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  • 7 minutes ago
यूपी की राजनीति में कल्याण सिंह और वाजपेयी के मतभेद की कहानी, देखें 'सरकार' में

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00:07मशूर शेर हैं, नए किरदार आते जा रहे हैं, मगर नाटक पुराना चल रहा है
00:13नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और आप यूपी की चुनावी गाथा सुन रहे हैं सरकार
00:19कहानी के जिस पड़ाओ पर हम है, तब कल्यान सिंग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे
00:24बेहद नाटकी अगतविधियों के बीच दूसरी बार सीम बने थे
00:28बियस्पी के साथ 6-6 महीने रोटेशन वाली सरकार की बंदिश अब नहीं थी
00:33पर आकड़े नहुने के कारण कल्यान सिंग को बहुत समहल समहल कर सरकार चलानी पड़ रही थी
00:39पर मुश्किल बाहर से नहीं आई, बीजेपी के भीतर से ही आई
00:47नमस्कार, आज तक मैं पेश हैं अभी तक की ख़बर
00:50कल्यान सिंग बीजेपी से निकाले गए, कहा पार्टी को ये फैसला महंगा पड़ीगा
01:14राजनीती में भरोसा बड़ी चीज है, क्योंकि जब भरोसे की बुनियाद दरखती है तो बड़ा टकराओ होता है
01:211999 में यूपी दो महा दिगजुं के बीच टकराओ का रण क्षेत्र बन गई
01:28कल्यान सिंग 6 दिसंबर को जब विवादे धाचा धा, तो उसके बाद कल्यान सिंग को ये महसूस होने लगा
01:37और ये बात सच भी है के पूरे देश में कल्यान सिंग हिंदुबादी बले नेता के रूप में उभर के
01:44आए
01:45और शायद कल्यान सिंग को इस बात का गलत फेमी या भ्रहम हो गया
01:50के वो अटल जी, अडवानी जी, उस समय के अशोक सिंगल, जो मंदिर आंदूलन से जुले रहे बले नेता थे,
02:00राजमाता सिंधिया
02:01इन सबसे जादा या उनके समकष उनका एक कदब बढ़ गया है, कल्यान सिंग को इस बात की शायद गलत
02:08फेमी हो गई
02:09वाजपई तब भी सब को साथ लेके चलने की बात करते थे, जबकि कल्यान सिंग एक जातिगत राजमीती जो बाजपा
02:16में थी, उसके प्रतिबिम थे
02:31बीजेपी का मतलब ही था अटल बिहारी वाजपई और हिंदू रिदय समराट की विराड़ छवी वाले कल्यान सिंग ऐसे थे
02:39जैसे पार्टी के विचारधारा का परिचय पत्र
02:45तिन दोनों के बीच मत भेद भी थे, मन भेद भी था
02:55देखे कल्यान सिंग जी और अटल जी और भारती जन्ता पार्टी के बीच जो मतभेद पैदा हो गए थे उसकी
03:04बचे से कल्यान सिंग जी सीधे सीधे उन्होंने आरोप लगाने भी शुरू कर दिये थे और वह अपने नाराजगी जादा
03:14बढ़ गई थी तो वह अटल जी प
03:201997 में गलत वहमी थी बढ़ते बढ़ते बन गया मन मुटाओ और समय के साथ टकराओ बनने वाला था
03:29तब केंद्र में भी खोब उथल पुथल थी अटल विहारी वाजपेई की सरकात 13 दिन में गिर चुकी थी और
03:35देश में मध्यावधी चुनाओ हो रहे थी
03:38वाजपेई लखनव से प्रत्याशी थे और कल्यान सिंग यूपी के मुख्य मंत्री
03:42कल्यान सिंग से तब एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि क्या अटल विहारी वाजपेई फिर से प्रधान मंत्री बनेंगे
03:52यह उस दोर का बयान है जब दोनों में टक्राव किस्तिती आ गई थी और एक तरफ से यह सचाई
04:02भी है कि कल्यान सिंग जैसे अगर शत्रप नहीं होते तो अटल विहारी को चुनाओ जीतने में दिक्कत होती थी
04:10लेकिन दूसरी तरफ यह भी सचाई है कि यह कल्यान सिंग का माथा कुछ ज़्यादा खराब होने का भी वैयान
