00:00काली नसर
00:30पत्नी जी, मेकप क्लास बाद में करना
00:33वो चाउराहे वाली दुकान मिल गई है हमको
00:36अरे बा, रुको, मैं अपनी मां को फोन लगा कर बता देती हूं
00:41अरे मैं भी अपने रिश्टेदारों को बता देती हूं, कितरी खुशी की बात है
00:47हाँ हाँ, मैं भी अपने दोस्तों को बता देता हूं
00:50एक हफ़ते बाद रजिस्ट्री है
00:52बस, घर में खुशी का मौका था
00:55उन तीनों ने अपने-अपने फोन उठाए
00:58और लोगों में बात पहलाना शुरु कर दिया
01:01और रही सही कसर
01:03श्वेता बहूने अपने पडोस में सब को बता कर कर दी
01:07अरे बर्मा अंटी, अब हम भी जल्दी कार ले लेंगी
01:11घर कारेनोविशिन होगा
01:13और ठात से रहेंगे हम भी
01:15अरे, ऐसा क्या हुआ?
01:18लाटरी-बाटरी लग गई है क्या?
01:21अरे इस बार चौराय वाली मॉल में हमको भी दुकान मिल गई है
01:26दुकान नमबर 21
01:28जो एकदम चौराय पर है
01:30अब ग्राहक बढ़ेंगे तो
01:33आमदनी भी बढ़ेगी ही न?
01:36अरे वाह, कितने खुशी की बात है
01:40मैं बहुत खुश हूँ तुम्हे इतना खुश देखके
01:43बाक एक बात कहूँ
01:45सबको मत बताते फिरना
01:47किसी की नजर लग जाएगी
01:50तो खुशी की खबर वापस लाउट जाएगी
01:53है? ऐसे थोड़ी न होता है?
01:56अब डरारी हो
01:58अरे सही कहरी हूँ
02:00काली नजर कहते हैं इस चीज को
02:03जब आप किसी को कुछ बताओ
02:05और वो काम भिगर जाए
02:07अरे लेकिन मैं तो
02:10तुमने सबको बता दिया न?
02:13हाँ, फोन लगा लगा के
02:16अब बच के रहना
02:19काली नजर बड़ी खतरनाख होती है
02:22श्वेता इतनी खुश रहती है
02:25कि वो वर्मा आंटी की बात पर ध्यान ही नहीं देती
02:28जबकि पड़ोस में और भी लोगों से
02:30खुशी की खबर शेयर करती रहती है
02:33अगले दिन राजिश बहुत दुखी होकर घर आता है
02:36अरे बेटा क्या हुआ?
02:39मूं क्यों सूजा हुआ है?
02:42मा वो दुकान किसी और के पास चली गई
02:45किसी ने ज्यादा भाव लगा दिया
02:48अरे पर बात तो आप से हुई थी ना उस दुकान वाले की
02:51हाँ आज मैं टोकन अमांट देने गया था
02:54तब मुझे पता चला
02:58काली नजर
03:00क्या कहा?
03:02बर्मा अंटी ने समझाया था
03:04कि किसी को बताना मत वन्ना काली नजर लग जाएगी
03:08अच्छा तुम्हें उनकी बात मान लेनी चाहिए थी
03:12उनकी बात मान लेती लेकिन
03:15उसके पहले ही सब को बता चुके थे ना हम तीनो
03:18अरे अगली बार से ध्यान रखेंगे
03:21कोई भी नए चीज होगे तो किसी को नहीं बताएंगे
03:25तीनो कुछ दिन ऐसे ही रहते हैं
03:28पर एक दिन श्वेता को एक मेल आता है
03:32राजिश, मेरा ओन-लाइन मेक-अप कोर्स कम्प्लीट हो गया
03:35अगले दिन श्वेता वर्मा अंटी के पास जाती है बिठाय का डबबा ले कर
03:39अरे आओ, आओ, कैसे आना हुआ?
03:42सूर से नहीं बोलोंगी
03:45अरे अगली बार से प्रवाईल प्रवाईल चुके थे
03:49जो आड़े हैँ पर आड़े पर किया रहे हैं
03:53अगले दिन श्वेता वर्मा आंटी के पास जाती हैं मिठाय का डब्बा ले कर
03:58अरे आओ आओ कैसे आना हुआ?
