Skip to playerSkip to main content
  • 2 years ago
Subh Ruzaa (1998) Movie Explained In Hindi _ Ending Explained _ Hollywood movie explained in Hindi(480P)
Transcript
00:00तो गुरू जड़ा एक बार सोचो क्या हो कि बाप के आफिस जाते ही सौतेली मा अपने ही लॉंडे का टुलू पॉम पकड़ ले
00:08विचारा मासुम लॉंडा कब तक ही अपनी इजद बचा पाएगा
00:12जब उसकी प्यासी मा बाप के ना होने पर हर रोज नगा नाच चालू कर दे
00:16ठीक ऐसा ही कुछ होने वाला है हमारी आज की इस मूवी में
00:20जब एक सौतेली मा का दिल आ जाता है अपने लॉंडे के ही हतियार पर
00:25फिर इसके बाद वो किस तरह से अपने आइटम दिखा गर लॉंडे को पानी में उतारती हैं
00:29और फिर अपने पानी से नहला कर उसका सैंपू निकाल देती हैं
00:33यह सब आप देखोगे आज की इस मूवी में इसके लिए मैं आपको एहले की डिस्क्लेमर देदूं
00:37कि हाँ मूवी थोड़ी से संसिटिफ होने बाली हैं
00:40तो अगर आप ऐसे गंटेंट को एंटेटेंट्मेंट या एजुकिशनल वर्पस की जगह लेने के बज़ाएं
00:45आप अपने दिल, दिमाग, गुर्दे, फेवरे, किड्नी या फिर गुपताओं में ले लेते हो
00:49तो प्लीज आप वीडियो को यहीं पर स्किप कर देजेगा
00:51क्योंकि हमारा काम आपकी बताईवी कहाणी को एकस्ट्रेइन करना है
00:55ना कि आपकी भावनाव की पल्ट आगे लेना है
00:58तो कहाणी स्टार्ट होती है और हम मुठल मजीद को देखते हैं
01:01मुठल मजीद की मुधिया काम थुमाटीरियल कोई और नहीं
01:05बलकि उसकी ही सौतेली मॉम होती हैं
01:07उसकी एक और गंदी आदत होती है
01:09कि वो हर रोज अबनी मॉम की ही ठुकाई का टाइम नोड किया गरता था
01:14कि उसके डैड उसकी मॉम को कितना लंबा जिहल पाते हैं
01:17अगले सुबह हम उसके डैड को देखते हैं
01:19जो एक आर्मी रिटायड ओफिसर होता है
01:22खैर सरह से तो इनके गमडिया पे लाथ मार के ने कपका भगा दिया गया था
01:26पर इनके अंदर से सरहत नहीं निकल पा रही थी
01:29इस वज़े से इनोंने अपनी घर को ही सरहत बना लिया
01:32और भाई साहब उस दिन के बास से ही
01:35इनोंने अपने लोंडे की गमड में चरस बो दिया है
01:38मतलब ये मानों कि दिन में चार बोली अगर उसके पिछवाड़े पे ना मारे
01:42तो चाचा को सुकून मिलता ही चे नहीं है
01:44वो अपने लोंडे को मर्द बनाना चाहते थे
01:47जिसके लिए वो उसकी ही गावण में बंबू दे रखे थे
01:50हर एक चोटी से चोटी गलती पर या हर एक चोटी से चोटी बाप पर
01:53वो अपने ही लोंडे की खंड मार लेते थे
01:56हाला कि ये चीज मतलमंचीत की सौतेली मा नाली सुपारी भी देखती थी
02:00पर वो कुछ कहने ही बाती थी
02:02अलेक्स अपनी मॉम की जाट बर भी इज़त नहीं करता था
02:06जिससे परिशान होकर एक दिन उसका बाप उसके गोटिया पपेल लेता है
02:09और उससे कहता है कि अगर तुने अपनी मा की इज़त नहीं करी
02:13तो तिरी माचो मत दूँगा
02:14ये बोल कर वो कुछ काम के लिए जा रहा होता है
02:17पर जाने से पहले वो नाली सुपारी को समझा कर जाता है
02:20कि मेरे आने से पहले ये लॉण्डा मर्द बन जाना चाहिए
02:23और ये जुम्मेधारी तुम्हारी है
02:25भले ही इसके बदले तुम्हे कुछ भी देना पड़ें
02:27ये सुनकर नाली सुपारी की आकों में चमक सी आ जाती है
02:31पर वो कुछ कहती नहीं
02:32खैर कुछ दिर के बाए जब नाली सुपारी अपनी कार पो लेकर
02:35कहीं बाहर जा रही होती हैं
02:36तो वो कार स्टार्ट नहीं होती हैं
02:38इसलिए वो मुठल मंजीद से हैल्प लेने के लिए उसके रूम में जाती है
02:41जहाँ पर वो देखती है कि मुठल मंजीद अपनी फैंट उठा अगर
02:45अपने हदियार को हातों में लेकर ये साहिरी गारा होता हैं
02:48तुम उलजी जटो जैसी मैं खड़े लंड सा सीधा प्रियम
02:51तुम उड़जाय लटके चुमचो जैसी मैं तुमारी चूसा भीगा प्रियम
02:56तुम ठूकी हुई तीन सुरुपै वाली फटे माल जैसी
02:59मैं पान सुरुपै दिहाडी वाला फटे हाल प्रियम
03:03कुछ तुम कम करूँ कुछ मैं कम करूँ दोसर ले लो
03:06तो करें कुछ कमाल प्रियम
03:08तुम देती नहीं चुपाती जैसे
03:10कोई राजा का खजाना हो
03:12प्यार भी तो करता हूँ
03:14पर तुमें लगता मैं वूद का दिवाना हूँ
03:16प्रिये तुम सांग उठा कर तो देखो
03:19सहारा हम देंगे
03:21मेरी धार में एक बार वह कर तो देखो
03:23किनारा हम देंगे
03:25दिन राज जेलूंगा तुमें रुकने नहीं दूंगा
03:28तुमारी जान कसम खड़े-खड़े ले लूँगा
03:31चुकने नहीं दूंगा
03:32प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्र
04:02प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्र
04:32प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्रिये प्र
05:02लś्चन सारे मंखुल्सयोअर्कांरे का दह्यां चांग कररो America एन गेहरी साथ...
