Skip to playerSkip to main content
  • 2 years ago
Transcript
00:0016 जुलाई सूबए के 5.30 बजे
00:02अमेरिका में एक नूक्लियर बॉम की टेस्टिंग होती है
00:05जिसका रिजल्ड देखकर इस बॉम के क्रियेटर ओपनाइमर के मूँसे एक बात निकलती है
00:10और यह बात सच भी हो जाती है
00:16इस बॉम की टेस्टिंग के 20 दिन बाद
00:186 अगस्ट 1945 को अमेरिका जापान के हीरो सिमा पर
00:22सुबए 8.15 बजे लिटल बॉम को गिरा देता है
00:25जो लगबग 70,000 लोगों की इंस्टेंटली जान ले लेता है
00:29और इतने ही लोगों की जान अगले 2 महिने में और ले लेता है
00:32और इसके बाद में हम चांद और मंगल पर लाइफ डून रहे हैं
00:35ओफनाहैमर ने 2 बॉम बनाई फैटमेन और लिटल बॉइ
00:38लिटल बॉइ में एज एकस्प्लोजीव यूरेनियम को काम में लिया गया
00:41और फैटमेन में प्लूटोनियम को
00:43प्लूटोनियम और यूरेनियम दोनों ही रेडियो एक्टिव मटीरियल है
00:46लेकिन यहाँ पर यूरेनियम के आईसोटोप्स U-35 को काम में लिया गया
00:50और प्लूटोनियम के आईसोटोप्स P-239 को
00:53क्योंकि सिर्फ इनी आईसोटोप के अंदर नूकलियर फीजन की प्रोसेस हो सकती है
00:58और इसमें नूट्रोन्स की एविलेबिलिटी भी ज़्यादा होती है
01:01जो अभी आपको थोड़ा आगे समझ में आजाएगा
01:03लेकिन आज की नई टेकनोलोजी में इंटरेस्टिंग बात है कि
01:061945 में लिटिल बॉय बॉम में 64 केजी एनरिज्ड यूरेनियम को काम में लिया गया
01:11जो 15,000 टन टीन्टी जितनी एनरिज्ड प्रोडूस करता है
01:15लेकिन आज का एक केजी यूरेनियम 20,000 टन टीन्टी जितनी एनरिज्ड प्रोडूस कर सकता है
01:20जो 80 गुना ज्यादा पाउरफुल है 1945 के बॉम से
01:24तो आज का न्यूक्लियर बॉम साइज में भी छोटा है और पाउर में भी बहुत ज़्यादा है
01:28Explosive material आज भी प्लूटोनियम और यूरेनियम ही है लेकिन यह ज़्यादा प्यूर फॉम में है
01:34यदि यूरेनियम की पाउर को हम आसान बासा में समझे तो थर्मल पाउर प्लांट में कोईले से इलेक्ट्रिसिटी बनाई जाती है
01:40और नुकलियर पाउर प्लांट में यूरेनियम को यूज में लिया जाता है
01:43तो वहाँ पर एक केजी यूरेनियम 27 लाग केजी कोईले के बराबर होता है
01:48यूरेनियम का एटोमिक वेट ज़्यादा होता है तो इसको नुकलियर फीजन की प्रोसेस से छोटे एटम्स में तोड़ा जाता है
01:54और जब यह यूरेनियम ब्रेकडाउन होता है तो इससे बहुत ज़्यादा एनरजी निकलती है
01:58जैसे अपने यहाँ पे समझते हैं यह कोई यूरेनियम का एटम है अब यह एटम नूर्मल कंडिशन के अंदर स्टेबल रहता है
02:04लेकिन हमें तो इसको अन्स्टेबल करना है ताकि अपनी एनरजी को यह रिलीज कर सके
02:08इसलिए हम एक नूटरोन इसमें एड़ कर देते हैं जैसे हम इसमें नूटरोन एड़ करते हैं तो यह अन्स्टेबल हो जाता है और यह दो एटम के अंदर तोड़ जाता है
02:18अब इस ब्रेकडाउन से तीन नूटरोन और जबर्डस्ट एनरजी निकलती है
02:22अब इस नूटरोन के पास में बहुत ज़्यादा एनरजी होती है और इसकी ट्रेवलिंग स्पीड भी इतनी ज़्यादा होती है कि यह लाइट की स्पीड का 30% स्पीड से ट्रेवल करते हैं
02:32आगे और नूटरोन के एटम से टकराते हैं और उनको तोड़ते हैं और फिर उनसे नूटरोन और एनरजी निकलती है और फिर वह और आगे यूरेनियम के एटम को तोड़ते हैं इस टाइप से एक लंबी अनकंट्रोल्ड चेंद रिएक्शन चलती है जब तक पूरे यूर
03:03बॉम 10 फीट लोंग और 28 इंच का डायमेटर था और इसका वेट 4,400 केजी था
03:09जिस एरक्राफ्ट से इस बॉम को गिराया जाने वाला था उसका नाम B-29 जो एक बॉम्बर एरक्राफ्ट है
03:15जब एरक्राफ्ट 38,000 फीट की हाइट पड़ था तब एरक्राफ्ट अपने डोर ओपन करता है और बॉम को नीचे गिराता है
03:23यहां से बॉम का काम सुरू होता है इसके पिछे की तरव फिन्स लगे हैं जो अब इसको हावा में बैलेंस करने के काम आएंगे
03:29बॉम गिरते ही इसमें 24 वॉल्ट की बेटरी होती है जो टाइमर और बॉम में लगे सेंसर को एक्टिवेट कर देता है
