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  • 10 years ago
कफ़न ओस का फाड़ बीच से
दरके हुए क्षितिज उड़ जाएं
छलकी सोनलिया कठरी से
आंखों के घड़िये भर लाएं
चेहरों पर ठर गई रात की
राख पोंछती जाएं
शहरीले जंगल में सांसें
हलचल रचती जाएं

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