04:03सूर्से नहीं बोलूंगी
04:05वो सामने वाली दुकान है न वहाँ मैं अपनी पारलर की दुकान खुलने वाली हूँ उसकी मिठाय है
04:12अरे वाँ बहत बढ़ाई हो तुमको
04:15मैं कमाने लगूँगी तो राजिश पर पूरे घर का बोच नहीं रहेगा न आंटी जी
04:22ये तो है पर ये बता कि तुने ये बात किसी और को तो नहीं बताई न
04:28अरे नहीं नहीं पिछली बार गलती कर दी थी काली नजर लगी किसी की और राजिश की हाथ से वो दुकान चली गई थी
04:36सब को मत बताना चलो मैं चलती हूँ कल दुकान की बात करने भी तो जाना है अगले दिन श्वेता दुकान के लिए मालिक से बात करने जाती है
04:48अरे लेकिन दुकान तो हम कल रात को ही किसी को दे चुके हैं कल ही हाँ कल ही दो दिन बात कोई यहां पारलर भी खोल लेगा आप कहीं और दुकान देख लीजिये अरे पर हमको भी तो पारलर ही खोलना था हबह यह एक ही दुकान है आदी आदी तो नहीं दे सकता न मैं
05:10राजिश और श्वेता घर पर हताश हो कर आ जाते हैं इस पार तो किसी को बताया भी नहीं था अब किसकी काली नजर लग सकती है सुनो तुमने मा को बताया था क्या अरे कैसी बात कर रही हो मा की नजर थोड़ी न लगेगी पक्का तुमने किसी को नहीं बताया था न सिर्�
05:40बिरमा आन्टी को बताना तुमने जरूरी लगा
05:43ओरे बर्मा
05:44आन्टी नहीं थो काली नजर की बारे में बताया थाना
05:47वो हमेशा हमरा बहला ही तो चाती है
05:49मेरी मा भी हमारा भला ही चाती है
05:53अरे पर छिल्णा implies
05:55बात नहीं कर सकते कि आरांजार
05:57अरे पर चिलना क्यों रहे हो? बात नहीं कर सकते क्या आराम से?
06:02नहीं आता हूँ आराम से बात करना और करना भी नहीं चाहता हूँ मैं।
06:06दुकान जाने का अद्दुख गुसे में बदल गया था और राजेश और श्वेता में बात बंध हो गई थी.
06:13दो दिन बाद महले में पारलर का इनॉग्रेशन हुआ जिसमें महले के सभी लोगों को बुलाया गया पर श्वेता, राजेश और मा नहीं जाते.
06:23मा अंदर आजाओ क्या देख रहे हो? अरे नया पारलर देख रही हूँ अपने आंगन से.
06:31देखो, मा को दूसरे का सुख देखने में कितना मजा आ रहा है, मेरा दुख नहीं दिख रहा इने. यहां मेरा पारलर भी तो हो सकता था.
06:41अरे चुप रहो यार, हर बात में लड़ाई क्यों ढून रहे हो?
06:45राजिश और श्वेता फिर बहस करने लगते थे, तबी मा ने दोनों को बाहर बुलाया.
06:52अरे जरह देखो तो, दुकान चलाने वाले का बोर्ड पर नाम क्या लिखा है?
06:58शूती वर्मा.
07:01हम्, गाड़ी निकाल बेटा, हमें कहीं जाना है.
07:07काली नजर का इलाज कराने?
07:09राजिश अपनी बाइक निकालता है, तीन और ट्रिपलिंग कर रहे हैं.
07:14मा राजिश को उस मॉल वाले दुकान पर लेकर जाती है, जहां राजिश अपनी दुकान खोलने वाला था.
07:23यही दुकान लेना चाहता था ना तू?
07:27हाँ, पर इनको भी दुखी करने लेकर आई हो क्या यहां पर दुकान दिखा कर? वहां काफी नहीं था?
07:34अरे श्वेता, थोड़ा सबर रख, अभी पता चलेगा कि हम यहां क्यों आए हैं.
07:40बता इस दुकान चलाने वाले का नाम क्या है?
07:44अनुपम वर्मा.
07:46कुछ समझ में आया?
07:49वह दुकान वाली श्रुती वर्मा, यह दुकान वाला अनुपम वर्मा और हमारे पडोस में हमने उस दुकानों के बारे में बताया किस था? वर्मा अंटी को!
08:03मतलब वर्मा अंटी ही हमारा काम बिगार रही है?
08:06नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता ये बस इत्तफाक है।
08:11राजीश अपना फोन निकालता है और शुरृती वर्मा और अनुपम वर्मा के नाम फेस्बुक पर सर्च करता है, जहां ये दोनों ही वर्मा आंटी के रिष्टदार होते हैं.
08:23शुरृता को समझ में आ जाता है कि वर्मा आंटी की ही नजर काली नजर है।
08:28अब क्या करना है?
08:30कोई भी खुशी की घबर हो तो काली नजर से बचना है, यानी वर्मा आंटी से बचना है।
08:37अरे पर मुझे ये समझ में नहीं आया कि वो हमारे साथ ऐसा क्यों करेंगी?
08:52दोनों मा की बात में हामी भरते हैं और अगला काम चुपचाब करने की कसम खाते हैं ताकि आगे से वर्मा आंटी कोई काम ना बिगर सके।
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