00:00पुराने लाहोर की पर हुजूम गिल्ली में बिल्लियों का एक पुरम मुआशरा रहता था
00:04मिया सिलमज मशूर दर्जी के मलबे से शलवार कमीज पहनते थे
00:10हर जुमा बिल्लियों के नमाज की तयारी से हुआ में जोश भर जाता था
00:17मज और मियू बैक एक बड़ी बली चछट से पुकारती थी मियू अकबर
00:22नंडी मस्जिद में बच्चे बिल्लियां आगे बैठें पीछे बुड़ी बिल्लियां दाम लह रहा
00:29इमाम फुरकान दाना फार्सी बली उन्हें महरबानी और हिक्मत से रहनुमाई करते थे
00:35वो मच्छी बांटना घुसा ना करना महरबानी सिखाते
00:41बिल्लियां सीधी खड़ी थी पंजे जुमा की नमाज के लिए बहतरीन कतारों में
00:47मस्जिद हम आहंग खुबसूरती और पुरम्ण सजदों से दमक रही थी
00:53नमाज के बाद सर जुकाए और अस्सलाम अलेकुम का
00:58बली के बच्चे तित्लियों का पीछा बुजर्ग दूद बिल्यानी की कहानी
01:04यास्मीन की दिवारों वाली गिली इतिहाद नमाज और खर्खरानी का पनागा बन गए
01:11हक्तावार याद दहानी के इमान छोटे पंजों से दिलों को यग्जा करता है