00:00चोजो केट्स
00:03बुद्धीमान चूहा राक्षस
00:06एक समय की बात है
00:08एक चूहा जंगल में भोजन की तलाश में जा रहा था
00:12कि तब ही उसके सामने एक लोमडी आ गई
00:15अरे वाह
00:16चूहे मुझे बहुत भूँक लगी है
00:19आज तुम्हारा ही बोजन करूँगी
00:22नहीं नहीं मुझे मत खाओ
00:24यहां पास में ही एक बहुत भयानक जानवर रहता है
00:28वो मेरा दोस्त है
00:30उसके पूरे शरीर में बाल ही बाल है
00:33लंबे लंबे तांथ है
00:35अगर तुमने मुझे कुछ किया
00:37तो वो तुम्हे मार देगा
00:39लोमडी तर गई
00:40और अपनी गुफा में वापस चली गई
00:43चूहा मज़े से धीरे धीरे चलने लगा
00:46उसका यहां उपाय बहुत काम का था
00:49रास्ते में उसे उल्लू मिला
00:52अच्छा हुआ तुम आ गए
00:54आज मैं तुम्हे खाओंगा
00:56नहीं नहीं मुझे मत खाओ
00:59अगर तुमने मुझे कुछ किया
01:01तो जिस पेड़ पर तुम रहते हो
01:03वही मेरा दोस्त आकर
01:05अपने बड़े दान्त और नाकुनों से
01:07तुम्हे मार डालेगा
01:09उल्लू सुनते ही अपने पेड़ पर चला गया
01:12और डर गया
01:15आगे चलकर चुहे को ठीक वैसा ही राक्षस मिला
01:18जिसके वारे में उसने उल्लू और राक्षस को बताया था
01:22और वह बहुत बुरी ताना डर गया
01:25अरे इतना भयानक राक्षस
01:28भगवान मेरी मदद करो
01:30हा हा हा अब मैं तुम्हे खा जाओंगा
01:34मजे खाने की सोचना भी मत
01:36मैं जंगल का राजा हूं
01:39मुझे खा कर कोई फायदा नहीं
01:41मुझसे सर कितना डर्ते हैं जानते हो
01:46तुमसे कोई डर्ता है
01:48दिखाओं मुझे כן काओं डर्ता है तुमसे
01:50आओ मेरे सात
01:52उस राक्षस को चूहा अपने साथ लेकर उल्लू पे टेड़ के पास पहुचा
01:57चूहे और राक्षस को साथ देखकर उल्लू बहुत डर गया
02:01और यह देखकर राक्षस बहुत हैरान दूआ
02:04आगे चलकर लोमडी की गुफा आई
02:07और चूहे ने कहा
02:09लोमडी, बाहर निकलो
02:10मेरा दोस्त तुमसे मिलना चाहता है
02:13जैसे ही लोमडी बाहर आयी
02:15राक्षस को देखकर वह दर गई
02:17और राक्षस को लगा
02:19कि ये चूहे की करामात है
02:21चूहे का खोफ है
02:23राक्षस बहुत बुरी तरां से डर गया और वहां से फाग गया
02:27अपनी बुद्धी मानी से लोमडी, उल्लू और राक्षस सब से बच गया चूटा सा चूहा
02:35बारिश और बिल्ली
02:39एक दिन बिल्ली मोर को नाशते हुए देखती है
02:44बड़ा मन तर रहा है धीखने का
02:47ये मोर कितना सुन्दर है और नाशते हुए तो और भी सुन्दर लगता है
02:54काश मैं भी इसकी तरह नाच पाती बारिश का मज़ा ले सकती
03:01बिल्ली जिस पेड़ के नीचे पैठी थी उसी पेड़ के उपर एक क़ुआ बैठा था
03:08क्या हो गया, क्या सोच रही हो बिल्ली मॉसी
03:12कच नहीं, बारिश का मज़ा लेना चाहती हूं
03:16पर क्या करूँ, खाली पेड़ तो कोई मज़ा नहीं
03:21अरे इतना उदास क्यों होती हो, आओ मेरे पास आओ
03:26इस पेड़ पर बड़े स्वाधिष्ट बेर लगे हैं
03:29आओ, मैं तुम्हें तोड़ कर खिलाता हूं
03:32अरे वाह, बिल्ली जट से पेड़ पर चड़ गई
03:36अरे ये तो बहुत अच्छा उपाए है
03:38क़ुए ने बिल्ली के लिए खूब सारे बेर तोड़े
03:42और दोनों ने मिलकर बेर को खाया
03:45अब कैसा लग रहा है बिल्ली मासी?
