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  • 5 years ago
ज्येष्ठ मास की अमावस्या को वट सावित्री का व्रत सुहागिन महिलाएं करती हैं। ब्रज के मंदिरों में महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना की। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि अखंड सौभाग्य और संतान प्राप्ति की कामना से इस व्रत को रखा जाता है। अमावस्या तिथि को रोहिणी नक्षत्र, गजकेसरी योग, बुधादित्य योग, सूर्य एवं चंद्रमा वृषभ राशि में गोचर करेंगे। अत: यह व्रत फलदायी होगा। मान्यता के अनुसार, देवी सावित्री ने अपने पति को इसी वृक्ष के नीचे पुन: जीवित किया था। तभी से इस दिन वट सावित्री का व्रत रखा जाता है।

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