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  • 6 minutes ago
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अपना नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। 2,232 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट तय ऑर्बिट में स्थापित हो गया है। यह मिशन 'वन नेशन, वन टाइम' परियोजना का अहम हिस्सा है, जो देश और सीमा से 1,500 किलोमीटर दूर तक सटीक लोकेशन और नेविगेशन की सुविधा प्रदान करेगा। इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में पांच रॉकेट लॉन्च करने का लक्ष्य है। NavIC को भारत का स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम कहा जाता है, जिसे बनाने की आवश्यकता मुख्य रूप से 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान महसूस हुई थी जब विदेशी जीपीएस मदद नहीं मिल पाई थी। इस सफलता से भारत की अंतरिक्ष और सुरक्षा क्षमताएं और अधिक मजबूत होंगी।

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00:08NvS-03
00:30से लग होकर अपने तै और्बिट में पहुच गया
00:37नाविक तारमंडल वन नेशन वन टाइम पर्योजना का एक महत्पूर्ण हिस्सा है
00:41और एक स्वदेशी परमानु घड़ी पहले ही कक्छा में अस्थापित की जा चुकी है
00:49ये पूरे भारत और सीमा से 1500 किलोमीटर दूर तक सटीक लोकेशन और नविगेशन की सुविधादे का
00:57ये सेटलाइट नाविक मिशन के तहत लौंच हुई है
01:00इसरो अध्यक्ष डॉक्टर वी नारायन ने बताया कि इस वित्यवर्ष पाँच रौकेट लौंच करने का लक्ष रखा गया है
01:10मैं ये खुद नहीं कह रहा हूँ
01:12इसरो के सभी डिरेक्टर ने मिल कर ये लक्ष रखा है कि हम इस साल पाँच रौकेट लौंच करेंगे
01:19नविक का पूरा नाम नविगेशन विथ इंडियन कॉंस्टिलेशन है
01:25ये भारत का अपना शेत्रिय सेटलाइट नविगेशन सिस्टम है
01:29जिसे इसरो ने विकसित किया है
01:31इसे नविक की सेवाओं को मजबूत करने और नई तकनीकी सुविधा जोड़ने के लिए विकसित किया गया है
01:38नविक के लिए 11 सेटलाइट लौंच किये जा चुके हैं
01:42इन में एक launch असफल रहा और एक satellite तक्नीकी समस्या के कारण navigation सेवा नहीं दे सका।
01:49इसे बनाने की जरूरत 1999 के कारगिल योध के बाद महसूस हुई थी।
01:54उस समय भारत ने अमेरिकी GPS से सैन्य शेत्र की location सम्बंधी जानकारी मांगी थी।
02:01लेकिन अमेरिका ने मना कर दिया था। इसके बाद भारत ने अपना GPS तयार कर लिया।
02:07Bureau Report, ETV भारत
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