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00:30इस घनी जंगल के अंदर खुश जाते हैं, इसमें कोई गुफा होगी, उसी गुफा में हम लोग चले जाएंगे, तीनों उस काली परी को चक्मा दे कर जंगल के अंदर किसी गुफा में खुश गए, ये तीनों कहां चली गई, खुद को जादूई जल परियां कहती हैं और म
01:00परियर तक उस काली परी से नहीं छुप सकते, वो हमें किसी न किसी तरह ढूंडी निकालेगी, ऐसा करते हैं इस जादूई छडी को हम एक बच्ची के रूप में बदल देते हैं, हाँ, ये सही रहेगा बहन, दोनों चुपके से बाहर निकली, बाहर निकल कर तीनों ने उस
01:30अंदर ये वो तीनों समा गई, अभी तो ये तीनों यही कहीं भटक रही थी, अचानक कहां चली गई, आखिर कब तक बचोगी तुम तीनों मुझसे, वो छोटी सी बच्ची उसी जंगल में पड़ी रही, सुबह सुबह एक गरीब किसान वहां लखनी काटने आया, तो उस
02:00तो मैं अपने सारे दुख दर्द भूल गया, मैं इसे ममता के पास लेकर जाता हूँ, वो बहुत खुश हो जाएगी, मोहन अपने सारा काम धिम्दा छोड़ कर उस बच्ची को अपनी जोपड पटी के अंदर ले आया, ये किसकी बच्ची उठा लाए तुम, बच्चा चो
02:30दोनों पती-पत्नी उस बच्ची के साथ खेलने लगे, वो बच्ची भी खुश थी, कहते हैं उपर वाला जब देता है तब छपपर फाड़ कर देता है, ये तो बिलकुल परी लग रही है, इसकी आँखे तो देखो
02:40हाँ ममता, मुझे भी कुछ अजीब लग रहा है, एक अंजान आदमी की गोद में आकर इस बच्ची को रोना चाहिए, ये वेचारी वहाँ अकेले जंगल में पड़ी थी, फिर भी मुस्कुरा रही थी, मुझे तो लगता है ये किसी परी की संतान है
02:51किसी की भी संतान हो, आज से ये हमारी संतान है, अगर इतनी ही फिकर थी तो इसे छोड़ कर क्यों जाती, फिर एक रोज वो तीनो जादूई जलपरियां मोहन के घर के उपर से गुजर रही थी, तो उनकी नजर उस बच्ची पर पड़ी, वो देखो वो देखो, हमारी जा�
03:21बहुत सालों बाद मिली हो, लेकिन आज मैं तुम तीनों को छोड़ूंगी नहीं, जलदी से बताओ तुम्हारी जादूई छड़ी कहा है, तीनों जलपरियों ने एक दूसरे की तरफ देखा, चानक वहां से भागने लगी, काली परी भी पीछे पीछे भागने लगी, भा
03:51ऐसे ही समय बीता गया और वो बच्ची पांच साल की हो गई, मोहन और ममता ने उसका नाम परी रख दिया, ऐसे ही समय बीत रहा था, फिर एक दिल, ममता हम दूसरों के खेतों में काम करते हैं, फिर भी उतना नहीं कमा बाते की, अपनी बेटी को पढ़ा लिखा सकें, हमारे
04:21कर रहे हो।
04:51मैं अपनी बेटी को छुपा कर रखना होगा, वरना किसी गलत हादों में लग गई तो लोग इसका फायदा उठाएंगे, बेटी तु हमें छोड़ कर कभी जाएगी तो नहीं ना, पापा मैंने जब से होश संभाला है, आप दोनों को ही अपने माता-पिता की रूप में द
05:21जरूर कोई ना कोई जोल है, पता करना होगा, काली परी नदी के किनारे एक पेड़ पर छुप कर बैट गए, रात में तीनों जलपरिया नदी से बाहर निकली, अच्छा हुआ हमने अपनी जादूई छड़ी को एक इनसान की बच्ची के रूप में बदल दिया था, जो कि
05:51आप तीनों तो देखने में जलपरी लग रही हैं, हाँ, हम तीनों जलपरिया हैं, जिसको तुम अपनी बेटी समझ रहे हो, वो हमारी जादूई छड़ी है, हमने अपनी जादू से उसे इंसानी बच्चा बना दिया था, क्योंकि उसे खत्रा था, अब हम उसे लेने आए ह
