00:00अंबर तले जग रहे हम तेरे आचल तले रहते हैं।
00:21दुनिया में हम ही अकेले हैं जो माटी को मा कहते हैं।
00:39जागे तेरे लिए सारी उमर तुही आना सुलाने हमें।
00:46सर तेरा उचा रहे है वतन कोई जाने ना जाने हमें।
00:56खुश्बू के जैसे हवाऊं में हम गुमनाम से बहते हैं।
01:03दुनिया में हम ही अकेले हैं जो माटी को मा कहते हैं।
01:15वो बाग हसता रहे हम जिसे इंदोसता कहते हैं।
01:22दुनिया में हम ही अकेले हैं जो माटी को मा कहते हैं।
01:29माटी को मा कहते हैं।
01:36हम माटी को मा कहते हैं।
01:39माटी को मा कहते हैं।
01:43हम माटी को मा कहते हैं।
01:45माटी को मा कहते हैं।
01:48भरात माता की जेव।
Comments