04:18है क्योंकि एक दोर में उनको लगता था कि उनकी काबलियत प्रधान मंत्री बनने वाली है या और बड़ी है
04:23तब ही उन्होंने उस किसम से चुनाओती दी थी
04:40रहा कि उन इलाकों में सकती ज्यादा रही जो बीजेपी के अच्छे असर वाले इलाके थे उनकी निस्पक्ष मतदान के
04:47मतलब यह है कि इससे पहले जो चुनाओ हुए थे उसमें कल्यान सिंग भी रहे हैं तो क्या उस समय
04:54निस्पक्ष चुनाओ नहीं हुए थे जो अब व
05:091998 के आम चुनावों में बीजेपी ने यूपी से 58 सीटें जीती थी 1999 के मध्यावधी चुनावों में जीती सिर्फ
05:2029 उंगली किस पर उठी यह अंदाजा अप लगा सकते हैं
05:28अटल बिहारी वाजपई तो फिर से प्रधान मंत्री बन गए लेकिन कल्याण सिंग यूपी के मुख्य मंत्री नहीं रहे
05:361999 में 12 नवंबर को कल्याण सिंग ने इस्तीफा दे दिया
05:42राजनीती की माया राजनीती ही जाने कल्याण सिंग की जगे सीम बने 76 साल के राम प्रकाश गुपता राम प्रकाश
05:52गुपता जंसन के पुराने निता थे चौधरी चरण सिंग के समय डिप्टी सीम रह चुके थे
05:58लेकिन अजीब बात ये थी कि लगभग देड़ दशक पहले वो खुद राजनीती से अलग हो चुके थे और अब
06:04देखिए अचानत सीम बन गए
06:12सब हैरान थे एक तो गुपता जी किसी सदन के सदस्य नहीं दूसरे कलराज मिश्रे केश्रीनाथ त्रिपाथी विने कटियार लाल
06:19जी टंडन राजनाथ सिंग जैसे कदावर नेता नजर अंदाज किये गए
06:24लेकिन सीधे अटल जी की रिकमेंडेशन थी कोई कुछ नहीं बोला
06:33सीएम की कुरसी गई लेकिन कल्यार सिंग का घुस्सा नहीं गया
06:41अखिर में 9 दिसमबर 1999 को कल्यार सिंग को पार्टी से निकाल दिया गए
06:47रामदेर आंदोलन से कलियाण सिंघ बीजेपी के हीरो बने थे पर अब पार्टी के लिए विलन बन गए
06:53कलियाण सिंघ ने बीजेपी को हराने की कसम खा ले
07:06अब उनका शुमार हो गया तो जाहिरते बात है
07:11कि अटल जी के साथ में उनकी दो जो शक्तियां आपस में टकरा गई उसी बीच में नए नए विवाद
07:18पैदा हुए उसमें जाती का मामला जब उब्रा तो भारती जंता पाल्टी जो राम मंदिर आंदोलन से शिर्ष पर पूरे
07:26भारत की राजनेती में बढ़ गई थी उस टक
07:41मेडिया का विस्तार हो रहा था मुख्यमंत्री राम प्रकाश गुपता पर कलम के साथ कैमरों की भी नेगाहे थी और
07:47सीम साहब के भूलने की आदब पर बहुत टीका टिपड़ी होने लगी
07:52लोग भी पॉलिटिक जानते थे उतर प्रप्डेश को सबको हैरानी हुई कि यह आदमी कहां से आ गया यह तब
07:58के थे जो करीब 20-25 साल बाद जिनका जिर्णो अधार एक किसम से हुआ तो उनके कामकाज पे इस
08:06किसम के टिपनिया या इस किसम का मुआवरा जोग चलता ही रह
08:11राम प्रकाश गुपता एक बात के लिए बहुत फेमस हुए तबादले, ट्रांस्फर पोस्टिंग
08:18सीएम बनने के तीम महीनों के अंदर ही साड़े तीन सौ से ज्यादा अफसरों के तबादले कर दिये
08:23एक डियम का तो एक महीने में ही छे बार तबादला कर दिया
08:45सबके मन की करते करते भी राम प्रकाश गुपता लगभग 11 महीने ही मुख्यमंत्री रह पाए
08:52उनकी जगे मुख्यमंत्री की शपत दिलाई गई राजनात सिंग
09:10राजनात सिंग पार्टी के अनुशासित सिपाही थे
09:13बीते पूरे दशक में पार्टी में कितनी भी उठा पटक हुई राजनात सिंग पार्टी के हर निर्ने के साथ रहे
09:21एक बात और थी यूपी में पार्टी के छवी प्रशासिक और राजनीतिक तोर पर बहतर बनाने के लिए भी राजनात
09:28सिंग को चुना गया था
