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  • 2 years ago
Transcript
00:00एक नॉर्मल प्रिंटर किसी भी इमेज या टेक्स्ट को कागज पर प्रिंट करता है लेकिन 3D प्रिंटर उसी चीज को बनाने की केपेसिटी रखता है.
00:08कहने का मतलब 3D प्रिंटर से हम जैसे चाहे उब्जेक्ट बना सकते हैं और यह कोई सोकिंग बात नहीं है कि आने वाले कुछ टाइम में 3D प्रिंटर का मार्केट इतना डवलप हो जाएगा कि वे बिल्डिंग्स भी बनाने लग जाएँगे.
00:203D प्रिंटर की वर्किंग को तो हम 3D एनिमेशन से समझेंगे ही लेकिन सबसे इंपोर्टेंट 3D प्रिंटर से रिलेटेट कुछ आईडिया में आपको देने वाला हूँ जिनकी हेल्ब से आप अच्छा बिजनिष सेट अप भी कर सकते हो.
00:313D प्रिंटर में एक नोजल होता है जिसका डायमेटर 0.2 mm या इस से जादा भी हो सकता है.
00:37जितना नोजल का डायमेटर कम होगा उब्जेक्ट उतने ही सांधार और क्लियर क्वालिटी के बनेंगे.
00:42नोजल ब्रास या स्टेनलेस स्टील का बना होता है क्योंकि इस नोजल से प्लास्टिक सेमी लिकविड फॉम में बाहर निकलती है जिसका टेंपरेचर 200 दिग्री सेंटिग्रेड से लेकर 300 दिग्री सेंटिग्रेड के बीच होता है.
00:54यह मेल्टेड प्लास्टिक ही किसी उब्जेक्ट को तेयार करती है जिसको फिलमेंट भी बोल सकते हैं. यह फिलमेंट प्योर पोलीमर का बना होता है जिसका मेल्टिंग टेंपरेचर कम होता है.
01:04फिलमेंट को पिगलाने के लिए नोजल के ऊपर हीट ब्लोक लगा रहता है जिसके अंदर थर्मोस्टेट लगा रहता है. यह थर्मोस्टेट इस हीट ब्लोक को 200 से 300 दिग्री सेंटिग्रेड तक गरम करता है और साइड में इसके टेंपरेचर को मेजर करने के लिए थर्मो
01:34साइबी खाम है कि इसलिए धिन्दर के एक इस्से पर हीट सिंक लगा रहता है
01:41लेकिन फिर भी हीट थोड़ी बहुत उपर जरब चली जाते हैण और हीट सिंक धीरे धीरे गरम होने लगता है तो
01:46इसको कूल करने के लिए साइड में एक कूलिंग फैन लगा रहता है
01:49कई बार ऐसा भी होता है की परिंटर लोंग टाम तक चलता है
01:52तो फिलामेंट हीट सिंक में ही पिगलने लग जाता है
01:55और हीट सींक की दिवारों से चिपक जाता है
01:57और जब हम प्रिंटर को बंद करने के बाद काफी टाइम बाद में ओन करते हैं
02:01तो हीट सिंक की दिवारों पर चिपकी हुई प्लास्टिक सोलिड हो जाती है और नए फिलमेंट को अंधर नहीं आने देती
02:07जिसको हीट क्रिप बोलते हैं उस कंडिशन में हमें हीट सिंक की क्लीनिंग करनी होती है
02:11फिलमेंट को नोजल अपनी तरब नहीं खीच सकता इसलिए फिलमेंट को आगे फोर्स लगाने के लिए एक स्टेपर मोटर लगी रहती है
02:18यहाँ पर गियर डारेक्ट मोटर से जुड़ा होता है और एक आइडल गियर होता है
02:22जब इनकी बीच से फिलमेंट निकलता है तो मोटर का फोर्स फिलमेंट पर लगता है और मोटर फिलमेंट को इस बंडल से निकाल कर आगे बढ़ाता रहता है
02:30इस मेकनिजम को एक्स्ट्रूडर बोलते हैं
02:32स्टेपर मोटर गडी की तरह चलती है जिसका टोर्क हाई होता है
02:36यहाँ पर मोटर आपको सेम स्पीड में चलती हुई दिखाई दे रही है जिसके पीछे रीजन है
02:403D प्रिंटर में स्टेपर मोटर का स्टेप एंगल 0.9 दिगरी होता है
