00:00भारत माता की ज़र्ण।
00:10मेरे प्यारे देश वाजियों।
00:13आज पुरा देश दुनिया के कोने कोने में करोडो भारतिय प्रकास का पावन पर्व मना रहे हैं।
00:28दूर दूर से लोग अपने घर पहुँच रहे हैं परिवार और परिजनों के साथ मिलने जुनने का एक बड़ा महुच्शव
00:44होता है
00:46और मैं भी दिवाली मनाने आपके बीच पहुच गया हूँ
00:57सीमा पर और देश के भी तर राष्ट की रक्षा करने वाले राष्ट के प्रहरी मा भारती के वीर
01:15आप सब बेटे बेटियां आप सब मेरे परिजन है
01:25आप सब मेरे परिवार का हिस्ता है हिमाले की गोद में कारगिल से लेकर लिफचा तक
01:40समंदर किनारे सरक्रिक से लेकर समंदर की गोद में आइनेस विक्रान तक
01:53वीर जवानों के साथ हर दिवाली मेरे लिए यादगान रही है
02:06मेरे वीर जवानों इस बार मैं दिवाली मनाने बस्तर की जंगलों में आया हूँ
02:24आप सब के बीच आया हूँ यह वो भूमी है जहां कभी नक्सली आतं का कहर था
02:40और आप सब की त्याग तपस्या के कारण उसी भूमी पर आज
02:51नक्सली आतं का कहर खत्म हुआ विकास की बहर शुरू हो गई
03:06और साथियों साथ दोजार चब्विस के दिवाली बाग कई विशेत हैं
03:18चालिस पचास साथ के बाद आपके लिए ऐसी दिवाली आई हैं यह पहली दिवाली हैं
03:27जब देश नक्सलवात माववादी आतं के खिलाप दशों को
03:37पुरानी लड़ाई जीत चुका है यह पहली दिवाली है जब देश का हर जिला नक्सलवात से मुक्त है
03:58यह पहली दिवाली है जब करोड़ों देश वासी नक्सलवात के भय को परास्त कर चुके है यह एक असाधार उप्लब्दी
04:15है
04:17इसका बहुत बड़ा स्रेख आपका है आप जैसे लाखों भीरों का जमानों का बेटे-बेटियों का सुरक्षा कर्मियों का है
04:36इसलिए आज मैं आपके साथ तिवाले मना देहाया हूँ
04:52और
04:54140 करोड देश वास्यों की और से
05:02आपके त्याग
05:05समर्पान
05:07और सेवभाव के प्रति
05:12आभार भी व्यक्त करने के लिए आया हूँ
05:18साथियों
05:19हमारे दूरदर्शी पुर्वजों ने कहा है
05:26आभ्यंतरम भयम रक्षम
05:33असारम बायतो भयम
05:36अर्थात
05:39जब राष्ट की आंतरिक सुरक्षा मजबूत होती है
05:45तो बाहरी दुश्मन
05:51कुछ नहीं कर पाता है
05:56लेकिन अगर
06:00आंतरिक सुरक्षा कम पड़ती है
06:03तो बाहरी दुश्मन भी
06:06सर उठाने लगते है
06:12इसलिए
06:14जो भूमी का सिमाओं पर
06:19हमारी सेनाओं की है
06:23देश के भीतर वही रोल
06:27आप सब सुरक्षा बलो का है
06:32आपने
06:33देश की एकता
06:36अखंता के लिए
06:38अंगिनक बलिदान दिये है
06:43आपने
06:45असीम त्याग किया है
06:50देश की आंतरिक सुरक्षा में लगे सुरक्षा बल
06:56हमारे सीर पिएप
07:00कोबरा
07:03बिएसेफ
07:04आई टी बिप
07:06एक एक जवान
07:11एसेश बी
07:13आयर बी
07:15और राज्यों की पुलीस का एक एक सिपाई
07:20बस्तर फाइटर्स जैज़े
07:23स्पेशल फोर्सेस के कमांडोस
07:27महिला फाइटर्स
07:29ये देश
07:32आपकी सेवाओं के लिए
07:36आपका रणी है
07:46करोणों करोणों देशवासी
07:49आप पर गर्व करते हैं
