00:00एक द्यानदार लकड़हरा हारिस रोज जंगल से लकडियां काट कर गुजर बिसर करता था। एक दिन लकडियां काटते हुए इसे एक चमकता हुआ पत्थर मिला। वो फौरण इसे एक जोहरी के पास ले गया। जोहरी ने हैरत से कहा ये तो हीरे का कीमती तुकड़ा है त�
00:30उनके वालिद की निशानी था। हारिस ने फौरण वो पत्थर उन्हें लुटा दिया। बुजर्ग की आँखों में आंसू आ गया और इन्होंने धेरों दुआइं दें। रात को हारिस को खाब में एक फरिश्टा दिखाई दिया जो बोला। तुम्हारी सच्चाई अल्
01:00खाइं तो जा यॉए प्रिश दिया ग्राभर गया जिशाएं आपके दिया जो पत्वचाई वजा दिया जो पत्वचाई दिया जिस वेस्टा दिया खाई पकाई जोला दिया।
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