00:00एक पहाडी गाउं में भयंकर भूस खलन होता है, हर ओर तबाही, गिरे हुए पेड, रास्ते कीचड से भर जाते हैं।
00:08खामोशी के बीच, मिट्टी में लिपटी एक भूरे उन की चादर का कोना बाहर दिखता है।
00:38पोटी आँखें सतर्क हैं और वह जमीन को सूंग रहा है। बारिश थम चुकी है, लेकिन आस्मान अब भी उदास है।
01:08गर्माहट देता है एक रक्षक की तरहा। रात का सननाटा है। चांदनी में बच्चा और काला पिल्ला कीचड में एक दूसरे से लिप्टे हुए हैं।
01:18पिल्ले की आँखें आधी खुली हैं, हर आहट पर नजर रखे हुए, सुबह की रोशनी धीरे धीरे फैल रही है।
01:25काला पिल्ला जोर जोर से भौक रहा है। पीछे पहाड़ी पर कुछ इनसान दिखाई देते हैं, उम्मीद जाकती है। दो रेस्क्यू करमचारी बच्चे को उठाते हैं। पिल्ला बराबर खड़ा है, पूँच हिला रहा है, रेस्क्यू टीम है और भावग भी। ये सिर
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