02:35इतना इनके पास बल है इनसे पंगे थोड़े ही लेंगे किसी के पास कितना भी बल हो तुम्हारे पास उससे ज्यादा बल है पर वो बल तुम्हें दिखाई नहीं देगा जब तक तुम उसका अहवान नहीं करोगे इन्वोकेशन और वो इन्वोकेशन सिर्फ एक तरीके से
01:03:05काबेलियत क्या है ये मत देखो कि मैं खुद से कितनी उमीद रख सकता हूँ, कितनी expectation, कहो, सही है तो करना पड़ेगा, सही है तो करना पड़ेगा, अब सर फूटे, माथा पूटे, तकलीफे आए, जूजना पड़े, दुनियार उठे, सही है तो करना पड़ेगा, और जब क
01:03:35नमस्ते, मेरा नाम पूनम है, मैं अचारे जी के गीता सत्रों से लगभग एक साल से जुड़ी हूँ, अगर मैं बात करूँ के अचारे जी की सिख्षाओ के बारे में, तो जबसे मने अचारे जी के गीता सत्रों से कूछ सुनना शुरू किया है, तो उसकी बात से मैंनी अ�
01:04:05पहले इतनी जग्यासा नहीं रहती थी जीवत में जो समाज ने बिताया उसी के अनुसा जीवन जी रहे थी अचारीजी के सेशन्स के बाद जो मेरे जो मन में कुछ सवाल थे उसके उत्तर मेले हैं अभी जैसे पहले खेल में संगीत में और और जगे पार्टिसपेट नहीं कर
01:04:35अचारीजी के गीता सत्रों से अवश्य जुड़े आप दी अपने जीवत में दगलाव पहेंगे
01:04:43करें
01:04:47कि कि
01:04:51कि
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