07:57कृतज्यता
08:00और अपने पन की इसी भाव के साथ
08:05मैं आप सभी को
08:10जो जो जहां जहां डटे हैं सक को
08:16दिपावले की
08:17बहुत बहुत बढ़ाई देता हूँ
08:26मैं देश की सीमाओं पर
08:28राष्ट रक्षा के लिए तैनात
08:32हमारे सैनिकों को भी बढ़ाई देता हूँ
08:37साथियों
08:38माओ वादी आतंग नकसलवाद के खिलाब
08:43ये लड़ाई
08:46आजसान नहीं थी
08:49एक समय था
08:52जब देश के करीब
08:54बीस राज्यों में
08:58दो सो तीस जादा जिले
09:03नकसलवाद की चपेट में थे
09:05नकसलवाद के प्रभावित थे
09:09शाम होने के बाद यहाँ जीवन ठैर जाता था
09:18घरों से बहार निकलना ना मुम्किन हो जाता था
09:27लोगों से उनका वोट डालने का अधिकार भी इन नकसलियों ने चीन लिया था
09:39बिहार, महाराष्ट, ओरिशा, यूपी, मतबरदेश, चटीसगर
09:49देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा
09:55बाम प्रंथी उग्रवाद की चपेट में था
10:02हजारों गाउं, करोडों की आबादी
10:09एक साल में दो-दो हजार तक नकसली हमले
10:16एक साल में दो हजार हमले
10:19आप यात करिए
10:23दो हजार दस में यही पास ही
10:28दंते वाड़ा में नकसलीों से मुढ़ भेड़ में
10:35सी आर पी एप के हमारे
10:39छियत्तर सुरक्षा कर्मी शहीद हुए
10:452010 में ही
10:49दंते वाड़ा में ही
10:51एक और घट्ना में
10:5544 निर्दोष नागरीकों की हत्या हुई थे
11:03यह धर्ती हमारे वीरों के रख्त से
11:13अभिशित्त हो गए थी
11:16लेकिन
11:20महलों में रहने वाले
11:24किसी भी नामदार की
11:29सिसकी नहीं सुनाई थी
11:33किसी भी महलों में रहने वाले नामदार की
11:39आँखों से एक बिंदू में नहीं निकला था
11:45आए दिन
11:49कही न कही
11:50यह ऐसे हमले होते रहते थे
11:56दसकों तक
11:59यह सिलसिला चलता रहा
12:02इस दोरां
12:0536 गड़ में ही
12:10एक हजार से जादा जवानों का बनिदान हुआ
12:18आईएडी के बिस फोंटों में
12:23कितने ही जवानों को
12:25अपने हाद पैर घवाने पड़े
12:31आप दोजार चार से दोजार तेरा तक के आंकड़े देखेंगे
12:36तो हर साल
12:41जितने नक्सली मारे जाते थे
12:43उससे ज़्यादा संख्या में
12:47हमारे भीर जवान शहीद होते थे
12:54नक्सली संख्यणों के मुठ्या इससे अपनी जीत समझते थे
13:01जश्न मनाते थे
13:06और दुर्भाग्य से
13:10तब की सरकारों द्वारा
13:15नक्सल वात को लाईलाज बिमारी समझकर
13:19छोड़ दिया गया
13:23मेरा आदिवासी परिवाणों को
13:27उनके नसीब पर जीने के लिए
13:34छोड़ दिया गया
13:37और इसे शुकार कर लिया जया था
13:40कि ये तो बस ऐसे ही चलता रहेगा
13:44गोलिया चलेगी जवान मरेंगे नागरिक पिटेंगे
13:51साथियों कोई भी देश
13:57अपने दुश्मनों के लिए ऐसे ही चलता रहेगा
14:03कि एप्रोच से नहीं चलता
14:10देश को आगे बढ़ाने के लिए देश के दुश्मनों को
14:19बुलंद होसले के साथ एक रणिती बना कर कुचलना ही होता है
14:29इसके लिए जिस राजनितिक इच्छा शक्ति की कमी देश में थी वो कमी
14:39साल 2014 में दूर हुई