06:21दरसल तुम्हें एक जादूई छड़ी हो, तुम्हें अपने पुराने रूप में वापस आना होगा और हमारे साथ चलना होगा, इतने मैं पीछा करते करते वहां पर काली परी पहुँच गई, हाँ, हाँ, हाँ, हाँ, जिसका मुझे सालों से इंतसार था, वो आज मिली ग
06:51चलने वाली बेटी, देखो मेरा कमाल, काली परी परी ने अपने जादू से मोहन की बेटी, परी को चारू तरफ से रसी से बांद दिया, शायद तुम भूल गई, जो जादू तुम यहां दिखा रही हो, उसी जादू में मैं अपनी जिंदगी बिता रही हूँ, मैं खु�
07:21परी ने अपने मुह से एक फूप मारी, जिससे काली परी धुवा बन कर गायब हो गई, जो काम आज तक हम जल परिया नहीं कर पाई, वो काम तुमने कर दिया बेटा, अब मजबूरन हमें तुम्हें फिर से जादुई छड़ी बना कर अपने साथ ले जाना होगा, मैं अपने
07:51कलावती अपने दो बेटों, सूरज और सुबोत के साथ जैपूर में रहती थी, उसने अपने बेटे सूरज की शादी एक बहुत ही सुन्दर लड़की प्रीती से करवाई थी, प्रीती बहुत ही खूपसूरत थी, लेकिन खूपसूरत होने के साथ साथ वो घमंडी भी थी
08:21कि बिलकुल चांद का टुकडा है ये, तू देखना सुबोत, मैं तेरे लिए भी प्रीती जैसी सुन्दर लड़की लाऊंगी, फिर देखना, सब रिष्टेदार कैसे हमसे जलते रह जाएंगे
08:33लेकिन मा, रंच से क्या फर्क पड़ता है, इंसान का मन सुन्दर होना चाहिए
08:37चुप कर तू, तुझे कुछ नहीं पता, बाहरी सुन्दरता कितनी जरूरी है आज के जमाने में, और मा सुन्दर होगी, तभी तो आने वाला बच्चा भी सुन्दर होगा
08:47ऐसे ही कुछ समय बीच जाता है, सुबोध अच्चे से जानता था कि उसकी मा उसकी शादी एक काली लड़की से कभी नहीं करवाएगी, इसलिए वो बिना किसी से कुछ कहे
08:56एक रोज अपनी पसंद की काली लड़की कोमल को ब्याह कर घर ले आता है, काली बहु को देखकर कलावती का पारा साथवे आसमान पर चढ़ जाता है
09:05ये सुनकर नई बहु को बहुत बुरा लगता है, लेकिन अपने बेटे की खुशी की खाते, वो उस काली बहु को अपने घर में रख लेती है
09:24ऐसे ही समय बीटता है, कोमल भले ही काले रंग की थी, लेकिन वो सर्वगुन समपन्न थी, लेकिन कोमल के काले रंग के आके कलावती को उसके सभी गुन भी बेकारी लगते थे
09:35कुछ दिन बाद कलावती की ननत के बेटे की शादी थी, सब लोग उसकी तैयारी में लगे हुए थे
09:40प्रीती बहु, तू तो शशी की शादी में कोई साभी रंग पहन, तुझ पर तो हर रंग खिलता है
09:46लेकिन तू काली बहु, जरा ढग के कपड़े पहन कर जाना और अच्छे से तैयार होना
09:51वहाँ सब रिस्तेदार आएंगे, मेरी नाक मत कटवाना, अपने इस काले रंग को लीपा पोती से जितना ढख सको ढख लेना
09:58कलावती की आदत थी, वो अपनी बड़ी बहु प्रीती और कोमल दोनों में ही फर्क करती थी
10:03और इस बात से कोमल हमेशा दुखी रहती थी
10:06अगर मेरा रंग काला है, इसमें मेरी क्या गलती है
10:10मैंने कभी भी इस घर की अच्छी बहु होने में कोई भी कसर नहीं छोड़ी
10:14उसके बाद भी प्रीती भावी को इतना सम्मान मिलता है
10:17और मुझे इतना नीचा दिखाया जाता है
10:20अगले दिन सब शादी में पहुँचते हैं
10:23प्रीती भावी मेरी एक हैल्ट करो
10:26सुर्मा भराई के रीट के वक्त आप कोशिश करना कोमर भावी कैमरे में ना आने पाई
