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  • 2 years ago
Transcript
00:00वेब फिल्म सेक्षन 36 को लेकर जिसके डिरेक्टर है आदित्यन निंबलकर सहाब, फिल्म के काहानी और प्लॉट को ज़रा देख लेते हैं, काहानी जो है वो 2005 से लेकर 2006 के बीच, यूपी का जो शहर है, सबसे बड़ा शहर, जो कि आप सबसे डेवलब्ब भी है यूपी का, �
00:30जबरतद्स लेवल की कुछ भैयानक criminal activities होती है,
00:33जिसमें बहुत से लोग victim होते हैं,
00:38बहुत से बच्चे victim होते हैं, और भी शाहद अदर लोग भी हो,
00:41अदर उमर के लोग भी हो,
00:42तो जिसमें murder, क्या बोलते है, sexual assalutation, rape, cannibalism,
00:50भले एक अच्छा खाया पका के खाया, डज़न मैंटा
00:52ये तमाम चीज़े घटना है, घटी थी
00:54इस घटना के
00:56दो एक्यूस को पकड़ा गया था
00:58मैं नाम भूल रहा है, आप जड़ा चेक कर लीजीएगा
01:00दो एक्यूस को पकड़ा गया था
01:02बाद में वो छूट भी गए
01:04बहुत साल सजा कटने के बाद
01:06अब वो क्यों छूटे, ये करप्शन था
01:08या वो असली मतलब घुनेगार नहीं थे
01:10असली घुनेगार कोई और था
01:12उन्हें बली का बक्रा बनाया गया था
01:14बाद में बली का बक्रा के ऊपर तरस खाया गया
01:16या वो ही असली घुनेगार था, मुझे नहीं पता
01:18उसके लिए आप डिसर्च करें, वीडियो देखें
01:20मुझे जितना बताना था, मैंने बता दिया
01:22अब चलें दोस्तो देख लेते हैं
01:24फिल्म कैसी है
01:26फिल्म के शुरुत में कुछ ऐसे सीन्स हैं
01:28जो एक्साइटमेंट को बढ़ाने में काफियत तक कामियाब होते हैं
01:30खासकर दीपक डोग्रियल साभ जीनने
01:32वो पुलिस इंस्पेक्टर या जो भी पुलिस ओफिसर का
01:34रूल किया है
01:36कैसे वो करप्शन के खिलाब भी नहीं जाते है
01:38करप्शन के खिलाब नहीं जाते है
01:40क्योंकि उनके हिसाब से करप्शन के खिलाब हो ही जाते है
01:42जो महा सहासी हो या महा मूर्फ हो
01:44उन दोरों में से नहीं है
01:46फ्लो में रहते हैं
01:48काफी ऐसे सीन्स हैं
01:50इतने बच्चों का मरडर हो रहा है
01:52लापता हो रहा है
01:54पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
01:56तो उन्हें पकड़ना है क्रिमिनल को
01:58जज़बा है, इन सब जज़बे की बहुत कमी है
02:00उनके हिसाब से उनका जो अटिटिटूट था
02:02पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:04पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:06पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:08पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:10पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:12पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:14पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:16पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:18पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:20पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:22पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:24पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:26पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:28पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:30पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:32पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:34पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:36पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:38पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:40पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:42पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:44पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:46पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:48पता नहीं, कहीं मौद भी हो रही है
02:50ऐसा नहीं है कि बीच-बीच में चीप-चीप कॉमेडी है
02:52नहीं, थ्रिलर फिल्म के जो डॉन होने चाहिए
02:54वो ही है, लेकिन प्रेज़ेंटेशन कहीं नहीं
02:56कहीं बहुत सेधा रोबोटिक है, मैं उतना जुड़ नहीं पाया
02:58अक्टिंग दीपाग डॉब्रेल साब की जबर्दस्थ है
03:02विकरांट मैसी की जो अक्टिंग है वो उतनी अच्छी नहीं है
03:06अगर आप उनके अक्टिंग को इस एंगल से देखते हो
03:08कि ठीक है, करेक्टर डेवलप्मेंट ऐसे होंगे
03:11तो शायद आप उसे एक्सेप्ट कर पाओ
03:13लेकिन अगर आप परस्टनल चोईस के रिस्पेक्ट में देखो
