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  • 2 years ago

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00:00आज तो कुछ ज्यादा ही गर्मी हो रही है उपर से यह साड़ी अब जल्दी से ओनलाइन तीन-चार कॉटन के सूट ओर्डर कर देती हो इन पूरी गर्मियों में कॉटन के सूट ही पैलूगी
00:08हाथों में कुछ सामान लिए पंक्ती जल्दी जल्दी घर आती है घर आते ही पंक्ती हॉल का एसी चालूग करके आराम से सोफे पर बैट जाती है
00:15अब जाकर थोड़ा सुकून मिला इस एसी की हवा में बैट कर रवीना रवीना जरा इगलास पानी लियाओ बहुत प्यास लग रही है
00:24ये लो पंक्ती ये क्या तुम नॉर्मल पानी लेकर आयो अरे मैं बाहर से आयो जरा ठंडा पानी तो लेकर आती
00:30लेकिन गर्मी में बाहर से आती ठंडा पानी नहीं पीते हैं
00:34अरे यार तुम क्यों बार-बार मुझे ग्यान देने लग जाती हो प्रीज ठंडा पानी लेकर आओ ना
00:38ॹविना किचन से थंड़ा पानी लेकर आती है और पंक्ती को देती है जिसे पीकर पंक्ती रिलैक्स होती है
00:44ॹविना भूरा को हरओध च्वरी चीजों का हमेशा काफी खयाल लगता था
00:53तो वहीं पंक्ती थोड़ी लापरवा थी, समय गुजरता है और अब गर्मी काफी जाधा बढ़ चुकी थी
00:58रवीना बहु आस तो तुने खाने में काफी बनाया है तो रही शिमला, मिर्च, पत्ता, गोबी की सबजी और आच चावल भी काफी सारे बनाये तुने
01:06गर्मी के मौसम नहीं तो तुने शिमला, खीरा गर्मी में ही फायदा करती है पता है इसमें भरपूर मातरा में पानी होता है और गर्मियों में तो अक्सर शरीर में पानी की कमी हो ही जाती है उसे पूरी करने के लिए हम तो हमेशा इसी तरह की सबजियां खाते है
01:18पंक्ती पहू, तु हर बार गेट की तरफ क्या देख रही है? चल खाना शुरू कर
01:23मैं यह सब नहीं खाऊंगी, मैंने अपने लिए अलग से गर्मियों का खाऊना ओरर किया है
01:27अब जब तक गर्मिया रहेंगी तो मैं तो वही खाऊंगी
01:29पंक्ती इतनी बोल ही रही थी कि तबी घर की डूर बैल बचती है
01:33पंक्ती जल्दी से दरवाजा कोलती है और डिलिवरी बॉय से अपना पार्सल लेकर वापस डैनिंग टेबल पर आ जाती है
01:39और अपना ओर्डर किया हुआ ग्रीन सैलड खाने लगती है
01:42अगर तुम्हें सलाद ही खाना तो तुम्हें बता देती बार्से मंगवानी की क्या जरूरत थी
01:47और ये तो दिखने में भी काफी महंगा लग रहा है कितने का मंगवाया तुमने ये
01:51सिर्फ चार सो रुपे का है और ये कोई ऐसा वैसा सैलड नीज के अंदर
01:56सब की बात सुनकर भी पंक्ती अपनी सलाद खाती है और साथ में जूस पीती है
02:17गर्मी के शुरू होते ही गाउं से आई रवीना गर्मी में खाए जाने वाले काफी सारे ठंडे ठंडे पकवान बनाती है
02:23जब से गर्मिया शुरू हुई है कुछ भी ठंडा पीने के लिए नहीं बनाया
02:27मैं एक काम करती हूँ आज सब के लिए सत्तू का शर्बत और आमपन्ना बना देती हूँ
02:31इन शहरी लोगों ने तो ऐसी चीज पी नहीं होगी
02:33जब गाउं का आमपन्ना और सत्तू का शर्बत पीएंगे न तो इन्हें गर्मी से असली राहत मिलेगी
02:38रवीन अपने गाउं के तरीके से सब के लिए सत्तू का शर्बत और आमपन्ना बनाती है
02:43जिसे पीकर उसके सस्राल वालों को काफी ज़्यादा अच्छा लगता है
02:47मैंने तो आज तक सिर्फ सत्तू के शर्बत के बारे में सुना था
02:50पहली बार पी रहूं ये काफी ज़्यादा तेस्टी है
02:53मैं जब अपनी नानी के गाउं जाया करती थी तो वो मेरे लिए हमेशा आमपन्ना बनाती थी
02:59आज मुझे रवीना बहु ने अपनी नानी के हाथ के आमपन्ने की याद दिला दी
03:03बहु अब जब तक गर्मी है तब तक तु हर रोज हमारे लिए आमपन्ना और ये सत्तो का शर्बत बनाना ठीक है
03:09रवीना भी अपनी सस्राल वालों के साथ बैट कर गर्मियों में इस थंडे थंडे शर्बत को इंजोई करती है
03:15तब ये पंक्ती बाहर से धेर सारी समर ड्रिंक्स की बोटल और साथ में एक ब्लैक वाटर बोटल लेकर आती है जिसे देख
03:22अरे पंक्ती बहु ये तु इतनी सारी जूस की बोटल क्यों लेकर आई है और ये तेरे हाथ में काले पानी की बोटल क्या करी है
03:28ऐसा लग रहे है जैसे इसके अंदर नाले का पानी भरा है
03:31मा जी ये सारे juice out of India के हैं और काफी जाता tasty और refreshing है
03:37summer's में इनकी काफी demand चल रही है और ये कोई गंदा पानी नहीं है बलकि ये तो है black water
03:43लेकिन पंक्ती तुम्हें black water लेने की क्या ज़रूरत थी?
