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  • 8 minutes ago
दीपावली की पूजा के लिए रांची के बाजार में पूजा सामग्री खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. रिपोर्ट-चंदन भट्टाचार्य.

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00:00दिपाबली के मौके पर राजधाने नाचे के बाजारों में पुजन सामग्रियों की खरिदारी को लेकर सुभस ही चहल पहल रही।
00:07खासकर नई धान की बाली, गेदा फूल, केला का थम और कमल फूल की मांग अधिक रही।
00:13माता लक्ष्मी की पुजा में इन सामग्रियों का दिशेश महत्त होने के कारण अपरबजार कचारी समेत शहर के बिभिन बाजारों
00:20में खरिदारों की भीर देखने को मिली।
00:22लोग पुजा की तैयारी के लिए सुभसे ही बाजार पहुचने लगे थे।
00:26फूलों और अन्पुजन सामग्रियों की दुकानों पर दिन भर खरिदारी होती रही।
00:32दिपाबली में नई धान की बाली चड़ाने की परंपरा है।
00:34पुजा के लिए केला थम में भी लोगों की खरिदारी की सुची में शामिल रहा।
00:39बाजार में आकार के अनुसार इसके कीमत तै थी।
00:42गेंदा फूल के भी बाजार में अच्छी मांग रही।
00:45पूजा और घरों को सजाने के लिए लोग पिले और लाल गेंदा फूल खरिते न जराए।
00:50बाजार में किवल एक शमुदाय के लोग ही नहीं बलके अलग-अलग धर्मों के विक्रिता भी पूजा से जुड़ी इन
00:56शामगरियों को बेचते लजराए।
00:58कई विक्रिताओं ने बताया कि दिपाबली के मौके पर नई धान के बाली और कमल फूल की मांग हर साल
01:04रहती है।
01:29और यह क्या सते हैं वह आपका शाड़े छे सुर पे दिख रहा है।
01:32हाँ पूरा खतम हो गया हम लोग देड़ लाग का माल लाए थे अल्मुस्ट खतम हो गया पचास हजर का
01:36माल बचा हुवा होगा।
01:39हमको लगता है राची में पांच ट्रक लगता है पांचों का पांच खतम हो जाता है अपर बजार का बतार
01:45है पूरा राची को तो और जादा लगता होगा।
01:48इसके धान का बहुत महत्व होता है और कमल फिल में बहुत महत्व होता है इसके बिना पूजा नहीं होता
01:53है अम लोग तोल के लाए है बड़ा मुश्किल से तुलाव का अंदर से घूश के लाना पड़ता है
02:18अंतर यह कि यादा पतब दोनों चाड़ता है पर यह जादा मांगा यह वाइट वाला वाइट वाला वाला यह यह
02:25बिशी पर जोड़ा है
02:25foreign
02:32foreign
02:41foreign
02:42foreign
02:44foreign
02:44foreign
02:44Yes you can see the gate
02:49on the gate.
02:52Then you can see the gate
02:54and the gate will build the gate.
02:55It'll be light.
02:57The house is the house.
03:05Do you know what you're buying?
03:10No, it's not.
03:12foreign
03:42दिपाबली का ये बाजार केबल खरीद बिक्री तक सिमीत नहीं रहा बलकि इसमें परंपरा आस्था और आपसी समाजिक सोहार्थ की
03:50जहलक भी दिखाए दी
03:51नई फसल की बाली से लेकर कमल और गेंदा फुल तक हर सामगरी के पीछे जुड़ी धार्मिक मायन नताओं ने
03:58बाजार की रौनेक बढ़ाई
04:00चंदन भटाचारिया ईटीबी भारत राची

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