00:00इन मसलों पर अपनी आर्मी को सुनना पसंद करता हूँ, बहुत खूबसूरत ब्रीफिंग उनकी सुनी है, मिस्वी साहब, व्योमिका जी, सौफिया कुरेशी जी, वो उस ब्रीफिंग ने हमें गर्व से भर दिया, गमगीन देश को भी, अभी भी बिहार में, हर दूसरे दि
00:30लेकिन उस परिवार का जो वो खालीपन, उनके जाने से हुआ, उसकी भरपाई हमारे पास नहीं है, ऐसे माहौल में न, सीनमाई डायलाग से, सब किसी को बचना चाहिए, संसद है, संसद में बात होगी, कई पालूओं पे होगी, हमें इस बात का कस्ट है, कि आतंक के हमारी
01:00सिविलियन टार्गेट्स नहीं लिए, ये पूरे देश के लिए, 71 वाले प्षन में कि देश का भुगोल बदल दिया दुनिया का, तो अतिरेक से बचना चाहिए, मैं यही कहूंगा, अतिरेक बहुत सुखद नहीं होता, जब तब जब कि देश को लगे, कि अभी भी आतंक
01:30कि हम नहीं कायल, जब आखी से ने टपका, तो फिर लहू क्या है?
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