00:05चिमनियों से निकलता काला धुआ जलती मिट्टी की सोंधी गंद और चारों दरफ बिखरे कोईले के ढेर के बीच बिहार
00:14के शेखपुरा जिले में एक नया सवेरा हुआ है
00:17कभी कोईला उठाने को मजबूर नन्हे हाथों में अब सुनहरे भविश की पैंसिल नजरा रही है
00:24सदर प्रखन से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी परस्थित देवले गाउं के इट भटे पर जिला प्रशासन द्वारा अक्षर लर्निंग
00:33सेंटर खोला गया है
00:34इसका मुख्य उद्देश्य पलायन करने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चों को शिक्षा के मुख्यधारा से जोड़ना है
00:42वर्तमान में यहां 50 से अधिक बच्चे नियमित पढ़ रहे हैं जो इन गरीब परिवारों के लिए किसी वर्दान से
00:49कम नहीं है
00:49पाँच साल से काम करने वाले जहारखन के धनेश्वर मुंडा के भी दो बच्चे यहां पढ़ रहे हैं
01:07इस पहल के सबसे खास बात यह है कि लूदिपूर पंचायत के देवले गाउं की वाड़ पारशद रीता देवी खुद
01:15कई वर्षों से यहां मजदूरी कर रही है
01:19बच्चे भी इसी सेंटर में पढ़ रहे हैं
01:22महस चे महीने पहले शुरू हुए इस सेंटर में पढ़ने वाली पांच वर्ष की पेंकी बताती है
01:27कि उसे काम से ज़्यादा पढ़ाई में मन लगता है और उसके माता पिता भी उसे हमेशा यहां भेजते हैं
01:33उसे बढ़ा होकर फोजी बनना है
01:42महस्द दो महीने पहले इस सेंटर से जुड़ने वाला रामधीर पहले रांची में रहता था
01:47रोजगार की तलाश में जब उसका परिवार शेखपुरा पहुचा
01:51तो भटे से स्कूल दूर होने के कारण उसकी पड़ाई पूरी तरह से छूट गई थी
01:56लेकिन अब वो पढ़ रहा है भारा प्रवा, पहाडा पढ़ रहा है
02:27।
02:41इन वंजत बच्चों के चेहरों पर लोटी ये मुसकान बताती है कि स्थितियां चाहें जितनी भी कठन हूँ, अगर सही
02:48प्रयास किया जाए तो बदलाव मुम्किन है।
02:51देवले गाउं के सफल मॉडल को देखने के बाद अब जिला प्रशासन इसे जिले के सभी इट भटो पर चलाने
02:58की तैयारी कर रहा है ताकि हर बच्चे का भविश्य समर सके।
03:02शेखपुरा से ETV भारत के लिए शिवचंद्र प्रताप की रिपोर्ट