05:08Bollywood साधर मौन ःतींनी मुँभ करना इतने देलां, प स्थाक सामाकी कहूंया थेार प्रियरो करेगी
05:15और कहती है कि जिस तरह से आज सुबह तुम मेरे चुम्चे दबा रहे थें
05:20वैसे ही चलो अब मेरे प्यार भी दबाओ पर तभी कुछी देर में
05:23नाली सुपारी उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी गहरी कुफा में उतार लेती हैं
05:27और उससे हाथ बाहर ना निकालने के लिए बोलती हैं
05:30जिसके बाद मुठल मंजीत अपनी उंगली से ही उसकी गहरी कुफा की सफाई करने लगता हैं
05:35अब तक मुठल मंजीत भी विल्कुल पागल से हो गया था
05:37वो भीना कोई देरी की है
05:39सिदा अपनी ही मॉम को जुका के भीचे से बेलना स्टार्ट कर देता है
05:43इतनी लंभी बंदूग तो खुद मेजर साब की भी नहीं थी
05:45इसके लिए आज इतनी लंभी बंदूग को अपनी गुफा में नहीं करो
05:49वो एक अलगी चरंसुक के लेवल पर बहुत जाती है
05:51आलागी इस चीज़ से नाली सुपारी को बुरा तो बहुत लगता है
05:55पर अब वो उसके बंदूग की ताकट जान चुकी थी
05:57वो समझ पारी थी कि अगर एक बार फिरसे वो बंदूग को तयार करते हैं
06:01इस बार तो वो उसकी मिली के चीथड़े उड़ा देगी
06:04अकले दिन वो मुठल मंजीत को उसी बंदू पड़ी कार में गरम करने लगती हैं
06:08और अब तो मुठल मंजीत में विल्कुल खुल जोगा था
06:11वो अपनी मॉम को उसी कार में पल्टा के कार को डांसिंग कार बना देता है
06:15उसका लंबा हतियार लेने के बार नाली सुपारी उससे पूछती है
06:18कि कहीं ऐसा तो नहीं कि हम ये गलत कर रहे हूँ
06:21जिस पर मुठल मंजीत उससे कहता है
06:23कि लंबाई और गहराई का रिस्ता तो बहुत पुराना है
06:26हमें इस रिष्ते को कायम रखना चाहिए
06:28जितना जाधर से जाधर समभव हो
06:30और इससे अच्छी बात क्या हो सकती है
06:32नाली सुपारी भी इस चीज़ से बहुत जाधर कुछ होती है
06:35क्योंकि उसे चूसने के लिए अब कोई धीला नहीं पलकि सक्त लॉलिबाब पिल रहा था
06:39देरे देरे ये एक दूसरे के साथ इतना जाधर ओपर हो जाते हैं
06:42कि इन्हें अब क्लूस रहने की आदधी कदम हो जाती है
06:45खैर अब मुठल मंजीत के दिल में भी
06:47उसकी छाम्टो के तरे आर्मानू के फूल खिलने ही लगे थे
06:51पर तभी एक दिन किसमत उसके खिले हुए फूलों पे मूद देती है
06:55जब वो नाली सुपारी के लिए सुन्दर सुनदर से फूल ले कराता है
06:59पर वो देखता है कि उसका बाब घर पर आया हुआ है
07:01जो नाली सुपारी की नाली में अपनी सुपरा चला रहा है
07:05और सुपरा की इतने तेज रवतार के वज़े से
07:07नाली सुपारी की फटके चार हो जाती है
07:10ठुकने के बार नाली सुपारी लडखाते लडखाते किचन में
07:13अपने पती के लिए खाना बनाने आती है
07:15कि तभी पीछे से मुठल मंजीद वहाँ पर आ जाता है
07:18जो उसके बड़े बड़े और मुलायम तर्बूजोब के
07:21बीच के छेड में उंगली करने लगता है
07:23पहले तो नाली सुपारी को लगता है कि शायद ये उसका पती है
07:27जो एक बार फिर से उसकी नाली में अपनी सुपरा चलाना चाहता है
07:30पर जैसे ही वो मुड़कर बीचे मुठल मंजीद को देखती है
07:33उसकी फटके हात में आ जाती है