02:44जिसका सिम्पल सा मतलब है मोटर का रूटर 0.9 दिगरी के छोटे-छोटे स्टेप में रोटेट करता है
02:50और इतने छोटे स्टेप एंगल की वज़य से मोटर चलती दिखाई देती है
02:55इस मोटर की कंट्रोलिंग बहुत संदार होती है
02:57जहां मोटर को रोकना होता है उससे 0.5 दिगरी ही आगे नहीं जाएगी
03:01जिससे 3D प्रिंटर में क्वालिटी आती है
03:03रोबोटिक्स एपलिकेशन में मोस्टली इसी मोटर को यूज़ किया जाता है
03:06अब 3D प्रिंटिंग करने से पहले जिस उब्जेक्ट को हमें प्रिंट करना है
03:10उसको 3D सोप्ट्वेर की हेल्ब से कम्प्यूटर के अंदर बनाया जाता है
03:13और 3D के सोप्ट्वेर को हमने डीटेल से हमारे 3D एनिमेशन के कोर्स में सिखाया है
03:18तो एक बार आप कोर्स को जरूर से सीखना
03:20जैसे आपने सोप्ट्वेर की हेल्ब से एक गलास बनाया
03:23गलास की डिमेंशन, हाइट, सब कुछ हम सोप्ट्वेर में डिसाइड कर लेते हैं
03:27उसके बाद फाइल को 3D प्रिंटर के सिस्टम में लोड किया जाता है
03:313D प्रिंटर सबसे पहले फाइल को रीड करता है
03:33और नोजल को सेट करता है
03:35जितनी भी मोटर उनको रेडी करता है
03:37और प्लास्टिक मेल्ट करने के लिए हीट बलो को स्टार्ट कर देता है
03:403D प्रिंटर का यह बेड है
03:42जिस पर कोई भी उब्जक्ट बन कर तैयार होता है
03:44जो गरम प्लास्टिक नोजल से निकलती है
03:46वै इसी के उपर आकर गिरती है
03:48तो यह काफी गरम हो जाती है
03:50इसलिए इसको टाच नहीं करना चाहिए हाथ से
03:52इस बेड का कंट्रोल भी कंट्रोलर के पास में ही होता है
03:55जो उन्ली वै एकसिस में कुछ इस तरीके से मूव कर सकता है
03:58बेड को मूव करवाने के लिए एक स्टेपर मोटर होती है
04:01जिसको बैल्ट की हेल्प से बेड से कनेक्ट किया जाता है
04:05बेड के उपर हेड उनिट होती है जिसमें नोजल लगा रहता है
04:08हेड उनिट भी एकसिस में अपना मूवमेंट कर सकती है
04:11और इसके मूवमेंट को एक अलग स्टेपर मोटर कंट्रोल करती है
04:14जो एक बैल्ट की हेल्प से हेड उनिट से कनेक्टेड रहती है
04:18अब इस हेड उनिट को जेड एकसिस में अप डाउन करवाने के लिए
04:21एक और अलग स्टेपर मोटर लगी रहती है यहां नीचे की तरब
04:24जिससे एक थ्रेड़ेड रोड को कनेक्ट किया जाता है
04:27जब मोटर रोटेड करती है तो रोड पर लगे थ्रेड्स
04:30हेड उनिट को जेड एकसिस में अप डाउन करवाते हैं
04:33और इंटरेस्टिंगली हमारा रियल वर्ड जो हमें 3D में दिखाई देता है
04:36उसमें X, Y, and Z तीन ही एकसिस होते हैं
04:39और 3D प्रिंटर का तीनों एकसिस में पूरा कंट्रोल है
04:42तो ये किसी भी उब्जेक्ट को जैसे इंसान बनाते हैं
04:45वैसे बनाने के लिए तैयार है
04:47नोजल सिर्फ प्लास्टिक को पिगलाने के बाद बाहर बेशता है
04:50बाकी जैसा हमारा उब्जेक्ट है
04:52उसके इसाब से नोजल हेड को मूव करवाने का काम प्रिंटर का कंट्रोलर करता है
04:57नोजल हेड से प्लास्टिक continuously पिगलता रहता है और बाहर निकलता रहता है
05:01तो सबसे पहले नोजल हेड जिस तरीके से हमारा उब्जेक्ट है
05:04वैसा बेड पर प्लास्टिक को line by line सेट करता है