03:46जानती होना ये कितना महंगा आता है? कम से कम एक बोतल पंदरा सो से दो हजार रुपई के बीच में होती है
03:52black water हमारे metabolism system को काफी अच्छा रखता है और body को detox भी करती है
03:59लेकिन सिर्फ पाचन क्रिया को सही करने के लिए तुमने इतने पैसे खर्च कर दिये
04:02अरी ये बोतल तो एक बार में ही खतम हो जाएगी
04:05पंक्ती अगर तुम्हें पाचन क्रिया सही करने के लिए ही कुछ पीना था तो मुझे बता दे थी
04:11पता है माजी हम हर गर्मियों के मौसम में अपने गाउं में मिट्टी के मटके में धेर सारा पानी डाल
04:15उसके अंदर चुकंदर, गाजर, आवला, नीमबू, पुदीना, धनिया डाल कर उसका पानी बना कर पीते थे
04:21और ये सारी चीज तो घर में भी रखी हुई है
04:24तुमने तो बेफाल तुम्हें इतने पैसे बरबाद करती है
04:27कोई पैसे बरबाद नहीं किये मैंने
04:29इतना कहकर पंक्ती अपनी सारी जूस की बोटल और ब्लैक बोटल लेकर अपने कमरे में चली जाती है
04:40आज रात के गर्मी के पकवानों में रवीना दही भले, पान ताभात और सब के लिए मठ्था बनाती है
04:46मा जी इसे पानता भात कहते हैं, पाड़ी लाकों में लोग बड़े चाव से इसे खाते है
05:04इस गर्मी में हमारे पेट को काफी ठंड़क देता है और सेहत के लिए भी काफी फाइदे मन है
05:09इससे बड़िया दही भले मैंने आज से पहले कभी नहीं गाई, और ये लसी आहा, क्या टेस्टी लसी बनाई है तुमने, आखरकार बीवी किसकी हो
05:18हरे ये सब तो मेरी बहु का कमाल है, मा जी तो कुछ भी नहीं है, कल तो मैं सोच रही हूँ कि आप लोगों के लिए पूरी और आमरस बनाऊं
05:26मुझे तो आमरस काफी पसंद है, जब छोटे थे तो हमेशे दादी मा बना कर दिया करती थी, लेकिन उनके जाने के बाद, आमरस तो पीना बंधी हो गया, कोई बात नहीं, कल का मुझे बेसबरी से इंतिजार है, मेरे लिए तो तुम 10-12 पूरी बना कर रखना
05:41गाउं की रहने वाली रवीना घर में ही मौझूद चीजों से अपने सस्राल वालों के लिए आए दिन कई तरह के थंडे-थंडे पकवान बनाती, कभी दही की सबजी, तो कभी मठा, तो कभी थंडे-थंडे शर्बत, वहीं दूसरी तरफ शहर की पंक्ती गर्मी में थंड
06:11चार हजार रुपए खर्च करके मौल से आम, स्ट्रॉवेरी, कीवी, तर्बूज और पपीता जैसे फल जिन्हें गर्मी में काफी खाया जाता है, उन्हें लेकर घर आती है, लेकिन जैसे उन सब को काट कर खाती है, तो वह सब काफी जादा फीके निकलते हैं, वह बाकी घ
06:41लाकर भी देता, तु तो बस पैसे उड़ाने में लगी हुई है, अपनी सास को जनम दिन पर तौफ़ा देने के लिए रवीना एक बड़ी सी दुकान से 5000 रुपई की साड़ी खरीद कर लाती है,
07:03माजी तो ये सारी देखकर खुश हो जाएंगी, अच्छा हुआ कि अपने गाउं के तरीकों से मैंने हमेशा अपने ससुराल वालों को ठंडे ठंडे पकवान खिलाए हैं, और अपने पती के पैसों की बचत की, तभी तो आज मैं माजी के लिए साड़ी ले पाई,
07:16अगर इनसे पैसे मांगे तो ये काफी गुस्सा करेंगे, उन्होंने मुझे जो भी पैसे दिये थे, वो सारे मैंने खत्म करती हैं, अब क्या दू मैं माजी को?