10:30तो मेरी शादी की सारी अल्बम की फोटोज और शादी की वीडियोज खराब हो जाएंगी
10:34चिंता मत करो देवर जी
10:36मैं उसे आपकी घोडी के आसपास भी नहीं फटकने दूँगी
10:39प्रीती भावी वो बॉआ जी ने देवर जी के लिए सुर्मा भराई रस्म के लिए भीज़ा है
10:43देवर जी लगवा लेते
10:45प्रीती भावी मेरे लिए ज़रा एक गिलास पानी मंगवा देते
10:48कोमल ज़रा देवर जी के लिए गिलास पानी ले आओ
10:51कोमल को पानी लेने भेज़ कर पेती बाराथ के भीड में रस्म पूरी करके
10:56सब रिष्टेदारों के साथ फोटो की चुआती है
10:58इसनी देर में कोमल आ जाती है और उसकी आँखे आसों से भर आती है
11:03मेरे पहर में थोड़ा दर्द है मैं बाराथ के साथ चल नहीं पाऊंगी
11:07मैं सोच रही थी गाड़ी में बैठ जाती हूँ
11:09कोमल अपने आसों को चुपाए गाड़ी में बैठ जाती है
11:13अब तो कोमल रोजाना इन सब बातों से बहुत दुखी रहने लगी थी
11:17एक सुबा
11:17मा जी मैं जरा बाजार होकर आती हूँ
11:21मुझे कुछ जरूरी सामान लाना है
11:23घर से बाजार के लिए निकल तो आई उपर
11:27वापिस घर जाकर दुबारा सबके ताने सुनने की अब मुझ में
11:30हिम्मत ही नहीं रह गई है
11:31कुछ समझ नहीं आरा क्या करूँ
11:33काले रंग से मुक्ती पाओ
11:35गोरे होकर यहां से जाओ
11:37ये कैसे हो सकता है
11:39देखूं क्या एक बार
11:40ये तो कोई दरपन की दुकान दिखाई पड़ती है
11:43हर तरब दरपन ही दरपन है
11:44आओ, माया की पोटली में सब कुछ मिलेगा
11:48आपने वो बाहर कुछ लिखा हुआ था
11:51क्या वो सच है
11:52काली से गोरी कर दूँगी मैं तुम्हारी काया
11:56नाम है मेरा माया
11:57तुम्हें काला रंग पसंद नहीं क्या
11:59नहीं, मुझे अपने इस रंग से बहुत प्यार है
12:03पर मेरी सासूमा और जेठानी मेरे काले रूप रंग का मजाग उडाती है
12:07मैं तंग आ गई हूँ
12:08मुझे भी सुन्दर और गोरा रूप चाहिए
12:10मेरी मदद करो
12:11माया कोमल को जादूई दर्पन के अंदर भेश देती है
12:33और कुछ तेरबाद वो से वापस बुलाती है
12:36और देखते ही देखते
12:37कोमल का काला रंग गायब हो जाता है
12:40और कोमल गोरे रंग की बन जाती है
12:42ये मैं हूँ
12:44मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है
12:46मैं इतनी सुन्दर बन गई
12:47अब तो मेरा मुकाबला कोई नहीं कर पाएगा
12:50सासुमा और जेठानी जी तो देखती रह जाएंगी
12:52आपका बहुत बहुत धन्यवाद माया जी
12:54मैं आपका ये एहसान कभी नहीं भूलूँगी
12:57माया के जादूई दरपंट से
12:59गोरा रंग रूप पाकर कोमल बहुत खोश हो जाती है
13:02सारे मुहले वाले भी उसे देख कर हैरान रह जाते है
13:05ये कलावती जी की बहुत कोमल है न
13:08ये सुन्दर कैसे बन गई
13:09इसका रंग तो बहुत काला था
13:11और ये तो बहुत ही गोरी हो गई
13:13जैसे अभी दूद से नहा कर आई हो
13:15सच मुच बेहन
13:17ये तो मानो चांदी सी गोरी हो गई है
13:19जैसे कोई चमतकार हो गया हो
13:21उल्टे तवे जैसी काली थी, पर इसे देखकर तो लगता है, पूरे महले में इससे सुन्दर कोई है ही नहीं
13:28नमस्ते आंटी जी, पहचाना मुझे, मैं कोमल हूँ, इतने हैरान होकर क्यों देख रहे हूँ?
