00:00अरे यार, क्या हुआ, अरे मेरी गर्फरेंट मुझे हमेशा English में मैसेज करती है, और तुझे तो मालूम है मेरी English कितनी खराब है, अब मैं जा करूँ,
00:07यू डिक्स्णरी अप डाउलोड कर, यू डिक्स्णरी अप ये कैसे हल्ग करेगा,
00:11अरे डिक्स्णरी अप में एक बहुत ही अमेजिंग फीचर है, Magic Translator, जो तुझे बस सेटिंग में जाकर इनेबल करना है, और उसके बाद अपनी गर्फरेंट के मैसेज में जाकर क्लिक कर, वो खुद से ट्रांसेट कर देगा, ओ वाव, बट मेरा ग्रामर भी कच्छा है यार
00:41हुई है और अपने इंग्लेश इंप्रोगी जिया है, चमतकारी बहु की लालची सास, राजगट की गौरी अपने माता पिता की इकलोती संतान थी, गौरी के पिता मैनत कश किसान थे, वो सारा दिन खेतों में काम करते, गौरी अपनी मा का किचन में हाथ बटाती, वो जं�
01:11अरे, यहां कौन रो रहा है, इस जंगल में भला किसी के रोने की आवाज, जरूर कोई जंगल में फस गया होगा, वो देखती है तो उसे एक परी दिखाई दीती है, जिसका एक पंक टूटा होता है, अरे, तुम कौन हो, और क्यों रो रही हो, मैं परी लोग की रानी हूँ
01:41लेकिन देखो न, मेरे पंक ही तोट गए, अब मैं कैसे उडान भरूँगी, अरे, इसे जोड़ना तो आसान है, रुको, मैं अभी जोड़ देती हूँ, यह कहकर गौरी लकडी और रसी की सहायता से पंको को जोड़ देती है, परी अपने जुड़े हुए पंको को देखकर
02:11इसे अगर उसने किसी इनसान को छू लिया, तो वो अगली पूर्णिमा तक सोने का ही रहेगा, गोरी घर आती है और सारी बात अपने माता-पिता को बताती है, गोरी की मा उसे कहती है, तू भी न गौरी, सारा दिन परियों की कहानिया पड़कर स्वपन लोग में ही रहती ह
02:41गौरी घड़े को जैसी ही हाथ लगाती है वो सोने का हो जाता है
02:45गौरी के माता पिता घड़े को देखकर हैरान रह जाते हैं
02:49अगले दिन गौरी के पिता उस घड़े को सुनार के पास बेचने जाते हैं
02:54तो रास्ते में उन्हें कंचा काकी मिलती है
02:57वो सोने का घड़ा देखकर गौरी के पिता से पूछती है
03:00अरे गौरी के बापू ये पीतल तो बड़ा चमक रहा है
03:05अरे काकी ये पीतल नहीं सोना है सोना बेजने ले जा रहा हूं
03:11अरे कहीं कोई लाटरी लग गई है क्या इतना सोना
03:15गौरी के पिता काकी को गौरी को परीद्वारा दिये वर्दान के बारे में बताते हैं
03:21काकी गौरी के पिता की बात सुनकर सोच में पढ़ जाती है
03:25और फिर अगले दिन काकी गौरी के घर आती है
03:28गौरी के बापु तुम्हारे लिए मैं खुश खबरी लाई हूँ
03:33तबी गौरी की मा पूछती है
03:35क्या खुश खबरी है काकी
03:37अरे तुम्हारी बेटी का रिष्टा
03:39मैं अपने बेटी से करना चाती हूँ
03:41अरे कब तक अपनी सयानी लड़की को
03:43घर पर बिठाकर रखोगी हाँ
03:45देखो काकी मैं ऐसे ही व्यक्ती से
03:48अपनी बेटी की शादी कराऊंगा
03:49जो गौरी के वर्दान से नहीं
03:51उसके गुणों को समझे
03:53अरे हमें तो गौरी के गुण अच्छे लगे
03:56इसलिए तो आ गई हूँ मैं
03:57फिर गौरी के माबाब मान जाते हैं
04:00और उसकी शादी काकी के बेटे से हो जाती है
04:03अगले दिन
04:04अरे गौरी कल पूर्णी मा की रात है
04:07तुम्हारे पिता जी परी के वर्दान के बारे में बता रहे थे
04:10तो मैं ना कुछ चीज़े रख दूंगी
04:12जरा हाथ लगा देना
04:14तभी गौरी का पती वहाँ आ जाता है
04:16और अपनी मा से कहता है
04:18मा क्या जरूरत है गौरी के वर्दान को इस्तमाल करने की
04:22वैसे भी मेरी मैनद से घर तो चल ही रहा है न
04:25और गौरी के पिता ने भी यही कहा था
04:27कि वो ऐसे ही व्यक्ति से उनकी बेटी की शादी करेंगे
04:30जो गौरी के वर्दान से नहीं उसके गुणों को समझे
04:33अरे बसकर किताबी बातें तेरे लिए क्या लड़कियों की कमी थी
04:38जो मैं ये किसान की बेटी घर ले आती
04:40और सुन गौरी कल अगर तुने सारी चीजों को सोने का नहीं किया
04:45तो मैं तुझे घर से निकाल दूँगी
04:47और अपने बेटे की दूसरी शादी करवा दूँगी समझी
04:51इतना कहकर गौरी की सास वहाँ से चली जाती है
04:54अगली पूर्णी मा की रात गौरी की सास गौरी के सामने धेर सारे बरतन रख दीती है
04:59और कहती है जल्दी कर गौरी राग खتم हो जाएगी. जल्दी जल्दी इन सारे बरतनों को हाथ लगा कर सोने का कर दे.
05:07गौरी करती भी तो क्या? वो जैसे ही एक छोटे से बरतन को चूने वाली होती है कि उसकी सास भढ़क जाती है.
05:13क्या मजाग बना रखा है? इतने चोटे से बर्तन में क्या होगा? ये ले! ये बड़ा वाला बर्तन!
05:20जैसे ही बड़ा सा बर्तन लेकर गौईरी की सास उसके तरफ बढ़ती है, वैसे ही बर्तन के बाहर से वो धड़ाम से गिर जाती है
05:27सास को गिरा देख गौरी उन्हें संभालने दोड़ती है
05:31और वो सास को हाथ लगा कर कहती है
05:34अरे सासुमा क्या हो गया आपको कहीं छोड़ तो नहीं लगी न
05:37लेकिन जैसे ही वो हाथ सास से हटाती है
05:40तो देखती है कि उसकी सास सोने की हो गई है
05:45गौरी सोनी की सास को देखकर रोने लगती है और अपने पती से कहती है?
05:50मुझे परीने का हा था कि अगर मैं किसी इंसान को हाथ लगाती हूं तो वो अगली पुली मात तक सोने का ही रहेगा.
05:57अब मैं क्या करू ?
05:59अरे करना क्या है मा को उठा कर अलमारी में रख दो और हाँ लालज का फल बुरा ही होता है ज्यादा बड़े बरतन को सोने का बनाने के चक्कर में मा का ये हाल हुआ है ये कहकर वो दोनों मा की तरफ देखने लगते हैं
Comments