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  • 1 year ago
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Transcript
00:00शांत पहाडी गाव गडवास की तंग गलियों में एक पुरानी हवेली खड़ी थी. वर्षों से वीरान लेकिन रात होते ही वहां किसी युवती की सिस्किया, किसी के चलने की आवाजे और अजीट सी सुगंध हवा में घुल जाती थी. लोग कहते थे वहां एक प्रेत बाला
00:30आया था पुराने स्थानों की तस्वीरे लेने. उसे हवेली की दीवारों में कुछ ऐसा खिंचाव महसूस हुआ जैसे कोई उसे बुला रहा हो.
00:39रात को जब वह पहली बार हवेली में गया, वहां सिर्फ सननाटा नहीं था, बलकि किसी की सासे उसके पीछे चल रही थी. अचानक एक ठंडी हवा का जोंका आया और आरव ने एक अजीब सी परचाएं को देखा, एक लड़की सफेद लिबास में, काले लंबे बाल, गीली
01:09में बंधा हो, उसके पास गया. उसका चहरा सुन्दर था, लेकिन आखों में एक अनकही पीडा और अनंत इंतजार था. उस रात हवेली में जो हुआ, वहां आरव कभी भूल नहीं पाया. उस रात आरव ने उसे चूने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही उसके हाथ उसके चहर
01:39और अचानक आरव जमीम पर गिर गया. लेकिन अगली सुबह वह अपनी ही टेंट में था, जैसे कुछ हुआ ही नहो. फिर भी उसकी कलाई पर वही सफेद चुन्नी की गंध थी. वह अब हर रात उसी हवेली में जाने लगा. वह लड़की अब हर बार उसका इंतजार करती �
02:09उसे बताया. मैं इस हवेली की बेटी थी. मेरी शादीज बरगस्ती एक तांत्रिक से कर दी गई. लेकिन उसने मुझे मार डाला. मेरी आत्मा को इसी हवेली में बांध दिया गया. मैं तभी मुक्त हो सकती हूँ जब कोई मुझे सच्चे दिल से प्रेम करे. पूरी रात मे
02:39आरव ने वादा किया. मैं तुम्हें मुक्त करूंगा. लेकिन अगली रात हवेली में सब कुछ बदल गया. तारा अब शांत और सुन्दर नहीं थी. उसकी आखों से खून बह रहा था. उसके होंट फटे हुए थे. और उसकी आवाज किसी और की थी.
02:59तू भी धोखा देगा, जैसे सब ने दिया. कोई प्रेन नहीं करता. सब मुझे छोड़ कर चले जाते हैं. उसने आरव को बंधक बना लिया. वह हर रात उसके साथ सोती, लेकिन अब उसके आलिंगन में प्रेन नहीं, क्रोध और प्रतिशोध था. वह आरव को खुद में क
03:29हवेली की पुराने किताबों में एक मंत्र मिला, जो आत्मा को मुक्त कर सकता था. लेकिन उसकी कीमत थी, एक सच्चा प्रेम उसे आत्मा को देना होगा हमेशा के लिए. आरव ने निरने लिया. वह तारा से सच्चा प्रेम करता था. उसने हवेली में तारा से अंतिम बार �
03:59और तारा चीखती हुई एक उजाले में बदल गई. उसकी आत्मा मुक्त हो गई. अगली सुबह गाउवालों ने हवेली के खंडहर में एक अजनबी की लाश पाई. उसके चहरे पर एक मुस्कान थी. और उसकी चाती पर खून से लिखा था. अब मैं अकेली नहीं हूँ.
04:21प्रेटबाला की मुहबबत भाग दो परचाएं का बंधन. गाउव गडवास में हवेली की तबाही के बाद सब कुछ शांत हो गया था. लेकिन तारा की आत्मा मुक्त नहीं हुई थी.
04:36आरव का मृत शरीर गाउव वालों ने देखा. लेकिन किसी को यह नहीं पता था कि उसकी आत्मा कहा है.
04:46वे समझ नहीं पाए कि उसकी मृत्यू सिर्फ एक अंत नहीं थी, बलकि एक दर्वाजा थी उस दुनिया के लिए जिसे कोई इनसान समझ नहीं सकता.
