00:00शापित पुल की रहस्य भरी रात
00:02कहते हैं, शहर के बाहर एक पुराना लकडी का पुल है, काला पुल.
00:08लोग उसे श्रापित मानते हैं.
00:10कहते हैं, जो भी प्रेमी उस पुल से रात के वक्त गुजरते हैं,
00:14वो या तो गायब हो जाते हैं, या फिर उनके बीच में ऐसी नफरत पैदा हो जाती है,
00:19कि वो कभी साथ नहीं रह पाते.
00:21बहुत समय पहले, एक लड़की, समीरा, और एक लड़का, विवेक, एक दूसरे से बेपनाह मोहबबत करते थे.
00:29दोनों कॉलेज में साथ पढ़ते थे, पर उनके घरवालों को उनका रिष्टा मनजूर नहीं था.
00:35एक दिन दोनों ने फैसला किया कि वे घर छोड़कर भाग जाएंगे.
00:40रात के अंधेरे में, वे अपनी बाइक से उस पुल की ओर निकले, जो शहर की सीमा के पार था.
00:46जैसे ही वे काले पुल के पास पहुँचे, हवा में अजीब सननाटा चा गया.
00:51समीरा ने विवेक का हाथ पकड़ा और कहा, क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा?
00:55विवेक ने मुस्कराते हुए कहा, डर सिर्फ तुम्हारे बिना जीने से लगता है, इस पुल से नहीं.
01:02और समीरा के चेहरे पर मुस्कान नहीं थी, उसकी सांसें तेज हो गई.
01:07उसे ऐसा लगा जैसे कोई उनके पीछे पीछे चल रहा हो.
01:10उसने पलट कर देखा, कोई नहीं था.
01:13विवेक ने बाइक रोकी, क्या हुआ?
01:17वो मुझे किसी लड़की के रोने की आवाज आई, समीरा ने कांपती आवाज में कहा,
01:21यहां कोई नहीं है समीरा, यह तुम्हारा वहम है.
01:25विवेक ने उसे बाहों में भर लिया, उसका स्पर्श गर्म था,
01:29लेकिन समीरा के जिस्म पर एक ठंडी लहर दोड़ गई.
01:32उसने कहा, चलो यहां से चलते हैं, यह जगह, अजीब है.
01:37उसी समय पुल पर एक सफेद साड़ी में लिप्टी हुई,
01:39लंबे बालों वाली एक औरत दिखाई थी.
01:42वह सीधा उनकी ओर देख रही थी.
01:45उसकी आँखें लाल और चमकदार थी.
01:48विवेक ने जटके से समीरा को बाइक पर बिठाया और गाड़ी स्टार्ट की.
01:53पर इंजन स्टार्ट नहीं हुआ.
01:55औरत अब उनकी ओर बढ़ रही थी.
01:57समीरा ने घबरा कर विवेक का चहरा चूमा और कहा,
02:01अगर आज आखिरी रात है,
02:03तो मैं तुम्हें अपने होटों का स्वाद देना चाहती हूँ.
02:06विवेक ने उसकी कमर थामी और वे एक पल के लिए भूल गए
02:09कि मौत उनके इतने करीब थी.
02:12जैसे ही उनके होट एक दूसरे से मिले,
02:15हवा और ज्यादा ठंडी हो गई.
02:17एक साया उनके चारों और घूमने लगा.
02:20बाइक अपने आप चलने लगी और पुल के दूसरी और पहुँची.
02:23वे दोनों कुछ देर के लिए बेहोश हो गए.
02:27जब आँख खुली, तो वे एक जोपड़ी में थे.
02:30सामने एक बूढ़ी और पैठी थी.
02:33उसने कहा, तुम लोग बच गए, लेकिन कईमत तो चुकानी पड़ेगी.
02:38कौन हो तुम? विवेक ने पूछा.
02:40मैं वही हूँ, जो कभी इस पुल से अपने प्रेमी के साथ गुजरी थी.
02:45लेकिन उसने मुझे धोखा दिया.
02:47मैंने यहीं आत्मात्या की.
02:49तब से इस पुल पर जो सच्चा प्रेम करता है, उसे मैं शाप देती हूँ.
02:53पर तुम दोनों ने एक दूसरे के लिए जान देने की हिम्मत दिखाई है.
02:59तुम्हारे प्यार ने मुझे भी मुक्त कर दिया.
