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  • 1 year ago

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Transcript
00:00दोस्तो मुझे पता है आप सब लोगडाउन में पोर हो रहे हैं
00:04तो मैं आपकी बोर्यत दूर करने के लिए लाया हूँ
00:06HelloF, इंडियाज लीडिंग सोशल मीडिया प्लैटफोम
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00:16तो देर किस बात की है? अभी download करो HelloF और करें अपनी बोर्यत का खात्मा
00:22जया की सास को भूलने की बड़ी बिमारी थी
00:30इससे बचने के लिए वो चीजों को एक डायरी में लिख लेती है, जिससे कोई उसे बेवकूफ न बना पाए
00:36एक दिन जया कहती है
00:40अरे मा आओ ना, खाना खालो, आग की फेवरिट भींदी बनाई है मैंने
00:45अरे तुम कौन हो, मेरे घर में क्या कर रही हो, और मुझे भींडी नहीं बैंगन पसंद है
00:51लो, फिर से शुरू हो गई
00:54इनको याद दिलाने के चकर में कहीं मेरी याददाशना चली जाए
00:58हरे मैं बदकिस्मत इसे आपकी बहू हूँ
01:01और आपके खाने का वक्त हो गया है
01:03ये कहकर वो उसे अपनी शादी की फोटो पकड़ा देती है
01:07देखिए, कैसे मेरी शादी में आप पीछे खड़ी होकर मुझे आशिरवाद दे रही है
01:12अच्छा अच्छा याद आ गया, याद आ गया
01:15चलब ज्यादा वकील नाबन खाना लगा
01:17नेदारी है
01:19जया की सास का ये सिलसिला चल ही रहा था
01:24कि एक दिम
01:24अरे बहू, ज़रा यहाँ आना
01:27ये देख, मेरा हार कैसा लग रहा है
01:30बड़ा ही महेंगा हार है, मेरी सास ने दिया था मुझे
01:34वा माजी, बड़ा ही सुंदर हार है ये तो
01:37सास मन में इसे लिख लेती है
01:40इसका क्या भरोसा?
01:42कल को कहते मेरा हार है, आपको पहनने को दिया था
01:46ये सोच कर वो इस बात को डाइरी में लिख लेती है
01:49एक दिन
01:50अरे मा, आपने ये देखा, कैसे लग रहे हैं मेरी साड़ी?
01:55हाँ हाँ, यही तो रोज पहनती है
01:56एक तो सावली, उपर से चटक रंगी ये साड़ी
02:00मैं कैसे भूल सकती हूँ?
02:03जयाकुसास की बात पर गुस्सा आ जाता है
02:05शादी में आप लोगों की तरफ से ही तो आई थी ये साड़ी
02:09अब तेरे पिताजी ने तुझे हमें दिखाया था
02:13तब तो तुगोरी थी
02:14बाद में हमें क्या पता था कि तेरा रंग काला हो जाएगा?
02:18वैसे तो आपको बात याद नहीं रहती
02:21लेकिन दो साल पहले बहू का रंग कैसा था ये याद है
02:25कौन बहू? किसके बहू?
02:28जया जल्ला कर वहाँ से चली जाती है
02:30अगले दिन जया किसी पार्टी में जाने के लिए तयार होती है
02:34कि तब ही उसे सास का वो हार याद आता है
02:37वो सास के पास जाती है
02:39अरे माजी ज़रा वो हार देना
02:43कौन सा हार?
02:45अरे जो उस दिन आप दिखा रही थी
02:47सास उस वक्त तक सब भूल चुकी होती है
02:51अरे किस दिन कौन सा हार क्या बोल रही है?
02:55जया मौकी का फाइदा उठाने की कोशिश करती है
02:58और सास को कहती है
02:59अरे वही जो मैंने आपको रखनी को दिया था
03:03जो मेरी माने मुझे दिया था
03:05अरे तु बहू है मेरी
03:08ये तो तुने मुझे रखा दिया है
03:10लेकिन भला बहू अपना हार सास को क्यों देने लगी?