04:56आरव की आत्मा अब एक भूतिया दायरे में बंद थी. एक रहस्यमई अंधकार में आयाम जहां समय नहीं चलता था, जहां हर तरफ धुन्ध थी, और तारा अब पहले जैसी कोमल आत्मा नहीं रह गई थी.
05:12अब वो बनी थी प्रेता प्रेम की भूखी एक पिशाचनी, जो हर रात आरव की आत्मा को अपने साथ रखती थी.
05:23आरव, तुमने वादा किया था, मुझे अकेला नहीं छोडोगे.
05:30उसकी आवाज अब किसी चाकू की तरह आरव की आत्मा को चीरती थी.
05:34वो उसे आलिंगन में जकड लेती, मगर वो आलिंगन अब गर्म नहीं होता.
05:42वह हड़ी को चीरती सर्दी से भरा होता.
05:46आरव अब हर रात वही अनुभव करता.
05:49सासे जो उसकी आत्मा को खीचती थी, पूंठ जो कभी प्यार देते थे, अब सड़ चुके थे, और आखें जो कभी प्रेन से देखती थी, अब उसमें धहकती हुई लाल आग बन गई थी.
06:04एक दिन प्रेत लोक में आरव को एक और आत्मा मिली अन्या.
06:08वो एक युवती थी, जिसकी आत्मा वर्षों से प्रेत लोक में भटक रही थी.
06:16अन्या ने आरव को बताया, तारा की आत्मा मुक्थ हो सकती थी, पर उसने तुम्हें धोखा दिया.
06:24वह आत्मा नहीं, अब एक वशीकरन तांत्रिका बन चुकी है, जो हर प्रेम करने वाले को कैद कर रही है.
06:35आरव को अब पता चला कि तारा कभी प्रेम में थी ही नहीं, वो बस किसी को चाहती थी, जो मरकर भी हमेशा उसका रहे.
06:44तारा अब हर उस पुरुष की आत्मा को बंदी बना रही थी, जिसने उससे प्रेम किया.
06:51अन्या ने आरव को एक पुराना तांत्रिक मंत्र दिया, जिससे वो अपनी आत्मा को फिर से जीवित कर सकता था.
07:00लेकिन शर्थ थी, उसे तारा की आत्मा को त्यागना होगा.
07:13तारा की आत्मा विक्राल हो गई, उसके चहरे से मास गिरने लगा.
07:43उसके बालों में साप लिप्टे हुए थे, उसकी आखों से आग निकल रही थी.
07:50आरव ने मंत्र पढ़ा.
07:52हवेली की परचाईं अब विक्रित होने लगी.
07:56धर्ती काप उठी.
07:57अन्या की आत्मा ने आरव को ढाल दी और एक उजाला आरव की आत्मा को घेरे में ले गया.
08:06तारा चीखती रही.
08:09मैंने तुमसे प्यार किया.
08:11मैंने तुम्हारे लिए सब कुछ त्यागा.
08:15और अब तुम मुझे छोड़ कर जा रहे हो.
08:19आरव ने आखे बंद की और मंत्र पूरा कर दिया.
08:26अगले दिन एक नया फोटोग्राफर गाव आया.
08:30उसने वही पुरानी हवेली देखी.
08:33उसे किसी ने बताया कि वहाँ एक युवक की आत्मा आज भी भटकती है.
08:38वो युवक जिसने प्रेम किया था एक आत्मा से.
08:44और तभी हवेली की खिड़की से किसी ने जहाका.
08:50सफेद लिबास, काली आखें और होठोन पर वही मुस्कान.
08:55तुम आ गए.
08:58प्रेटबाला की मुहबबत भाग तीम अन्तिम प्रेटबंधन.
09:02गाओ गडवास की हवेली फिर से शान्त हो चुकी थी.
09:08या शायद सिर्फ उपर से शान्त दिखती थी.
09:12जिस दिन नया फोटोग्राफर विवेक हवेली में आया,
09:16उसने महसूस किया कि उसकी तस्वीरे धुंधली हो रही थी.