03:35बेरोमेटर सेंसर ग्राउंड से हाइट को चेक करता रहता है और साथ में बॉम की बोडी पर लगे रडार सेंसर भी एक्टिवेट हो जाते हैं
03:43जब बॉम हीरोशेमा के ग्राउंड से 1900 फीट के उपर था तब फाइरिंग स्वीच को एक्टिवेट किया गया
03:49यह स्वीच इगनाइटर को ओन करता है जो स्पार्क जनरेट करता है और इस स्पार्क के सामने कोरोडाइट पाउडर से बरेविये सिल्क के सिलेंडरिकल बेग होते हैं
03:57कोरोडाइट एक स्मोकलेस प्रोपेलेंट होता है जिसमें स्पार्क से एक एक्टिवेट होता है इस एक्टिवेट के आगे टंगस्टन कार्बाईट डिस्क लगी रहती है जिसपर इस एक्टिवेट का जबरदस्ट फोर्स आता है और इस डिस्क के आगे एनरिज्ड यूर
04:27ऐक्टिवेट को ही सिलेंट्रीकल फॉम में सुपर क्रिटीकल वैल्यू रखी जाती है जिसका वेट 25.6 केजी है जो एक्सप्लोजन के लिए तैयार बेटा है
04:35यहाँ पर एनरिज्ड यूरेनियम की सुपर क्रिटीकल और सब क्रिटीकल मास वैल्यू को रखा जाता है जिससे क्रिटीकल मास को अचीव किया जाता है और क्रिटीकल मास वैल्यू है जिसपर यूरेनियम फीजनेबल बनता है अधरवाईज नुकलियर फीजन की प्रोसेस �
05:05कल्ट नहीं हो जाती तब तक यह मेटल यूरेनियम को करती चाम जाती है, और ज़े से यह अधरवाईज नुकलियर फीजन की प्रोसेस का दिया तो इतनी जासा में एनरजी निकलती है, विवभरकाण के जैया कि यह मेटल बिगल के ब्लांस्ट हो जाती है
05:15और ये ब्लास्ट इतना जबर्दस्ट होता है कि 1200 फीट डायामेटर की एक जबर्दस्ट फायर बॉल क्रियेट होती है जो उपर 6000 फीट तक जाती है।
05:23यह एक मशुरूम जैसा चमकदार बादल होता है जिसका टेमपरेचर 6000 डिग्री सेंटेग्रेड होता है जो सन के सरफेस टेमपरेचर के बराबर है।
05:31इस फायर बॉल ने पलक जपकते ही लगबग 40,000 लोगों के जान ले ली। इसके एरिया में जितने भी लोग थे वे एकदम गाईब हो जाएंगी उनकी हड़ियां भी नहीं बचेगी बहुं बन जाएगी।
05:41यह जो फायर बॉल है ये बहुं जदा सोक वेव क्रियेट करेगी और सोक वेव चारों तरप हर डारेक्शन में ट्रेवल करेगी साउंड की स्पीड से भी जदा स्पीड में। जिस से जोरदार अर्थक्वेक भी आना शुरू हो जाएंगी।
05:52लेटिल बॉय बॉम को सरपेश से कुछ उचाई पर बलास्ट किया गया ताकि इसके फायर बॉल जदा एरिया को कवर कर सके।
05:58बलास्ट होते ही टेंपरेशर इतना जदा हो जाता है कि यहाँ पर जो हावा थी वे गरम होकर उड़ जाती है। जिससे यहाँ पर वेक्यॉम क्रियेट हो जाता है।
06:06बॉम के सेंटर को बेलेंस करने के लिए साइड के हवाएं बॉम के सेंटर की तरफ बड़ेगी जिससे यहाँ फायर बॉल फायर स्ट्रोम में बदल जाती है। जिसका डायामेटर 3.2 किलोमेटर का है। और इस फायर बॉल से इतना प्रेशर और टेंपरेशर इंक्रीज हो �
06:36बलास्ट और फायर से तो लोग उसी टाइम खतम हो जाएंगे लेकिन ये जो रेडियेशन है ये कई अज्जार सालों तक लोगों को मारती रहेगी
06:42और लोगों पर इसके साइड इफेक्ट होते रहेंगे और केंसर का ख़तरा तो हमेसा बना ही रहेगा
06:47अमेरिका के हीरोशिमा और नागाशाकी पर इस बॉम की वज़े से लगबग दो लाग लोग मारे गए और उस एरिया में आज भी उस न्यूक्लियर बॉम का इफेक्ट देखा जा सकता है
06:56जिसके फोटोज आप यहाँ पर देख सकते हूँ
06:59ओपन हाइमर को अपने इस अविसकार को लेकर बहुत रिग्रेट था और उन्होंने इस न्यूक्लियर बॉम पर बेन लगाने के लिए बहुत कोशेश की लेकिन वैक कर नहीं पाए
07:07अब आप ही बताओ ओपन हाइमर हीरो है या विलन
07:09एक किलो यूरेनियम प्राइज 7 मिलियन डॉलर का है फिर भी हमारी अर्थ पर 12,500 न्यूक्लियर बॉम एविलेबल है
07:16आज 10 से बी ज़्यादा कंटरी के पास में न्यूक्लियर बॉम है पिछले 80 सालों में से किसी भी न्यूक्लियर बॉम का यूज नहीं हुआ
07:22लेकिन फिर भी हम इंसान एक हाथ में पेट्रोल और एक हाथ में जलती वी माचिज लेकर गोम रहे
07:27ऐसा बैठरीन 3D एनिमेशन आपको भी चीखना है तो डिस्क्रिप्षन में कोर्स का लिंक दिया हुआ है हमारी 3D कमीनिटी में आपका स्वागत है
07:34आप चेनल पर वीजट करके और भी धेर सारे ऐसे वीडियोस को एंजोय कर सकते हो थेंक्यो

Recommended