13:34कोमल घर के अंदर जाती है
13:36हाँ जी, किस से मिलना है? आप कौन है?
13:40ये इतनी सुन्दर औरत कौन है? सरा देखो तो
13:43मा जी, मैं कोमल हूँ, आपने मुझे पैचाना नहीं
13:46कोमल, तू इतनी सुन्दर कैसे हो गई? और तेरा रंग गोरा कैसे हो गया?
13:51तू बाजार गई थी या दूसरे लोग से दुबारा जनम लेकर आई है
13:55कोमल, आखिर कौन सा चिराग का जिन्न मिल गया जिसने तुम्हारी काया ही बदल दी?
14:00आप लोगों को आम खाने से मतलब है या गुटलियां गिनने से?
14:03जब काला रंग था तब आप लोग परिशान थी
14:05आज जब मेरा रंग गोरा हो गया है, मैं सुन्दर हो गई हूँ
14:08तब आप दोनों को परिशानी है, वैसे मैं अल्रेडी बहुत थक गई हूँ
14:12अब मेरा दिमाग खराब मत कीजे
14:14और हाँ, पृती भाबी, जब आप पुलाओ बनाओगी तो थोड़े मतर जादा डाल देना
14:18पता नहीं, आज कर आपको मतर चलने में इतना आलस क्यों आता है
14:21माजी, जरा मेरी साड़ी प्रेस कर दीजेगा, मुझे शाम को एक पार्टी में जाना है
14:25ये कोमल बहु ही है ना, कहीं उसकी जगा कोई दूसरी तो नहीं आ गई
14:30जिसके मुझे आवाज नहीं निकलती थी, आज तो वो सात्वे आसमान पर चड़ गई है
14:36और ये बाहर लोगों की भीड क्यों लगी हुई है, क्या काम है आप सबको
14:41मैंने सुना है आपकी बहु काली से गोरी बन गई है
14:44हमें भी तो दिखाएए, आपकी बहु ने ऐसा कौन सा उप्टन लगाया है
14:49कि कुछी घंटों में वो इतनी सुन्दर बन गई
14:51यहां कोई तमाशा नहीं लगा हुआ है, आप लोग जाएए यहां से
14:55कोई इतनी हूर की परी नहीं बनाई है जो महले वाले भी से देखने के लिए इतने उताबले हो रहे है
14:59कौन था माजी, मुझे किसी की आवाज आई थी, कुछ लोग मेर से मिलना चाहते थे
15:04महले वाले आए थे, तेरी सुन्दरता देखना चाहते थे
15:07कि ऐसा कौन सा जादू हो गया, जो तेरा काला रंग गोरा बन गया
15:11तो कोई बात नहीं माजी, देखने देते
15:14वैसे आज शेहर की कुछ न्यूस चैनल मेरा इंटर्व्यू लेने आ रहे है
15:18मैं मचानक आपने अपना हुलिया बदलने के बारे में कैसे सोचा
15:22बस मैं एक ही रंग रूप से उप गई थी, इसलिए अपने आपको बदल लिया
15:26वैसे आपके आगे और क्या प्लाने, आप मॉडलिंग वगेरे के बारे में सोच रही है
15:30जी, मौका मिलेगा तो जरूर करूंगी
15:33कोमल के बदलते हावभाव से कलावती और प्रीती परिशान हो रहे थी
15:38सुबोथ, वो मिसेस जैन के बेटे की शादी की सालगिरा है
15:42तो मुझे स्पेशल गेस्ट बुलाए है, अब चल रहे हो ना