09:20हर फ्रेम में एक स्त्री चाया दिखती थी,
09:24सफेद साडी में, खुले बाल और पीछे जलती आखें.
09:30रात होते ही हवेली के चारों और धुंध घिरने लगी.
09:34विवेक को नींद में एक आवाज आई.
09:38तुम आ गए.
09:39मैंने कहा था, तुम कभी मुझसे बच नहीं सकते.
09:45विवेक चौंक कर उठा.
09:48लेकिन उसके कमरे में अकेला वो नहीं था.
09:52आईने में तारा खड़ी थी.
09:54उसकी सडी हुई उंगलिया शीशे पर खून से लिख रही थी.
09:59मैं आरव को वापस लाने जा रही हूँ.
10:09अन्या की आत्मा ने उसे धोखा दिया था.
10:15वो तारा की जुरवा बहन थी और उसने आरव को मुक्त नहीं किया,
10:20बलकि तारा की आत्मा को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए उसकी आत्मा को एक बंधन में डाल दिया.
10:27अब तारा और अन्या एक हो चुकी थी ग्विभुज प्रेतिनी जिसकी आत्मा अब आरव के जीवन को बार बार जीने और हर बार मरने में तब्दील हो चुकी थी
10:40विवेक की जिग्यासा ने उसे हवेली की तहखाना तक पहुँचाया
10:44वहां उसे एक पुरानी काली किताब मिली जिसमें तारा और अन्या के तांत्रिक अनुष्ठान का वर्णन था
10:53उसने पढ़ा
10:56जिसने प्रेम में मृत्यु पाई हो उसकी आत्मा को जबरन जोडा जाए तो वह पिशाचिनी बन जाती है
11:03लेकिन यदि वह आत्मा किसी तीसरे शरीर में प्रवेश कर जाए तो अमर हो जाती है
11:12विवेक समझ गया वो तीसरा शरीर वह स्वय है
11:16तारा और अन्या उसे केवल आरव की आत्मा का नया बरतन बनाना चाहती थी
11:23रात के ठीक तीन बजे हवेली की दिवारें हिलने लगी
11:29विवेक के चारों और हवा तेज हुई जूमर जंजना उठा और उसकी आखों के सामने खून तपकने लगा
11:36तारा सामने आई उसकी देह आधी जली हुई आखें अब भी आरव के नाम पर छलकती हुई
11:44विवेक अब तुम मेरी अमरता हो आरव को हमेशा के लिए तुम्हारे भीतर बंद कर दूंगी
11:53और मैं हर जन्म तुम्हें चूमूंगी चाहे वो प्यार हो या मृत्यु
11:59लेकिन तभी विवेक के शरीर में कुछ हलचल हुई
12:04आरव की आत्मा जाग गई थी
12:08तारा यह प्रेम नहीं यह श्राप है
12:14मैं अब मुक्त होंगा और तुम्हें भी करूंगा मुक्त
12:19उसने वही तांत्रिक मंत्र दोहराया जो पहले अधूरा रह गया था
12:25तारा चिल्लाई नहीं मैं तुम्हें फिर से नहीं खो सकती
12:31हवेली जलने लगी दीवारें चटकने लगी सारे बंद आत्माय मुक्त होने लगी
12:42तारा और अन्या की आत्मा अब जल रही थी लेकिन मुस्कुरा रही थी
12:49तुमने सोचा ये अन्त है हमने तुम्हें छोड़ा ही कब था आरव अब हम तुम्में हैं
13:00विवेक के शरीर से धुआ निकला उसकी आखें काली पड़ गई और उसकी मुस्कान वैसी ही थी जैसी तारा की
13:09पांच साल बाद गाउ में नई हवेली बनी एक परिवार उसमें रहने आया
13:18उनकी बेटी ने रात को कहा
13:21मा मेरी नई दीदी बहुत सुन्दर है वो मुझे हर रात कहानिया सुनाती है
13:29मा ने पूछा कौन दीदी?
13:36बेटी ने मुस्कुराते हुए कहा
13:39वो जो सफेद साड़ी पहनती है
13:43और कहती है प्रेम कभी नहीं मरता
13:47दी एंड या शायद शुरुआत
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