09:29लेकिन चुकि पार्टी में बड़े बड़े दिंगज थे बगावत से बचना भी जरूरी था तब अनुशासन को बनाए रखने के
09:36लिए और नए सियन की सहूलियत के लिए पार्टी के एक महासचिव को लखना उभी जा गया जानते हैं यह
09:42महासचिव कौन थे नरेंद्र मो
09:59पथली ठीक 15 दिन बाद यूपी से अलग करके उत्तरांचल राज्य का गठन हुआ यूपी की 22 विधान सभा सीटे
10:08उत्तरांचल में चली नहीं यानि यूपी की कुल 426 सीटों में से रह गए 404 सीटे
10:16फिजिक्स के लेक्चरर राजनाच सिंग को राज्य बटवारे के गणित से जैसे ही जरा सांस मिली उन्होंने किसानों से जुड़े
10:23मुद्दों को सबसे पहले हल करना शुरू किया
10:26राजनाजी खुद किसान परिवार से आते थे उन्होंने किसान पंचायते शुरू की धान गेहूं की अधे खरीब की स्टेट पॉलिसी
10:34बनाई गन्ना किसानों को समय पर भुगतान की योजनाय बनाई गन्ने का मूल ने बढ़ाया सीचाई के पानी की वेवस्था
10:41पर जोर दि
10:56उपर से सरकार मिली थी राजनाज सिंग को बही कल्यान सिंग के जमाने वाली जिसमें कई दल के लोग शामिल
11:03थे और जम्बो मंत्री मंदल था तो राजनाज सिंग काम करें या मान मनवल ये सवाल हमेशा खड़ा हो जाता
11:10था
11:12समस्या ये थी कि जो भी मंत्री स्योगी दल थे उनके थे तो उनको साथ रखना भी मजूर थी अब
11:19उस समय तमाम तरह की बयानवाजी तमाम तरह की और भी चीज़ें हो रही थी अब वो मुक्मंत्री रहते हुए
11:25राजनाज सिंग का उन पर नियंतरन करना भी कुछ जो रा�
11:33राजनाज सिंग जब कल्यान सिंग सरकार में शिक्षा मंत्री थे तब नकल कानून जैसा धाकड़ फैसला लिया था अब सीम
11:40थे तो तमाम गतिरोद के बावजूद फैसले जबरदस्त ले रहे थे अपने ही मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा देते
11:47और खुद ही फोन कर
11:48के बताया भी कि आपको मंत्री बंडल से बर्खास्त किया जाता है नरे सगरवाल चूग लोकानी कांगरेस के नेता थे
11:55और वो उन्होंने क्या किया कि और जा मंत्री रहते हुए वो प्रदेश की विजली जो कंपनी थी विजली बोर्ड
12:05उसको तीन हिस्सों में बाट दिया �
12:06उन्होंने और उसको लेकर तमाम तरह की बयानवाजी तमाम चीजें हो रही थी अच्छचुक वो सहयोग था और सीनियर लीडर
12:13थे नरे सगरवाल तो कुछ ऐसा बयान उन्होंने हरिजवार में दिया जो मुखमंत्री के खिलाप था और सिक्ता के खिलाप
12:20था तो राजना सि
12:31यह कैसा राजनाच सिंग्ने मंत्री पंस बर्खास्त कर दिया फिर गिरफतार भी करवाया वस्ती में एक व्यापारी के लड़के का
12:39प्रण होने पर क्या हुआ कि उस लड़के को लाकर के कैंट में एक रखा गया तब कालीन मंत्री चे
12:48अमर मनी सिंग उनके आवास पर उसको
12:54वहां से बरामाद हुआ तो राजनाच सिंग्ने खड़ा फैसला ले चुए अमर मनी सिंग को तब मंत्री मंदल से बरकास
13:00कर दिया असल में यह सब लोग क्यों मंत्री बने क्यों विदायक बने यह हमारे हिंदी पटी की पॉल्टिक्स का
13:08एक सरनाक प्रकरन है कि और 67 से यह का
13:12सुरू हुआ है अमर मनी कोई पुर्णी कमा के पॉल्टिक्स तो करते नहीं रहे हैं उन्होंने इसी किसम का सरकारी
13:18ठेकों को हत्याओ जितने अपरादी गत्वीदियां होती हैं उनको संद्रक्षन दो या खुद उसमें भागीदार बनो और अकेले अमर मनी
13:26नहीं है
13:27वैसे घूशनाय करने में भी राजनाज सिंग आगे थी और ये उनकी आलोचना का कारण बनता रहा आरक्षन का मुद्दा