03:49हाँ, अब अच्छा लग रहा है
03:51बारिश हो रही है और पेट भी भरा हुआ है
03:55मोर भी लगता है नाज़ते नाज़ते ठक गया
03:59और हम खाते खाते
04:03हो, हो, हो
04:05हमें हर चीज में मज़ा आता है
04:07जब हम एक साथ अपनों के साथ रहते हैं
04:11बकरी और मुरगी
04:14एक दिन एक मुरगी के पैर बे
04:17चलते चलते बढ़ा सा काटा चुप गया
04:21बचाओ, बचाओ, कोई मेरे बदत करो
04:26ओ, बहुत दर्थ हो रहा है
04:29वही पास पे एक बकरी खास खा रही थी
04:33अरे, मैं, मैं, ये तो मदद कौन बाँग रहा है
04:37चलो, चल कर देखती हूं, मैं, मैं
04:41क्या हुआ तुम्हे, इतनी चिला क्यों रही हो
04:44मेरे पैर में काटा चुप गया है
04:47बहुत दर्थ हो रहा है
04:50चला भी नहीं जा रहा
04:52मेरा काटा निकाल दो बकरी
04:55मेरी बदध करो
04:57नहीं तो मुझे अकेला और कैल पाकर
05:00कोई भी मुरा शिकार कर सकता है
05:03मैं, मैं, जरूर, जरूर
05:05बकरि ने मुर्गी का काटा निकाल दिया
05:09अगर मुर्गी के पेर में ग़ाव बहुत बड़ा था
05:12सो चलना बहुत मुश्किल हो गया था
05:15शुक्रिया बक्री बहन
05:17मगर मैं अब चल नहीं पा रही
05:19कुछ करो
05:21बक्री बहुत अच्छी थी
05:22उसने मुर्गी को अपनी पीट पर विठा लिया
05:25और उसके घर भी छोड़ कर आई
05:56और इस तरह मुर्गी की चान एक पक्री ने बचाई
06:01भालू और रानी मदुमक्ऻी
06:04एक दिन भालू बड़े मज़े से
06:07पेड़ की चाओ में बैठा था
06:09तब ही उसने देखा
06:11कि सामने के पेड़ पर
06:13मदुमक्ऻी का बड़ा सा छटता है
06:16जिसमें शहद ही शहद है
06:19इतना सारा शहद
06:21अरे वाह!
06:23काश ये मुझे मिल चाए
06:26पर कैसे मिलेगा?
06:28भालू के मुझ में पानी आ गया
06:31अगले दिन भालू ने हिम्मत कर
06:34मदुमक्ऻी से कहा
06:36कैसी हो रानी जी
06:38मुझे आप से कुछ बात करनी है
06:42हाँ हाँ बोलो
06:43क्या कहना जाते हो?
06:45आपके छटे का जवाब नहीं
06:49आप बड़ी मेहनत करती हो
06:51और आपकी मेहनत देख
06:54मुझे बहुत खुशी मिलती है
06:57क्या कहा?
06:58बात क्या है?