07:31शोभा के दोनों बेटे रात में बाहर से केक लेकर आते हैं, और अब शोभा सब के साथ मिलकर केक काटती है, केक काटने के बाद रवीन अपनी सास को अपनी लाई हुई साड़ी देती है, जिसे देख शोभा काफी खुश होती है, ये तो वही साड़ी है जो मैंने दिन में
08:01।
08:31पंक्ती की बात सुनकर घर में सभी लोग काफी खोश होते हैं जिसके बाद अब पंक्ती भी रवीना की तरह ही घर में गर्मियों में धेर सारे तरीके के ठंडे ठंडे ठंडे पकवान बनाती है
09:01और जितनी हो सके उतनी अपने पैसों की बचत भी करती है
09:04जब देखो शोर और गर्मी है भगवान ऐसा लगता है कुछ दिनों में मुझे कलस्ट्रोफोबिया हो जाएगा
09:10भाबी मेरा मैंगो शेक का है जल्दी से लाईए
09:14इन लोगों ने तो नाक में दम करके रख दिया
09:16पूरे महले में चार-चार मंजल के घर है लेकिन हमारा ही एक मंजल का घर है
09:20ना सुख ना शान्ती और प्रविसी नाम की तो चीज़ ही नहीं हाल आ रही हूं दो मिनट
09:26आखरकार क्यों अपने एक मंजल वाले ससराल में शालू इस कदर परेशान हो रही थी
09:31इसलिए क्योंकि इसके परिवार में जाड़ा लोग थे
09:34या फिर इसलिए कि उसे अपने पती के साथ बिताने का मौका नहीं मिलता था
09:38या फिर कोई और ही कारर था
09:41आई ये से जानने के लिए कहानी में थोड़ा पीछे चलते हैं
09:44मनरमा बहन पडोस वाली शांती बता रही थी कि आपकी बेटी का रिष्टा तै हो गया
09:49सुनने में आया है कि जहां उसका रिष्टा तै हुआ है
09:52सभी लोग बैट कर हौल में काफी देर बात करते हैं जिसके बाद अब कलावती अपने घर चली जाती है
10:19और शालू अपने कमरे में
10:20मनोर्मा और रंजीत दोनों अपनी बेटी से कुछ ऐसा चुपा रही थी
10:37जिसे जानकर शालू ये रिष्टा तोड़ सकती थी
10:39आखिर वो क्या चीज़ थी
10:41आई ये से जानने के लिए कहानी में बने रही है
10:43समय गुजरता है और शालू की अनुराग नाम के लड़के से शादी हो जाती है
10:47अनुराग शालू गाड़ी में बैट कुछ देर में
10:50चार मन्जिल के मकान से भरे एक बड़े से महले में पहुन जाते है
10:54थोड़ी देर में गाड़ी रुकती है और अब शालू और अनुराग गाड़ी से उतरते है
11:16उस चार मन्जिल वाले में बने एक मन्जिल वाले घर पर जाती है
11:20जिसे देख
11:50. . . . . .
12:18शालू इतना बोल ही रही होती है कि तब छालू की जीठानी के दोनों बच्चे शालू के कमरे में आ जाते है और बेट पर कूदने लगते है
12:26बच्चो ये तुम दोनों क्या कर रहे हो चलो उत्रो बेट पर से कोई ऐसे कूदता है क्या
12:30चाची आज हम आपके साथ ही सोईगे और कहलेंगे भी
12:33आपको कहानी आती है क्या?
