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  • 5 years ago
नई दिल्ली, 5 जून। वर्दी चाहे किसी भी रंग की हो। किसी भी देश की हो, मगर बात जब किसी की जिंदगी पर आ जाती है तो फिर यह ना सरहद देखती है और ना ही जाति-मजहब। यह जिंदगी बचाने के लिए खुद की जान जोखिम में डालने से भी नहीं चूकती है।

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