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  • 1 year ago
नारायणपुर की सांस्कृतिक साधना को राष्ट्रीय सम्मान मिला है. अबूझमाड़ के मूर्धन्य कलाकार पंडीराम मंडावी को पद्मश्री सम्मान से राष्ट्रपति ने नवाजा है

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00:00शान्दार कृटी में तबदील करने में जुटे
00:29इस शक्स का नाम है पंडी राम मंडावी जिनोंने बस्तर की कला को देश विदेश तक पहुचाने का काम किया है
00:37कला के साध़क और सांस्कृतिक माटी के इस जनक को साल 2025 का पदमश्री सम्मान मिला है
00:44नई दिल्ली में आयोजिद गर्मा मैं समाहरों में महामहिम राष्टपती द्रौपदी मुर्मू ने पंडी राम मंडावी को पदमश्री सम्मान भेट किया
00:5368 साल के पंडी राम मंडावी बीते 5 दशक से 36 गड की कला खास कर काश्ट कला को प्रसारित और संरक्षित करने का काम कर रही है
01:04उन्होंने 36 गड की पारंपरिक वाद्ययंत्र निर्मान और काश्ट शिल्प कला को संरक्षित करने का काम किया है
01:11पंडिराम मंडावी, बासुरी, ठेहंडो, डूसीर, सिंग की तोड़ी, कोटे डका, उसूर जैसे विलिप्थ हो रहे वाध्यंत्रों को ना केवल बनाते हैं, बल्कि उन्हें लोक मंचों पर बजा कर प्रस्तुत भी करते हैं
01:26पंडिराम मंडावी के कला की विशेशता के बात करें, तो यहां केवल प्रदर्शन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जागरूपता और संडक्षन की एक जीवन्त प्रक्रिया है, जिसे उन्होंने संडक्षित कर रखा है
01:39आकाशनी ठाकुर, ETV भारत, नारायनपूर
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