00:00ये कहानी कालपनी खेतता महिला सलशक्तिकरण और समानता पर आधारित है।
00:30इस कहानी के सभी पात्र कहानी की पंक्तियां समवात, कथांग, घटनाएं और द्रिश्य पूरी तरह से कालपनिक है।
01:00के सभी आपनिक है।
01:03कि प्लिदकरण और समान पर्च्तिकरण दोरी आपने की अच्तिकरण बाहा है।
01:12ये पाहा है।
01:14कुछ जो पुछा कुछ ए कि छो हुझा
01:25कर दो
01:31कर दो
01:36वालो जिलालो ....
02:06कर दो करोण।
02:08मुला सबसाइ
02:17और आठा
02:18कर दो
02:28मुला कर दो
02:31यह तरी
02:33पिर बिले के कर तो पिर भूहापत करेंगे
02:43आपसा
02:56करेंगे करेंगे राट भूहापत करेंगे
03:26कर दो कर दो
03:56कर दो
04:26कर दो
04:30कर दो
04:35कर दो
04:42कर दो
04:48हुआ हुआ हुआ है
05:18हुआ है
05:48हुआ है
06:00हुआ है
06:04मिरसे तो नहीं है
06:06कि यह जाहिल तुम्हें मेरी दोस्ट जाद है तबस्टूम नहीं कुछ आद नहीं है
06:25देखो उसका बेटा है जायद
06:29और मैंने तबस्टूम से बात छेड़ी है वो लोग तयार है अफजा के हलाला के लिए
06:37हम जायद का निकाह उससे पढ़वा सकते हैं देखो जायद इंसान भी अच्छा है और वो लोग शरीफ लोग है अच्छे लोग और बहुत बड़े लोग है इसलिए उनकी कोई मांग भी नहीं है
06:57जाहिद की बेगम का इंतकाल चंद महीनों पहले हो गया था तो अब हलाला के मैयाद के दोरान उसको भी अफजा का सहरा मिल जाएगा
07:10और देखो राहिल निकाह के वकफे के बाद वो तुम्हारे पास वापस आ जाएगी और सब ठीक ठाक हो जाएगा
07:18देखो राहिल मैंने तबस्सम को जबान दे दी है और उन लोग को कोई इतराज नहीं है वो लुग मान गए है अब इससे बेतर तो कोई मेरे ख्याल में दूसरी बात हो नहीं सकती इसलिए तुम मान जाओ
07:42दिवाख खराब होगे इस लड़के का
07:48हुआ हुआ हुआ है
08:18कि अब तुम दोनों मान लो कि तुम दोनों तलाक शुदा हो गए हो
08:39कर दो
09:09कैसी हैं अप
09:28तिखावा करने की जरूरत नहीं है
09:34हम अभी भी वही अफसा है
09:38जिसे आपने आखरी बार देखा था
09:42आप से दिवानों की तरह मुहबत करने वाली
09:46अफसाप के बिन आपकी याद में भी नहीं जीपा रहे हैं
09:58अफसाप के बिन आपकी याद में भी नहीं जीपा रहे हैं
10:10कि जबसे आप गई है ना जिंदगी रुक सी गई है हमारी हमेशा हापी कि खाया अलोंगे खोई रहते हैं
10:20कि और अभी तक हापी की तस्निम पुरे कमरे को महिकाती है
10:33कि आप तो हमारी याद में कि सच में शायर बन गए
10:42हमारा यकीन मानिये का राहिल हम आपको आपसे ज्यादा याद करते हैं
10:57आपने तो नहीं पर हमने बहुत फोन कियें आपको
11:08पर आपने एक बार भी नहीं उठा है कैसे उठाते फोन कि जब भी घर में फोन बज़ता था हमें मालूम होता था कि आपी का फोन है
11:26मगर जो कुना हमने किया उसके बाद
11:31कि सुबान खोड़नों तो दूर की बात हम अपना चैर आपको दिखाने के काबिल नहीं रहे थे
11:40कि अफसा कुछ भी कीजिए मगर हमारी जंदगी में वापस आ जाए हम भी वहीं चाहते हैं राहिल