03:02अचानक हवा में गूंचती चीखें शान्त हो गई.
03:05बाहर देखा तो काले पुल पर धुंद छट गई थी.
03:09विवेक और समीरा ने उस रात एक दूसरे को और भी गहराई से चाहा.
03:14वे एक दूसरे की बाहों में खो गए.
03:16समीरा की सांसें धीमी धीमी चल रही थी.
03:19और विवेक की आँखों में केवल प्यार था.
03:22डर नहीं.
03:23सुबह होने पर वे दोनों शहर लोट आए.
03:27लेकिन आज भी अगर कोई प्रेमी उस काले पुल से गुजरता है और उनके इरादे सच्चे हों,
03:33तो सफेद साड़ी वाली औरत उन्हें बस देखती है.
03:36और मुसकरा कर अद्रिश्य हो जाती है.
03:39शापित पुल की रहस्य भरी रात भाग दो.
03:43लोट आया शाप.
03:44उस रात के बाद समीरा और विवेक की जिन्दगी बदल गई.
03:48वे अब और भी करीब आ गए थे.
03:51प्यार में लिप्टे हुए, दोनों ने सोचा था कि अब सब कुछ ठीक हो गया है.
03:55मगर काले पुल ने अब भी उन्हें पूरी तरह आज़ाद नहीं किया था.
03:59रातें फिर से अजीब होने लगी थी.
04:02विवेक को सपनों में वो सफेद साड़ी वाली औरत दिखाई देती.
04:06कभी वो उसके कान में कुछ फुस फुसाती,
04:08कभी समीरा के गले पर हाथ रखती,
04:11और कभी उसके बेहद पास आकर सिर्फ इतना कहती,
04:14अब मेरी जगह कोई और लेगा.
04:17एक रात जब बारिश तेज हो रही थी,
04:20समीरा अकेली घर में थी.
04:22बिजली बार-बार कट रही थी.
04:24वो खिड़की के पास बैठी थी
04:25और अजीब सी बेचैनी महसूस कर रही थी.
04:28अचानक बाहर काले बादलों के बीच
04:31उसे पुल की परचाई दिखाई दी.
04:33वही पुल,
04:34जो शहर से मीलों दूर था.
04:36लेकिन वो च्छाया जैसे उसके घर तक ही चाई थी.
04:39उसके मोबाईल पर मैसेज आया,
04:41मुझे मदद चाहिए,
04:43पुल पर आओ, अभी.
04:45विवेक समीरा ने बिना कुछ सोचे,
04:46रेनकोट पहना और स्कूटी उठा कर चल दी.
04:50बारिश तेज थी,
04:51मगर दिल की धड़कने और भी तेज.
04:53जब वह काले पुल पर पहुँची,
04:55वहां सिर्फ अंधेरा था.
04:57दूर से किसी के चीखने की आवाज आई.
04:59विवेक, समीरा चीखी.
05:02कोई जवाब नहीं आया.
05:03फिर अचानक अंधेरे से एक साया निकला.
05:06उसके कपड़े गीले थे,
05:08बाल बिखरे हुए थे,
05:09चहरा साफ नहीं दिख रहा था.
05:11कौन है?
05:12समीरा ने कांपती आवाज में पूछा.
05:14वो साया बोला,
05:16मैं वही हूँ,
05:17जिसकी जगे अब तुमने ली है.
05:19समीरा की चीख निकल गई.
05:21तभी किसी ने उसका हाथ पीछे से पकड़ लिया.
05:24वो विवेक था.
05:25तुम यहां क्या कर रही हो?
05:27उसने पूछा.
05:28तुमने मैसेज किया था.
05:30समीरा बोली.
05:31मैंने?
05:32नहीं समीरा.
05:33मैंने कोई मैसेज नहीं किया.
05:35मैं तो तुम्हें ढूंड रहा था.
05:36क्योंकि तुम घर से गायब थी.
05:38दोनों ने एक दूसरे की आँखों में देखा.
05:41और तभी,
05:42वो साया हवा में तेरता हुआ उनके सामने आ गया.
05:46अब उसका चेहरा दिख रहा था.
05:48वो कोई औरत नहीं थी.
05:50बलकि समीरा ही थी.
05:51वही आँखें, वही होट,
05:53वही साड़ी जो आज सुभह समीरा ने धोकर सूखने डाली थी.