05:08जब एक लेयर बनकर तेयार हो जाती है तब हेड थोड़ा सा उपर उठता है
05:12और उसी लेयर के उपर फिर से प्लास्टिक को पिगला कर लाइनों को एड घरता जाएगा
05:17इस तरीके से एक के उपर एक लेयर को सेट किया जाता है
05:20और जब तक हमारा उब्जेक्ट बनकर तेयार नहीं हो जाता तब तक यही प्रोसेस चलती रहती है
05:25इस टाइप की प्रिंटिंग को additive printing बोला जाता है जिसमें एक के उपर एक लेयर को एड किया जाता है
05:31यदि आपके दिमाग में थोड़ी हलसल हुई हो तो एक क्वेस्ट्रूडर मोटर इतनी दूर से फिलामेंट पर force लगाएगी तो क्या force सही से लग पाएगा? मेरे ख्याल से बिल्कुल भी नहीं
05:46इसलिए एक्वेस्ट्रूडर से head unit तक एक tube को connect किया जाता है जो फिलामेंट पर आ रहे है प्रेसर को head unit तक पहुंचाने का काम करती है
05:54अब ऐसा भी किया जा सकता है कि एक्वेस्ट्रूडर को head unit के उपर ही set कर दिया जाए लेकिन इससे एक problem आती है
06:01जिसकी वजए से वे अपना movement accurately नहीं कर पाएगा और हमारा final output खराब भी हो सकता है
06:07इन printer की सबसे बड़ी खास बात है कि जब कोई model बन जाता है तो उसमें waste material almost zero होता है और इनकी high efficiency होती है
06:15object को हम पहले ही 3D के software में बना कर अच्छे से देख लेते हैं कि उसमें कोई mistake तो नहीं है
06:212022 तक 3D printer का market share almost 16 billion के around था लेकिन कुछ research से पता चला कि 2030 तक इसका market 105 billion तक हो जाएगा जिसका मतलब समझते हो इस sector में जबरदस्ट future हो सकता है
06:37आने वाले टाइम में aerospace sector में aircraft के parts को 3D printer से बनाये जाएगे, buildings और bridge भी 3D printer से बनने लग जाएगी जिसके छोटे example आज भी हमें दिखाई देते हैं
06:47medical sector में 3D printing के कई application सामने आये हैं, dental field में dental crown को patient के इसाब से बना कर set किया जाता है
06:54prosthetic equipment 3D printer से बनाये जाएगे according to patient need
06:59लेकिन 3D printer को operate करने के लिए आपको 3D में object कैसे बनाये जाते हैं वहे भी आना चाहिए
07:05इसलिए हमने 3D animation का बैठरियन course design किया है जिसमें हमने models बनाने के अलावा भी animation कैसे करते हैं वहे सब भी detail में सिखाया है
07:13इसलिए 3D animation के फिल्ड में भी बहुत सांधार scope है लेकिन 3D printer आपको एक additional option मिल जाता है जहाँ future जबरदस्ट होने वाला है
07:21छोटे 3D printer 30-40 अजार के आते हैं जिनको आप अपने घर पे ही छोटे gear, toys, mobile cover इसके लावा देरों चीजे बना कर अपने career को start कर सकते हो
07:30कोर्स की details description में available है हमारी 3D community में आपका most welcome है
07:35चैनल पर विजिट करके आप और भी अच्छे वीडियो देख सकते हो थेंक्यू

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