13:34उठाया कमिटी बनाई लेकिन मामला कोर्ट में फस गया बड़े पैमाने पर नौक्रियों में भरती के लिए समूह गर की
13:41भरतिया निकाली ये मामला
13:43भी अन्जाम तक नहीं पहुंच सका पर सही सही कहा जाए तो राजनाज सिंग को समय कम मिला वो एक
13:53साल 131 दिन ही मुख्यमंत्री रह सके और तब तक 2002 में आ गए यूपी के चुनाओ पार्टी के पास
14:01तब तक न मंदिर मुद्दा धारदार बचा था न कल्यान सिंग जैसी �
14:05छवी वाला कोई नेता उल्टे कल्यान सिंग नई राजनीतिक पार्टी राष्ट्रे क्रांती दल बनाकर बीजेपी को मट्या मेट करने की
14:14कसमे खाते हुए चुनाओ मैदान में ताल ठोक रहे थे चुनाओ के जो नतीजे आये उन्होंने बीजेपी को जोर का
14:22जहटका दिया
14:23बीजेपी 100 सीटों तक भी नहीं पहुंच सकी राज में समाजबादी पार्टी और बहुजन समाजबादी पार्टी से भी पिछड कर
14:30तीसरे नमबर पर आई
14:32समाजबादी पार्टी को मिली 143 सीटें बहुजन समाजबादी को 98 और बीजेपी को 88
14:39कॉंग्रेस को मिली केवल 25 कल्यान सिंग की पार्टी को मिली 4 कल्यान सिंग और बीजेपी के दंगल में दोनों
14:50की ही गाड़ी पट्री से उतर गई और यूपी की गाड़ी फिर वहीं आकर खड़ी हो गई जहां से एक
14:56दशक पहले चली थी न किसी को सपश्ट बहुमत न किसी द
15:01कल्में आपसी साज्यदारी की उभी कि एस पी बीएस पी तो जैसे जानी दुश्मन थे बीजेपी बीएस पी के दो
15:09प्रयोग बहुत बुरी तरह विफल हो चुके कॉंग्रेस मूर्चित आवस्था में पड़ी ती क्या होता ऐसे राश्रपती शासन लग गया
15:18लेकिन यू�
15:28पी के पास थी माया वती लेकिन बीजेपी के पास कोई एक ऐसा सर्व स्वीकारिये नेता नहीं था पसे सी
15:37को पॉइंट बनाकर यूभी के सियासत में नया फेल तैयार हो गया
15:41मायावती ने अपने अल्प संख्यक विधायकों को भरोसा दिलाया कि बीजेपी के साथ जाएंगे
15:46लेकिन आपको कोई नुकसान नहीं होने देगे
15:51इधर बीजेपी के विधायक भी जल्दी जल्दी चुनावों में जा जाकर ठक चुके थे
15:56दोनों तरफ चाह बनी तो राह भी निकलाई
15:58बीजेपी और बीजेपी ने तीसरी बार कह दिया गटवंधन पुगूल है
16:03और गटवंधन की सड़क पर हाथी लेकर मुख्यमंत्री की कुरसी पर तीसरी बार पहुँच गई मायावती
16:14वैसे असलियत ये थी कि बस मजबूरी का सौधा था ये
16:18मन तो मिल नहीं रह थे और सब को लग रहा था कि बस जो दिन बीत रहा है
16:22सो बीत रहा है सरकार टिकेगी नहीं
16:26लेकिन तब सब की आखें खुली की खुली रह गई
16:28जब मायावती बहंजी के रोल में सब को दिखी
16:32बीजेपी के लाल जी टंडन और मायावती की एक तस्वीर सामने आई
16:37मुस्कुर आते हुए राखी बांधने की
16:40लाल जी टंडन से निजी संबंधों का फाइदा
16:45भाजपा और बसपा के बीच बेहतर संबंधों के दिख्ट से बहुत महत
16:51पूर रहा है मायावती सुरू में तीन बार मुक्वंत्री बनी
16:59तो उनके पद समहालने के पीछे भारती जनता पार्टी की बड़ी भूमिका रही है
17:07भी मायावती पर यही इल्जाम लगता है कि उन्होंने भाजपा के साथ मिल करके उसके सहयोग से सरकार चलाई
17:18कि इस प्रक्रिया में भाजपा से नजदी की बनेने का जो सिल्सला शुरू हुआ वास्तों में उसका आधार मुख्य है
17:29आधार लाजिट अंदर जी ते
17:34लेकिन जब दिलों में दूरी हो तो लाक मुलम में चड़ाओ दूरी धरार बनते देर नहीं लगती
17:44मायावती ने मोर्चा खोल दिया कुंडा के विधायक राजा भया के खिला
17:51मायावती की नाराजगी पुरानी थी