15:45अब ये महरानी पार्टियां अटेंट करे और मैं घर के काम करूं
15:49मैं तो बहानी से माई के जाकर बैट रही हूँ, यहां तो सासु मा के साथ घर के काम कर करके पिसी जाओंगी
15:54अगली सुबह प्रीती अपनी मा की बिमारी का बहाना लगाकर पती सूरज के साथ माई के चली जाती है
16:01सुबोथ को भी किसी काम से शेहर से बाहर जाना था
16:03चलो अच्छा है, सुबूत भी काम से बाहर जा रहे है
16:14और भाईया भावी भी घर पर नहीं है
16:16आज अमा वस्या की रात है
16:17आज मैं अपने पुराने रूप में रहूँगी
16:19मा जी तो जल्दी सो जाती है
16:21तो उनको कुछ पता नहीं चलेगा
16:22बस ये रात कर जाए
16:24कल सुबा मुझे अपना सुन्दर रूप दुबारा मिल जाएगा
16:26सब लोग चले जाते है
16:28कोमल रात होते ही अपने कमरे में आ जाती है
16:30अच्छा है, मा जी चल्दी सो गई
16:32लगता है मेरा असली रंग वापस आ रहा है
16:35मेरे हाथ धीरे-धीरे काले हो रहे है
16:37अहां मेरा मुझ दुबारा पहले जैसा हो चुका है
16:39लगता है जादूई दर्पन के जादू का असर
16:42इस रात के लिए खत्म हो चुका है
16:43मैं वापस अपने रूप में आ गई हूँ
16:45अब सो जाती हूँ, सुबह होते ही मैं ठीक हो जाऊंगी
16:47अरे ये तो माजी आवाज लगा रही है
16:49कोई परिशानी तो नहीं है
16:51माजी, माजी, ए भगवान
16:53सिने में दर्थ, आह कोमल बहू
16:56लगता है माजी की तब्यत खराब हो गई है
16:58मुझे इन्हें अस्पतार लेकर जाना होगा
17:00कोमल कलावती को आटो में बिठा कर
17:02जल्दी से अस्पतार लेकर पहुच्चती है
17:04कुछ वक्त के पश्याद कलावती की
17:06हालत में सुधार आता है
17:07कलावती को अस्पतार लाने के चक्कर में
17:09कोमल ये भूल जाती है
17:11कि उस दिन अमावस्या की राथ है
17:12और उसे अपना असली रूप मिला हुआ है
17:14कलावती कोमल का असली रंग रूप देख लेती है
17:17कोमल रोकर कलावती को सारी बात बताती है
17:20मेरी प्यारी बहू, गल्पी तो हमसे हुई है
17:23तेरा तो मन बहुत साफ है
17:25तू तो मेरी जान बचाने की फिक्र में सब कुछ भूल गई
17:29तुझे तो ये भी याद नहीं रहा
17:30कि यदि किसी ने देख लिया तो तेरा जादू छिन जाएगा
17:34दुबारा कभी नहीं मिलेगा
17:35और इस सब का कारण मैं बनी
17:38माजी, आपकी जान से बढ़कर मेरे लिए कुछ भी नहीं है
17:42आप हो तो सब कुछ है
17:43उस दिन के बाद हर कोई कोमल की तारीफ करता है
17:46कोमल को भी समझा गया था
17:48कि दरपंड सिर्फ उपरी सुन्दरता बयान करता है
17:51और जो व्यक्ति मन से सुन्दर है
17:52उसकी हर जगा प्रशनसा होती है