11:52अफसा हम जाते हैं कि आप निकाह लाला के लिए तयार हो जाएं
12:06कि अफसा होने का अफसा जो हमने किया उसे ठीक तो नहीं कर सकते मगर आप निकाह लाला करेंगी तो फिर से
12:32चाहिए हम एक साथ हो सकते देखो सिरक दो मैने की बात अब कर आप हम ऐसे तडभन के नहीं चीज सकते अफसा कि यह आप नहीं
12:46कि आपकी अम्मिन की जबान बोल रही है
12:50कि क्या कि हमारे राहिल कि हमारे राहिल assume हरे आफे एसी बात नहीं कर सकते
12:55से कित तक हम ने किया था हम्मिन ही हमारे कानुन की मांग अफ्जा है हम कानून नहीं बदल सकते और हम थे गरवालों को और शर्मिंदा नहीं कर सकते हम आप
13:11झी जल बोल रहे हैं are you
13:15को पिर गॉर देखो कानून बदलना इतना सान नहीं है एद हमारी बहलाय ही
13:20माफ कीजिए गराहिल पर हमें इसमें किसी की कोई भलाई नहीं दिख रहे हम ऐसे कैसे किसी किसी गेर इंसान के साथ निकाह कर ले रहा हैं आप उसे जानती हैं
13:42अब मैंने आपके नेकाहलाला की बात जैद से किया है आपकी दोस्त वहिदा उसके शोहर
13:52क्या है हाँ भोश्मित हो रहा है वाहिदा हमारी अच्छी सहेली थी और जैद को हम हमेशा अपना भाई मानते आए
14:09आपने हमें हैरान कर दिया है राहिल हमें लगाता की हम इतने दिनों बात अपने राहिल से मिल रहे हैं हम अपने जिस्म को आपके अलावा किसी और को चूने की इजासत कैसे दे दे रहे हैं
14:36तो क्या हमें खुश है मिल गी इस सब करके अब क्या है कि अपने लफ़सों को दों बापिस नहीं ले सकते हैं
14:46मुखर सिर्फाप ही हैं जो हमारे इस रिष्टे को बचा सकती हैं
14:53अब इस कानौन को नहीं बतल सकते हैं हम जानते हैं कि हम एक दूसरे के बिना धूरे हैं नहीं जी पाएंगे एक दूसरे के बिना
15:07देखो अफसा आप जाए जो भी फैसला ले हम आपसे बस इतना कहना चाहते हैं हम आपसे हमेशा महबबत करते थे
15:25और हमेशा करते रहेंगे फिर जाए आपका फैसला जो भी हो और हमें आप हमें
15:37माफ़ करते ना
15:56माफ़ करते ना
15:58कि हने को भोठी रस्ते
16:25अपने मिलन के भरसासिन की कांचली
16:32यूं तो घटाएं दे थी अपनी लगन के बारिश न परवो न अडले
16:45आँखों से जो बह रही है घटा नाम क्या दे से
16:54अब तो दिन नहीं रात का है गुआ रोशनी कब मिले क्या पता
17:09जो था कभी मेरे दे का जहूं पल में वो खो गया है ताहाँ
17:21से में में दर्द का करएं किस तरह हम जो ये बहता
17:33होगी है
17:39होगी हम है
17:45होगी हम
17:47अब जो जो पर दो महीने के लिए आपके साथ हैं, हलाला की मुद्दद खतम होती हैं, हम राहिल के पास चले जाएंगे, इससे साद़ आप हमसे कोई उम्मीद मत रखिएगा, आप हमारे जिसम को तुछ हू सकते हैं, पर हमारी रूपर सिर्फ और सिर्फ राहिल कहा के हैं, उ
18:17उससे साद स्जाएंगे, इससे समें सकते हैं, झाथैंल हूस से बदाएंगे, इससे साद आप pozwval सू बाहित क जो by ललता हैं, ऑाला के हैं, उससे साद बभस के बवादे आप साद
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