07:00साफ साफ कहो भालू
07:02अच्छा
07:04वो आपके छटे को देखा
07:07तो सोचा
07:09अब तो बहुत शेहट जमा हो चुका है
07:13किसी दिन कोई दावत रखो
07:15हमे भी बुलाओ
07:17जंगल के बाकी जानवर भी बुलाओ
07:21कहीं ऐसा ना हो
07:22ये शेहट को चुरा ले
07:25रानी मदुमक्ही बहुत चालाक थी
07:28वो भालू की बातों में नहीं आई
07:31बलकि उसने चतुराई से भालू से कहा
07:35हाँ हाँ भालू भाई मैं समझ गई
07:38आप क्या कहना चाते हो
07:40शेहट खाने का दिल है आपका
07:43बाते मत बनाओ
07:45मैं सब समझती हूँ
07:47अच्छा
07:48भालू बहुत शर्मिंदा हो गया
07:51तब ही रानी मदुमक्ही ने कहा
07:53ये लो भालू भाई शेहट आपके लिए
07:57क्या क्या कहा मेरे लिए
08:00हाँ आपके लिए
08:03मगर आपको एक वादा करना होगा
08:06हाँ हाँ बोलो बोलो क्या वादा है
08:09बस आपको हर रोज मेरे घर का ध्यान रखना होगा
08:13और मेरे चते की रखवाली करनी होगी
08:17मैं हर रोज आपको शेहट खिलाऊँगी
08:20हाँ हाँ ये ठीक रहेगा
08:22ठीक है राणी जी
08:24आज से मैं आपका सेवक
08:27आपके चते का ख्याल रखूँगा
08:30आप मुझे हर रोज शेहट दीजिए
08:33इस तरहां राणी मक्ही ने चतराई से
08:37इतने बड़े भालू को अपना सेवक बना लिया
08:41साप और चीटी
08:44एक बड़े से पेड़ पर एक लमबासा
08:47ताकतवर साप रहता था
08:49उसके पेड़ के पास चीटियों का बड़ासा घर था
08:53जहां सबी चीटियां मजे से रहती थी
08:57साप पेड़ के उपर से उन्हें देखता रहता
09:01साप बहुत शैतान था
09:03वो जब भी अपना शिकार ढूंडने निकलता
09:06जान पूचकर अपनी पूच से चीटियों का घर तोड़ रहता
09:12हाँ, हाँ, बहुत भूँक लगी है
09:16चलो जंगल की सेर पर निकला जाय
09:21और इन चीटियों को भी कई दिनों से सताया भी तो नहीं
09:27आज ही इन्हें मज़ा चकाता हूँ
09:31साफधान, दोस्तों देखो, वो साप यहीं आ रहा है
09:36खुद को बचाओ, इस साप ने तो परिशान कर दिया है
09:40जब भी पेड़ से नीचे आता है
09:43हमारे घर को नुखसान पहुजाता है
09:46और पल भर में हमारी सारी मेहनत बरपात हो जाती है
09:50हमें कुछ करना होगा
09:53हाँ, मगर कैसे?
09:56मैंने साप को सबक सिखाने का उपाए सोच लिया है
10:00क्या उपाए?
10:02हम कहीं और जाकर अपना घर बनाएंगे
10:05नहीं, हम जहाँ जाएंगे ये वहीं आ जाएगा
10:10हमें इसे सबक सिखाने के लिए
10:12कुछ और करना होगा
10:14मैंने कुछ सोचा है
10:16जब सामप वापस लोटा
10:19जब सामप वापस लोटा
10:21और अपने पेड़ पर चड़ गया
10:23वहां पहले से राणी चीटी
10:25अपने सेना पती के साथ
10:27पेड़ पर चुप कर बैठी थी
10:30जैसे ही साम सुस्ताने बैठा
10:33और उसने अपनी आँखों को खोला
10:35तुरंट चीटीों ने
10:37लाल मिर्च डाल कर
10:39साम की आँखों पर हमला कर दिया
10:42अरे बचाओ, बचाओ, ये क्या हुआ?
10:46अरे बचाओ, बचाओ, ये क्या?
10:50मेरी आँखों में इतनी जलन कैसी?
10:53मुझे कुछ दिखाई क्यों नहीं दे रहा?
10:56अरे ये कौन है? बचाओ, बचाओ
11:02आब तुम्हें पता चला
11:04दूसरों को सताने में
11:05तुम्हें बहुत मज़ा आता है न?
