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  • 1 year ago
मंदिर की आत्मा - Hindi Story _ Hindi Kahaniya _ Moral Stories _ Horror story _ New hindi Kahani(720P_HD)

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Transcript
00:00मंदिर की आत्मा
00:30तो फिर भी लोग इस मंदिर से दूर क्यों रहते हैं?
00:33ये इतना विरान क्यों रहता है?
00:36अरे बड़े बुज़र्ग कहते हैं कि मंदिर में आत्माओं का राज है
00:40जो लोगों की मदद करते हैं, लेकिन मंदिर से सभी को दूर भी रखते हैं
00:46अरे ये कैसी आत्मा हैं, जो लोगों की मदद भी करते हैं, और लोगों को मंदिर से दूर भी रखते हैं।
00:53अरे यही चलता आया है यहाँ पर, इसलिए कोई कुछ बोलता नहीं, क्योंकि जिसके घर में कोई भी परिशानी होती है, तो बताते हैं कि इस मंदिर से उन्हें मदद मिलती है।
01:06अरे वाह, यह तो अच्छी बात है, तभी इस गाउं में इतनी खुशाली दिखती है।
01:12तभी बाहर किसी की चीखने चिलाने की आवाज आती है। दोनों बाहर निकलती हैं तो देखती हैं कि गाउं के एक बुजर्ग रो रहे हैं, क्योंकि शहर से उन्हें कोई बुरी खबर मिली है।
01:42वो अस्पताल में बगती है।
01:48आरे तो इसमें परेशान होने की क्या बात है चाचा, जाओ शहर और बेटे का इलाज करवाओ।
01:56हाँ चाचा, विमला सही कह रही है, अब शहर जाओ और इलाज करवाओ।
02:02अरे कैसे इलाज करवाओ, अभी पैसे नहीं है, और शहर के अस्पतालों में इलाज का घर्चा लाखों में आता है।
02:12अरे चाचा, भगबान पर भरोसा रखो, कही न कहीं से मदद जरूर मिल जाएगी, बस आज का दिन कैसी भी काट लो।
02:21अरे अब तो बेटा, थोड़ा समय काटना पर मुश्किल होता जा रहा है।
02:26देख कमला, तु ही समझा चाचा को, रे पैसों का कहीं न कहीं से इंतिजाम जरूर हो जाएगा।
02:35अरे चचा, जब विमला कहा रही है तो थोड़ा उस पर भी भरोसा रखो, चलो आपको घर छोड़ कर आ जाती हूँ।
02:41उसकी बाद कमला उन बुजर्ग को लेकर चली जाती है और विमला मंदर की और चली जाती है।
03:11अरे सुनो, मेरे घर के बाहर ये पैसों से भरा बैग रखा हुआ मिला है। onboard किसका है ये भाई?
03:18अरे भाया, मुझे क्या पता? तभी उदर से कमला और विमला निकलती हैं।
03:25अरे बेटा संतो, देख, ये क्या रखा हुआ था मेरे घर के सामने?
03:29कमला और विमला हैरानी से देखती है
03:32अरे वा, देख विमला, तुने कहा था ना कि कोई ना कोई मदद जरूर करेगा
03:38अरे भगवान सब की मदद करते हैं, ये पैसों की मदद भी भगवान नहीं बीजी है
03:45और क्या, अब चच्चा सोच क्या रहे हो, शहर जाओ और बेटे का इलाज करवाओ
03:51ठीक है बेटियों, जो तुम कहो, चलो निकलता हूँ शहर, बेटे का इलाज करवाने के लिए
03:59अरे विमला, एक बात तो बता, ये इन्हें मिले तो कैसे मिले पैसे
04:05अरे मैं ना कहती थी, कि ये मंदिर सबकी मुसीबतों में मदद भीजता है
04:11अरे वाग गई, बड़ी पुनी आत्मा है मंदिर में
04:15हम, सो तो है, लेकिन उनके बारे में लोगों को कम ही पता है
04:20अच्छा, और तुम्हें क्या पता है?
04:23जितना पता था वो तो बता दिया
04:27ना रे ना, मैं नहीं मानती, तो कुछ तो छिपा रही है
04:32हरे कुछ ना छिपा रही, जो पता था वो बता दिया
04:37मंदिर से लोगों को मदद मिलती है, बस इतना ही पता है
04:41ठीक है ठीक है बाबा, अब नहीं पूछूंगी
04:44इसके बाद उसी राद कमला चुपचाप अपने कमरे से निकलती है और मंदिर के और चल पड़ती है
04:51कमला धीरे-धीरे मंदिर के दर्वाजी पर पहुंचती है अंदर से हलकी-हलकी रोश्णी आ रही थी
04:57इसके बाद जो वो देखती है वो हैरान रह जाती है
05:00कमला इसके बाद तेजी से वापस लोटाती है
05:04दूसरे दिन सुबह सुबह
05:06अरे विमला, तू तो चिपी रिस्तम निकली
05:10हैं? ऐसा क्या चिपा लिया मैंने?
05:15अरे तूने तो भना की नहीं लगने दी
05:16और चाचा की मदद भी कर दी
05:18हैं? ये क्या कह रही हो? ऐसा कैसे कह सकती हो तुम
05:23मैंने कोई मदद बदद नहीं की
05:25अरे सब पता है मुझे, कल रात मैं गई थी मंदिर
05:29तो क्या देखा?
05:34अरे तुम्हारा पती और कुछ लोग वहाँ दिखे
05:37बोरियों में नोट भरे हुए थे
05:39और सभी नोट गिनने में लगे हुए थे
05:41तो तुम्हें क्या लगा? वो क्या कर रहे थे?
05:47अरे मैं समझ गई कि वो लोग कहीं से
05:49डकैती कर पैसे लेकर यहां मंदिर के पीछे
05:52छिपाते हैं
05:53अब जब तुम जान ही गई हो तो बता देती हूँ
05:58लेकिन ये बात किसी को पता नहीं लगनी चाहिए
06:01मेरे पती डकैती नहीं डालते हैं
06:04बस उन लोगों से पैसे चिनते हैं
06:06जिनोंने गलत तरीके से पैसे बनाये हैं
06:10और फिर?
06:11फिर लोगों की मदद करते हैं
06:14यही है वो पुणिया आत्मा है जो लोगों को मदद पहुचाती है
06:18अब समझी?
06:21हाँ, अब समझी उन पुणिया आत्माओं का चक्कर
06:25सही है
06:26करते रहो मदद
06:29लेकिन साहुदानी से
06:31मेरी तरह कोई और ना पहुच जाए
06:44अब समझी तरह कोईदानी से
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