07:35वो उसे समझाने लग जाती है कि तुम्हें बिलकुल डर रही है क्या
07:38इस तरह से जो तुम अपनी चोटी से राइफल निकाल रहे हो
07:41अगर तुम्हारे बाप ने देख लिया तो तुम्हारी गन में बोली मारेगा
07:45पर मुठल मंजीद अब इतने साथ गरम हो गया था
07:47कि उससे रहा ही नहीं जाता
07:49वो जबरदस्ते उसको पेलने लग जाता है
07:51जिससे नाली सुपारे को गुस्सा आ गया
07:53और वो उसकी मा बहने कर देती है
07:55अगली दिन उसका बाप उसे अपने साथ जंगल ले जाता है
07:57जहां पर वो उसके सामने ग्यान की बाते पेलने लग जाता है
08:01पर मुठल मंजीत के सर पर अब चुटका भूत सबार हो गया था
08:04जिससे उससे रहा नहीं जाता
08:05और वो गुस्से में एक चाक उठाकर अपने डैड की डेड बॉडी बनाने वाला था
08:09पर तभी उसका डैड उससे बोलता है
08:11देखो बच्चपन में मैं भी तुम्हारे ही जैसा था
08:14मैं जानता हूँ कि तुम एक नमर के मुधियाबाज हो
08:16मैं भी ऐसा ही हुआ करता था
08:18जिस विज़ेसे बहुत लॉंड औरे मेरी गावमेंड का गाजियाबाद बना दिया
08:21क्योंकि मैं उनकी ही बेहनों को छेड़ा करता था
08:23मैं नहीं चाहता कि तुम्हारी गावमेंड का कोई गाजियाबाद बनाएं
08:26इसी विज़ेसे मैं तुम्हारे लिए इतना स्ट्रिक्ट रहता हूँ
08:29ताकि ये जो भूत का भूत है जो तुम्हारे सर से निकल जाएं और तुम अच्छे ट्रेक्ट पर आ जाओ
08:34ये संकर मुठलम जी समझ जाता है कि भले ही उसका बाप एक नमबर का चादर मोध हैं
08:39पर अपने बेटी के लिए वो बिलकुल भी बुरा नहीं हैं
08:41गहर आकर एक बार फिर से वो नाली सोपारी की नाली में अपनी दोनु सोपारी डालने की कोशिस करता हैं
08:47पर फिर से वो उसे देने से मना कर देती हैं और ऐसे ही उठके चली जाती हैं
08:51जिस से उसे इतना जादा बुरा लगता हैं कि जब वो डिनर कर रहे होते हैं
08:54तो वो अपने डैट की गन उठा कर अपने डैट को ही गन पॉइंट कर लेता हैं
08:58और कहता है कि तुम्हारे आने के बाज से ही तुम्हारी बीवी ने मुझे देना बंद कर दिया
09:02अभी तक हम कितना डांग उठा कर मज़े कर रहे थे पर तुमने हमारे मरजे पर मुझ दिया
09:07अब रुगो मैं तुमारी ही कामण का गुलकंड बना दूंगा जिसके बाद तुम्हारी बीवी एक बार फिर से मुझे देने लगीगी
09:13पर यहाँ पर नाली सुपारियों से यह सब कुछ ना करने के लिए बोलती है और कहती है कि अगर तुमने यह बगचोंदी करी तब तुम्हे तुम्हे और नहीं दूंगी उसका डैड भी यह देखकर हसते लग जाता है और उससे कहता है कि देखो मुठल मंजीत मैंने आज �
09:43मुझे अच्छे से पता है कि तुम मेरी बीवी को बहुत पेलते थे यह सारी खबर वो मुझे रात में दिया करती थी उसने मुझे तुम्हारे हतियार का साइस भी बताया जिससे सुनकर मुझे बहुत खुशी भी तुम आगी चलके मेरे खानदान का नाम रोशन करोगे पर
10:13तुम पल्टा पल्टा के लिए सब को
10:15फाइनली तुम मर्द बन चुके है तुम चाहो थो
10:17मेरी बीवी की रोज लो बस इस बात का
10:19मुझे प्रामिस करो कि आज के बाद
10:21तुम मुठिया बाजी नहीं करोगे मुठल मजीद
10:23भी इस बात का प्रामिस कर देता है और
10:25प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और प्रामिस कर देता है और �

Recommended