17:531997 में जब उन्होंने छेचे महीने फॉर्मिले वाली कल्यान सरकार गिराई थी तब राजा भया ने कल्यान सिंह सरकार को
18:02बहुमत तक पहुचाने में बड़ी मदद की थी
18:04मायावती अब मुख्यमंत्री थी लगा दिया आतंगवाद मिरोधक कानून वही पोटा जो बड़े बड़े आतंग्यों पर लगाया जाता था
18:13राजा भया जेल गए और उनकी रियासत बन गई सियासत का अखाल
18:20मायावती ने उसमें राजा भया को अरेस्ट कर लिया था पोटा लगा दिया था उनके उपर जिसका भारती जन्ता पार्टी
18:26ने तब बिरोध किया था
18:28कि ये पोटा उन पर न लगाया जाए उनके पिता जी को भी अरेस्ट कर लिया गया बैती ताल पर
18:34लेके मायवती जी ने और उन लोगों ने काफी वहाँ पर उसको के सरकारी जमीन है उस पर भी राजा
18:40भाईया पर उनके परिवार पर आरूप लगे और वहाँ से एक नहराज�
18:51को बचाए दूसरे यूपी की सवाण और दलत राजनीती भी तो भी जेपी ने खुला विरोध कर दिया मायवती के
18:58मिलने का राजा भाईया जो और उनके पिता जी वह संग से जोड़े रहें वस्तुता उनके पिता जी जो है
19:09वह संग के से उनका पुराना नाता रहा है तो �
19:13भारती जनता पार्टी के अच्छे कार करता हूं मैं हाला को उनके पिता जी कोई राजनीत में नहीं थे तो
19:21लेकिन वह मांसिकता उनकी भारती जनता पार्टी से जोड़ी हुई थी मायवती ने जब उनके उपर पोटा लगाया और जब
19:28उनको ग्रफतारी की उनके पिता जी
19:40यह उसको बचा है तो ऐसे में भारती जंता पार्टी ने विरूत किया कि नहीं इन पर पोटा नहीं लगना
19:46चाहिए
19:50बात यहीं तक रहती तब भी निव जाती लेकिन मामला फस गया दिल्ली से अटल भिहारी वाजपई प्रधान मंतरी थे
19:59उनकी सरकार में परेटन मंतरी जगमोहन ने मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट ताज कोरिडोर के निर्मार में नियमों की अन्देखे का
20:06आरूप जड़ दिया
20:07मायावती इतनी नाराज हुई कि जगमोहन को तुरन थटाने की मांग पर अड़ गई
20:17मायावती की मांग का तो खेर क्या होता यूपी में सरकार का खेल बिगड़ गया बीजेपी ने तिल मिला कर
20:24समर्थन वापसी की घूशना कर दी मायावती ने इस्तीफा दे दिया
20:31पर विधान सभा भंग नहीं हुई राजनीती के खेल की तिकडम अभी बाकी थी
20:44चारा बचा ही क्या था सिवाए राश्रपती शासन लगाने के क्योंकि बीजेपी और एस्पी तो साथ आने से रहे
20:50लेकिन कहते हैं ना दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है वही हुआ सरकार भी बनी और नया सियासी समीकरण भी
20:58आप देख रहें उत्तर प्रदेश की बेमिसाल सियासत की कहानी सरकार बहन मायावती का इस्तीफा हो चुका
21:05इधर मायावती की सरकार गिरी उधर मुलायम सिंग यादव ने तुरंट सरकार बनाने का दावा ठोग दिया
21:10सपा के पास सबसे अधिक विधायक थे कूल 143 बहुमत से तो बहुत दूर लेकिन बहुमत खुद चलकर मुलायम सिंग
21:19यादव के पास आ गया
21:21बीएसपी के 13 विधायक तूट गय थे और उनके समर्थन में आ गया
21:43मायावती फोरण समझ गए कि अभी पार्टी थोड़े तूटी है आगे और भी बड़ा नुकसान हो सकता है
21:49लिहाजा उन्होंने विधान सभाध ध्यक्ष के पास ये अरजी भीजी कि इन सभी 13 विधायकों की सदस्यता दल बदल निरुधा
21:56कानून के तहत खारिच करती जाए
21:59ये हो जाता तो बहुमत साबित करने में मुलायम सिंग को दिक्कत आती
22:05लेकिन असली कहानी भी अब यहीं से समझने की है
22:18केशरी नात त्रिपाठी विधान सभाध ध्यक्ष थे पर वो थे तु बीजेपी के ही नेता
