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  • 1 year ago
ज़ुबां पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई,
चुपके से आंधियों में एक ख़ामोशी छाई।
बिखरे ख्वाबों की परछाइयाँ हैं साथ,
दिल की गहराइयों में उठती है सदा।

तेरे बिना ये जज़्बात अधूरे हैं,
हर लम्हा तेरा इंतज़ार अब भी मेरे अंदर है।
सपनों की गलियों में खोई हुई हूँ मैं,
ज़ुबां पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई।

चाँदनी रातों में तेरा नाम लूँ,
हर तारे से तेरी यादें बुनूँ।
दिल के साज़ पर चलती है ये धुन,
ज़ुबां पे दर्द भरी दास्ताँ चली आई।

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