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یہ کہانی بچوں کے لیے سبق آموز ہے، جو ہمیں نیکی، سچائی اور صبر کا پیغام دیتی ہے۔ دیکھیں اور اپنے بچوں کو اچھی تربیت دیں۔

This is a moral story for kids that teaches values like honesty, patience, and kindness. Watch and share to inspire young minds.

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Transcript
00:00एक खुश्णुमा सुभा थी, जब हमजा और अली हाथों में हाथ डाले स्कूल की तरफ जा रहे थे.
00:07उनके चहरों पर खुशी और उम्मीद चमक रही थी.
00:11छुट्टी के वक्त दोनों बड़े पेड के नीचे बैठे थे.
00:15हमजा सेंडविच खा रहा था और अली कोई मज़ेदार बात सुना कर जोड़जोड से हस रहा था.
00:22स्कूल की घंटी बजी, बच्चे गेट की तरफ दोड़े.
00:26हमजा और अली ने एक दूसरे को मुस्कुरा कर अलविदा कहा.
00:31शायद ये आखिरी अलविदा था, उन्हें क्या पता था.
00:36अगले दिन स्कूल में हमजा अकेला खड़ा था.
00:40उसकी नजरे चारो तरफ अली को ढून रही थी.
00:44लेकिन अली कही नहीं था.
00:47उसी शाम, हमजा अपने घर के बाहर सीडियों पर अकेला बैठा था.
00:52हात में अली की चाबी वाला छोटा सा कीचेन, हवा में उड़ता अली की गुमशुदगी का पोस्टर.
01:00सब कुछ शांत और उदास.
01:03उस रात, हमजा अपनी स्टडी टेबल पर बैठा था.
01:07नोट्स बिखरे हुए थे, नक्षे, खबरें, अली की यादें और एक मिशन, सच्चाई का पता लगाने का.
01:16सुबह होते ही हमजा एक पुरानी दुकान पर पहुँचा.
01:20दुकानदार ने हैरानी से सडक की ओर इशारा किया.
01:25हमजा ने अली की तस्वीर दिखाई, शायद कोई सुराग मिल जाए.
01:30शाम को हमजा अकेले रेलवे ट्रैक पर चल रहा था.
01:35एक हाथ में टॉच, दूसरे में अली की निशानी.
01:39सूरज धल रहा था, लेकिन हमजा का होसला चमक रहा था.
01:45फिर, एक अजनबी ने उसे एक पुराना बंद कमरा दिखाया.
01:50अंदर अंधेरा था, सिर्फ अली का टूटा हुआ खिलोना पड़ा था.
01:54क्या ये कोई निशानी थी?
01:57हमजा ने अपनी डाइरी निकाली और कुछ नोट किया.
02:01अब ये सिर्फ खोज नहीं, एक मिशन बन चुका था, पीछे हटने का सवाल ही नहीं था.
02:08अगले दिन स्कूल के गेट पर हमजा उलजन में खड़ा था.
02:12अली ने घड़ी देखी और कहा, हम देर न हो जाएं, लेकिन हमजा की निगाहें किसी और चीज को ढून रही थी.
02:21स्कूल की असेंबली में सभी बच्चे लाइन में खड़े थे, लेकिन हमजा की आखे अली को खोज रही थी, जैसे वो इसी भीड में कहीं खो गया हो.
02:31रीसेस में हमजा उसी पेड के पास गया जहां वो कल बैठे थे. अब वहां सिर्फ यादे थी, और एक खामोशी जो सब कुछ कह रही थी.
02:43छुट्टी के वक्त हमजा स्कूल के गेट पर ही खड़ा रहा. अली नहीं आया, सारे बच्चे घर जा चुके थे, लेकिन हमजा वहीं खड़ा रहा.
02:53घर पहुचकर हमजा ने दीवार पर अली का पोस्टर लगाया. उसकी आंखों में एक सवाल था, कहां हो तुम, दोस्त?
03:04उस रात हमजा के कमरे में बस एक लैम्प जल रहा था. अली की आवाजे, हसी और यादे उसके जहन में गूंज रही थी.
03:15सुभा सुभा हमजा एक पुरानी गली में निकला. एक बच्चा बोला, मुझे कुछ याद है, शायद पहली उम्मीद की किरन. कच्रे के पास एक तूटा हुआ खिलोना मिला, जो कभी अली का था. हमजा की आंखों में चमक आ गई, शायद वो सही रास्ते पर था.
03:35हमजा ने एक पुराने नक्षे पर निशान लगाया. उसने ठान लिया था, चाहे कुछ भी हो जाए, वो सच्चाई सामने लाकर रहेगा. फिर, एक बुजुर्ग ने कहा, मैंने ऐसे ही किसी लड़के को उस दिन रेलवे लाइन के पास देखा था. हमजा का दिल तेजी से �

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