11:07आज तुम्हें भी हम सता के मज़े ले रहे हैं
11:10मुझे माफ कर दो, मैं अब कभी ऐसा नहीं करूँगा
11:14मुझे बचाओ, मुझे बचाओ
11:17तब ही चीटियों ने पानी डाल कर
11:19साप के आँखों को धो दिया
11:21और उससे वादा लिया
11:23कि वो कभी चीटियों का घर नहीं तोड़ेगा
11:27मैं वादा करता हूँ
11:28इस तरह की शेतानी अब नहीं करूँगा
11:31तुम्हें कभी परिशान नहीं करूँगा
11:35एक जंगल के पास, दो देश के राजाओं के बीच
11:39पहत बड़ा युद्ध हो
11:41युद्ध समाफ्थ होने पर
11:43सेनाएं अपने-अपने राजों की और वापस चली गए
11:47लेकिन सेना का एक धोल
11:50युद्ध इस तल पर ही गलती से रह गया
11:53एक दिन आंधी आई
11:55और वह बेचारा धोल
11:58लुडक्ता-लुडक्ता हुआ
12:00जंगल के बीचों-बीच
12:11जब भी ठेनी उस धोल से टकराती
12:14तो उसमें से आबाज आती
12:19एक दिन एक सियार ने धोल की आबाज सुनी
12:23आबाज सुनकर सियार बहुत डर गया
12:26और सोचनी लगा
12:28जरूर कोई जानवर है
12:31पर सियार को कुछ समझ नहीं आया
12:34सियार छुप-छुप कर
12:36डर के मारे धोल पर नज़र रखनी लगा
12:39एक दिन वह देखता है
12:42कि लहरी धोल पर कूद रही है
12:44और हलकी सी धं की आवार भी हो रही है
12:49ओ, यह कोई डरावना जानवर नहीं है
12:53सियार थीरे-थीरे धोल तक पहुंचा
12:57पर बहुत डरा हुआ था
12:59उसे धोल का कोई सिर-पैर नज़र ही नहीं आ रहा था
13:03क्यूंकि पेड़ की टेहन्यों ने
13:05उसे बुरी तरह से जगड कर ठक दिया था
13:09अब समझ में आया
13:11हूँ, तो जानवर इस धोल के अन्दर है
13:16चरूर मोटा-ताजा होगा
13:18तब ही इतनी जोर से आवाज आती है
13:21सियार वापिस अपने घर आ जाता है
13:24और सब कुछ अपनी पत्नी को बताता है
13:27तुम उसे मार कर क्यों नहीं लाए?
13:29मैं मूर्ख नहीं हूँ
13:32वैं तो एक पोल के अंदर है
13:35अगर मैं उसे एक तरफ से पकड़ने की कोशिश करता
13:38तो वैं दूसरी तरफ से भाग जाता
13:41इसलिए अब हम दोनों उसे पकड़ने चलेंगे
13:44हाँ, तुम तो बड़ी समझदार होते जा रहे हो
13:48मेरे साथ रहते रहते
13:50यही ठीक रहेगा
13:52कल सवेरे सवेरे हम दोनों जंगल मे जाएंगे
13:56अगले दिन सियार और उसकी पत्मी
13:59सुभह-सुभह दोनों धॉल के पास पहुँच जाते हैं
14:03और दोनों एक-एक तरफ से
14:06चम्डी के खिनारों को काटने लगते हैं
14:09जैसे ही ढोल की चम्डी कटने लगी
14:13सियार बोला
14:14वश्यार रहना
14:16एक साथ ढोल में हाथ डालकर
14:18शिकार को पकड़ना है
14:20भव्राओ मत
14:21मैंने अच्छे से पकड़ा हुआ है ढोल को
14:23दोनोंने अपने हाथ शिकार को पकड़ने के लिए
14:28ढोल में डाले
14:29अरे ये क्या हुआ
14:31यहां तो कुछ भी नहीं है
14:34अरे हम तो बुद्धू बन गए
14:37और इस तरहां दोनों मूर्फ बन गए
14:40ढोल के अंदर कुछ नहीं था