03:14तु कोई चलाकी तो नहीं कर रही है ना मेरे साथ
03:17हरे नहीं-नहीं माजी, अब जल्दी से वहा हार ले आये न, जो आपने बकसे में रखा है
03:23सास जाकर जैसी बकसा खुलती है, उसे हार दिखता है
03:27वो उस हार को ला कर बहु के पास लाती है
03:30यह ले, वैसे मेरा दिल नहीं मानता कि इतना सुंदर हार तेरा हो सकता है
03:36पर तुझ जैसी भी है जूठी तो नहीं होगी
03:39जया सास के हाथ से हार छिंते हुए कहती है
03:43अरे मैं और जूठी?
03:46ना मा जी ना, मेरी तो चार पुष्टों में से किसी ने भी कभी जूठ पोला ही नहीं
03:51ये बोलकर जया हार पहन कर वहां से चली जाती है
03:55लेकिन सास को बहुपर बिलकुल भी भरुसा नहीं होता
03:58और वो जया के जाने के बाद डाइरी दिखती है
04:01जिसमें साफ लिखा होता है
04:03कि हार जया का नहीं है
04:05अब क्या था?
04:07सास गुसे से आग बबुला हो जाती है
04:09और जया के वापस आने का इंतजार करती है
04:12लेकिन जब जया वापस आती है
04:14तब तक सास एक बार फिर सब भूल चुकी होती है
04:18अरे सासुमा आज ना आप ही रात का खाना बना लीजिए
04:22मैं तो ठक गई हूँ
04:25आहा क्यों नहीं
04:27वैसे भी काफी दिनों से मैं अपने बेटे के लिए खाना बनाने की सोची रही थी
04:31जब से तू आई है बेचारा बिना अस्वात का खाना खा रहा है
04:35ये बोलकर सास किचन में जाती है
04:37और बेटे की पसंद का धीर सारा खाना बनाती है
04:40रात को खाने की टेबल पर जब सभी खाना-खाने बैठते हैं, जया पती के सामने दिखावा करती है
04:47हाई रे, आज तो मैं थकी गई, कमर ही तूट गई मेरी, घर का इतना सारा काम और फिर
04:56अरे जया, आज तो तुमने कमाली कर दिया, इतना सारा खाना और वो भी मेरी पसंद का
05:02पहली बार शादे के बाद मैं इतना अच्छा खाना घर में खा रहा हूँ, तुमने बनाया है ये खाना
05:09सास को भी कुछ याद नहीं होता कि खाना उसने खुद बनाया है
05:20वो बहु को कहती है
05:21अर तो क्या हो गया घर का खाना बनाने में कोई ठकता है क्या
05:26चल तुने कुछ तो अच्छा बनाया
05:29बहु भी मन ही मन खुश हो जाती है
05:31तबी जया का पती जैसे ही मुँ में पहला निवाला रखता है
05:35जया ये खाना तुमने बनाया है?
05:40हाँ हाँ
05:40गबराती हुए जया पूछने लगती है
05:43क्यों? क्या हुआ? अच्छा नहीं लगा?
05:47अरे जूट बोलने की भी हद होती है जया
05:49मा के हाथ का खाना खाकर मैं इतना बड़ा हुआ हूँ
05:52पहले निवाले पर ही बता सकता हूँ कि खाना तुमने नहीं मा ने बनाया है
05:57फिर वो मा की तरफ देखकर बोलता है
05:59मा याद करो खाना तुमने बनाया है
06:03है ना? याद करो मा
06:05सास को याद आ जाता है
06:07और साथ ही हार वाली बात भी याद आ जाती है
06:10मैं बातों को भूल जाती हूँ
06:13तो तु उसका फाइदा उठा रही है
06:15और हाँ मेरा हार लेकर आ भी
06:18जिसे तुने मुझसे अपना बोल कर ले लिया था
06:21और हाँ क्या बोल रही थी तु
06:23कि जूट तेरी चार पुष्टों में किसी ने नहीं बोला
06:26मा जी माफ करतीजी मुझे
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