00:00मुरली अम्रित की धारा है धारा जो देती दुखों से किनारा
00:11मुरली अम्रित की धारा है धारा जो देती दुखों से किनारा
00:22ओम शान्ती आए सुनते हैं दो मई दो हजार पच्चीस दिन शुकरवार की साकार मुरली
00:33शिव बाबा कहते हैं मीठे बच्चे एकांत में बैठ अपने साथ बातें करो
00:40हम अविनाशी आत्मा है बाप से सुनते हैं या प्रैक्टिस करो
00:45प्रश्न जो बच्चे याद में अलबेले हैं उनके मुख से कौन से बोल निकलते हैं
00:54उत्तर वह कहते हैं हम शिव बाबा के बच्चे हैं ही याद में ही है लेकिन बाबा कहते वह सब गपोडे हैं
01:04अलबेलापन है, इसमें तो पुरुशार्थ करना है, सवेरे उठ अपने को आत्मा समझ बैट जाना है, रूह रिहान करनी है, आत्मा ही बात चीत करती है, अभी तुम देही अभिमानी बनते हो, देही अभिमानी बच्चे ही याद का चार्ट रखेंगे, सिर्फ ग्यान की ल�
01:34बच्चों को समझाया गया है कि प्राण आत्मा को कहा जाता है, अब बाप आत्माओं को समझाते हैं, यह गीत तो भक्तिमार्क के हैं, यह तो सिर्फ इनका सार समझाया जाता है, अब तुम जब यहाँ बैटते हो, तो अपने को आत्मा समझो, देह का भान छोड़ देना है
02:04इसको आत्मा समझो, मैं छोटी आत्मा हूँ, आत्मा ही सारा पाट बजाती है इस शरीर से, तो देह अभिमान निकल जाए, यह है महनत, हम आत्मा इस सारे नाटक के एक्टर्स है, उंच से उंच एक्टर है, परमपिता परमात्मा, बुद्धी में रहता है, वो अभी इतनी छ
02:34है छोटी बिंदी, हम आत्मा भी छोटी बिंदी है, आत्मा को सिवाए दिव्य दृष्टिक के देख नहीं सकते, यह नई नई बातें अभी तुम सुन रहे हो, दुनिया क्या जाने, तुम्हारे में भी थोड़े हैं, जो यथार्थ रीती समझते हैं, और बुद्धी में �
03:04जाने फलाने आते हैं, तुम जानते हो बाप ग्यान का सागर है, परंतु शरीर बिगर तो ग्यान सुना न सके, शरीर ध्वारा ही बोल सकते हैं, अशरीरी होने से और्गंस अलग हो जाते हैं, भक्ति मार्ग में तो देहधारियों का ही सिमरन करते, परंपिता परमात्मा के �
03:34सतो प्रधान थे, तुमको ही फिर सतो प्रधान बनना है, तमो प्रधान से सतो प्रधान बनने के लिए तुम्हें फिर यह अवस्था मजबूत रखनी है, कि हम आत्मा है, आत्मा इस शरीर द्वारा बात करती है, उनमें ज्ञान है, यह ज्ञान, और कोई की बुद्धी में
04:04अपने साथ ऐसी ऐसी बातें करनी है, हम आत्मा हूं, बाप से सुन रहा हूं, धारणा मुझ आत्मा में होती है, मुझ आत्मा में ही पाड़ भरा हुआ है, मैं आत्मा अविनाशी हूँ.
