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  • 6 years ago
Shayari for shayari lovers

लिखने को ग़ज़ल ,
कातिब ख्याल ढूंढते है

बुरे लोग दर हक़ीक़त
अपना जवाल ढूंढते है

जो भूल जाते है रिश्तों को
वो अपनों की पुकार ढूंढते है

वैसे तो कहलाते हैं जो बड़े लोग
वो भी अपना मुकाम ढूंढते है

खुद कर जाते हैं सारी हदें पार
वो औरों के लिए मेआर ढूंढते है

जब बहारें थी तो कोई कद्र न की
आया पतझड़ तो बहार ढूंढते है
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