03:15तो बिल्कुल भी मजा नहीं आता
03:17हाँ, वियर्डनिस है, वो ही किलर है, वो ही साइको किलर है
03:21एक वियर्डनिस उनके करेक्टर डेवलप्मेंट में है
03:24उनके बॉड़ी लैंग्वेज और जिस तरह से बात करते हैं
03:27लेकिन वो उतना भी अट्रैक्ट नहीं कर पाते हमें
03:30यानि मुझे तो अट्रैक्ट नहीं कर पाए
03:32तो ठीक है, फिल्म चल रही थी, ठीक है चल रही है, बैक्कराउंड्स अच्छे है
03:36उस जमाने का पीरियट 2005-2006 का बैठरीन तरीके से क्रियेट की गई है
03:41खासकर वो नोकिया पुराने वाला फोन आता था, पुराना वाला जो
03:46उसमें जब रिंग टोन बजा तो मेरी भी यादे ताज़ा होगी
03:48क्योंकि मेरे बास वली ना हो, मेरे पापा के बास वो फ़ोन थी
03:52तो ये सब उस पीरियट को रीक्रियेट करने में फिल्म एक दम काफ़ी बैठरीन है
03:57लेकिन प्रेजंटेशन बहुत बोरी
04:00कुछ सीन्स बैठरीन है, जिसमें दीपा प्रोप्रियाल साब
04:03और विक्राल मेशी का किर्दार जब वो इंटरोगेशन
04:06जो सीक्मेंस है वो काफी बैठरीन है, नो डाउड
04:09लेकिन ओबर और अगर आप फिल्म को देखें
04:11तो जो एकस्टेक्टेशन थी उस पे खड़ी नहीं उतरें
04:15जिरोंने जिन्दगी में कोई अच्छी मिस्ट्री थिलर फिल्म नहीं देखी हो
04:19उन्हें शायद ये मास्टर पीस लेगे
04:21जिनके पूरी जिनदगी वही आप मसाला कुमर्शिल फिल्म देखने में
04:24मैं ही चली गई उन्हें शायद ये फिल्म जबरदस्ट लगे
04:26लेकिन मैं वैसे नहीं हूँ
04:28मैंने काफी बहतरी मिस्ट्री थिलर फिल्म देखी है
04:30और तमाम देख वे करी मैं कहरा हूँ कि
04:33मतलब ऐसा नहीं कि बहुत ही घटिया है लेकिन कुछ खास भी नहीं है
04:37वो मैंने कहा ना कि घटिया भी आप नहीं कह सकते रोबोटी बोर करती है
04:41थोड़ा मतलब नींद आने जैसे भी बात होती है
04:44कुछ सीन्स में भले अच्छे है वो नींद मिट जाती है
04:48नींद का जो हरेश है वो मिट जाती है
04:51लेकिन कभी कभी नींद आही जाती है इतनी बोरी है
04:55और एडिटिंग की बात करूं तो ठीक है फिल्म बहुत लेंदी है ऐसा नहीं है
05:00अगेन लेंदी नहीं है लेकिन जो भी है काफी अधिक बोरी है
05:04दोस्तों फिल्म का कुछ सीन्स अच्छे भी है जैसे मैंने कहा
05:07कि वो जो इंटरोकेशन सीन है वो बहतरीन है
05:09फिर जब दीपक डॉपरियल साहब पुलिस का किब्दार निभा रहे हैं
05:14उनकी बेटी के उपर जब मुसीवत के बादल मंद रहते हैं
05:17क्या बादल मंद रहते हैं उसके लिए आप फिल्म देखिए
05:19मुसीवत के बादल जब मंद रहते हैं तब वो थोड़ा एवार होता है
05:24जब अपने उपर आई तभी लोग एवार होते हैं
05:27थोड़ा जागरत होता है कि मुझे जो भी हो इस केस के उपर अच्छे से काम करना है
05:33इन्हें इंटरोगेशन और ये
05:35लेकिन ओवरॉल जो फिल्म है वो कहीं न कहीं डिसपॉइंटी करती है
05:39बोरिंग ही है
05:40फिल्म है एक सीन है जहां एक बच्चे को किड्नैप करता है विक्रांग मेसी का क्रेक्टर
05:46और उसके हाथ ऐसे बदे है और वो बोलता है अंकर अंकर मुझे छट दो मेरे पिताजी जो है
05:50मेरे पापा यूनिफरम पहनते है वो आपको गोली मार देंगे
05:53वो ऐसे बात करता है ऐसे बात नहीं करता है मैं बोल रहा हूँ आपको
05:57वो डाइलोग डिलिवरी जो करता है वो देख के लगता है नहीं वो किसने
06:01मतलब किड्नैपर को वो नहीं कह रहा है वो कह रहा है वो ट्यूशन
06:05जो सर है थोड़ा ज्यादा पढ़ा लिया इसलिए वो कह रहे है सर मुझे जाने तो
06:10इस तरही के एक्सप्रेशन था कोई डर नहीं बच्चे की बहुत वाहियाद एक्टिंग लगी
06:16और विक्रांद मेंसे की कैसे है वो तो मैंने पहले ही बोल दिया है तो फिर ऐसे करते
06:20फिल्म आगे बढ़ती है और फिर खतम हो जाती है
06:22टेकनिकल ऐस्पेक्ट की मैं ज्यादा बात इसलिए नहीं करता
06:25काफी लोग कहते हैं की टेकनिकल ऐस्पेक्ट की बात करो
06:27टेकनिकल ऐस्पेक्ट की मैं बात इसलिए नहीं करता
06:29क्योंकि सेक्टर 36 से भी वाहियाद फिल्में है
06:33वाहियाद से वाहियाद फिल्में भी आज कल टेकनिकल ही अच्छी होती है
06:37मतलब सिनवाटोग्राफी, कलर वो गएरा
06:39इस फिल्म की जो कलर है, कलर जो चूज किया गया
06:41वो फिल्म के जो टेंपरमेंट है उसके एसाब्से काफी कम्पैटेबल यानी परीपूरक है
06:45तो कुल मिला के दोस्तो यही था हमारे रिवो
06:48अगर आप रिलेट नहीं भी करते हो तो भी ओके
06:50मैंने अपनी ओनेस्टी से, मुझे देखके जो लगा, नूटरल माइंट से देखके जो लगा, यह ओनेस्टी से मैंने रिवो थी
06:56अगर रिलेट नहीं भी करते हो तो भी इट्स ओके
06:58ठीक है दोस्तो यही था हमारे रिवो, मिलते है किसी नैविटी
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