05:57ये, ये क्या है?
05:59विवेक पीछे हट गया.
06:00और समीरा समझ चुकी थी.
06:02ये मेरी परच्छाई है.
06:03उस भूतिया समीरा ने असली समीरा की ओर देखा और कहा,
06:11तुमने मेरे दर्द को छू लिया.
06:14अब तुम्हें मेरी जगहे लेनी ही होगी.
06:16ये पुल, प्रेमियों की कबरगाह नहीं.
06:19उनके पुनरजन्म की जमीन है.
06:21अब तुम मेरी तरह बनोगी और मैं मुक्त हो जाऊंगी.
06:25विवेक ने समीरा को कसकर पकड़ लिया.
06:28मगर समीरा की सांसें अब भारी हो रही थी.
06:31उसके होंट नीले पढ़ने लगे.
06:34शरीर बर्फ जैसा ठंडा हो गया.
06:36नहीं, तुम उसे नहीं ले जा सकती.
06:38विवेक ने चीखते हुए समीरा को बाहों में जकड़ लिया और चूम लिया.
06:44वो चुम्बन सिर्फ प्रेम नहीं था.
06:46वो एक अंतिम वादा था.
06:48एक आत्मा को रोकने का प्रयास.
06:50लेकिन देर हो चुकी थी.
06:52समीरा ने आँखें खोली.
06:54मगर अब वो समीरा नहीं थी.
06:57उसकी आँखें लाल हो चुकी थी.
06:59उसने धीरे से फुस फुसाया.
07:01अब मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूंगी.
07:03हर पल, हर रात, हर सांस में.
07:07विवेक पीछे हट गया.
07:08समीरा की मुस्कान अब इनसानी नहीं थी.
07:10उसने धीरे धीरे पुल की रेलिंग पार की
07:13और हवा में लहराती हुई बोली.
07:16अब मेरी कायद शुरू होती है.
07:18लेकिन सिर्फ शरीर में नहीं.
07:20रिष्टों में, भावनाओं में, प्रेम में.
07:23उसके बाद वो गायब हो गई.
07:25विवेक वहीं पुल के किनारे बैठा रहा.
07:28पूरी रात.
07:29अकेला भटकता हुआ.
07:31सुबह जब पुलिस ने उसे ढूड़ा,
07:33वो बस एक ही बात कह रहा था.
07:35वो मेरी थी, पर अब वो मेरी मौत है.
07:39अब भी, अगर कोई लड़की उस पुल पर
07:41रात के वक्त अपने प्रेमी के साथ जाती है,
07:44तो एक छाया उनके दिल में उतर जाती है.
07:47कभी न दिखने वाली,
07:49पर हमेशा महसूस होने वाली.
07:51एक साया, जो अब समीरा के नाम से जानी जाती है.
07:55भाग तीन, अंतिम रात्रे,
07:57प्रेम या पुनरजन्म विवेक,
08:00अब वैसा नहीं रहा था.
08:02समीरा के खो जाने के बाद,
08:03उसकी आँखों में नींद नहीं बची थी,
08:06और दिल में कोई उम्मीद नहीं.
08:08वह हर रात उसी पुल पर जाता,
08:10समीरा को पुकारता,
08:11और फिर सन्नाटे में उसकी गूंज सुनकर तूट जाता.
08:15एक दिन, जब उसकी हालत बहुत बिगड़ गई,
08:18एक वृद्ध साधू उसके पास आया.
08:20तुम्हारा दिल तूटा है,
08:22पर आत्मा अभी भी उससे जुड़ी है,
08:24साधू ने कहा,
08:25विवेक रो पड़ा,
08:27वो मरी नहीं है बाबा,
08:29वो मेरे अंदर है,
08:30मेरी सांसों में,
08:32पर अब वो इनसान नहीं रही.
08:34साधू ने चुप चाप अपनी पोटली से,
08:36एक तांत्रिक ग्रंथ निकाला,
08:38एक ही उपाय है,
08:40प्रेम की आत्मा को या तो पूरी तरह मुक्त करो,
08:42या फिर उसे अपने साथ ले जाओ,
08:45सदा के लिए.
08:46कैसे?
08:47विवेक ने कांपती आवाज में पूछा,
08:50इस काले पुल के नीचे एक पुराना मठ है,
08:53जहां कभी बली दी जाती थी.