22:24उनके सामने एक तरफ थी उन मायावती की आचिका जिनके साथ तीन बार बीजेपी सरकार बना चुकी थी
22:31और दूसरी तरफ थे मुलाइम सिंग यादव जिनके साथ बीजेपी के रिष्टे जितने खराब हो सकते थे उससे भी अते
22:37खराब
22:4626 अगस्त यानि मायावती की सरकार गिरने और मुलाइम सिंग के दावा प्रस्तुत करने वाले दिन ही
22:52बीजेपी के संसदिय दल की एक बैठक हुई थी यूपी के हाला अब कहा तो ये जाता है कि इस
22:58बैठक में ये तैप आया गया था कि
23:00विधान सभा भंग करके फिर से चुनाओं में जाने से बहतर है राश्टुपती शासन लेकिन एक विचार ये भी किया
23:07गया कि अगर मुलाइम सिंग की सरकार बनती है तो बनने दी जाए
23:12तो बस केश्री नात्रिपाथी ने बीएसपी के बागी विधायकों वाली याजिका डाली थंडे बस्ति में और मुलाइम सिंग को ये
23:19संकेव दे दिया कि जाएए राज्या विशेक की तैयारी कीजिए
23:2429 अगर्स्त 2003 को मुलाइम सिंग यादर तीसरी बार बन गए यूपी के मुख्य मंत्री
23:45और पहुमत साबित करने के लिए उन्हें दिया गया पूरे दो सप्ता कस्म है
23:59समाजवादी पार्टी को आप धुरविरोधी तो कह सकते हो भाचपा की लेकिन दोनों के बीच में कहीं न कहीं एक
24:06बुनियादी ऐसा रिष्टा है कि दोनों की सियासत एक दूसरे की मदद करती है
24:11ऐसे में भाचपा का समाजवादी पार्टी का मदद करना परदे के पीछे भी परदे के सामने भी सरकार बनाना ये
24:19सिलसला पुराना है
24:20और जो आप जिक्र कर रहो उस वक्त ही ये दोर शुरू हुआ था कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार
24:26बनती थी तो ये उम्मेद जग जाती थी कि अब भाचपा सत्ता में होती थी तो समाजवादीयों को लगता था
24:37कि अब नमबर मेरा आएगा
24:40तो वो बीजेपी जो गेस्ट हाउस कांड से लेकर राम मंदिर आंदोलन तक
24:46मुलायम सिंग को लोगतंत्र के लिए खतरा बताते नहीं ठकती थी
24:50उसने उस समय मुलायम सिंग में लोगतंत्र का रक्षक देखा
24:55मैं अराज नहीं थी तो कांटे से कांटा निकालने के लिए जानी ही जाती
24:59बीजेपी वही कर रही थी मायवती से हिसाब चुकता करना उसकी प्राध्मिक्ता थी
25:06मुलायम सिंग यादब को बीएसपी के 13 पागी विधायकों सहित
25:09कल्यान सिंग की पार्टी के चार विधायकों का समर्थन भी मिला
25:14सारे पुराने मद्वेद भुलाकर राष्ट्रे लोग दल अपने 14 विधायकों के साथ मुलायम सिंग से आ मिला
25:21निर्दलिया और छोटे दलों के करीम 19 विधायक आए जो कसर रह गई
25:25वो कॉंग्रेस और CPM ने बाहर से समर्थन देकर पूरी कर दी
25:34मुलायम सिंग बहुमत से मुख्यमंत्री बन गए है लेकिन अभी खेल बाकी था
25:38BSP के 37 और विधायकों ने बगाबत कर दी
25:42पहुंच गए विधान सभाध्यक्ष केश्रीनात त्रिपाठी के पास
25:45मुले हमें नए राजनीतिक दल के तौर पर माननेता दी दी जाए
26:02मायावती के पैरों तले जमीन खिसक रही थी और उस पर विधान सभाध्यक्ष की भूमिका
26:10केश्रीनात त्रिपाठी ने तुरंत भागली विधायकों के दल को लोक्तांत्रिक बहुजन दल के तौर पर माननेता दे
26:15है अलब्त्ता पुराने 13 विधायकों वाला मामला अभी बिलंबित है इस पर उसपार वह फैन्दग नेहीं ले पाए ते
26:22कि केसे नत्रपाथी ने तेरह विधायकों के मसले पर कोई फैसला ही नहीं दिया लंबे समय तक उसको पेंडिंग रखा
26:35और मुलायम से जादव इस बात का इंतियार करते रहे कि और विधायक कैसे तूटें ताकि अलग गुट बनने की