04:19ये अंदर घोटना चाहिए
04:21हमको तमो प्रधान से सतो प्रधान बनना है
04:24देह अभिमानी मनुष्य को आत्मा का भी ग्यान नहीं है
04:28कितनी बड़ी-बड़ी किताबें अपने पास रखते है
04:31अहंकार कितना है
04:33यह है ही तमो प्रधान दुनिया
04:36उंचते उंच आत्मा तो कोई भी है नहीं
04:40तुम जानते हो कि
04:41अब हमें तमो प्रधान से सतो प्रधान बनने का पुरुशार्थ करना है
04:46इस बात को अंदर में घोटना है
04:48ग्यान सुनाने वाले तो बहुत है
04:51परन्तु याद है नहीं
04:54अंदर में वहां अंतरमुकता रहने चाहिए।
04:57हमको बाप की याद से पतित से पावन बनना है,
05:01सिर्फ पंडित नहीं बनना है।
05:03इस पर एक पंडित का मिसाल भी है,
05:05माताओं को कहते राम राम कहने से पार हो जाएंगी।
05:09तो ऐसे लबाडी नहीं बनना है,
05:10ऐसे बहुत हैं।
05:13समझाते बहुत अच्छा हैं परन्तु योग है नहीं।
05:17सारा दिन देह अभिमान में रहते हैं।
05:20नहीं तो बाबा को चाट भेजना चाहिए।
05:22हम इस समय उठता हूँ, इतना याद करता हूँ।
05:25कुछ समाचार नहीं देते।
05:27ग्यान की बहुत लबाड, अर्थात गप पमारते हैं।
05:31योग है नहीं।
05:33भल बडों-बडों को ग्यान देते हैं, परन्तु योग में कच्छे हैं।
05:37सवेरे उठ बाब को याद करना है।
05:40बाबा, आप कितने मोस बिलवड हो।
05:43कैसा यह विचित्र ड्रामा बना हुआ है, कोई भी यह राज नहीं जानते, ना आत्मा को ना परमात्मा को जानते हैं।
05:52इस समय मनुष्य जानवर से भी बत्तर हैं।
05:56हम भी ऐसे थे।
05:57माया के राज्य में कितनी दुर्दशा हो जाती है।
06:01यह ज्यान तुम कोई को भी दे सकते हो।
06:05बोलो, तुम आत्मा अभी तमो प्रधान हो, तुमें सतो प्रधान बनना है।
06:11पहले तो अपने को आत्मा समझो।
06:13गरीबों के लिए तो और ही सहज है।
06:16साहुकारों के तो लफडे बहुत रहते हैं।
06:20बाप कहते हैं, मैं आता ही हूँ साधारन तन में।
06:24न बहुत गरीब, न बहुत साहुकार।
06:27अभी तुम जानते हो, कल्प कल्प बाप आकर,
06:30हमको यही शिक्षा देते हैं कि पावन कैसे बनो।
06:34बाग की तुमारी धंदे आदी में खिट-पिट है,
06:36उसके लिए बाबा नहीं आये है।
06:39तुम तो बुलाते ही हो, हे पतित पावन आओ,
06:42तो बाबा पावन बनने की युक्ति बतलाते है।
06:45यह ब्रह्मा, खुद भी कुछ नहीं जानते थे।
06:48अक्टर होकर और ड्रामा के आदी मध्य अंध को न जाने,
06:51तो उन्हें क्या कहेंगे।
06:53हम आत्मा, इस स्रिष्टी चक्र में एक्टर हैं,
06:57यह भी कोई जानते नहीं।
06:58भल कह देते हैं, आत्मा मूलवतन में निवास करती है,
07:03परन्तु अनुभव से नहीं कहते।
07:05तुम तो अभी प्रैक्टिकल में जानते हो,
07:07हम आत्मा मूलवतन के रहवासी हैं,
07:10हम आत्मा अभिनाशी हैं,
07:12यह तो बुद्धी में याद रहना चाहिए,
07:14बहुतों का योग बिल्कुल है नहीं,
07:17देह अभिमान के कारण फिर मिस्टेक्स भी बहुत होती हैं,
07:20मूलबात है ही देही अभिमानी बनना,
07:22यह फुर्णा रहना चाहिए,
07:24हमको सतो प्रधान बनना है,
07:26जिन बच्चों को सतो प्रधान बनने की तात अर्थात लगन है,
07:31उनके मुक से कभी पत्थर नहीं निकलेंगे,
07:34कोई भूल हुई तो जड़ बाब को रिपोर्ट करेंगे,
07:36बाबा हमसे यह भूल हुई,
07:39क्षमा करना,
07:41छीपाएंगे नहीं,
07:43छीपाने से वह और ही व्रिद्धी को पाती है,
07:46बाबा को समाचार देते रहो,
07:48बाबा लिग देंगे तुम्हारा योग ठीक नहीं,
07:52पावन बनने की ही मुख्य बात है,
07:54तुम बच्चों की बुद्धी में,
07:56चौरासी जन्मों की कहनी है,
07:59जितना हो सके,
08:00बस यही चिंता लगी रहे सतो प्रधन बनना है,
08:04देह अभिमान को छोड़ देना है,
08:06तुम हो राज रिशी,
08:09हट योगी कभी राजयोग सिखला न सके,
08:11राजयोग बाप ही सिखलाते है,
08:15ज्यान भी बाप ही देते है,
