00:00हर हर महा देव, नमस्कार, आप से अनूरोध है कथा पूरी सुने और अगर आपने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया तो तुरंद सब्सक्राइब बटन पे क्लिक करें तो आईये कथा शुरू करते हैं।
00:10किसी नगर में एक साहुकार रहता था जिसके घर में धन की कमी नहीं थी लेकिन उसे संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ था जिसकारण वह बहुत परेशान रहता था पुत्र प्राप्ती की इच्छा से वह हर सोमवार व्रत भी रखता था और पूरी श्रद्धा के साथ शिव
00:40आग्रह करने लगी पार्वती जी की इच्छा सुनकर भगवान शिव ने कहा की हे पार्वती इस संसार में हर प्राणी को
00:46उसके कर्मों का फल मिलता है और जिसके भाग्य में जो है उसे भोगना पड़ता है लेकिन पार्वती जी ने साहुकार की भक्ती का मान रखने के
00:53लिए उसकी मनो कामना पूर्ण करने के लिए कहा माता पार्वती के आग्रह पर शिव जी ने साहुकार को पुत्र प्राप्ती का वर्दान दिया लेकिन साथ
01:00ही यह भी कहा कि इस बालक की उम्र केवल बारह वर्ष ही होगी माता पार्वती और भगवान शिव की बातचीत को साहुकार सुन रहा था जिसे सुन कर ना तो उसे कोई खुशी थी और ना ही दुख वह पहले की तरही शिव जी की पूजा करता रहा कुछ समय के बाद साहुक
01:30करा कर दक्षिना देते हुए जाना दोनों मामा भांजे इसी तरह यग्य कराते और ब्राह्मनों को दान दक्षिना देते हुए काशी की तरफ चल पड़े रास्ते में एक नगर पढ़ा जहां नगर के राजा की कन्या का विवाह था लेकिन जिस राजकुमार से उसका विव
02:00विवा के बाद इसको धन दे कर विदा कर दूँगा और राजकुमारी को अपने नगर ले आऊँगा उसने लड़के को दुले के वस्तर पहना कर राजकुमारी से उसका विवाह करा दिया लेकिन साहुकार का पुत्र इमान
02:11उसने मौका पाकर राजकुमारी की चुन्नी पर लिख दिया की तुम्हारा विवाह तो मेरे साथ हुआ है, लेकिन जिस राजकुमार के साथ तुम्हें भेजा जाएगा वह एक आँक से काना है। मैंतो काशी पढ़ने जा रहा हूँ।
02:22राजकुमारी ने चुन्नी पर लिखी बात अपने माता पिता को बताई। राजा ने अपनी पुत्री को विदा नहीं किया। दूसरी ओर साहुकार का लड़का और उसका मामा काशी पहुंचे और वहां जाकर उन्होंने यज्य किया। जिस दिन लड़के की आयु बारह साल क
02:52से कहा, स्वामी मुझे इसके रोने के स्वर सहन नहीं हो रहा। आप इस व्यक्ती के कश्ट को अवश्य दूर करें। जब शिवजी मृत बालक के समीब गए तो वह बोले कि यह उसी साहुकार का पुत्र है जिसे मैंने बारह वर्ष की आयु का वर्दान दिया। अब इसकी
03:22शिक्षा समाप्त करके लड़का मामा के साथ अपने नगर की ओर चल दिया। दोनों चलते हुए उसी नगर में पहुंचे जहां उसका विवा हुआ था। उस नगर में
03:31भी उन्होंने यग्य का आयोजन किया। उस लड़के के ससुर ने उसे पहचान लिया और महल में ले जाकर उसकी खातिरदारी की और अपनी पुत्री को विदा किया। इधर साहुकार और उसकी पत्नी भूखे प्यासे रहकर बेटे के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। दो
04:01प्रदान कर रहा हूँ। इसी प्रकार जो कोई सोमवार वरत करता है या कथा सुनता है उसके सभी दुख दूर होते हैं।
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