26:44परियाप्ट संख्या हो जाए
26:48यह संख्या बाद में पूरी हुई लेकिन थोड़ा समय बाद पूरी हुई और कुल 37 विधायक वस्पा के टूटे जबकि
26:59जोर्रत उस वक्त तेज की थी
27:02कि उसके बाद तक्नीकी दिश्ट से विधिक दिश्ट से सारी चीज़ें पूरी हो गई तो इस तरीके से केशर नात्र
27:09पाठी के
27:11सदस्यता के नेड़े पर विलंबित फैंसले के कारण उस वक्त मुलायम सिंह आता सरकार को बहुत बड़ी राहत मिल गई
27:20राहत क्या मिल गई उस सरकार बनी रह गई वरना सरकार गिर सकती थी यह लग बात है कि बाद
27:28में केशर नात्र पाठी और इस फैंसले की सरवोच अद
27:40पर राजनीती का उसूल है जिसकी सरकार बनती है वो सबसे पहले अपनी पार्टी से किसी को विधानसभा अध्यक्ष बनादेता
27:47है लेकिन मुलायम सिंह की सरकार के दोराण बीजेपी के कद्दावर
27:52नेता केश्रीनाथ प्रिपाथी ही विधान सभाध्यक्ष बने रहे।
27:57चूकि केश्रीनाथ जी एक अच्छे बकीलों में उनकी गिंती है।
28:02विध के अच्छे ग्याता है, जानकार है।
28:05और उन्हों ने पार्ट अफ स्टेटी कहले ही।
28:10जो एक राजेटिक चाल होती है।
28:12वह कहले है।
28:13उस लहाज से
28:14केशी नाज्जी ने उन 13 विधायकों के जो बस्पा के टूट के अलग दल बना लिया था
28:20जिसमें मायावती ने कहा था के इन 13 विधायकों की सदस्ता समात की जानी चाहिए
28:26दल बदल कानून के तहर वो उन्होंने नहीं की और उससे मुलाइम सिंग इस्टेबिल हो
28:34खैर कहीं पर दुश्मनी निभाई गई तो कहीं पर दुश्मन के दुश्मन के साथ दोस्ती
28:43मुलाइम सिंग सरकार चलती रही
28:45इस बीच बीएस पी ने इलहाबाद हाई कोट की लखनव खंड़ पीट में 13 विधायकों की सदस्सता खारिज नव करने
28:53और 37 विधायकों के दल को मान्य तक देने के मामले में याचिका दाखिल करती
29:02मुलाइम सरकार कोट से मुहलत मांगती रही
29:05केस खिचता गया
29:09बीएस पी जनता के बीच गुस्सा निकालती रही
29:132003 बीट गया, 2004 बीट गया, 2005 आ गया
29:18लेकिन कोई लेड़नय तब तक नहीं हो सका
29:26मुलाइम सिंग यादव का राज चलता रहा
29:29लेकिन जिन ठेट गवई मुलाइम सिंग को
29:31उनके समर्थक धर्ती पुत्र कहा करते थे
29:34वो इसी दौर में बड़े औद्योगिक घरानों के साथ नजर आने लगे
29:40फिल्मी दुनिया की चका चौन्व से घरे हुए
29:52सैफ़ाई महोटसव की शुरुआत वैसे तो 1996 में ही हो गई थी
29:56लेकिन तब वो छोटे और स्थानियस तर पर हो दागा
30:012003 में मुलाइम सिंग के मुख्यमंत्री बनते ही
30:05वो विराट और भव्वे हो गया इतना भव्वे की बॉलिवुड की रंगीनिया तक सैफ़ाई के सामने फीकी पड़ जाए
30:12मुलाइम के राजनीतिक विरोधी इसे बड़ा मुद्दा बनाया करते थे
30:16इस चका चौन के आयोजन में पार्टी नेता अमर सिंग का बड़ा योगदान रहा करता था
30:21और अमर सिंग धीरे धीरे नेता जी के सबसे करीबी बन चुके थे
30:26समाजबादी पार्टी के कई बड़े नेताओं को पार्टी में अमर सिंग का बढ़ता कद अच्छा नहीं लग रहा था
30:35अमर सिंग का विरोध खुले आम होता था लेकिन मुलायम सिंग को उनकी आलोचना सुनना पसंद नहीं था
30:41नेता जी पूंजी वाद के साथ मिलकर समाजबाद की नई परिभाशा गड़ रहे थे
30:46और उधर कानून व्यवस्था का मुद्दा यूपी में बड़ा होता जा रहा था
30:54कानून व्यवस्था में एक उंगली सरकारी सनरक्षन पर भी उठने लगी थी
31:032007 में इलहबाद के मदरसे में दो बच्चियों के साथ बचस्वनूटी के मामले ने यूपी से लेकर दिल्ली तक संसनी