08:17बाकी इस समय है तमो प्रधन भक्ती,
08:20ज्यान सिर्फ बाप संगम पर ही आकर सुनाते है,
08:23बाप आये हैं तो भक्ती खत्म होनी है,
08:25यह दुनिया भी खत्म हो जानी है,
08:27ग्यान और योग से सतयुक की स्थापना होती है
08:31भक्ती चीज ही अलग है
08:33मनुष्य फिर कह देते दुख सुख यहां ही है
08:36अभी तुम बच्चों पर बड़ी responsibility है
08:39अपना कल्यार करने की युक्ती रचते रो
08:42यह भी समझाया है पावन दुनिया है
08:45शांती धाम और सुक धाम
08:48यह है अशांती धाम दुख धाम
08:51पहली मुख्य बात है योग की
08:53योग नहीं है तो ग्यान की लबार है सिर्फ पंडित मुआफिक
08:57आजकल तो रिद्धी सिद्धी भी बहुत निकली है
09:00इनसे ग्यान का connection नहीं है
09:02मनुष्य कितना जूट में फसे हुए है
09:05पतित है
09:06बाप खुद कहते है
09:08मैं पतित दुनिया पतित शरीर में आता हूँ
09:11पावन तो कोई यहां है ही नहीं
09:14ये तो अपने को भगवान कहते नहीं
09:16ये तो कहते हैं मैं भी पतित हूँ
09:18पावन होंगे तो फरिष्टा बन जाएंगे
09:20तुम भी पवित्र फरिष्टा बन जाएंगे
09:23तो मूल बात यही है कि हम पावन कैसे बने
09:26याद बहुत जरूरी है
09:28जो बच्चे याद में अलबेले हैं
09:31वो कहते हैं हम शिव बाबा के बच्चे तो हैं ही
09:34याद में ही हैं
09:36लेकिन बाबा कहते
09:37वो सब गपोड़े हैं
09:39अलबेलापन है
09:40इसमें तो पुरुशार्थ करना है
09:43सवेरे उठ अपने को आत्मा समझ
09:45बैठ जाना है
09:47रुहरिहान करनी है
09:49आत्मा ही बाचीत करती है न
09:51अभी तुम देही अभिमानी बनते हो
09:54जो कोई का कल्यान करता है
09:56तो उनकी महिमा भी की जाती है न
09:58वह होती है देहे की महिमा
10:01यह तो है निराकार
10:03परमपिता परमात्मा की महिमा
10:05इसको भी तुम समझते हो
10:07यह सीड़ी और कोई की बुद्धी में थोड़े ही होगी
10:10हम 84 जन्म कैसे लेते हैं
10:13नीचे उतरते आते हैं, अब तो पाप का घड़ा भर गया है, वह साफ कैसे हो? इसलिए बाप को बुलाते हैं, तुम हो पांडव संप्रदाए, रिलिजियो भी पोलिटिकल भी हो, बाबा सब रिलिजिन की बात समझाते है, दूसरा कोई समझा न सके।
10:43बाप ही पिछाडी में आकर सब को पवित्र बनाए वापिस ले जाते हैं, इसलिए उस एक के सिवाए और कोई की महिमा है नहीं, ब्रह्मा की वह तुम्हारी कोई महिमा नहीं, बाबा ना आता, तो तुम भी क्या करते? अब बाप तुमको चड़ती कला में ले जाते हैं, गात
11:13तो आत्मा है, उनका यह तख्त है, आत्मा अविनाशी है, काल कभी खाता नहीं, आत्मा को एक शरीर छोड़, दूसरा पाट बजाना है, बाकी लेने के लिए कोई काल आता थोड़े ही है, तुमको कोई के शरीर छोड़ने का दुख नहीं होता है, शरीर छोड़कर दूसरा
11:43आत्माएं, परमात्मा अलग रहे बहुकाल, बाप कहां आकर मिलते हैं, यह भी नहीं जानते, अभी तुमको हर बात की समझानी मिलती है, कब से सुनते ही आते हो, कोई किताब आदी थोड़े ही उठाते हैं, सिर्फ रीफर करते हैं समझाने के लिए, बाप सच्चा तो सच्च
12:13रावन से तुमने बहुत हारखाई है, यह सब हेल बना हुआ है, अभी तुम जानते हो, हमारा राज्य स्थापन हो रहा है, फिर यह सब होंगे नहीं, यह तो सब पीछे आये हैं, यह स्रिष्टी चक्र बुद्धि में रखना कितना सहज है, जो पुरुशार्थी बच्चे
12:43दुख नहीं देना है, प्यार से समझाना चाहिए, पवित्रता पर भी कितना हंगामा होता है, वह भी ड्रामा अनुसर होता है, यह बना बनाया ड्रामा है ना, ऐसे नहीं ड्रामा में होगा तो मिलेगा, नहीं, महनत करनी है, देवताओं मिसल, दैवीगुन धारन करने है, �
13:13धोर न पाए
13:14यह तो सत बाप है
13:16सत टीचर है
13:17आत्मा को अब स्मृति रहती है
13:20बाबा ग्यान का सागर
13:22सुक का सागर है
13:23जरूर ग्यान दे कर गया हूँ
13:26तब तो गायन होता है
13:27इनकी आत्मा में
13:30कोई ग्यान था क्या?