12:34आप हमें कहानी सुना ना हमने मां को कहा दिया
12:36कि हम नहीं चाची के साथ सोईगे
12:38ए भगवान
12:39क्या मुसीबत है अब ये दोनों बच्चे के हमारे साथ सोईगे
12:42जिठानी जी को भी अकल नहीं है क्या एक मंजिल वाले घर में लाकर पचक दिया मुझे
12:46सब मेरी जिठानी के दोनों बच्चे मेरे साथ सोईंगे
12:49हो गई मेरी सुहाग रात
12:50शालू हमेशा से ही चार से पांच मंजिल वाले सस्राल चाहती थी
12:55सारे महले में सबी के कम से कम चार मंजिल के मकान थे
12:58वहीं शालू का सस्राल ही एकलोता ऐसा मकान था
13:01जो एक मंजिल का बना हुआ था
13:03उपर से शालू का परिवार भी काफी भरा पूरा था
13:06बापरे कितनी जादा गर्मी है इस एक मंजिल वाले मकान में
13:11अगर ये भी चार मंजिल वाला मकान होता तो चौधी मंजिल पर जाकर थंडी थंडी हवा खाती
13:17शालू हमने हॉल में AC लगा तो रखा है तुम हॉल में क्यों नहीं आ जाती आराम से AC की हवा खाना बैठ कर
13:25इतने बड़े हॉल में इकलौता AC होने की वज़ा से पूरा परिवाद 24 गंटे AC चला कर उसके सामने ही बैठा रहता जिसके चलते शालू अपने पंखे वाले कमरे में ही आकर बैठ जाती है
13:35घर में जादा लोग होने की वज़ा से आए दिन हमेशा किसी न किसी की बहस होती तो कभी अनामिका के बच्चे घर में शोर मचाते फिरते
13:44एक तो गर्मी से हालत खराब है और इन लोगों ने शोर कर करके सर में दर्द करके रख दिया है
13:49मेरे साथ टाइम स्पेन नहीं कर पाए तो क्या हुआ
13:59लेकिन मेरे मन पसंद खाने की चीज तो लेकर आते हैं
14:03अच्छा वो चिली पुटैटो ले आए अब जल्दी से इस प्लेट में डाल कर अपनी कमरे में ले जाती हूँ
14:07अगर किसी ने देख लिया तो मांग मांग कर खत्म कर देंगे
14:09शालू चिली पुटैटो छुपाते हुए अपने कमरे में उसे ले जा रही होती है
14:14कि तभी शालू की नंद आरती शालू को देख लेती है
14:17अरे वाओ भाबी चिली पुटैटो आपको पता है इमने चिली पुटैटो काफी पसंद है
14:22थोड़ा सा दीजे ना
14:24आरती आधी से जादा चिली पुटैटो लेकर अपने कमरे में चली जाती है
14:28तभी अनामेगा के दोनों बच्चे भी स्कूल से आ जाते हैं
14:31और शालू के हाथ में चिली पुटैटो देख उसे खाने की जिद करते है
14:35बिचारी शालू चिली पुटैटो का चिली तक नहीं खा पाती
14:38कुछी वक्त में शालू की आस पड़ोस में काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी
14:42here is a lot of extra fun
14:55it's only 4 menzils
15:00it's only 4 menzils
15:03why should you be able to do something
15:04outside of the room
15:05of the room
15:06it's only 4 menzils
15:08which is very uncomfortable
15:09it's very difficult
15:09इतना भी मुश्किल नहीं है एक बड़ी सी रसी पर थैला बांद के लटका लो जब भी सामान लाओ तो थैले में डाल दो और उपर जाकर थैला कीच लो मेहनत भी नहीं लगेगी और काम भी हो जाएगा
15:20अपने आसपास के चार मंजिल वाले मकान को देखकर जहां शालू खुश होती तो वहीं अपने एक मंजिल वाले सस्राल से शालू काफी परेशान हो रही थी
15:30शालू अपने कमरे में आराम कर रही होती है कि तब ही शालू की नंद उसे मैंगो शेक बनाने के लिए बोलती है
15:50अच्छा हुआ अब मैं इन पैसों से एक और मंजल का मकान बनाऊंगी और आराम से रहोंगी और एक महीने बाद तो मेरी जॉब लगी जाएगी तो दीरे दीरे लोन के पैसे भी चुका दूगी मैं मज़े से जब भी मकान के लिए बोलती थी तो उनके पास पैसे नहीं होते �
16:20में तो शालू आराम से दूसरी मंजल पर रह रही थी लेकिन अब जैसे जैसे दिन गुजरने लगते हैं तो उसे अब उस दूसरी मंजल वाले मकान से दिक्कत होने लगती है
16:28कभी अपने अकेले पन तो कभी उपर नीचे बढ़ते काम के चलते शालू काफी परेशान हो चुकी थी
16:56हर रोस की तरह शालू काम खतम करके अपने उपर वाले कमरे में सो रही होती है कि तब ही उसे अचानक अल्मारी के पीछे से अजीब सी आवाज आती है
17:04दर के मारे भागते हुए शालू नीचे आ जाती है
17:26और अब शालू एक बड़ा फैसला करती है अपने उपर वाले फ्लोर को शालू अब किराई पर दे देती है और पहले की तरह ही नीचे रहने लगती है
17:34कुछ दिनों में शालू ने जो जॉब के लिए अपलाई किया था वहां से भी उसे अप्रूबल मिल जाता है और अब शालू सुबह से शाम तक जॉब करती है और रात को आकर खानवाना बना कर आराम से सो जाती है

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