31:11पहला दी
31:12इसमें नाम आया था समाजबादी पार्टी के ततकालीन संसद अतीक एहमद और उसके भाई खालिद का
31:37बिगरती कानून व्यवस्था यूपी की राजनीती में सबसे बड़ा मुद्दा बन गए
31:43तब ततकालीन गुरतपूर सांसद योगी आदितिनाथ कानून व्यवस्था की हालत बताते बताते लोगसभा में फूट फूट कर रो पड़े
31:50सरकार के खिलाब विरोध प्रदर्शन के कारण योगी आदितिनाथ को 11 दिन की जेल की गई थी
32:13ये तस्वीर दो हजार साथ की है तारीख थी बारव मार्च
32:41तब योगी आदितिनाथ की उम्र थी 34 साथ वो तीन बार के गउरक पूर सांसत थे
32:47राज्य सरकार की कारवाई पर योगी इतने आक्रोशित हुए थे कि आँसूं को रोप नहीं पाए थे
33:05खैर वक्त का पहिया दस साल में घूम गया पर उस समय योगी आदितनाथ के नाशूं ने यूपी के सत्ता
33:12में कोई खास हलचल नहीं मजाए
33:35इस दोरान में कई कुछ ऐसे कारिक्रम हुए योगी आदितनाथ के कुछ ऐसे प्रदर्शन हुए �
33:41कुछ ऐसे सरकार विरोधी कदम उठाय योगी आदितनाथ ने लोकतांतिक तरीके से सरकार के नीतियों के खिलाप जिस दोरान में
33:50मुलाइम
33:50सरकार में उनको जेल में भेज दिया गया था यह सारी बाते उन्होंने संसद में रखके एक एक एक हिन्दुत
34:00की अलग को जलाने की कोशिश की और ये देश को बताने की कोशिश की एक मुलाइम
34:07मुलायम सिंग यादों को मुला मुलायम ऐसे ही नहीं कहा जाता है ना सिर्फ वो मुस्लिम तुस्री करण़ करते हैं
34:14बलके हİंदुत का कहीं-- эти
34:16अंधे आ करते हैं हींदू समाज को इग्नोर करते हैं और एक संत औरे का किसी हिंदूत को आगे बढ़ाने
34:25के वाले एक सांसात के साथ जिस तरह का उत्अर पेदिर्स में सुलूब को रहा है इस से अंदाजा लगाया
34:30जाए के मुलायम
34:31सिंग हिंदों के खिलाफ पर मुलायम सिंग जानते थे कि कानून विवस्था का सवाल चुनाओं में
34:45मुश्किले खड़ी कर सकता है। सोनों ने पार्टी की छवी बदलने के लिए उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश के तौर
34:52पर स्थापित करने की प्रयास चुरूत है।
34:55यूपी में जुर्म कम है का माहौल बनाने की कोशिश है।
34:58कुछ हम बोला पुझू बोला हम पुछा हुजूर आप सरकार का है बदलना चाहते हैं।
35:04तू बोले हम देश में सबसे आगे चलना चाहते हैं।
35:07बताइए यह प्रदेश किस चीज में नीचे है।
35:11हम कहा केंद की रिपोर्ट जे कहती है जुर्म में एकदम पीछे है।
35:28शायद जनता को यह रास नहीं आया।
35:42तो समाजवादी पार्टी को यूपी ने सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
35:51इन चुनावों में मायावदी की वापसी और वो भी पूर्ण बहमत के साथ।
35:58जब मैंने मुख्य मंत्री की पत का भार समाद लिया है तो आज मैं बहुजन समाज की मुख्य मंत्री नहीं।
36:06सर्व समाज की मुख्य मंत्री हूँ।
36:10बीएसपी को मिली 206 सीटे, समाजवादी पार्टी को 97, बीजेपी को 51 और कॉंग्रिस को 22 सीटे।
36:25मायावती को पूर्ण बहुमत मिलना बड़ी बात थी, क्यूंकि जनता ने कल्यान सिंग की 1991 वाली सरकार के बाद पहली
36:33बार किसी को पूर्ण बहुमत दिया था।
36:35मायावती के लिए ये बहुमत चुनौती भी थी और सबसे बड़ा अवसर भी दिखाएंगे सरकार के अगले एपिसोड में तब
36:43तक देश और दुनिया की तमाम ख़बरों के लिए आप देखते रही आज़े।

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