13:32आत्मा क्या?
13:34ड्रामा क्या है?
13:35कोई भी नहीं जानते
13:36जानना तो मनुष्य को ही है ना
13:38रूद्र यग्य रचते हैं
13:41तो आत्माओं की पूजा करते हैं
13:44उनकी पूजा अच्छी वा देवी शरीरों की पूजा अच्छी
13:46यह शरीर तो
13:48पांच तत्वों का है
13:50इसलिए एक शिव बाबा की पूजा ही
13:52अव्यभिचारी पूजा है
13:53अभी उस एक से ही सुनना है
13:56इसलिए कहा जाता है
13:57Here no evil, see no evil
14:00गलानी की कोई बात न सुनो
14:02मुझ एक से ही सुनो
14:04यहां है अव्यभिचारी ग्यान
14:06मुख्य बात है
14:08जब देह अभिमान तूटेगा
14:10तभी तुम शीतल बनेंगे
14:12बाप की याद में रहेंगे
14:14तो मुख से भी उल्टा सुलता बोल नहीं बोलेंगे
14:17कुद्रिष्टी नहीं जाएगी
14:19देखते हुए जैसे देखेंगे नहीं
14:21हमारा ग्यान का तीसरा नेत्र
14:24खुला हुआ है
14:26बाप ने आकर त्रिने त्री
14:28त्रिकाल दर्शी बनाया है
14:30अब तुमको तीनो कालो
14:32तीनो लोकों का ग्यान है
14:34अच्छा
14:35मीठे मीठे सिकी लधे बच्चो
14:38प्रति मात पिता बाप दादा का
14:40याद प्यार और गुड मॉर्निंग
14:41रूहनी बाप की रूहनी बच्चो को नमस्ते
14:44हम रूहनी बच्चो की रूहनी मात पिता बाप दादा को
14:48याद प्यार गुड मॉर्निंग और नमस्ते
14:51धारना के लिए मुख्य सार
14:54एक
14:55ग्यान सुनाने के साथ साथ
14:57योग में भी रहना है
14:59अच्छे मैनर्स धारन करने है
15:01बहुत मीठा बनना है
15:03मुख से कभी पत्थर नहीं निकालने है
15:05दो
15:07अंतर मुखी बन
15:09एकांत में बैट अपने आप से रूह रियान करनी है
15:13पावन बनने की युक्तियाँ निकालनी है
15:16सवेरे सवेरे उठकर बाप को बड़े प्यार से याद करना है
15:20वर्दान
15:22वाइरलेस सेट द्वारा
15:24विनाश काल में अंतिम डायरेक्शन को कैच करने वाले
15:28वाइसलेस भव
15:29विनाश के समय
15:31अंतिम डायरेक्शन को कैच करने के लिए
15:34वाइसलिस पुद्धी चाहिए
15:36जैसे वे लोग
15:38वाइरलिस सेट द्वारा एक दूसरे तक
15:40आवाज पहुंचाते हैं
15:42यहाँ है वाइसलिस की वाइरलिस
15:44इस वाइरलिस द्वारा आपको
15:46आवाज आएगा की
15:47इस सेफ स्थान पर पहुंच जाओ
15:50जो बच्चे बाप की याद में
15:52रहने वाले वाइसलिस है
15:53जिने अशरीरी बनने का अभ्यास है
15:56वे विनाश में विनाश नहीं होंगे
15:58लेकिन स्वेच्छा से शरीर छोडेंगे
16:01स्लोगन
16:03योग को किनारे कर
16:05कर्म में बिजी हो जाना
16:07यही अलबेलापन है
16:08अव्यक्त इशारे
16:11रूहानी रोयल्टी और प्यूरिटी की
16:14परसनेलिटी धारन करो
16:15प्यूरिटी की रोयल्टी
16:17अर्थाद एक वर्ता बनना
16:19एक बाबा, दूसरा न कोई
16:21इस ब्राह्मन जीवन में
16:24संपूर्ण पावन बनने के लिए
16:25एक वर्ता का पाट पक्का कर लो
16:27वृत्ती में शुभ भावना
16:29शुभ कामना हो
16:31दृष्टी द्वारा हर एक को
16:33आत्मिक रूप में वा फरिष्टा रूप में देखो
16:35कर्म द्वारा हर आत्मा को
16:38सुख दो और सुख लो
16:40कोई दुख दे, गाली दे, इंसल्ट करे
16:43तो आप सहनशील देवी, सहनशील देव बन जाओ
16:47ओम शान्ती
16:49संगम की बेला है सुखानी
17:08हैं बड़ा वर्दानी
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