00:00ये एक ऐसी कहानी है जो अतीत में घटित हुई थी।
00:05एक गाउं में एक धोबी था।
00:09गाउं के सभी घरों से कपड़े कठ्ठा करकर उन्हें धोया करता था।
00:14और उससे मिलने वाले पैसे से वो और उसकी पतनी अपना घर चलाते थे।
00:18उसके पास एक घोड़ा और एक गधा था।
00:26अपने पास ये गधा और घोड़ा दोनु है। कितना अच्छा लग रहा है न।
00:31हाँ वो तो है। अगर ये नहीं होते तो आपको ये कपड़े ले जाने पड़ते।
00:36हाँ वो तो है। अगर ये नहीं होते तो आपको ये कपड़े ले जाने पड़ते।
00:42घोड़ा होने की वज़े से हम दूर दूर तक यात्रा कर सकते हैं।
00:46ये तो सही कहा।
00:50घोड़ा और गधा दोनों एकी अस्तवल में रहते थे।
00:54घोड़ा कभी गधे को अपने दोस्त के रूप में नहीं माना।
01:00तुम कैसे प्राणी हो, किसी भी तरह से सुन्दर नहीं दिक्ते।
01:05मेरी तरफ देखो, मुझ जैसे को कहता है गुब्सुरत।
01:09हाँ मेरे दोस्त, हो सकता है तुम सही कह रहे हो, लेकिन मैं भी तो तुमारा दोस्त हुना।
01:15मैं तुमारा दोस्त नहीं हूँ, तुमारी बद्बू की वज़ज़े मुझ से यहां ख़रा भी नहीं हुआ जा रहा।
01:23बद्सुरत गंदे प्राणी।
01:26नहीं, ऐसा मत कहिए भाई, वैसे भी मैं अपने मालिक का सारा काम अकेले करता हूँ, हम दोनों के मालिक तो एक ही है, आपका जीवन इतना आराम दायक और अच्छा है, पर मेरी जिन्दगी में कस्त ही कस्त है।
01:43ओ अच्छा, लेकिन तुम ऐसा क्यों कह रहे हो।
01:46मालिक, पूरा बोज मुझसे अकेले ही उठवाते हैं, पर आपसे तो बस छोटे-बोटे काम करवाते हैं।
01:55ओ यह बात है, याद रखना मैं तुमसे ज्यादा मॉल्लेवान और कीम्ती हूँ, मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ।
02:16तुम मेरे साथ ऐसा मत करो दोस्त, मुझे बहुत दर्द हो रहा है, मैं भी तो आप जैसा ही एक प्राणी हूँ।
02:30तुम मेरे जैसे कवी नहीं हो सकते, मुझे में उत्तम बुद्धी और भरपूर ताकत है, पर तुम मजदूरी करने वाले और एक बहुत बेवकूफ प्राणी हो।
02:41आप कृपया ऐसा मत कहिए भाई।
02:45भेवकूफ गधे, हर प्राणी का महत्व उसके मूल्य और कीमत पर तै होता है।
02:52आपको इतना घमंडी नहीं होना चाहिए।
02:56कई मौकों पर तो घोड़े और गधों के लिए अक्सर जगड़ा हुआ करता था।
03:02गधे से बड़ा होने का एहंकार घोड़े में हमेशा हुआ करता था।
03:10लगता है कि बारिश आने वाली ही, सारे कपड़े जल्दी लेकर जाने पड़ेंगे।