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  • 14 minutes ago
कंप्यूटर-इंटरनेट के युग में दिवाली पर गुम हो रही लाल बही परंपरा पर अनिल कुमार पाण्डेय के संपादन में संवाददाता गोपाल मिश्र की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट...

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Transcript
00:00श्री गणेशी सदासा है, श्री लेशमीटी सदासा है।
00:03ये बातें आज से कुछ साल पहले तक उन डुकानों में, उन गर्दियों पर या उन और जोगित इस्थानों पर
00:11सुनाई देती थी।
00:11दिवाली के फूजन में ऐसी चीजों का प्रयोग होता था, जिनमें खाटा बही और अन्य तरहां के जो लिखा पड़ी
00:19के संदर्वित चीजें थी, उनको इस्तमाल किया जाता था।
00:41और आटिविचल इंटेलिजन्स ने इस परंपरा को अब लगबख खत्म कर दिया है।
01:12अब लोग कंप्यूटर की तरह मुख रचुकी है। जरूरत भी है क्योंकि उम्रे साल भर के लेखे लोके को रखना
01:18और उस पर देढ़ से दो महिने में अपने प्रॉफिट लॉट को निकालना अब मुश्किल काम है। लेकिन परंपरा के
01:24नाम पर इनका निर्वान अब प�
01:39लेकिन कुल मिला कर इस तरह की खाता भाही जो अलग अलग तरह के लगब 5-6 तरह की उनका
01:44वजूद अब खत्म हो रहा है और उनसे लोग दूरी बना रहे हैं और परंपराओं से खूर्च होते लिए पहले
01:50ये बही खाते चलते थे जो आपका मैनुवल काम होता था जब हा�
01:59मेरे तक बैलेंशीट टैली करते रहते थे अब उसके बाद कंप्यूटर का जगी हुगा अगया पुरा जिरे जिरे करके जो
02:06है अब रिटर्न भी फाइल होने कंप्यूटर के जूरू होने लगए तो लोगों ने इसको मुझारी पूजा करना के लिए
02:12बिक्रियत ने होती है
02:13ताकि यह कहले जाए कि पहले से 25 परसंट तक पेल अब रह गई और यह बरकरार रहेगी पहले तो
02:22विए चार से पांच मेने पहले लगबर शुरू हो जा तरह काम हमारे हैं होना और पूरा काम यह महनुवाल
02:28है आपका इसमें जो है आपका पेपर कटिंग करूँ के हाथ से म
02:43पूरी हाथ से होती है तो अब क्या है कि आपका यह सारा प्रोसर स्पेश्ट में मेरे टाइम लगता तो
02:50इसलिए चार से पांच मेने पहले ही सब काम शुजू होता था अब होते होते दीरे जरे घटे घटे घटे
02:56चार से तीन मेना दो मेना करते गटे अब जो है आपका पं�
03:14देखे पहले इसको खाता वही के नाम से देखा जाता था और इसमें कुरानी काहवार भी जूड़ी हुई है कि
03:20पहले लिख बाद में दे यदि चुके तो खाता वही से ले और कप्पुटर तो अजुनित्का कई हो गए यदि
03:25आज आपके हैं लाइट ने रहे साइबर का प
03:41दिवाली के पर पर हम लोग अपना नया कापी पेन दुकान का मीटर कैची यह सब नया बगलते हैं लोग
03:47तो खाता वही किसके पुजा की जाती है आखिर इसकी पी के पुजा होनी चाहिए बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं
03:52तो सरसती पुजा होती है उनकी किताब कॉपी की
03:54और हम लोग अपने दुकानों का यह लिखा पड़ी करते हैं इसको दिवाली को पुजा की जाती है इसका दुकाली
03:59कुजा का मिश्य समहत्त होता है जैसे कि देखिए इन कापियों पर खाता वहीं पर दिवाली कुजा से सम्मंधित सुगला
04:05आप स्वस्पिक बना हुआ है सा
04:20हमारा उचल खाता जो हां तुधारी का दिन भर का कच्छे का लिंदेन होता आस पर उसका उसके बास खाता
04:26वही होती है खाता वही के बाद जो दिन भर का पैसा आया गया उसको हपते या पंदर दिन में
04:31उसको जमा नकल भही नाम नकल भही में इसको टास्फर करते हैं उसके
04:44I'm gonna pass it on my own.
04:45What's that?
04:45I'm going to pass it on my own.
04:45I'm going to pass it on my own.

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