08:55वहां अगर तुम उसका नाम लेकर प्रेम पूर्वक उसे बुलाओ,
08:59तो वो जरूर आएगी.
09:00पर ध्यान रहे,
09:02अगर तुम्हारा प्रेम सच्चा नहीं हुआ,
09:04तो वो तुम्हें वहीं खा जाएगी.
09:06विवेक ने सहमती में सिर हिलाया.
09:09अगली रात अमावस्या थी.
09:11हवाएं बहुत तेज थी,
09:13आसमान में कोई तारा नहीं था.
09:15विवेक ने मठ में दिया जलाया,
09:17समीरा की तस्वीर रखी और आँखें बंद कर ली.
09:20समीरा, मैं वहीं विवेक हूँ,
09:23जो तुम्हें आज भी उसी तरह चाहता है,
09:25जैसे पहले दिन चाहा था.
09:27तुम्हारी हर सांस मेरी धड़कन है.
09:29आओ समीरा, लौट आओ.
09:32धीरे धीरे मठ की दीवारें कांपने लगी.
09:34एक जोरदार चीख गुंजी.
09:37और वहां अंधेरे के बीच से समीरा की आत्मा प्रकट हुई.
09:40पर अब वो वैसी नहीं रही थी.
09:43उसके कपड़े काले हो चुके थे.
09:45आँखों से खून टपक रहा था.
09:47और उसकी चाल एक जिन्दा लाश की तरह थी.
09:50तुमने मुझे बुलाया.
09:52क्यों?
09:53उसने गुराते हुए पूछा.
09:55विवेक ने डर को दबाते हुए कहा.
09:58ताकि तुम्हें मुक्त कर सकूँ.
10:00ताकि तुम्हें फिर से प्यार कर सकूँ.
10:02इंसान बना कर आत्मा नहीं.
10:05समीरा उसकी ओर बढ़ी.
10:06प्यार, तुमने मुझे छोड़ दिया था.
10:09नहीं, तुम गई थी.
10:11पर मैं अब भी तुम्हारा हूँ.
10:13अगर तुम्हें मुक्ती नहीं चाहिए,
10:15तो मुझे भी अपने साथ ले चलो.
10:17इस जीवन से, इस शरीर से.
10:20विवेक ने समीरा का चहरा थामा,
10:22और बिना डरे उसके होठों को चूम लिया.
10:25वो चुम्बन सिर्फ प्रेम नहीं था,
10:27बलकि एक सौदा था.
10:29जीवन के बदले जीवन.
10:31समीरा की आत्मा कापने लगी.
10:33उसकी आँखों में नमी आ गई.
10:35हवा रुख गई.
10:36तुम्हारा प्रेम अब भी जीवित है,
10:38तो मैं भी जीवित हो सकती हूँ.
10:40उसने फुस्फुसाया.
10:41साधू मंदिर के द्वार पर खड़ा सब देख रहा था.
10:44उसने मंत्र पढ़े.
10:46अगनी भभक उठी.
10:47तभी समीरा की आत्मा तेजी से घूमने लगी.
10:51उसकी चीखें आकाश में गूँजने लगी.
10:53पूरा मठ रोशनी से भर गया.
10:55विवेक ने आँखें बंद की.
10:57और फिर सब शान्त हो गया.
11:00सुभा का सूरज चमक उठा था.
11:02पुल अब पहले जैसा नहीं था.
11:04वो काली पर छाईया, वो डरावना साया.
11:07सब चला गया था.
11:08विवेक मंदिर के द्वार पर गिरा पड़ा था.
11:11जब उसकी आँख खुली,
11:12तो सामने एक लड़की खड़ी थी.
11:14सफेद सूट में, बाल बंदे हुए,
11:16आँखों में वही मासूमियत.
11:18समीरा, विवेक ने दबी आवाज में पूछा.
11:22लड़की मुस्कराई.
11:23हाँ विवेक, अब मैं फिर से जिन्दा हूँ.
11:27दोनों ने एक दूसरे को गले लगा लिया.
11:29आंसू बहते रहे.
11:31उस दिन के बाद,
11:32काला पुल सिर्फ एक आम पुल रह गया.
11:34न कोई परच्छाई,
11:35न कोई आत्मा.
11:37लेकिन कहते हैं,
11:38अगर किसी का प्रेम सच्चा हो,
11:40तो वह मौत को भी जीवन में बदल सकता है.