गुरु कैसा होना चाहिए इस प्रश्न के जवाब में उत्तर देते हुए मैतया कहते है कि ये बड़ा महत्वपूर्ण रिश्ता है। बाकी सब रिश्ते समय के साथ बदलते है, पर गुरु का रिश्ता समय के साथ प्रगाढ़ होता है।
गुरु का चयन करते हुए हमे कबंधा जैसे लोग दिखते है जिनका मुंह उनके पेट पे लगा होता है। भुजाएं लम्बी और मजबूत होती है। ऐसे लोग गुरु नहीं बन सकते।
मैतया सबरी का जिक्र करते है और कहते है कि उन्होंने जो बेर राम को खिलाये थे वो स्वयं भी खाके देखे थे। गुरु को अपनी शिक्षा का खुद भी अनुसरण करना चाहिए।
मैतया दक्षिणा की बात करते है और कहते है कि ये पैसा या भेट नहीं अपितु शिष्यों का विकार है जो गुरु त्याग करने बोलते है।
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